मेघा-ट्रॉपिक्स और सरल, इसरो के किस विदेशी एजेंसी के साथ संयुक्त उपग्रह मिशन हैं?
- A.नासा
- B.जाक्सा
- C.सीएनईएस
- D.रोस्कोस्मोस
सही उत्तर
C. सीएनईएस
व्याख्या
सही उत्तर सीएनईएस है, जो फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी है। विज्ञप्ति में बताया गया है कि भारत और फ्रांस की अंतरिक्ष साझेदारी लगभग छह दशक पुरानी है तथा इसरो और सीएनईएस के सहयोग में मेघा-ट्रॉपिक्स और सरल जैसे संयुक्त उपग्रह मिशन शामिल रहे हैं। इसमें यह भी जोड़ा गया है कि दोनों पक्ष पृथ्वी अवलोकन और जलवायु से जुड़े अनुप्रयोगों में सहयोग आगे बढ़ा रहे हैं, जो इन्हीं दोनों मिशनों का स्वाभाविक क्षेत्र है। विकल्प क में दी नासा अमेरिका की एजेंसी है और वह अन्य परियोजनाओं में इसरो की साझेदार है, पर यहां उसका नाम नहीं है। विकल्प ख में दी जाक्सा जापान की एजेंसी है और इस विज्ञप्ति में उसका उल्लेख नहीं है। विकल्प घ में दी रोस्कोस्मोस रूस की एजेंसी है और इन दोनों मिशनों से उसका कोई संबंध नहीं है। देश, एजेंसी और मिशन को एक साथ जोड़कर याद रखें।
पूरा लेख पढ़ें: भारत-फ्रांस अंतरिक्ष वार्ता, पेरिस समिट से पहले हुई बैठक
अभ्यास प्रश्न
भारत और फ्रांस की बैठक में जिस इंटरनेशनल स्पेस समिट की चर्चा हुई, वह किस शहर में हो रहा है?
- A.वियना
- B.पेरिस
- C.तुलूज़
- D.जिनेवा
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सही उत्तर: B. पेरिस
व्याख्या
सही उत्तर पेरिस है। विज्ञप्ति के अनुसार डॉ. जितेंद्र सिंह और प्रो. फिलिप बैप्टिस्ट की वर्चुअल द्विपक्षीय बैठक इंटरनेशनल स्पेस समिट से पहले हुई, जो पेरिस में 9 और 10 सितंबर 2026 को होना है। इसी बैठक में बेंगलुरु स्पेस एक्सपो की भी चर्चा हुई, जो 7 से 9 सितंबर 2026 तक चलेगा। दोनों आयोजन कुछ ही दिनों के अंतर पर हैं, इसलिए छात्र इन्हें आपस में मिला देते हैं। विकल्प क में दिए वियना में संयुक्त राष्ट्र का बाह्य अंतरिक्ष मामलों का कार्यालय है, इसलिए यह स्वाभाविक पर गलत अनुमान बनता है। विकल्प ग में दिया तुलूज़ फ्रांस के अंतरिक्ष उद्योग का बड़ा केंद्र है और यही इसे सबसे आकर्षक भ्रामक विकल्प बनाता है, पर यह समिट वहां नहीं हो रहा। विकल्प घ में दिया जिनेवा अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ का मुख्यालय है, जिसके ढांचे का भारत ने समर्थन किया, पर वह आयोजन स्थल नहीं है। जोड़ी याद रखें: समिट पेरिस में, एक्सपो बेंगलुरु में।
पेरिस समिट में भारत की भावी मानव युक्त अंतरिक्ष उड़ान पर उद्घाटन भाषण देने के लिए किसे आमंत्रित किया गया है?
- A.प्रधानमंत्री
- B.डॉ. जितेंद्र सिंह
- C.इसरो अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग सचिव
- D.प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार
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सही उत्तर: C. इसरो अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग सचिव
व्याख्या
सही उत्तर इसरो के अध्यक्ष, जो अंतरिक्ष विभाग के सचिव भी हैं है। विज्ञप्ति में स्पष्ट लिखा है कि इसी पद पर आसीन व्यक्ति को पेरिस समिट में उद्घाटन भाषण देने का निमंत्रण मिला है और उस भाषण का विषय लो अर्थ ऑर्बिट में भारत की भावी मानव युक्त अंतरिक्ष उड़ान है। विकल्प क में दिया प्रधानमंत्री का उत्तर गलत होते हुए भी एक सच्चे तथ्य के बहुत करीब है, और यही इसे खतरनाक बनाता है। प्रो. बैप्टिस्ट ने समिट के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावित वीडियो संदेश पर आभार जताया था, पर वीडियो संदेश और उद्घाटन भाषण अलग-अलग बातें हैं। विकल्प ख में दिए डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बैठक में भारत का नेतृत्व किया और समिट में भागीदारी की इच्छा जताई, पर निमंत्रण उन्हें नहीं मिला। विकल्प घ में दिए प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का इस विज्ञप्ति में कोई उल्लेख नहीं है।
भारत सरकार की ओर से प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किसने किए?
- A.वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल
- B.वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल
- C.विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन
- D.राजदूत अल्बर्टो गुआनी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल
व्याख्या
सही उत्तर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल है, जिन्होंने भारत सरकार की ओर से हस्ताक्षर किए। विकल्प A गलत है और यही इस प्रश्न का जाल है: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल उसी दिन की खबर में हैं, पर उनकी भूमिका उरुग्वे के साथ मिलकर तरजीही व्यापार समझौते के विस्तार की वार्ता शुरू करने की घोषणा करने की थी, प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने की नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन मर्कोसुर की कार्यवाहक अध्यक्षता के नाते इस अवसर पर उपस्थित रहे और उन्होंने हस्ताक्षर स्वयं नहीं किए। विकल्प D दूसरे ढंग से गलत है: भारत में उरुग्वे के राजदूत अल्बर्टो गुआनी ने हस्ताक्षर तो किए, पर मर्कोसुर पक्ष की ओर से, भारत की ओर से नहीं, और उनके साथ पैराग्वे के राजदूत फ्लेमिंग राउल डुआर्टे रामोस भी थे। समारोह में अर्जेंटीना और ब्राजील के दूतावासों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
भारत और मर्कोसुर के बीच हस्ताक्षरित प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल मुख्य रूप से किससे संबंधित है?
- A.इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्रों की स्वीकार्यता
- B.कृषि उत्पादों पर सभी शुल्क हटाना
- C.द्विपक्षीय व्यापार के लिए साझा मुद्रा
- D.शैक्षणिक डिग्रियों की पारस्परिक मान्यता
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सही उत्तर: A. इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्रों की स्वीकार्यता
व्याख्या
सही उत्तर इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्रों की स्वीकार्यता है। प्रोटोकॉल में प्रावधान है कि इलेक्ट्रॉनिक रूप में जारी मूल प्रमाणपत्र की कानूनी वैधता और मूल्य कागज पर जारी प्रमाणपत्र के समान होगा, बशर्ते उसे हर पक्ष के अपने घरेलू कानून के अनुसार अधिकृत संस्थाओं और अधिकारियों द्वारा जारी तथा इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षरित किया गया हो। यह काम तरजीही व्यापार समझौते के परिशिष्ट III के अनुच्छेद 16 में संशोधन के जरिए किया गया है, जिसमें मूल नियमावली रखी गई है, और इससे प्रमाणपत्र जारी करने तथा जांचने की लागत और समय घटने की उम्मीद है। विकल्प B गलत है, क्योंकि प्रोटोकॉल शुल्क दरों को छूता ही नहीं; रियायतें भारत की ओर से 450 और मर्कोसुर की ओर से 452 टैरिफ लाइनों पर बनी हुई हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि किसी मुद्रा व्यवस्था की घोषणा नहीं हुई। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह व्यापार दस्तावेज शिक्षा से जुड़ा नहीं है।
भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौता कब लागू हुआ था?
- A.25 जनवरी 2004
- B.1 जून 2009
- C.27 नवंबर 2025
- D.9 अप्रैल 2026
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1 जून 2009
व्याख्या
सही उत्तर 1 जून 2009 है। यहां अभ्यर्थियों को दो तिथियां अलग-अलग याद रखनी होंगी, क्योंकि विज्ञप्ति में दोनों एक ही वाक्य में आती हैं। विकल्प A यानी 25 जनवरी 2004 वह तिथि है जब तरजीही व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, और हस्ताक्षर से लागू होने के बीच पांच वर्ष से अधिक का अंतर रहा। विकल्प C गलत है, क्योंकि 27 नवंबर 2025 को समझौते की संयुक्त प्रशासनिक समिति की चौथी बैठक हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों ने डिजिटल मूल प्रमाणपत्रों की अनुमति देने के विचार का समर्थन किया। विकल्प D गलत है, क्योंकि 9 अप्रैल 2026 को इसी समिति की पांचवीं बैठक हुई, जिसमें अतिरिक्त प्रोटोकॉल का प्रस्ताव आपसी सहमति से स्वीकार हुआ। चारों तिथियों को एक क्रम में पढ़ना आसान रहता है: 2004 में हस्ताक्षर, 2009 में लागू, 2025 में समर्थन, 2026 में प्रस्ताव स्वीकार और सितंबर 2026 में प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर।