निम्नलिखित में से किन्हें 1924 के कानपुर बोल्शेविक षड्यंत्र केस में जेल भेजा गया था?
- A.मुजफ्फर अहमद, एस. ए. डांगे, शौकत उस्मानी, नलिनी गुप्ता
- B.मुहम्मद अली और शौकत उस्मानी
- C.एस. ए. डांगे और एस. वी. घाटे
- D.मुजफ्फर अहमद और एस. एस. मिराजकर
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, मुजफ्फर अहमद, एस. ए. डांगे, शौकत उस्मानी, नलिनी गुप्ता। इन चार आरंभिक साम्यवादियों को 1924 के कानपुर बोल्शेविक षड्यंत्र केस में दोषी ठहराकर चार साल की जेल की सजा दी गई थी।
रूसी क्रांति और 1920 में ताशकंद में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के बाद ब्रिटिश सरकार को साम्यवाद फैलने का डर था। 1924 में उसने कुछ युवा साम्यवादियों पर भारत में कम्युनिस्ट इंटरनेशनल की शाखा बनाने और ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने की साजिश का आरोप लगाया। मुकदमे से साम्यवादी विचार अखबारों में छाए और उलटे और लोकप्रिय हुए; 1925 में कानपुर में ही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का पहला सम्मेलन हुआ।
B गलत है क्योंकि मुहम्मद अली खिलाफत आंदोलन के नेता थे, इस केस के अभियुक्त नहीं। C गलत है क्योंकि एस. वी. घाटे इस केस में दोषी नहीं ठहराए गए; उन पर बाद में मेरठ केस में मुकदमा चला, और इस विकल्प में बाकी नाम भी छूट गए हैं। D गलत है क्योंकि एस. एस. मिराजकर पर बाद में 1929 के मेरठ षड्यंत्र केस में मुकदमा चला।
Exam tip: पेशावर केस 1922–27, कानपुर बोल्शेविक केस 1924, मेरठ षड्यंत्र केस 1929।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखें1824 का बैरकपुर विद्रोह इसलिए भड़का कि 47वीं देशी पैदल सेना के सिपाहियों ने किस बात से इनकार कर दिया?
- A.पगड़ी पर चमड़े की कलगी पहनने से
- B.नए एनफ़ील्ड कारतूस के उपयोग से
- C.समुद्र पार कर बर्मा कूच करने से
- D.भारतीय अधिकारियों के अधीन सेवा से
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प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध के समय बैरकपुर में तैनात 47वीं देशी पैदल सेना को बर्मा जाने का आदेश मिला। सिपाहियों ने आपत्ति की, क्योंकि समुद्र पार करने का अर्थ जाति भ्रष्ट होना था और सेवा परंपरा के अनुसार सामान की ढुलाई के लिए कोई भत्ता नहीं दिया गया था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पंचालनकुरिची के वीरपांड्य कट्टबोम्मन, जिन्हें कंपनी ने 1799 में फांसी दी, किस विद्रोह श्रृंखला से जुड़े हैं?
- A.पालीगार विद्रोह
- B.रामोसी विद्रोह
- C.गडकरी विद्रोह
- D.चुआर विद्रोह
उत्तर देखें
पालीगार तिरुनेलवेली और मदुरै क्षेत्र के सैन्य सरदार थे, जो सैनिक रखने के बदले भूमि रखते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में वहाबी आंदोलन को मुख्य रूप से किसने रूप दिया?
- A.सैयद अहमद बरेलवी
- B.सर सैयद अहमद ख़ान
- C.दूदू मियां
- D.तीतू मीर
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B ग़लत है, क्योंकि सर सैयद अहमद ख़ान बहुत बाद की पीढ़ी के थे और उनका कार्य भिन्न प्रकार का था, अर्थात 1857 के बाद शुरू हुआ अलीगढ़ का शिक्षा सुधार आंदोलन।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पूर्वी बंगाल के किसानों के बीच फ़रायजी आंदोलन की स्थापना किसने की?
- A.दूदू मियां
- B.हाजी शरीयतुल्लाह
- C.करम शाह
- D.शाह वलीउल्लाह
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यह आंदोलन मुसलमानों से उन प्रथाओं को छोड़ने का आह्वान करता था जिन्हें वह ग़ैर-इस्लामी मानता था, और शीघ्र ही यह हिंदू ज़मींदारों के अवैध करों तथा नील बागान मालिकों के विरुद्ध मुस्लिम किसानों का संगठित प्रतिरोध बन गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1829-33 का खासी विद्रोह यू तिरोत सिंह ने किस ब्रिटिश परियोजना के विरुद्ध चलाया?
- A.कलकत्ता से ढाका तक रेल लाइन
- B.ब्रह्मपुत्र घाटी से सिलहट तक सड़क
- C.खासी पहाड़ियों से होकर नहर
- D.कछार में चाय बागान
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कंपनी ब्रह्मपुत्र घाटी को खासी क्षेत्र से होकर सिलहट से जोड़ने वाली सड़क चाहती थी और उसे बनाने के लिए बाहरी मज़दूर तथा सैनिक ले आई।
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