मानव मस्तिष्क का कौन सा भाग शरीर का संतुलन और मुद्रा बनाए रखता है?
- A.प्रमस्तिष्क
- B.अनुमस्तिष्क
- C.मेडुला ऑब्लांगेटा
- D.हाइपोथैलेमस
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, अनुमस्तिष्क है। अनुमस्तिष्क प्रमस्तिष्क के पीछे और नीचे स्थित होता है और ऐच्छिक पेशीय क्रियाओं का समन्वय करता है, इसलिए वह शरीर का संतुलन तथा मुद्रा स्थिर रखता है; उसके क्षतिग्रस्त होने पर मांसपेशियां सबल रहने पर भी चाल लड़खड़ाने लगती है। विकल्प A गलत है क्योंकि प्रमस्तिष्क मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है और वह चिंतन, स्मृति, बुद्धि, इच्छा तथा संवेदनाओं की व्याख्या का केंद्र है। विकल्प C गलत है क्योंकि मेडुला ऑब्लांगेटा हृदय गति, श्वसन, निगलने, खांसने और वमन जैसी अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि हाइपोथैलेमस तापमान, भूख, प्यास और नींद का नियमन करता है तथा अपने विमोचक हार्मोनों द्वारा तंत्रिका तंत्र को पीयूष ग्रंथि से जोड़ता है। चारों भागों को अलग रखने का सरल सूत्र यह है कि प्रमस्तिष्क सोचता है, अनुमस्तिष्क संतुलन रखता है, मेडुला जीवन चलाता है और हाइपोथैलेमस शरीर को अनुकूल बनाए रखता है।
पूरा लेख पढ़ें: मानव शरीर के महत्वपूर्ण तथ्य: प्रतियोगी परीक्षा नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंमानव शरीर की सबसे छोटी अस्थि कौन सी है?
- A.स्टेपीज
- B.मैलियस
- C.इनकस
- D.हाइऑइड
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रकाब के आकार की स्टेपीज मध्य कर्ण की तीन अस्थियों में सबसे भीतरी है और मानव शरीर की सबसे छोटी अस्थि है, जिसकी लंबाई कुछ मिलीमीटर ही होती है; शरीर की सबसे छोटी मांसपेशी स्टेपीडियस भी इसी से जुड़ी होती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वयस्क मानव शरीर में कुल कितनी अस्थियां होती हैं?
- A.186
- B.206
- C.256
- D.300
उत्तर देखें
वयस्क मानव कंकाल में 206 अस्थियां होती हैं, जिनमें से 80 अक्षीय कंकाल की हैं, अर्थात खोपड़ी, कशेरुक दंड और वक्ष की, तथा 126 उपांगीय कंकाल की, अर्थात हाथ-पैर और मेखलाओं की।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि कौन सी है?
- A.थायरॉइड
- B.अग्नाशय
- C.यकृत
- D.पीयूष ग्रंथि
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यकृत का भार लगभग डेढ़ किलोग्राम होता है और वह शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि तथा सबसे बड़ा आंतरिक अंग है; यह पित्त स्रावित करता है, ग्लाइकोजन, लोहा और विटामिन ए संचित करता है, अमोनिया को यूरिया में बदलता है तथा औषधियों और विषों का विषहरण करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मानव हृदय का गति प्रेरक (पेसमेकर) किस संरचना को कहा जाता है?
- A.एट्रियो-वेंट्रिकुलर नोड
- B.साइनो-एट्रियल नोड
- C.बंडल ऑफ हिज
- D.पुरकिंजे तंतु
उत्तर देखें
साइनो-एट्रियल नोड दाहिने अलिंद की भित्ति में ऊर्ध्व महाशिरा के मुख के पास स्थित विशिष्ट पेशी ऊतक का छोटा भाग है और वह बाहरी उद्दीपन के बिना वह आवेग उत्पन्न करता है जो प्रत्येक हृदय स्पंदन की दर तय करता है, इसलिए उसे गति प्रेरक कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मानव शरीर में लाल रक्त कणिका का औसत जीवनकाल कितना होता है?
- A.लगभग 10 दिन
- B.लगभग 60 दिन
- C.लगभग 120 दिन
- D.लगभग 365 दिन
उत्तर देखें
लाल रक्त कणिकाएं लाल अस्थि मज्जा में बनती हैं, परिपक्व होते समय अपना केंद्रक खो देती हैं और लगभग चार माह जीवित रहती हैं, जिसके बाद प्लीहा में उनका विघटन होता है, इसी कारण प्लीहा को लाल रक्त कणिकाओं का कब्रिस्तान कहा जाता है; उनके हीमोग्लोबिन से निकला लोहा पुनः…
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