नीलगिरि और पलनी पहाड़ियों में मिलने वाली आर्कियन समूह की शैल चार्नोकाइट का नाम किसके नाम पर पड़ा?
- A.जॉब चार्नोक
- B.विलियम जोंस
- C.जेम्स प्रिंसेप
- D.अलेक्जेंडर कनिंघम
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, जॉब चार्नोक, जो कलकत्ता की स्थापना से जुड़े ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी थे और जिनका वहाँ का समाधि-पत्थर इसी शैल से बना था, जिसके कारण बाद में शैल का नाम उनके नाम पर रखा गया। चार्नोकाइट आर्कियन आधार समूह की ग्रेनाइटी शैल है और दक्षिण की नीलगिरि तथा पलनी पहाड़ियों में मिलती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि विलियम जोंस ने 1784 में एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल की स्थापना की और वे प्राच्य विद्या के लिए स्मरण किए जाते हैं, भूविज्ञान के लिए नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि जेम्स प्रिंसेप ने ब्राह्मी तथा खरोष्ठी लिपियों को पढ़ा, जिससे अशोक के अभिलेख खुले। विकल्प D गलत है, क्योंकि अलेक्जेंडर कनिंघम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रथम महानिदेशक थे। यह प्रश्न याद दिलाता है कि इस अध्याय में कुछ नाम आधारित तथ्य भी हैं, और चार्नोकाइट उनमें सर्वाधिक पूछा जाने वाला है।
पूरा लेख पढ़ें: भारत की भूगर्भिक संरचना और शैल समूह के नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंखनिज पदार्थ का कोई भी प्राकृतिक पिंड, जो पृथ्वी की भूपर्पटी का निर्माण करता है, _____ है।
- A.कचरा
- B.शैल
- C.पत्थर
- D.जीवाश्म
उत्तर देखें
भूविज्ञान में शैल एक या अधिक खनिजों का वह प्राकृतिक समुच्चय है जो पृथ्वी की भूपर्पटी का भाग बनाता है, चाहे वह ग्रेनाइट की तरह कठोर हो अथवा चिकनी मिट्टी की तरह मृदु, और शैलों को उनके बनने की रीति के अनुसार आग्नेय, अवसादी तथा कायांतरित वर्गों में बाँटा जाता…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत का लगभग समस्त कोयला भंडार किस शैल समूह से संबंधित है?
- A.धारवाड़ समूह
- B.विंध्यन समूह
- C.गोंडवाना समूह
- D.कडप्पा समूह
उत्तर देखें
ऊपरी कार्बनी काल से आगे गोंडवाना भूखंड के गर्तों और मीठे जल की द्रोणियों में पादप पदार्थ की मोटी परतें जमा हुईं और बलुआ पत्थर तथा शेल के नीचे दब गईं, जिससे दामोदर, महानदी, गोदावरी, सोन और वर्धा घाटियों के कोयला क्षेत्र बने।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पन्ना क्षेत्र सहित भारत की हीरायुक्त संगुटिकाश्म परतें किस शैल समूह में पाई जाती हैं?
- A.आर्कियन समूह
- B.विंध्यन समूह
- C.गोंडवाना समूह
- D.टर्शियरी समूह
उत्तर देखें
मध्य भारत से सोन घाटी तक फैले इस पुराणा समूह के बलुआ पत्थर, शेल और चूना पत्थर में वे संगुटिकाश्म परतें हैं जिनमें हीरे मिलते हैं, और मध्य प्रदेश की पन्ना खदानें तथा कर्नूल क्षेत्र से व्यापार में आए हीरे इनसे जुड़े हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत का कौन सा शैल समूह लौह अयस्क, मैंगनीज और सोने जैसे धात्विक खनिजों में सर्वाधिक धनी है?
- A.कडप्पा समूह
- B.धारवाड़ समूह
- C.विंध्यन समूह
- D.दक्कन ट्रैप
उत्तर देखें
कर्नाटक के धारवाड़ क्षेत्र के नाम पर बना यह समूह भारत का प्राचीनतम कायांतरित अवसादी समूह है और इसे अत्यधिक धात्विक कहा जाता है, क्योंकि इससे लौह अयस्क, मैंगनीज, सोना, तांबा, सीसा, जस्ता और अभ्रक मिलते हैं; कोलार स्वर्ण क्षेत्र का चैंपियन नाइस इसी का अंग है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संगमरमर किस शैल के कायांतरण से बनता है?
- A.ग्रेनाइट
- B.बलुआ पत्थर
- C.चूना पत्थर
- D.शेल
उत्तर देखें
चूना पत्थर मुख्यतः कैल्सियम कार्बोनेट से बनी अवसादी शैल है, और ताप तथा दाब पड़ने पर उसके कण पुनः क्रिस्टलित होकर संगमरमर नामक घनी, समान बुनावट वाली शैल बना देते हैं।
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