निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. पूँजी पर्याप्तता अनुपात (CAR) वह राशि है जिसे बैंकों को अपनी निजी निधियों के रूप में रखना होता है, ताकि खाताधारकों द्वारा देय राशि न चुकाने पर बैंकों को होने वाली किसी भी हानि की भरपाई हो सके। 2. CAR का निर्धारण प्रत्येक बैंक स्वयं करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1, न ही 2
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, केवल 1। CAR न चुकाए गए ऋणों से होने वाली हानि के विरुद्ध बैंक की अपनी पूँजी का सुरक्षा कवच है, और इसकी न्यूनतम सीमा नियामक तय करता है, हर बैंक स्वयं नहीं।
पूँजी पर्याप्तता अनुपात, जिसे जोखिम-भारित परिसंपत्तियों से पूँजी का अनुपात (CRAR) भी कहते हैं, बैंक की पूँजी को उसकी जोखिम-भारित परिसंपत्तियों से भाग देकर प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है। जोखिम भरे ऋणों को अधिक भार मिलता है, इसलिए ज़्यादा जोखिम से ऋण देने वाले बैंक को अधिक पूँजी रखनी पड़ती है। वैश्विक मानक बैंकिंग पर्यवेक्षण की बेसल समिति से आता है, और भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक अपने बेसल-III नियमों के तहत सभी बैंकों के लिए न्यूनतम सीमा तय करता है, जो बेसल न्यूनतम से अधिक सख्त है। बैंक न्यूनतम से अधिक पूँजी रख सकता है, पर कम सीमा नहीं चुन सकता।
B गलत है: कथन 2 असत्य है, क्योंकि आवश्यक CAR रिज़र्व बैंक तय करता है, अलग-अलग बैंक नहीं।
C गलत है: केवल कथन 1 सही है।
D गलत है: कथन 1 CAR का उद्देश्य सही बताता है।
परीक्षा टिप: CAR = पूँजी ÷ जोखिम-भारित परिसंपत्तियाँ; मानक बेसल से, भारत में न्यूनतम सीमा RBI तय करता है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में सहायता करता है। 2. NPCI ने एक कार्ड भुगतान योजना, रुपे (RuPay), प्रारंभ की है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की स्थापना 2008 में देश में खुदरा भुगतान की शीर्ष संस्था के रूप में भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय बैंक संघ की पहल पर, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत हुई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. NBFC मांग जमा स्वीकार नहीं कर सकतीं। 2. भारत में कार्यरत सभी NBFC का RBI में पंजीकृत होना अनिवार्य है। 3. NBFC भुगतान और निपटान प्रणाली का हिस्सा हैं और स्वयं पर आहरित चेक जारी कर सकती हैं। 4. जमा स्वीकार करने वाली NBFC के जमाकर्ताओं को निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम (DICGC) की जमा बीमा सुविधा उपलब्ध नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.1 और 4
- B.1, 2 और 3
- C.केवल 4
- D.2, 3 और 4
उत्तर देखें
RBI स्वयं NBFC और बैंक के बीच जो तीन अंतर बताता है, उनमें से दो यही हैं। NBFC बैंक की तरह कर्ज देती और निवेश करती है, पर बचत या चालू खाते जैसी मांग जमा स्वीकार नहीं कर सकती, इसलिए कथन 1 सही है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में किसी वाणिज्यिक बैंक की परिसंपत्तियों में शामिल नहीं है?
- A.अग्रिम
- B.जमा
- C.निवेश
- D.माँग और अल्प सूचना पर देय धन
उत्तर देखें
जमा वह धन है जो बैंक को अपने ग्राहकों को लौटाना होता है, इसलिए यह बैलेंस शीट में देनदारियों की ओर आता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में वाणिज्यिक बैंकों का अभिकर्ता (एजेंसी) कार्य माना जाता है?
- A.जमा स्वीकार करना
- B.अधिशेष निधियों का निवेश
- C.आयकर भुगतान स्वीकार करना
- D.ओवरड्राफ्ट सुविधा देना
उत्तर देखें
कर एकत्र करते समय बैंक अपने ग्राहक और सरकार की ओर से अभिकर्ता के रूप में काम करता है, इसलिए यह एजेंसी कार्य है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. अमेरिकी डॉलर या SWIFT प्रणाली का प्रयोग किए बिना डिजिटल मुद्रा में भुगतान करना संभव है। 2. डिजिटल मुद्रा को उसमें प्रोग्राम की गई किसी शर्त के साथ वितरित किया जा सकता है, जैसे उसे खर्च करने की समय-सीमा। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें
केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा से देशों के बीच डॉलर या SWIFT के बिना सीधे भुगतान हो सकता है, और इसके उपयोग पर शर्तें प्रोग्राम की जा सकती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →