कीटों में उत्सर्जन किन रचनाओं द्वारा होता है?
- A.वृक्कक
- B.मैलपीगी नलिकाएं
- C.ज्वाला कोशिकाएं
- D.हरित ग्रंथियां
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, मैलपीगी नलिकाएं है। ये पतली बंद नलिकाएं कीट के देह द्रव में तैरती हैं और आहार नाल में खुलती हैं, जहां वे नाइट्रोजनी अपशिष्ट लेकर उसे लगभग शुष्क यूरिक अम्ल के रूप में बाहर कर देती हैं, जिससे जल बहुत कम नष्ट होता है। इसी कारण कीट शुष्क आवासों में भी जीवित रहते हैं।
विकल्प A, वृक्कक केंचुए जैसे एनेलिड के उत्सर्जी अंग हैं। विकल्प C, ज्वाला कोशिकाएं चपटे कृमियों की हैं। विकल्प D, हरित ग्रंथियां, जिन्हें एंटेनरी ग्रंथियां भी कहते हैं, झींगे जैसे क्रस्टेशियनों के उत्सर्जी अंग हैं, अर्थात वे कीटों के ही संघ की पर भिन्न वर्ग की हैं, इसी कारण वही सबसे आकर्षक गलत उत्तर है। इस प्रकार आर्थ्रोपोडा एक से अधिक उत्सर्जी योजनाओं वाला संघ है, इसलिए प्रश्न में वर्ग देखकर ही उत्तर चुनना चाहिए, केवल संघ देखकर नहीं।
पूरा लेख पढ़ें: जंतु जगत: अकशेरुकी और कशेरुकी संघों के नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंजातियों की संख्या के आधार पर जंतु जगत का सबसे बड़ा संघ कौन है?
- A.मोलस्का
- B.आर्थ्रोपोडा
- C.कॉर्डेटा
- D.एनेलिडा
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व्याख्या
सही उत्तर B, आर्थ्रोपोडा है। वर्णित जंतु जातियों में तीन-चौथाई से अधिक आर्थ्रोपोड हैं, अर्थात कीट, मकड़ियां, बिच्छू, कनखजूरे, केकड़े तथा झींगे। काइटिन का कठोर बाह्यकंकाल, संधियुक्त उपांग, छोटा शरीर और कीटों में उड़ने की शक्ति ने इस समूह को पृथ्वी के लगभग प्रत्येक आवास में फैला दिया।
विकल्प A, मोलस्का दूसरा सबसे बड़ा संघ है, जिसमें घोंघे, सीपियां, स्क्विड तथा ऑक्टोपस आते हैं, और यहां यही सामान्य गलत उत्तर है। विकल्प C, कॉर्डेटा में सभी कशेरुकी आते हैं और परिचित जंतु इसी के होने के कारण वह बड़ा लगता है, पर इसमें जातियां आर्थ्रोपोडा तथा मोलस्का दोनों से बहुत कम हैं। विकल्प D, एनेलिडा केंचुए, जोंक तथा समुद्री कृमियों का बहुत छोटा संघ है। क्रम याद रखें: आर्थ्रोपोडा, मोलस्का, फिर कॉर्डेटा। यह भी ध्यान रखें कि आर्थ्रोपोडा में खुला परिसंचरण तंत्र तथा संयुक्त नेत्र होते हैं, और कीट ही एकमात्र उड़ने वाले अकशेरुकी हैं।
जंतु जगत का कौन संघ पूर्णतः समुद्री है, जिसका कोई सदस्य मीठे जल या थल पर नहीं रहता?
- A.एनेलिडा
- B.मोलस्का
- C.इकाइनोडर्मेटा
- D.प्लेटीहेल्मिंथीज
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व्याख्या
सही उत्तर C, इकाइनोडर्मेटा है। तारा मछली, समुद्री अर्चिन, समुद्री खीरा, भंगुर तारा तथा समुद्री लिली केवल समुद्र में मिलते हैं, और उनका जल संवहन तंत्र, जो समुद्री जल भरकर कार्य करता है, एक कारण है कि वे मीठे जल या थल पर नहीं बस सके। टीनोफोरा संघ, अर्थात कंघी जेली भी पूर्णतः समुद्री है।
विकल्प A, एनेलिडा में थल का केंचुआ तथा मीठे जल की जोंक भी है, नेरीस जैसे समुद्री कृमियों के अतिरिक्त। विकल्प B, मोलस्का में थल का घोंघा, मीठे जल का पाइला तथा समुद्री स्क्विड और ऑक्टोपस हैं। विकल्प D, प्लेटीहेल्मिंथीज में मीठे जल का प्लेनेरिया तथा थलीय जंतुओं के भीतर रहने वाले परजीवी, जैसे फीताकृमि आते हैं। केवल इकाइनोडर्म और कंघी जेली समुद्र तक सीमित हैं। इस संघ का एक और लक्षण यह है कि उसके सदस्य वयस्क अवस्था में अरीय पर लार्वा अवस्था में द्विपार्श्व सममित होते हैं।
उत्सर्जन तथा परिसरणीय नियमन करने वाली ज्वाला कोशिकाएं किस समूह के जंतुओं में पाई जाती हैं?
- A.चपटे कृमि
- B.गोल कृमि
- C.केंचुए
- D.कीट
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, चपटे कृमि, अर्थात संघ प्लेटीहेल्मिंथीज है। ज्वाला कोशिकाएं, जिन्हें सोलेनोसाइट भी कहते हैं, वे विशिष्ट कोशिकाएं हैं जिनमें स्पंदनशील पक्ष्माभों का गुच्छ होता है, जो अपशिष्ट द्रव को नलिकाओं के तंत्र में धकेलता है, और वे प्लेनेरिया, टीनिया तथा फैसिओला जैसे जंतुओं में नाइट्रोजनी अपशिष्ट निकालने और जल संतुलन, दोनों का कार्य करती हैं।
विकल्प B, एस्कहेल्मिंथीज के गोल कृमि साधारण उत्सर्जी छिद्र तथा रेनेट कोशिकाओं से उत्सर्जन करते हैं, ज्वाला कोशिकाओं से नहीं। विकल्प C, केंचुए तथा अन्य एनेलिड लगभग प्रत्येक खंड में बनी वृक्कक नलिकाओं से उत्सर्जन करते हैं। विकल्प D, कीट आहार नाल में खुलने वाली मैलपीगी नलिकाओं से उत्सर्जन करते हैं, जिससे उनका जल बहुत कम नष्ट होता है। उत्सर्जी रचना को संघ से मिलाना मानक प्रश्न है।
किस संघ में शरीर का संगठन कोशिकीय स्तर का होता है और ऊतक नहीं बनते?
- A.सीलेंटरेटा
- B.पोरिफेरा
- C.टीनोफोरा
- D.प्लेटीहेल्मिंथीज
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व्याख्या
सही उत्तर B, पोरिफेरा है। स्पंजों में कोशिकाएं ढीले ढंग से व्यवस्थित होती हैं और बहुत कुछ स्वतंत्र रूप से कार्य करती हैं, जहां कॉलर कोशिकाएं नाल तंत्र से जल बहाती हैं और अन्य कोशिकाएं भोजन कणों का पाचन करती हैं, इसलिए शरीर कभी वास्तविक ऊतक के स्तर तक नहीं पहुंचता। कंकाल कंटिकाओं अथवा स्पंजिन तंतुओं का होता है।
विकल्प A, सीलेंटरेटा ऊतक स्तर तक पहुंच चुका है, जहां दंश कोशिकाएं तथा संकुचनशील कोशिकाएं मिलकर कार्य करती हैं। विकल्प C, टीनोफोरा में भी ऊतक स्तर है, जिसकी कंघी पट्टियों की आठ पंक्तियां क्रम से स्पंदन करती हैं। विकल्प D, प्लेटीहेल्मिंथीज और आगे बढ़कर अंग स्तर पर है, जिसमें निश्चित जनन तथा उत्सर्जी अंग होते हैं। सीढ़ी याद रखें: कोशिकीय, ऊतक, अंग और अंग-तंत्र, इसी क्रम में संघ आते हैं, और इन चारों में स्पंज ही ऐसा है जिसका शरीर सामान्यतः असममित होता है।
रक्षा तथा शिकार पकड़ने के लिए प्रयुक्त दंश कोशिकाएं, अर्थात निडोब्लास्ट किस संघ का लक्षण हैं?
- A.सीलेंटरेटा
- B.इकाइनोडर्मेटा
- C.मोलस्का
- D.पोरिफेरा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, सीलेंटरेटा है, जिसे निडारिया भी कहते हैं, और संघ का नाम इन्हीं कोशिकाओं से बना है। प्रत्येक निडोब्लास्ट में निमेटोसिस्ट नाम का कैप्सूल होता है, जिसमें लिपटा धागा स्पर्श होने पर बाहर निकलकर विष छोड़ता है, और यह हाइड्रा, समुद्री एनीमोन, जेलीफिश तथा प्रवालों में मिलता है।
विकल्प B, इकाइनोडर्मेटा कांटों तथा चिमटी जैसी रचनाओं से रक्षा करता है, दंश कोशिकाओं से नहीं। विकल्प C, मोलस्का में कवच और रेतने वाली रेडुला होती है, तथा शंकु घोंघों में विषैला दंश, पर निडोब्लास्ट नहीं। विकल्प D, पोरिफेरा में कंटिकाएं होती हैं, जो शरीर को खुरदरा और खाने में अप्रिय बनाती हैं। निडोब्लास्ट की उपस्थिति, अरीय सममिति तथा द्विकोरकी शरीर सीलेंटरेट के तीन लक्षण हैं, और इस संघ में दो शरीर रूप भी मिलते हैं, स्थिर पॉलिप तथा मुक्त तैरता मेड्यूसा।