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GK24
सामान्य विज्ञानमध्यमपूछा गया: RRB ग्रुप D · 17 Aug 2022, Shift 1

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है? a) मेथेनोइक अम्ल नेटल (बिच्छू बूटी) की पत्तियों से स्रावित होता है। b) ऐसीटिक अम्ल सिरके में पाया जाता है। c) दाँतों का क्षय तब शुरू होता है जब मुँह का pH 5.5 से कम हो जाता है। d) मुँह में उपस्थित बैक्टीरिया बचे हुए भोजन कणों के अपघटन से क्षार बनाते हैं।

  1. A.a
  2. B.b
  3. C.c
  4. D.d

सही उत्तर

D. d

व्याख्या

सही उत्तर है D, कथन d। मुँह में मौजूद बैक्टीरिया बचे हुए भोजन कणों को तोड़कर क्षार नहीं बल्कि अम्ल बनाते हैं, इसलिए कथन d ही गलत है। यह अम्ल मुँह के भीतर pH घटा देता है और जैसे ही pH 5.5 से नीचे जाता है, इनैमल घुलने लगता है; इनैमल कैल्शियम फॉस्फेट से बना होता है और मानव शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है। इसी तरह दाँतों का क्षय शुरू होता है और इसी कारण अम्ल को उदासीन करने के लिए क्षारीय टूथपेस्ट काम में लाया जाता है। A उत्तर नहीं है क्योंकि मेथेनोइक अम्ल, जिसे फॉर्मिक अम्ल भी कहते हैं, सचमुच बिच्छू बूटी के डंक और चींटी के डंक में होता है, इसलिए कथन a सही है। B उत्तर नहीं है क्योंकि सिरके में सचमुच ऐसीटिक अम्ल लगभग पाँच से आठ प्रतिशत तक होता है। C उत्तर नहीं है क्योंकि क्षय वास्तव में pH 5.5 से नीचे ही शुरू होता है। परीक्षा टिप: बिच्छू बूटी और चींटी से फॉर्मिक अम्ल, सिरके से ऐसीटिक अम्ल और दही से लैक्टिक अम्ल।

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Q1.सामान्य विज्ञानपूछा गया: राजस्थान · RSMSSB Lab Assistant 2016 Official Paperकठिन

निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक शॉट्की और फ्रेंकेल, दोनों दोष दर्शाता है?

  1. A.AgF
  2. B.AgBr
  3. C.AgCl
  4. D.NaCl
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. AgBr

व्याख्या

सही उत्तर है B, AgBr। सिल्वर ब्रोमाइड उस आयनिक क्रिस्टल का मानक उदाहरण है जिसमें दोनों प्रकार के बिंदु दोष एक साथ पाए जाते हैं। शॉट्की दोष में एक धनायन रिक्तिका और एक ऋणायन रिक्तिका की जोड़ी गायब होती है, इसलिए क्रिस्टल विद्युत उदासीन रहता है पर द्रव्यमान घटने से उसका घनत्व गिर जाता है; यह दोष वहाँ मिलता है जहाँ दोनों आयनों का आकार लगभग समान और समन्वय संख्या अधिक हो। फ्रेंकेल दोष में छोटा आयन, आमतौर पर धनायन, अपने जालक स्थान से निकलकर अंतरकाशी स्थान में बैठ जाता है, इसलिए द्रव्यमान और घनत्व अपरिवर्तित रहते हैं; यह वहाँ मिलता है जहाँ दोनों आयनों के आकार में बड़ा अंतर हो। सिल्वर ब्रोमाइड में छोटा सिल्वर आयन अंतरकाशी स्थान में जा सकता है और रिक्तिका युग्म भी बनते हैं, इसलिए दोनों दोष दिखते हैं। A गलत है क्योंकि AgF में आयनों का आकार लगभग समान होने से केवल शॉट्की दोष होता है। C गलत है क्योंकि AgCl फ्रेंकेल दोष दर्शाता है। D गलत है क्योंकि NaCl शॉट्की दोष का उत्कृष्ट उदाहरण है। परीक्षा टिप: शॉट्की दोष घनत्व घटाता है, फ्रेंकेल नहीं, और AgBr दोनों दर्शाता है।

Q2.सामान्य विज्ञानपूछा गया: बिहार · 14 Oct 2022मध्यम

थर्मोप्लास्ट (तापसुघट्य प्लास्टिक)

  1. A.में बहुलकीकरण सभी दिशाओं में बढ़ने के कारण प्राथमिक बंधों का त्रिआयामी जाल होता है
  2. B.लंबी शृंखला वाले अणु होते हैं जो द्वितीयक बंधों से जुड़े रहते हैं
  3. C.में तापमान बढ़ने पर प्लास्टिक रूप से विकृत होने की क्षमता घटती जाती है
  4. D.में द्वितीयक बंध होते हैं और ताप ऊर्जा बढ़ने पर भी ये द्वितीयक बंध कभी नहीं टूटते
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. लंबी शृंखला वाले अणु होते हैं जो द्वितीयक बंधों से जुड़े रहते हैं

व्याख्या

सही उत्तर है B, लंबी शृंखला वाले अणु होते हैं जो द्वितीयक बंधों से जुड़े रहते हैं। थर्मोप्लास्टिक में बहुलक लंबी रेखीय या हल्की शाखित शृंखलाओं के रूप में रहता है, और एक शृंखला दूसरी से केवल वान्डरवाल्स जैसे कमजोर द्वितीयक बलों द्वारा जुड़ी होती है। ताप से इन कमजोर बंधों को ढीला करने भर की ऊर्जा मिल जाती है, इसलिए पदार्थ मुलायम हो जाता है, नया आकार ले लेता है और ठंडा होने पर फिर कठोर हो जाता है; यह चक्र बार-बार दोहराया जा सकता है, इसीलिए थर्मोप्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण संभव है। पॉलिथीन, पॉलीप्रोपिलीन, पीवीसी, पॉलीस्टाइरीन और नायलॉन इसी वर्ग में आते हैं। A गलत है क्योंकि प्राथमिक बंधों का त्रिआयामी जाल बेकेलाइट जैसे थर्मोसेटिंग प्लास्टिक का लक्षण है, जो एक बार जमने पर फिर नहीं ढाला जा सकता। C गलत है क्योंकि तापमान बढ़ने पर विकृत होने की क्षमता घटती नहीं, बढ़ती है। D गलत है क्योंकि ताप ऊर्जा बढ़ने पर द्वितीयक बंध टूटते हैं, और इसी कारण प्लास्टिक मुलायम होता है। परीक्षा टिप: थर्मोप्लास्टिक में कमजोर द्वितीयक बंध और पुनः ढलाई, थर्मोसेटिंग में तिर्यकबंधित प्राथमिक बंध।

Q3.सामान्य विज्ञानपूछा गया: SSC CGL · 01 Dec 2022, Shift 4मध्यम

निम्नलिखित में से किन जंतुओं के पाचन तंत्र में एक ही छिद्र होता है जो मुँह और गुदा दोनों का काम करता है?

  1. A.अरैक्निड
  2. B.इकाइनोडर्म
  3. C.प्लैटीहेल्मिंथीज
  4. D.आर्थ्रोपोड
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. प्लैटीहेल्मिंथीज

व्याख्या

सही उत्तर है C, प्लैटीहेल्मिंथीज। चपटे कृमियों के संघ प्लैटीहेल्मिंथीज में पाचन तंत्र अपूर्ण होता है और उसमें केवल एक ही छिद्र रहता है, इसलिए वही मुँह भोजन भीतर लेता है और अपशिष्ट बाहर निकालता है। उनकी आहारनाल एक बंद थैली जैसी होती है जिसमें गुदा नहीं होती। प्लेनेरिया, यकृत पर्णाभ कृमि और फीताकृमि इसी संघ में आते हैं, और फीताकृमि में तो आहारनाल ही नहीं होती, वह अपने शरीर की सतह से भोजन सोखता है। चपटे कृमि त्रिकोरकी, अप्रगुही और द्विपार्श्व सममित होते हैं, और इनमें से अनेक परजीवी हैं। अलग मुँह और गुदा वाला पूर्ण पाचन तंत्र गोल कृमियों से आगे दिखाई देता है। A गलत है क्योंकि मकड़ी और बिच्छू जैसे अरैक्निड आर्थ्रोपोड हैं और उनमें पूर्ण आहारनाल होती है। B गलत है क्योंकि तारामीन और समुद्री अर्चिन जैसे इकाइनोडर्म में मुँह और गुदा दोनों होते हैं। D गलत है क्योंकि जंतु जगत का सबसे बड़ा संघ आर्थ्रोपोडा पूर्ण आहारनाल रखता है। परीक्षा टिप: सीलेंटरेटा और प्लैटीहेल्मिंथीज में एक छिद्र, ऐस्केहेल्मिंथीज से आगे दो छिद्र।

Q4.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 9 Aug 2018, Shift 1मध्यम

वायु में f फोकस दूरी वाले एक उत्तल दर्पण को 4/3 अपवर्तनांक वाले द्रव में डुबोया जाता है। द्रव में इस दर्पण की फोकस दूरी क्या होगी?

  1. A.(4/3) f
  2. B.(3/4) f
  3. C.(7/3) f
  4. D.f
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. f

व्याख्या

सही उत्तर है D, f। दर्पण की फोकस दूरी उसके चारों ओर के माध्यम पर निर्भर नहीं करती, इसलिए वायु में f फोकस दूरी वाले उत्तल दर्पण की फोकस दूरी द्रव में भी f ही रहती है। दर्पण परावर्तन के नियम से काम करता है और गोलीय दर्पण के लिए f = R/2 होता है, जहाँ R उसकी सतह की वक्रता त्रिज्या है। R केवल दर्पण की बनावट से तय होता है, इसलिए वायु के स्थान पर जल, तेल या कोई भी द्रव आ जाए, फोकस दूरी नहीं बदलती। लेंस का मामला इसके उलट है, क्योंकि वह अपवर्तन से काम करता है - उसकी फोकस दूरी काँच के अपवर्तनांक और आसपास के माध्यम के अनुपात पर निर्भर करती है, इसलिए द्रव में लेंस की फोकस दूरी बदल जाती है। A गलत है क्योंकि f को 4/3 से गुणा करना दर्पण को लेंस मान लेने जैसा है। B भी इसी कारण गलत है, वहाँ केवल गुणक उलट दिया गया है। C गलत है क्योंकि 7/3 का यहाँ कोई आधार नहीं है। परीक्षा टिप: दर्पण की फोकस दूरी R/2 होती है और हर माध्यम में वही रहती है, लेंस की नहीं।

Q5.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 02 May, 2025, Shift 2मध्यम

समय के साथ ताँबा हरा पड़ जाने का मुख्य कारण क्या है?

  1. A.हाइड्रोजन भंगुरता
  2. B.वायु से नाइट्रोजन का अवशोषण
  3. C.पराबैंगनी प्रकाश से अभिक्रिया
  4. D.ऑक्साइड की परत बनना
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. ऑक्साइड की परत बनना

व्याख्या

सही उत्तर है D, ऑक्साइड की परत बनना। ताँबा हरा इसलिए पड़ता है कि उसकी सतह धीरे-धीरे हवा से अभिक्रिया करके संक्षारण उत्पादों की परत से ढक जाती है, और वह परत हरे रंग की होती है। नम हवा में ताँबे पर पहले गहरे रंग का कॉपर ऑक्साइड बनता है; फिर कार्बन डाइऑक्साइड और नमी मिलकर उसे क्षारीय कॉपर कार्बोनेट में बदल देते हैं, जो पुरानी ताँबे की छतों, मंदिरों के गुंबदों और स्टैचू ऑफ लिबर्टी पर दिखने वाली हरी पर्त है। यह परत धातु से चिपकी रहती है और भीतर की धातु की रक्षा करती है, इसीलिए ताँबा लोहे की तरह जंग खाकर नष्ट नहीं होता। A गलत है क्योंकि हाइड्रोजन भंगुरता धातु को भुरभुरा और दरारयुक्त बनाती है, उसका रंग नहीं बदलती। B गलत है क्योंकि ताँबा हवा से नाइट्रोजन नहीं सोखता, नाइट्रोजन साधारण ताप पर लगभग निष्क्रिय रहती है। C गलत है क्योंकि पराबैंगनी प्रकाश ताँबे से अभिक्रिया कर हरी परत नहीं बनाता। परीक्षा टिप: ताँबे की हरी परत क्षारीय कॉपर कार्बोनेट है, और इमली या नींबू का अम्ल इसी परत को घोलकर बर्तन साफ करता है।