निम्नलिखित में से कौन-सा नाइट्रोजन ऑक्साइड द्वितयन (डाइमराइज़) कर सकता है?
- A.N2O
- B.NO2
- C.N2O3
- D.N2O5
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, NO2। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए इसके दो अणु जुड़कर डाइनाइट्रोजन टेट्रॉक्साइड, N2O4, बनाते हैं।
NO2 के एक अणु में संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या विषम (17) होती है, इसलिए यह एक मुक्त मूलक है और इसी कारण इसका रंग लाल-भूरा होता है। जब ऐसे दो अणु मिलते हैं, तो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन जोड़ा बनाकर दोनों नाइट्रोजन परमाणुओं के बीच बंध बना देते हैं और रंगहीन N2O4 बनता है। अभिक्रिया 2NO2 ⇌ N2O4 उत्क्रमणीय है: ठंडा करने पर रंगहीन द्वितय बढ़ता है और गर्म करने पर भूरी गैस लौट आती है, जो रासायनिक साम्य का प्रसिद्ध प्रयोग है।
A गलत है, क्योंकि N2O (हँसाने वाली गैस) के सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं और यह द्वितयन नहीं करता।
C गलत है, क्योंकि N2O3 स्वयं NO और NO2 के जुड़ने से बनता है; यह आगे द्वितयन नहीं करता।
D गलत है, क्योंकि N2O5 युग्मित इलेक्ट्रॉनों वाला स्थिर अणु है, जो नाइट्रिक अम्ल का एनहाइड्राइड है।
Exam tip: विषम इलेक्ट्रॉन वाले अणु जैसे NO2 द्वितयन करते हैं; ठंडा करने पर भूरी NO2 रंगहीन N2O4 बन जाती है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंएक कप में स्थिर पड़े तरल के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. तरल के सभी बिंदुओं पर दाब समान होता है 2. दीवारों पर दाब लगता है। 3. तरल में हर जगह दाब होता है। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
स्थिर तरल दीवारों पर दाब डालता है और उसके हर बिंदु पर दाब होता है, पर यह दाब सभी गहराइयों पर बराबर नहीं होता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →परम शून्य ताप 0 केल्विन है। °C मात्रक में निम्नलिखित में से कौन-सा परम शून्य ताप है?
- A.0 °C
- B.-100 °C
- C.-273.15 °C
- D.-173.15 °C
उत्तर देखें
केल्विन पैमाने का शून्य जल के हिमांक से 273.15 डिग्री नीचे होता है। केल्विन और सेल्सियस पैमानों में एक डिग्री का मान बराबर होता है, इसलिए T(K) = t(°C) + 273.15।
पूरी व्याख्या पढ़ें →डाइनाइट्रोजन (N₂) और डाइऑक्सीजन (O₂) वायु के मुख्य घटक हैं, फिर भी वे आपस में अभिक्रिया करके नाइट्रोजन के ऑक्साइड नहीं बनाते, क्योंकि
- A.अभिक्रिया को आरंभ करने के लिए उत्प्रेरक चाहिए
- B.नाइट्रोजन के ऑक्साइड अस्थायी होते हैं
- C.अभिक्रिया ऊष्माशोषी है और इसके लिए बहुत ऊंचा ताप चाहिए
- D.वायु में N₂ और O₂ का स्टॉइकियोमीट्री अनुपात इस अभिक्रिया के लिए आदर्श नहीं है
उत्तर देखें
नाइट्रोजन और ऑक्सीजन तभी मिलते हैं जब बहुत अधिक ऊर्जा दी जाए। नाइट्रोजन अणु बहुत मजबूत त्रिबंध से बंधा होता है, इसलिए उसे तोड़ने में बहुत ऊर्जा लगती है, और अभिक्रिया N₂ + O₂ → 2NO ऊष्मा अवशोषित करती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निकल उत्प्रेरक की उपस्थिति में वनस्पति तेलों का हाइड्रोजनीकरण किसका उदाहरण है?
- A.प्रतिस्थापन अभिक्रिया।
- B.विलोपन अभिक्रिया।
- C.योगात्मक अभिक्रिया।
- D.मुक्त-मूलक बहुलकीकरण।
उत्तर देखें
तेल के कार्बन–कार्बन द्विबंधों पर हाइड्रोजन जुड़ जाती है। वनस्पति तेल असंतृप्त होते हैं: उनकी वसीय अम्ल श्रृंखलाओं में C=C द्विबंध होते हैं, जिनके कारण वे द्रव रहते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एक धनात्मक आवेश ऐसे स्थान में दक्षिण की ओर गतिमान है जहां चुंबकीय क्षेत्र उत्तर दिशा की ओर है। गतिमान आवेश अनुभव करेगा :
- A.उत्तर दिशा की ओर एक विक्षेपक बल।
- B.पूर्व दिशा की ओर एक विक्षेपक बल।
- C.पश्चिम दिशा की ओर एक विक्षेपक बल।
- D.कोई विक्षेपक बल नहीं।
उत्तर देखें
आवेश ठीक क्षेत्र की उल्टी दिशा में चल रहा है, और चुंबकीय क्षेत्र अपनी रेखा पर चलते आवेश पर कोई बल नहीं लगाता।
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