कोलंबो यात्रा के दौरान प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के समुद्री प्रशिक्षुओं ने किस श्रीलंकाई संस्थान का दौरा किया?
- A.नौसेना एवं समुद्री अकादमी, त्रिंकोमाली
- B.कोटेलावाला रक्षा विश्वविद्यालय, कोलंबो
- C.नौसैनिक गोदी, गाले
- D.समुद्री प्रशिक्षण केंद्र, जाफना
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर त्रिंकोमाली स्थित नौसेना एवं समुद्री अकादमी है। स्क्वाड्रन के समुद्री प्रशिक्षु इसी अकादमी गए और वहां अपने श्रीलंकाई समकक्षों से मिले, जबकि अकादमी के कैडेट बाद में भारतीय जहाजों पर आकर स्क्वाड्रन की प्रशिक्षण सुविधाएं देख गए। विकल्प B गलत है, क्योंकि कोटेलावाला रक्षा विश्वविद्यालय श्रीलंका का जाना-माना रक्षा संस्थान होने पर भी इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था। विकल्प C गलत है, क्योंकि गोदी मरम्मत और रखरखाव की सुविधा होती है, प्रशिक्षण अकादमी नहीं, और ऐसी किसी यात्रा की जानकारी नहीं दी गई। विकल्प D गलत है, क्योंकि उसमें नामित संस्थान इस आदान-प्रदान में कहीं नहीं आता। दोनों ओर के प्रशिक्षुओं का यह आदान-प्रदान पूरी यात्रा का पेशेवर केंद्र रहा। इसके साथ श्रीलंका नौसेना के पश्चिमी नौसैनिक क्षेत्र के कमांडर से वरिष्ठ अधिकारी की भेंट भी हुई, जिससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुए।
पूरा लेख पढ़ें: भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण जहाज कोलंबो बंदरगाह से रवाना
अभ्यास प्रश्न
29 अक्टूबर 2026 को कोलंबो से रवाना हुए भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन में कौन से जहाज शामिल थे?
- A.आईएनएस विक्रांत, आईएनएस विक्रमादित्य और आईसीजीएस समुद्र
- B.आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता और आईसीजीएस सारथी
- C.आईएनएस तबर, आईएनएस त्रिकंड और आईसीजीएस विक्रम
- D.आईएनएस शिवालिक, आईएनएस कदमत्त और आईसीजीएस अभिनव
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यही तीन जहाज प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन यानी 1 टीएस बनाते हैं, जो भारतीय नौसेना के समुद्री प्रशिक्षुओं को ले जाता है और 29 अक्टूबर 2026 को बंदरगाह यात्रा पूरी कर कोलंबो से रवाना हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →श्रीलंका यात्रा के संदर्भ में उल्लिखित महासागर दृष्टिकोण का पूरा अर्थ क्या है?
- A.क्षेत्रों में बंदरगाह पहुंच और व्यापार के लिए समुद्री गठबंधन
- B.क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति
- C.सभी क्षेत्रों की सुरक्षा और विकास के लिए मानवीय सहायता हेतु पारस्परिक सहयोग
- D.क्षेत्रों में विकास के लिए समुद्री सद्भाव और साझा कार्रवाई
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प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की कोलंबो यात्रा और श्रीलंका नौसेना के साथ हुआ आदान-प्रदान इसी भारतीय दृष्टिकोण के अनुरूप बताया गया, जिसमें क्षेत्रीय समुद्री सहयोग तथा क्षमता निर्माण शामिल हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सिवितावेचिया में आईएनएस त्रिशूल पर आईं इटली में भारत की राजदूत कौन हैं?
- A.वाणी राव
- B.रुचिरा कंबोज
- C.तरनजीत सिंह संधू
- D.हर्षवर्धन श्रृंगला
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इटली में भारत की राजदूत के रूप में वे सिवितावेचिया में आईएनएस त्रिशूल पर गईं, चालक दल से बातचीत की और डेक पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में इतालवी नौसेना के फ्लीट कमांडर व सीआईएनसीएनएवी वाइस एडमिरल ऑरेलियो डी कैरोलिस के साथ शामिल हुईं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आईएनएस त्रिशूल के चालक दल ने सिवितावेचिया में इतालवी नौसेना के कौन-से विमानवाहक पोत का दौरा किया?
- A.आईटीएस गैरीबाल्डी
- B.आईटीएस कैवोर
- C.आईटीएस ट्राइस्टे
- D.आईटीएस आंद्रेया दोरिया
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जब दोनों जहाज सिवितावेचिया में थे, तब युद्धपोत का चालक दल इस इतालवी विमानवाहक पोत पर गया, और इस दौरे से दोनों नौसेनाओं के अधिकारियों तथा नाविकों को समुद्र में अपनी पेशेवर पद्धतियों की तुलना करने और अनुभव साझा करने का अवसर मिला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सिवितावेचिया पोर्ट कॉल के समय आईएनएस त्रिशूल किस सागर में तैनात था?
- A.अरब सागर
- B.भूमध्य सागर
- C.बाल्टिक सागर
- D.दक्षिण चीन सागर
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सिवितावेचिया की पोर्ट कॉल जहाज की उसी सागर में चल रही परिचालन तैनाती का हिस्सा थी, और 28 अक्टूबर 2026 को यात्रा समाप्त होने पर युद्धपोत उसी तैनाती के अगले चरण की ओर बढ़ गया।
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