निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म भारतीय दर्शन की छह प्रणालियों का भाग नहीं है?
- A.मीमांसा और वेदांत
- B.न्याय और वैशेषिक
- C.लोकायत और कापालिक
- D.सांख्य और योग
सही उत्तर
C. लोकायत और कापालिक
व्याख्या
सही उत्तर है C, लोकायत और कापालिक। इनमें से कोई भी छह आस्तिक प्रणालियों में नहीं आता, इसलिए यही युग्म बाहर पड़ता है। छह प्रणालियाँ, जिन्हें षड्दर्शन कहा जाता है, हैं सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा और वेदांत, और ये सभी वेदों के प्रामाण्य को स्वीकार करती हैं। इन्हें आमतौर पर तीन जोड़ियों में पढ़ा जाता है: सांख्य के साथ योग, न्याय के साथ वैशेषिक, और मीमांसा के साथ वेदांत। लोकायत भौतिकवादी विचारधारा है, जिसे चार्वाक भी कहते हैं; यह वेद, आत्मा और मृत्यु के बाद के जीवन को नहीं मानती, इसलिए बौद्ध और जैन के साथ इसे नास्तिक दर्शन में गिना जाता है। कापालिक एक शैव तांत्रिक संप्रदाय था, यानी धार्मिक पंथ, दर्शन की शाखा नहीं। A गलत है क्योंकि मीमांसा और वेदांत वेदों पर ही खड़ी दो शाखाएँ हैं। B गलत है क्योंकि न्याय भारतीय तर्कशास्त्र देता है और वैशेषिक परमाणुवाद। D गलत है क्योंकि सांख्य और योग छह में सबसे प्राचीन जोड़ी बनाते हैं। परीक्षा टिप: आस्तिक का अर्थ वेद को मानने वाला; चार्वाक, बौद्ध और जैन तीन नास्तिक दर्शन हैं।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंभारतीय इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: ऐतिहासिक व्यक्ति - किस रूप में विख्यात 1. आर्यदेव - जैन विद्वान 2. दिग्नाग - बौद्ध विद्वान 3. नाथमुनि - वैष्णव विद्वान। उपरोक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
- A.कोई भी युग्म नहीं
- B.केवल एक युग्म
- C.केवल दो युग्म
- D.तीनों युग्म
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. केवल दो युग्म
व्याख्या
सही उत्तर है C, केवल दो युग्म। दिग्नाग और नाथमुनि के युग्म ठीक हैं, पर आर्यदेव का नहीं, इसलिए ठीक दो युग्म सही हैं। आर्यदेव, जो लगभग तीसरी शताब्दी में हुए, माध्यमिक शाखा के बौद्ध भिक्षु और नागार्जुन के प्रमुख शिष्य थे; उनका ग्रंथ चतुःशतक शून्यता के सिद्धांत की रक्षा करता है, अतः उन्हें जैन विद्वान कहना ग़लत है। पाँचवीं या छठी शताब्दी के दिग्नाग ने बौद्ध न्याय परंपरा की नींव रखी और प्रमाणसमुच्चय लिखा, जिसने प्रत्यक्ष और अनुमान पर सदियों तक चली बहस को दिशा दी। लगभग दसवीं शताब्दी के नाथमुनि श्रीरंगम की श्रीवैष्णव परंपरा के प्रथम आचार्य थे; उन्होंने आलवारों के तमिल भजनों को नालायिर दिव्य प्रबंधम में संकलित किया और वे उसी गुरु-परंपरा में थे जो आगे रामानुज तक पहुँची। A गलत है क्योंकि दो युग्म सुमेलित हैं। B संख्या कम बताता है और D अधिक। परीक्षा टिप: नागार्जुन, आर्यदेव, बुद्धपालित और चंद्रकीर्ति सभी माध्यमिक परंपरा के हैं।
निम्नलिखित ऐतिहासिक स्थलों पर विचार कीजिए: 1. अजंता की गुफाएँ 2. लेपाक्षी मंदिर 3. साँची स्तूप। उपरोक्त स्थलों में से कौन-सा/से भित्ति चित्रों के लिए भी जाना जाता है/जाने जाते हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 1 और 2
- C.1, 2 और 3
- D.कोई नहीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केवल 1 और 2
व्याख्या
सही उत्तर है B, केवल 1 और 2। अजंता और लेपाक्षी, दोनों की दीवारों और छतों पर चित्रकारी है, जबकि साँची में नहीं, इसलिए पहले दो ही ठीक बैठते हैं। महाराष्ट्र की अजंता गुफाओं में भारत के सबसे उत्कृष्ट बचे हुए बौद्ध भित्ति चित्र हैं, जो टेम्परा शैली में दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से पाँचवीं शताब्दी ईसवी के बीच बने; इनमें बोधिसत्व पद्मपाणि तथा जातक कथाओं के दृश्य सबसे प्रसिद्ध हैं। आंध्र प्रदेश के लेपाक्षी स्थित वीरभद्र मंदिर सोलहवीं शताब्दी के विजयनगर कालीन भित्ति चित्रों से भरा है, जिनमें शिव के बड़े छत-चित्र और सजीव रंगों वाला नटराज शामिल हैं। A गलत है क्योंकि इसमें लेपाक्षी छूट जाता है। C गलत है क्योंकि मध्य प्रदेश का साँची अपने स्तूपों और तोरणद्वारों की उत्कीर्ण सज्जा के लिए प्रसिद्ध है, जो मूर्तिकला है, चित्रकला नहीं। D गलत है क्योंकि तीन में से दो स्थलों पर भित्ति चित्र हैं। परीक्षा टिप: अजंता का नाम चित्रकला से और साँची का नाम स्तूप की वेदिकाओं तथा तोरणों की मूर्तिकला से जोड़ें।
‘गांधार कला शैली’ का विकास ________ वंश के अधीन हुआ।
- A.कुषाण
- B.मौर्य
- C.नंद
- D.चोल
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कुषाण
व्याख्या
सही उत्तर है A, कुषाण। गांधार कला शैली का विकास उत्तर-पश्चिम में, पेशावर और तक्षशिला के आसपास हुआ, और यह पहली तथा दूसरी शताब्दी में कुषाण शासकों, विशेष रूप से कनिष्क के काल में अपने शिखर पर पहुँची। इसके मूर्तिकारों ने भूरे-नीले शिस्ट पत्थर में और बाद में स्टको में काम किया, और उन्होंने बुद्ध को ग्रीक-रोमन रूप दिया — लहराते बाल, तीखी नाक, सिलवटों में गिरता भारी वस्त्र और सिर के पीछे प्रभामंडल। शैलियों के इसी मेल के कारण इसे यूनानी-बौद्ध या इंडो-ग्रीक शैली कहा जाता है। मथुरा शैली इसी कुषाण काल में फली-फूली, पर उसमें लाल बलुआ पत्थर और पूरी तरह भारतीय शिल्प-भाषा का प्रयोग हुआ। B गलत है क्योंकि मौर्य अपने चमकदार पालिश वाले स्तंभों और पशु शीर्षों के लिए जाने जाते हैं। C गलत है क्योंकि नंद वंश ने मूर्तिकला की कोई विशिष्ट शैली नहीं छोड़ी। D गलत है क्योंकि चोल बहुत बाद की नटराज जैसी कांस्य प्रतिमाओं के लिए याद किए जाते हैं। परीक्षा टिप: गांधार — शिस्ट पत्थर, ग्रीक-रोमन बुद्ध; मथुरा — लाल बलुआ पत्थर; दोनों कुषाण काल में।
पश्मीना एक बारीक किस्म का ऊन है, जिसकी बुनाई सबसे पहले भारत के किस राज्य में की गई थी?
- A.उत्तर प्रदेश
- B.पंजाब
- C.जम्मू और कश्मीर
- D.हिमाचल प्रदेश
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. जम्मू और कश्मीर
व्याख्या
सही उत्तर है C, जम्मू और कश्मीर। पश्मीना वह अत्यंत बारीक ऊन है जो लद्दाख के ठंडे ऊँचे पठार पर पाले जाने वाले चांगथांगी बकरे के भीतरी रोयें से कंघी करके निकाला जाता है, और इसकी कताई तथा शॉल की बुनाई सबसे पहले कश्मीर घाटी में हुई। यह शिल्प पंद्रहवीं शताब्दी से जोड़ा जाता है, जब कहा जाता है कि सुल्तान ज़ैन-उल-आबिदीन मध्य एशिया से बुनकर लाए थे। ये शॉल आगे यूरोप पहुँचे और अंग्रेजी को ‘कश्मीर’ शब्द दिया। एक कनी या जामावार शॉल करघे पर महीनों लेती है, और कश्मीर पश्मीना को अब जीआई टैग मिला हुआ है। A गलत है क्योंकि उत्तर प्रदेश बनारसी रेशम और चिकनकारी के लिए जाना जाता है। B गलत है क्योंकि पंजाब फुलकारी कढ़ाई के लिए प्रसिद्ध है। D गलत है क्योंकि हिमाचल प्रदेश भेड़ के ऊन से कुल्लू शॉल और किन्नौरी नमूने बुनता है। परीक्षा टिप: पश्मीना — लद्दाख का चांगथांगी बकरा, बुनाई कश्मीर में, जीआई टैग प्राप्त।
भारत में पंजीकृत भौगोलिक संकेतक नवीकरण से पहले कितने समय तक वैध रहता है?
- A.पाँच वर्ष
- B.सात वर्ष
- C.दस वर्ष
- D.बीस वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. दस वर्ष
व्याख्या
सही उत्तर C, दस वर्ष है। अधिनियम 1999 के अंतर्गत पंजीकृत भौगोलिक संकेतक और अधिकृत उपयोगकर्ता की प्रविष्टि दस वर्ष तक वैध रहती है और उसे बिना किसी सीमा के आगे दस दस वर्ष के लिए नवीकृत किया जा सकता है, इसलिए समय पर आवेदन होने पर जीआई सदा बना रह सकता है। विकल्प A गलत है क्योंकि अधिनियम में जीआई के लिए पाँच वर्ष की कोई अवधि नहीं है। विकल्प B गलत है क्योंकि भारतीय कानून में सात वर्ष किसी बौद्धिक संपदा अधिकार की अवधि नहीं है और यह विशुद्ध जाल है। विकल्प D गलत है क्योंकि बीस वर्ष भारत में पेटेंट अधिनियम 1970 के अंतर्गत पेटेंट की अवधि है, जो आवेदन की तिथि से गिनी जाती है और उसका नवीकरण नहीं होता। परीक्षाएँ पेटेंट और जीआई की अवधि एक ही विकल्प समूह में रखना पसंद करती हैं।