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GK24
भारतीय इतिहासमध्यमपूछा गया: SSC MTS · 08 May 2023, Shift 1

निम्नलिखित में से किस पल्लव शासक के शासनकाल में ह्वेनसांग ने पल्लव राजधानी कांची की यात्रा की थी?

  1. A.महेंद्रवर्मन प्रथम
  2. B.महेंद्रवर्मन द्वितीय
  3. C.नरसिंहवर्मन द्वितीय
  4. D.नरसिंहवर्मन प्रथम

सही उत्तर

D. नरसिंहवर्मन प्रथम

व्याख्या

सही उत्तर है D, नरसिंहवर्मन प्रथम। चीनी यात्री ह्वेनसांग लगभग 640 ईस्वी में कांची पहुँचा था, उस समय पल्लव सिंहासन पर नरसिंहवर्मन प्रथम था।

नरसिंहवर्मन प्रथम का शासन लगभग 630 से 668 ईस्वी तक रहा। उसने ममल्ल अर्थात महान पहलवान की उपाधि ली और उसी के नाम पर ममल्लपुरम बसा। उसने अपने पिता की पराजय का बदला लेते हुए चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय को हराया और चालुक्य राजधानी वातापी पर अधिकार किया, जिससे उसे वातापिकोंड की उपाधि मिली। ममल्लपुरम के शैलकृत रथ उसी के शासनकाल के हैं। ह्वेनसांग ने कांची को बौद्ध और जैन विद्या का बड़ा समृद्ध नगर बताया।

विकल्प A, महेंद्रवर्मन प्रथम, उसके पिता थे, जिन्हें पुलकेशिन द्वितीय ने हराया था। विकल्प B, महेंद्रवर्मन द्वितीय, नरसिंहवर्मन प्रथम के बाद बहुत थोड़े समय शासन कर सके। विकल्प C, नरसिंहवर्मन द्वितीय, जिन्हें राजसिंह कहा जाता है, बहुत बाद में हुए और उन्होंने तटीय मंदिर तथा कांची का कैलासनाथ मंदिर बनवाया।

परीक्षा सुझाव: ह्वेनसांग कांची में लगभग 640 ईस्वी, शासक नरसिंहवर्मन प्रथम, वातापी का विजेता।

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Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iमध्यम

असहयोग कार्यक्रम के संबंध में निम्नलिखित विषयों पर विचार कीजिए :

I. विधि न्यायालयों और विदेशी कपड़े का बहिष्कार

II. कठोरता से अहिंसा का पालन

III. उपाधियों और सम्मानों को सार्वजनिक रूप से उपयोग किए बिना अपने पास रखना

IV. विवादों के निपटारे के लिए पंचायतों की स्थापना

उपर्युक्त में से कितने असहयोग कार्यक्रम के भाग थे?

  1. A.केवल एक
  2. B.केवल दो
  3. C.केवल तीन
  4. D.सभी चार
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. केवल तीन

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल तीन। विषय I, II और IV असहयोग कार्यक्रम के भाग थे, पर III नहीं: भारतीयों से उपाधियाँ लौटाने को कहा गया था, उन्हें चुपचाप रखने को नहीं।

यह कार्यक्रम सितंबर 1920 में कलकत्ता के विशेष कांग्रेस अधिवेशन में स्वीकृत हुआ और दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में पुष्ट हुआ। इसके नकारात्मक पक्ष में उपाधियों और मानद पदों का त्याग तथा सरकारी स्कूल-कॉलेजों, न्यायालयों, 1919 के सुधारों वाली विधायिकाओं और विदेशी कपड़े का बहिष्कार था। रचनात्मक पक्ष में राष्ट्रीय स्कूल-कॉलेज, ब्रिटिश अदालतों की जगह विवाद सुलझाने के लिए पंचायतें, खादी और चरखे का प्रसार, हिंदू-मुस्लिम एकता और अस्पृश्यता निवारण था। कठोर अहिंसा मूल शर्त थी, इसलिए चौरी चौरा की हिंसा के बाद फरवरी 1922 में गांधी ने आंदोलन वापस ले लिया।

A गलत है: एक नहीं, तीन विषय कार्यक्रम के भाग थे।

B गलत है: दो नहीं, तीन विषय कार्यक्रम के भाग थे।

D गलत है: विषय III उपाधियाँ लौटाने के वास्तविक आह्वान के विपरीत है; गांधी ने स्वयं कैसर-ए-हिंद पदक लौटाया था।

परीक्षा टिप: असहयोग 1920-22 = उपाधि त्याग, न्यायालय, स्कूल, परिषद और विदेशी कपड़े का बहिष्कार; पंचायत और खादी; चौरी चौरा के बाद समाप्त।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2016, GS Paper Iमध्यम

प्राचीन भारत की निम्नलिखित पुस्तकों में से किसमें शुंग वंश के संस्थापक के पुत्र की प्रेम कहानी है?

  1. A.स्वप्नवासवदत्ता
  2. B.मालविकाग्निमित्र
  3. C.मेघदूत
  4. D.रत्नावली
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मालविकाग्निमित्र

व्याख्या

सही उत्तर है B, मालविकाग्निमित्र। कालिदास का यह नाटक पुष्यमित्र शुंग के पुत्र अग्निमित्र और रानी के यहाँ सेविका मालविका की प्रेम कहानी है।

पुष्यमित्र शुंग ने लगभग 185 ई.पू. में अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या करके शुंग वंश की स्थापना की। उनके पुत्र अग्निमित्र विदिशा से शासन करते थे, और कालिदास के पहले नाटक मालविकाग्निमित्र में अग्निमित्र को मालविका से प्रेम होता है, जो कुशल नर्तकी है और बाद में राजकुमारी निकलती है। नाटक में विदर्भ राज्य से युद्ध और सिंधु नदी के तट पर पुष्यमित्र के पौत्र वसुमित्र तथा यवनों (यूनानियों) के संघर्ष का भी उल्लेख है, इसलिए यह शुंग काल का उपयोगी ऐतिहासिक स्रोत है।

A गलत है: स्वप्नवासवदत्ता भास का नाटक है, जो वत्स के राजा उदयन और रानी वासवदत्ता पर है।

C गलत है: मेघदूत कालिदास का गीतिकाव्य है, जिसमें निर्वासित यक्ष बादल के जरिए पत्नी को संदेश भेजता है।

D गलत है: रत्नावली राजा हर्षवर्धन का नाटक है, जो उदयन और रत्नावली पर है।

परीक्षा टिप: कालिदास के तीन नाटक = मालविकाग्निमित्र (शुंग राजा अग्निमित्र), विक्रमोर्वशीयम्, अभिज्ञानशाकुंतलम्।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2019, GS Paper Iमध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सा हड़प्पा स्थल नहीं है?

  1. A.चन्हूदड़ो
  2. B.कोट दीजी
  3. C.सोहगौरा
  4. D.देसलपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. सोहगौरा

व्याख्या

सही उत्तर है C, सोहगौरा। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले का सोहगौरा मौर्यकालीन ताम्रपत्र अभिलेख के लिए जाना जाता है, हड़प्पाई अवशेषों के लिए नहीं।

प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में लिखा सोहगौरा ताम्रपत्र भारत के सबसे पुराने ताम्रपत्र अभिलेखों में से है और प्रायः मौर्य युग का माना जाता है। इसमें अकाल के समय राहत के लिए उपयोग होने वाले भंडारगृहों (कोष्ठागार) से जुड़ा आदेश दर्ज है, जो दिखाता है कि राज्य आरंभ से ही अकाल राहत की चिंता करता था। सूची के हड़प्पाई स्थल सिंध और गुजरात में फैले हैं: सिंध में चन्हूदड़ो और कोट दीजी, तथा कच्छ में देसलपुर।

A गलत है: सिंध का चन्हूदड़ो मनके बनाने की कार्यशालाओं के लिए प्रसिद्ध हड़प्पाई नगर है; यहाँ दुर्ग नहीं था।

B गलत है: सिंध के कोट दीजी में प्राक्-हड़प्पा चरण के बाद परिपक्व हड़प्पा बस्ती मिलती है।

D गलत है: गुजरात के कच्छ में देसलपुर एक किलेबंद हड़प्पाई स्थल है।

परीक्षा टिप: सोहगौरा (गोरखपुर) और महास्थान (बांग्लादेश) = अकाल राहत वाले मौर्य अभिलेख; चन्हूदड़ो = बिना दुर्ग का मनका कारखाना।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iआसान

राजा राममोहन राय के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

I. उनके मन में पूर्व की पारंपरिक दार्शनिक प्रणालियों के प्रति गहरा प्रेम और सम्मान था।

II. वे चाहते थे कि उनके देशवासी तर्कसंगत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा सभी स्त्री-पुरुषों की मानवीय गरिमा और सामाजिक समानता के सिद्धांत को अपनाएँ।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल I
  2. B.केवल II
  3. C.I और II दोनों
  4. D.न तो I और न ही II
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. I और II दोनों

व्याख्या

सही उत्तर है C, I और II दोनों। राममोहन राय पूर्व की दार्शनिक विरासत का सम्मान करते थे और साथ ही भारतीयों से तर्क, विज्ञान और सामाजिक समानता अपनाने का आग्रह करते थे।

भारतीय पुनर्जागरण के जनक कहे जाने वाले राममोहन राय (1772-1833) ने उपनिषदों का अध्ययन किया और उनके अंशों का बांग्ला तथा अंग्रेज़ी में अनुवाद करके दिखाया कि वे एक ईश्वर की उपासना सिखाते हैं; वे फ़ारसी, अरबी और संस्कृत चिंतन के भी गहरे जानकार थे। साथ ही वे आधुनिक, तर्कसंगत दृष्टि चाहते थे: उन्होंने अंग्रेज़ी और वैज्ञानिक शिक्षा का समर्थन किया, सती प्रथा के विरुद्ध अभियान चलाया, जिस पर 1829 में रोक लगी, और स्त्रियों के संपत्ति अधिकार की बात की। उन्होंने 1815 में आत्मीय सभा और 1828 में ब्रह्म सभा स्थापित की।

A गलत है: इसमें तर्क और समानता से जुड़ा कथन II छूट गया है।

B गलत है: इसमें पूर्वी दर्शन के प्रति सम्मान वाला कथन I छूट गया है।

D गलत है: दोनों कथन उनके दृष्टिकोण को सही बताते हैं।

परीक्षा टिप: राममोहन राय = आत्मीय सभा 1815, ब्रह्म सभा 1828, सती उन्मूलन 1829; उपनिषद और आधुनिक तर्क, दोनों।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2026, GS Paper Iकठिन

भारत में स्थानीय मान पद्धति के उपयोग से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. भारत में स्थानीय मान पद्धति का सबसे प्राचीन अभिलेखीय उपयोग गुजरात के मनकनी ताम्रपत्रों (595 - 596 ई.) में मिलता है।

2. नौवीं शताब्दी में पूरे भारत के अभिलेखों में स्थानीय मान का उपयोग सामान्य हो गया।

3. दक्षिण-पूर्व एशिया के संस्कृत अभिलेखों में स्थानीय मान सातवीं शताब्दी में ही मिलने लगते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 1 और 3
  3. C.केवल 2 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है D, 1, 2 और 3। तीनों कथन अभिलेखों से मिली उस जानकारी से मेल खाते हैं कि दाशमिक स्थानीय मान पद्धति कैसे फैली।

स्थानीय मान पद्धति में किसी अंक का मान उसकी स्थिति पर निर्भर करता है, इसलिए नौ अंकों और शून्य से कोई भी संख्या लिखी जा सकती है। आर्यभट जैसे गणितज्ञ लगभग 499 ई. में इस विचार का उपयोग कर चुके थे, पर किसी भारतीय अभिलेख में इसका सबसे पुराना तिथियुक्त उपयोग गुजरात के मनकनी (संखेड़ा) ताम्रपत्रों में है, जिनकी तिथि 595-596 ई. है। दहाई और सैकड़े के अलग चिह्नों वाली पुरानी पद्धति धीरे-धीरे हटी, और नौवीं शताब्दी तक पूरे भारत के अभिलेखों में स्थानीय मान वाले अंक सामान्य हो गए; 876 ई. के ग्वालियर अभिलेख में लिखित शून्य मिलता है। कंबोडिया और सुमात्रा के संस्कृत अभिलेखों में सातवीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक ये अंक दिखते हैं।

A गलत है: इसमें कथन 3 छूट गया है, जो सही है।

B गलत है: इसमें कथन 2 छूट गया है, जो सही है।

C गलत है: इसमें कथन 1 छूट गया है, जो सही है।

परीक्षा टिप: अभिलेखों में स्थानीय मान = मनकनी ताम्रपत्र 595-596 (सबसे पहले), दक्षिण-पूर्व एशिया सातवीं सदी, भारत में नौवीं सदी तक सामान्य, ग्वालियर 876 में शून्य।