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GK24
भारतीय इतिहासमध्यमपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2016, GS Paper I

मध्यकालीन भारत के आर्थिक इतिहास के संदर्भ में, 'अरघट्ट' शब्द किसको निर्दिष्ट करता है?

  1. A.बंधुआ मजदूर
  2. B.सैन्य अधिकारियों को दिए गए भूमि अनुदान
  3. C.भूमि की सिंचाई में प्रयुक्त जलचक्र
  4. D.कृषि भूमि में परिवर्तित बंजर भूमि

सही उत्तर

C. भूमि की सिंचाई में प्रयुक्त जलचक्र

व्याख्या

सही उत्तर है C, भूमि की सिंचाई में प्रयुक्त जलचक्र। आरंभिक मध्यकालीन भारत में खेतों की सिंचाई के लिए पानी उठाने वाले पहिए को अरघट्ट कहा जाता था। यह बाद में फ़ारसी पहिया कहलाने वाले यंत्र की तरह काम करता था: कुएं के ऊपर लगे पहिए पर घड़ों की एक माला बंधी होती थी, और जब बैल गियर को घुमाते थे तो घड़े पानी में डूबकर भरते, ऊपर आते और एक नाली में खाली हो जाते, जिससे पानी खेतों तक पहुंचता। यह शब्द उस समय के अभिलेखों और ग्रंथों में मिलता है, और इसके प्रसार से किसान सूखे क्षेत्रों में और बिना बारिश वाले मौसम में भी फसल उगा सके। बाबर ने भी पंजाब और लाहौर क्षेत्र में ऐसे पहिए के उपयोग का वर्णन किया है। विकल्प A गलत है, क्योंकि बंधुआ या बेगार श्रम के लिए बेगार या विष्टि जैसे शब्द थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि सैन्य अधिकारियों को दिए गए राजस्व अनुदान दिल्ली सल्तनत में इक्ता और मुगलों के समय जागीर कहलाते थे। विकल्प D गलत है, क्योंकि बंजर से खेती योग्य बनी भूमि के लिए राजस्व के अलग शब्द थे, अरघट्ट नहीं। परीक्षा टिप: अरघट्ट घड़ों की माला वाला जलचक्र है, यानी फ़ारसी पहिए का भारतीय रूप।

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Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2016, GS Paper Iआसान

सर स्टैफ़र्ड क्रिप्स की योजना में परिकल्पना की गई थी कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद

  1. A.भारत को पूर्ण स्वतंत्रता दी जाए।
  2. B.स्वतंत्रता देने से पहले भारत को दो भागों में विभाजित किया जाए
  3. C.भारत को इस शर्त के साथ गणराज्य बनाया जाए कि वह राष्ट्रमंडल में शामिल होगा
  4. D.भारत को डोमिनियन का दर्जा दिया जाए
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. भारत को डोमिनियन का दर्जा दिया जाए

मार्च 1942 के क्रिप्स मिशन ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत को डोमिनियन का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा, पूर्ण स्वतंत्रता का नहीं।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2016, GS Paper Iमध्यम

1907 में सूरत में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में फूट का मुख्य कारण क्या था?

  1. A.लॉर्ड मिंटो द्वारा भारतीय राजनीति में सांप्रदायिकता का प्रवेश
  2. B.ब्रिटिश सरकार से वार्ता करने की नरमपंथियों की क्षमता में गरमपंथियों का विश्वास न होना
  3. C.मुस्लिम लीग की स्थापना
  4. D.अरविंद घोष का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष न चुना जा सकना
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ब्रिटिश सरकार से वार्ता करने की नरमपंथियों की क्षमता में गरमपंथियों का विश्वास न होना

दिसंबर 1907 की सूरत फूट तरीकों के मूल मतभेद से हुई। फिरोज़शाह मेहता और गोपाल कृष्ण गोखले जैसे नरमपंथी याचिका, प्रार्थना और संवैधानिक दबाव में विश्वास रखते थे, जबकि बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल के नेतृत्व में गरमपंथी बंगाल विभाजन के बाद स्वदेशी, बहिष्कार और…

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2018, GS Paper Iकठिन

निम्नलिखित घटनाओं में से कौन-सी सबसे पहले घटी?

  1. A.स्वामी दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना की।
  2. B.दीनबंधु मित्र ने नीलदर्पण लिखा।
  3. C.बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने आनंदमठ लिखा।
  4. D.सत्येंद्रनाथ टैगोर भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने वाले पहले भारतीय बने।
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. दीनबंधु मित्र ने नीलदर्पण लिखा।

बंगाल के किसानों पर यूरोपीय नील बागान मालिकों के अत्याचार पर आधारित बांग्ला नाटक नीलदर्पण दीनबंधु मित्र ने 1858-59 में लिखा और यह 1860 में प्रकाशित हुआ, यानी बाकी तीनों घटनाओं से पहले।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2018, GS Paper Iमध्यम

1920 में, निम्नलिखित में से किसने अपना नाम बदलकर "स्वराज्य सभा" रख लिया?

  1. A.ऑल इंडिया होम रूल लीग
  2. B.हिंदू महासभा
  3. C.साउथ इंडियन लिबरल फेडरेशन
  4. D.सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी
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सही उत्तर: A. ऑल इंडिया होम रूल लीग

1920 में महात्मा गांधी ऑल इंडिया होम रूल लीग के अध्यक्ष बने और उनके नेतृत्व में इसका नाम बदलकर स्वराज्य सभा कर दिया गया।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · NDA-II 2024, GATकठिन

मक्का भारत में किस मार्ग से लाया गया था?

  1. A.अमेरिका और इंग्लैंड
  2. B.अफ्रीका और स्पेन
  3. C.फ्रांस और रूस
  4. D.पुर्तगाल और इटली
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अफ्रीका और स्पेन

मक्का अमेरिका महाद्वीप की फसल है और यह सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी में अफ्रीका और स्पेन के रास्ते भारत पहुँचा; सत्रहवीं शताब्दी तक यह पश्चिमी भारत की प्रमुख फसलों में शामिल हो गया था।