मनुष्यों में, आंशिक रूप से पचे हुए भोजन का आमाशय से छोटी आंत में निकास निम्नलिखित में से किस संरचना/प्रक्रिया द्वारा नियंत्रित होता है?
- A.क्रमाकुंचन (पेरिस्टालसिस)
- B.आमाशय की पेशीय भित्तियाँ
- C.अवरोधिनी (स्फिंक्टर) पेशी
- D.छोटी आंत के रसांकुर (विलाई)
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, अवरोधिनी (स्फिंक्टर) पेशी। आमाशय के निचले सिरे पर पेशियों का एक छल्ला, जिसे जठरनिर्गम अवरोधिनी (पाइलोरिक स्फिंक्टर) कहते हैं, खुलता और बंद होता है और भोजन को थोड़ा-थोड़ा करके छोटी आंत में जाने देता है। आमाशय में भोजन हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, पेप्सिन और श्लेष्मा के साथ मथकर अर्ध-तरल लुगदी बनता है, जिसे काइम कहते हैं। यह अवरोधिनी काइम को छोटी आंत के पहले भाग ग्रहणी (ड्यूओडिनम) में कम मात्रा में छोड़ती है, ताकि पित्त और अग्न्याशय रस उस पर ठीक से काम कर सकें। NCERT कक्षा 10 के जैव प्रक्रम अध्याय में भी इसी अवरोधिनी को आमाशय के निकास का नियंत्रक बताया गया है। विकल्प A गलत है, क्योंकि क्रमाकुंचन आहार नाल की लहर जैसी गति है जो भोजन को आगे धकेलती है, निकास का नियंत्रण नहीं करती। विकल्प B गलत है, क्योंकि आमाशय की पेशीय भित्तियाँ भोजन को मथती और मिलाती हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि रसांकुर छोटी आंत में पहुँच चुके पचे भोजन का अवशोषण करते हैं। Exam tip: पाइलोरिक स्फिंक्टर = आमाशय से ग्रहणी का द्वार; रसांकुर = अवशोषण; क्रमाकुंचन = भोजन की गति।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंयह तथ्य कि ग्रह सूर्य के चारों ओर वृत्तों में नहीं, बल्कि दीर्घवृत्तों में घूमते हैं, सबसे पहले किसने प्रदर्शित किया?
- A.गैलीलियो
- B.मार्टिन लूथर
- C.योहानेस केप्लर
- D.कॉपरनिकस
उत्तर देखें
1609 में केप्लर ने दिखाया कि ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं और सूर्य उस दीर्घवृत्त की एक नाभि पर होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.यूरिया यकृत में बनता है।
- B.यूरिया रक्त में बनता है।
- C.यूरिया स्टार्च के पाचन से बनता है।
- D.यूरिया फेफड़े और वृक्क में बनता है।
उत्तर देखें
यकृत की कोशिकाएँ अमीनो अम्लों के टूटने से निकले विषैले अमोनिया को ऑर्निथीन चक्र, जिसे यूरिया चक्र भी कहते हैं, के द्वारा यूरिया में बदलती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में प्रकाश के गमन का सही क्रम निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- A.संघनित्र-अभिदृश्यक लेंस-नेत्रिका-देह नलिका
- B.अभिदृश्यक लेंस-संघनित्र-देह नलिका-नेत्रिका
- C.संघनित्र-अभिदृश्यक लेंस-देह नलिका-नेत्रिका
- D.नेत्रिका-अभिदृश्यक लेंस-देह नलिका-दर्पण
उत्तर देखें
प्रकाश संघनित्र से होकर नमूने तक जाता है, अभिदृश्यक लेंस उसे ग्रहण करता है, फिर वह देह नलिका से ऊपर जाकर नेत्रिका के रास्ते आँख तक पहुँचता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हीमोग्लोबिन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.आरबीसी में उपस्थित हीमोग्लोबिन केवल ऑक्सीजन ले जा सकता है, कार्बन डाइऑक्साइड नहीं।
- B.आरबीसी का हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड दोनों ले जा सकता है।
- C.आरबीसी का हीमोग्लोबिन केवल कार्बन डाइऑक्साइड ले जा सकता है।
- D.हीमोग्लोबिन का उपयोग केवल रक्त के थक्का बनने में होता है, गैसों को ले जाने में नहीं।
उत्तर देखें
यह अपने लौह-युक्त हीम समूहों पर ऑक्सीजन बाँधता है और अपनी प्रोटीन शृंखलाओं पर कुछ कार्बन डाइऑक्साइड ले जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हिस्टोन प्रोटीनों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.हिस्टोन ऐसे प्रोटीन हैं जो माइटोकॉन्ड्रिया की झिल्ली में पाए जाते हैं।
- B.हिस्टोन ऐसे प्रोटीन हैं जो केंद्रक में डीएनए के साथ जुड़े हुए पाए जाते हैं।
- C.हिस्टोन साइटोसोल में लिपिडों से जुड़े प्रोटीन हैं।
- D.हिस्टोन साइटोसोल में कार्बोहाइड्रेटों से जुड़े प्रोटीन हैं।
उत्तर देखें
यूकैरियोटिक कोशिकाओं के केंद्रक में डीएनए इन्हीं प्रोटीनों के चारों ओर लिपटकर क्रोमैटिन बनाता है। हिस्टोन छोटे क्षारीय प्रोटीन हैं जिनमें धनावेशित अमीनो अम्ल लाइसिन और आर्जिनिन अधिक होते हैं, जो डीएनए के ऋणावेशित फॉस्फेट समूहों को आकर्षित करते हैं।
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