कुछ विषाणु संक्रमणों में प्लेटलेट्स की संख्या तेज़ी से घट जाती है। प्लेटलेट्स आवश्यक हैं, क्योंकि :
- A.वे लाल रक्त कोशिकाओं के साथ मिलकर ऑक्सीजन ले जाती हैं।
- B.प्लेटलेट्स रक्त के माध्यम से कोशिकाओं तक भोजन पहुँचाने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
- C.प्लेटलेट्स रक्त से कार्बन डाइऑक्साइड हटाती हैं।
- D.प्लेटलेट्स की रक्त के थक्का बनने में भूमिका होती है।
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है D, प्लेटलेट्स की रक्त के थक्का बनने में भूमिका होती है। प्लेटलेट्स क्षतिग्रस्त रक्त वाहिका को बंद करती हैं और थक्का बनने की प्रक्रिया शुरू करती हैं।
प्लेटलेट्स या बिंबाणु छोटे कोशिका-खंड हैं, जो अस्थि मज्जा की बड़ी कोशिकाओं मेगाकैरियोसाइट से बनते हैं। स्वस्थ वयस्क के प्रति माइक्रोलीटर रक्त में लगभग 1.5 से 4.5 लाख प्लेटलेट्स होती हैं और इनका जीवनकाल लगभग सात से दस दिन होता है। चोट लगने पर ये घाव पर चिपकती हैं, थक्का बनाने वाले कारक छोड़ती हैं और फाइब्रिनोजेन को फाइब्रिन के जाल में बदलने में मदद करती हैं। डेंगू जैसे विषाणु ज्वर में इनकी संख्या तेज़ी से गिरती है, जिससे रक्तस्राव का खतरा बढ़ता है।
विकल्प A गलत है, क्योंकि ऑक्सीजन लाल रक्त कोशिकाओं का हीमोग्लोबिन ले जाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि पचा हुआ भोजन प्लाज़्मा में घुलकर पहुँचता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड मुख्यतः प्लाज़्मा में बाइकार्बोनेट के रूप में जाती है।
परीक्षा टिप: RBC = ऑक्सीजन, WBC = रक्षा, प्लेटलेट्स = थक्का; डेंगू में प्लेटलेट्स घटती हैं।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंपवन की गति किससे मापी जाती है?
- A.पवन दिग्दर्शक (विंड वेन)
- B.पवन आरेख (विंड रोज़)
- C.बैरोमीटर
- D.एनीमोमीटर
उत्तर देखें
एनीमोमीटर (पवनवेगमापी) से पता चलता है कि हवा कितनी तेज चल रही है; इसका नाम यूनानी शब्द 'एनेमोस' से बना है, जिसका अर्थ है हवा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हीरे की चमक किसके कारण होती है?
- A.प्रकाश का व्यतिकरण
- B.प्रकाश का विवर्तन
- C.प्रकाश का ध्रुवण
- D.प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन
उत्तर देखें
तराशे हुए हीरे में प्रवेश करने वाला प्रकाश बाहर निकलने से पहले उसके भीतर बार-बार परावर्तित होता है, जिससे पत्थर चमकता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सी विद्युतचुंबकीय तरंग नहीं है?
- A.प्रकाश तरंग
- B.रेडियो तरंग
- C.ध्वनि तरंग
- D.सूक्ष्म तरंग (माइक्रोवेव)
उत्तर देखें
ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है जिसे चलने के लिए माध्यम चाहिए, जबकि बाकी तीनों विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं। ध्वनि वायु, जल या ठोस में संपीडन और विरलन वाली अनुदैर्ध्य तरंग के रूप में चलती है, इसीलिए यह निर्वात में नहीं जा सकती।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विद्युतचुंबकीय तरंग के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा सत्य नहीं है?
- A.विद्युतचुंबकीय तरंग ऊर्जा और संवेग का परिवहन करती है
- B.विद्युतचुंबकीय तरंग ध्रुवित और परावर्तित हो सकती है
- C.विद्युतचुंबकीय तरंग अनुदैर्ध्य होती है
- D.विद्युतचुंबकीय तरंग का संचरण परिवर्ती विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा वर्णित होता है
उत्तर देखें
विद्युतचुंबकीय तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं, अनुदैर्ध्य नहीं, इसलिए यह कथन असत्य है। विद्युतचुंबकीय तरंग में विद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे के लंबवत दोलन करते हैं और दोनों तरंग के चलने की दिशा के भी लंबवत होते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सी आवृत्ति परास मानव कानों के लिए संवेदनशील है?
- A.0-200 Hz
- B.20-20,000 Hz
- C.केवल 200-20,000 Hz
- D.केवल 2,000-20,000 Hz
उत्तर देखें
सामान्य मानव कान लगभग 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज तक की ध्वनि सुनता है, जिसे श्रव्य परास कहते हैं। आवृत्ति, जिसका मात्रक हर्ट्ज है, प्रति सेकंड होने वाले कंपनों की संख्या है और यही ध्वनि का तारत्व तय करती है: आवृत्ति जितनी अधिक, स्वर उतना तीखा।
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