निम्नलिखित में से कौन मौर्य काल में भूमि से संबंधित कर नहीं था?
- A.भाग
- B.बलि
- C.उदक
- D.शुल्क
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर D, शुल्क है। शुल्क वस्तुओं पर लगने वाला कर था, जो नगर के द्वारों, घाटों तथा सीमाओं पर व्यापार पर वसूला जाता था, भूमि या उसकी उपज पर नहीं। अर्थशास्त्र उसे नगर तथा व्यापार की आय में रखता है और शुल्काध्यक्ष जैसे अधिकारी उसे संभालते थे, इसलिए उसे भूमि करों के साथ नहीं रखा जा सकता।
विकल्प A भाग खेत की उपज में राजा का हिस्सा था, जो मुख्य भूमि कर था और सामान्यतः लगभग छठा भाग माना जाता था। विकल्प B बलि कृषक की जोत पर लगने वाला पुराना कर था, जिसे मौर्यों ने चालू रखा। विकल्प C उदक या उदकभाग जल कर था, जो राजकीय सिंचाई साधनों से खेत सींचने पर लिया जाता था, और दर इस पर निर्भर थी कि पानी हाथ से, बैलों से या नहर से मिला। तीनों भूमि से जुड़े हैं; केवल व्यापार कर नहीं।
पूरा लेख पढ़ें: प्राचीन बिहार: मगध, मौर्य, गुप्त और पाटलिपुत्र
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंकिस विदेशी आक्रमणकारी ने अपने भूभाग चंद्रगुप्त मौर्य को समर्पित किए थे?
- A.मिनांडर
- B.डेमोस्थनीज
- C.सेल्यूकस निकेटर
- D.गोंडोफर्नीज
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सेल्यूकस वह मकदूनियाई सेनापति था जिसने सिकंदर की पूर्वी विजय संभाली और लगभग 305 ईसा पूर्व भारतीय प्रांत फिर पाने का प्रयास किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हर्यक वंश के किस शासक ने मगध की राजधानी पाटलिपुत्र स्थानांतरित की?
- A.बिंबिसार
- B.अजातशत्रु
- C.उदायिन
- D.शिशुनाग
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अजातशत्रु के पुत्र और उत्तराधिकारी उदायिन ने गंगा तथा सोन के मिलन स्थल पर दुर्ग बनवाया और मगध की राजधानी राजगृह से वहां ले गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रथम बौद्ध संगीति राजगीर में किस शासक के काल में हुई थी?
- A.बिंबिसार
- B.अजातशत्रु
- C.कालाशोक
- D.अशोक
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प्रथम बौद्ध संगीति बुद्ध के महापरिनिर्वाण के कुछ ही समय बाद राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में हर्यक वंश के अजातशत्रु के संरक्षण में हुई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मगध के नंद वंश की स्थापना किसने की थी?
- A.शिशुनाग
- B.कालाशोक
- C.महापद्म नंद
- D.धनानंद
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महापद्म नंद ने शिशुनागों को हटाकर चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में नंद वंश की स्थापना की।
पूरी व्याख्या पढ़ें →समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति अर्थात् इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख की रचना किसने की?
- A.हरिषेण
- B.कालिदास
- C.वसुबंधु
- D.अमरसिंह
उत्तर देखें
हरिषेण समुद्रगुप्त के राजकवि तथा उच्च अधिकारी थे, और उन्होंने यह लंबी प्रशस्ति अशोक के एक पुराने स्तंभ पर उत्कीर्ण कराई, जो अब इलाहाबाद में है।
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