मानव दिल्ली के सभी यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों को देखने की योजना बना रहा है। वह देखने जाएगा
- A.लाल किला, क़ुतुब मीनार, जामा मस्जिद
- B.लाल किला, इंडिया गेट, क़ुतुब मीनार
- C.लाल किला, क़ुतुब मीनार, हुमायूँ का मक़बरा
- D.लाल किला, हुमायूँ का मक़बरा, इंडिया गेट
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, लाल किला, क़ुतुब मीनार, हुमायूँ का मक़बरा। दिल्ली में यूनेस्को के तीन विश्व धरोहर स्थल हैं और वे यही तीन हैं। हुमायूँ का मक़बरा 1993 में सूची में आया; 1560 के दशक में उसकी विधवा बेगा बेगम की इच्छा से बना यह भारतीय उपमहाद्वीप का पहला उद्यान-मक़बरा था और ताजमहल का आदर्श बना। क़ुतुब मीनार और उसके स्मारक भी 1993 में सूची में आए; मीनार कुतुबुद्दीन ऐबक ने शुरू की और इल्तुतमिश ने पूरी की, और इसी परिसर में जंग न लगने वाला प्रसिद्ध लौह स्तंभ है। शाहजहाँ द्वारा शाहजहानाबाद के महल-किले के रूप में बनवाया गया और 1648 में पूरा हुआ लाल किला परिसर 2007 में सूची में शामिल हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि दिल्ली की जामा मस्जिद एक महान मुग़ल मस्जिद होते हुए भी विश्व धरोहर स्थल नहीं है। विकल्प B गलत है, क्योंकि एडविन लुटियंस द्वारा बनाया गया युद्ध स्मारक इंडिया गेट इस सूची में नहीं है। विकल्प D भी इसी कारण गलत है, क्योंकि उसमें फिर इंडिया गेट है। परीक्षा टिप: दिल्ली के तीन विश्व धरोहर स्थल हैं हुमायूँ का मक़बरा और क़ुतुब मीनार (1993) तथा लाल किला (2007)।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखें1870 के दशक में बंबई सचिवालय का डिज़ाइन किसने तैयार किया?
- A.एच. सेंट क्लेयर विल्किन्स
- B.सर कावसजी जहाँगीर रेडीमनी
- C.पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास
- D.नुसरवानजी टाटा
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रॉयल इंजीनियर्स के अधिकारी हेनरी सेंट क्लेयर विल्किन्स ने बंबई सचिवालय का डिज़ाइन बनाया, जो 1874 में पूरा हुआ। यह सार्वजनिक भवनों की उस भव्य पंक्ति का हिस्सा था जो 1860 के दशक में किले की पुरानी दीवारें गिराए जाने के बाद बंबई के ओवल मैदान के किनारे बनी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में, इतिवृत्तों, राजवंशीय इतिहासों और महाकाव्य कथाओं को कंठस्थ करना निम्नलिखित में से किनका व्यवसाय था?
- A.श्रमण
- B.परिव्राजक
- C.अग्रहारिक
- D.मागध
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प्राचीन भारत में मागध पेशेवर चारण या भाट थे। सूतों के साथ वे राजाओं की वंशावलियां, राजवंशों के इतिहास और वीरों की कथाएं कंठस्थ करके सुनाते थे, और दरबार में तथा उत्सवों पर शासकों की प्रशंसा का गान करते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा वैष्णव परंपरा का मंदिर है?
- A.श्रीरंगम
- B.चिदंबरम
- C.गंगैकोंड चोलपुरम
- D.तंजावुर
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तिरुचिरापल्ली के पास कावेरी और कोल्लिडम नदियों के बीच एक द्वीप पर स्थित श्रीरंगम का श्री रंगनाथस्वामी मंदिर शेषनाग पर लेटे रंगनाथ रूप में विष्णु को समर्पित है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1931 में तंजावुर के बृहदीश्वर मंदिर में खोजी गई निम्नलिखित में से कौन-सी एक महत्वपूर्ण आरंभिक चोल चित्रकृति रही है?
- A.दोनों ओर चँवरधारियों के साथ बुद्ध
- B.योग-दक्षिणामूर्ति के रूप में शिव
- C.यक्षी काली
- D.सिंहासन पर सर्प-फन के साथ पार्श्वनाथ
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तंजावुर का बृहदीश्वर मंदिर राजराज चोल प्रथम ने बनवाया था और यह शिव को समर्पित है, इसलिए इसके आरंभिक चोल भित्तिचित्रों में शैव विषय ही दिखते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →साँची और उसकी पुरातात्विक खोजों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब 1818 में साँची की खोज हुई, तब उसके चार तोरणद्वारों में से तीन खड़े थे, चौथा उसी स्थान पर पड़ा था जहाँ वह गिरा था 2. साँची में चित्रित पशुओं में हाथी, घोड़े, बंदर और मवेशी शामिल हैं ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
दोनों कथन मध्य प्रदेश में स्थित साँची के महान स्तूप के उस विवरण से मेल खाते हैं जो NCERT कक्षा 12 के इतिहास में दिया गया है।
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