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GK24
बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

किसी ऋण खाते को अनर्जक परिसंपत्ति कब वर्गीकृत किया जाता है, जब ब्याज या किस्त कितने समय से अधिक बकाया रहे?

  1. A.30 दिन
  2. B.60 दिन
  3. C.90 दिन
  4. D.180 दिन

सही उत्तर

C. 90 दिन

व्याख्या

सही उत्तर है C, 90 दिन। भारत में बैंकों पर लागू आय निर्धारण और परिसंपत्ति वर्गीकरण मानदंडों के अनुसार सावधि ऋण अनर्जक परिसंपत्ति तब बनता है जब उसका ब्याज अथवा मूलधन की किस्त नब्बे दिन से अधिक बकाया रह जाए। यही नब्बे दिन का नियम अपने-अपने रूप में उन नकद ऋण और ओवरड्राफ्ट खातों पर भी लागू होता है जो अनियमित बने रहते हैं, तथा फसल ऋणों पर मौसम के नियम के रूप में।

विकल्प A, तीस दिन, और विकल्प B, साठ दिन, केवल बकाया खाते की स्थिति बताते हैं; ऐसे खाते को विशेष उल्लेख खाता के रूप में चिह्नित किया जाता है जिससे बैंक समय रहते कार्रवाई करे, पर वह अब भी मानक परिसंपत्ति है। विकल्प D, एक सौ अस्सी दिन, पुराना भारतीय मानदंड है, जो नब्बे दिन की अंतरराष्ट्रीय प्रथा अपनाने पर हट गया और अब केवल पुरानी सामग्री में मिलता है। नब्बे दिन के बाद खाता बारह महीने तक अवमानक, उसके बाद संदिग्ध और वसूली की आशा न रहने पर हानि परिसंपत्ति होता है।

पूरा लेख पढ़ें: बैंक बैलेंस शीट और प्रमुख अनुपात: कासा, एनआईएम, सीडी

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Q1.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

वाणिज्यिक बैंक की बैलेंस शीट के दायित्व पक्ष में निम्नलिखित में से कौन-सी मद दिखाई जाती है?

  1. A.ग्राहकों को दिए गए अग्रिम
  2. B.सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश
  3. C.ग्राहकों की जमाएं
  4. D.भारतीय रिजर्व बैंक के पास नकद शेष
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. ग्राहकों की जमाएं

व्याख्या

सही उत्तर है C, ग्राहकों की जमाएं। जमा वह धन है जो बैंक को जमाकर्ता को लौटाना है, इसलिए वह बैंक पर दावा है और बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की तीसरी अनुसूची के प्रपत्र 'ए' में पूंजी, आरक्षित निधि और अधिशेष, उधार तथा अन्य दायित्वों के साथ दायित्व पक्ष में दिखाई जाती है। जमाएं सामान्यतः वाणिज्यिक बैंक का सबसे बड़ा दायित्व होती हैं।

विकल्प A, अग्रिम, गलत है क्योंकि ऋण वह धन है जो बैंक को मिलना है, अतः वह उसकी परिसंपत्ति है। विकल्प B, सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश, भी परिसंपत्ति है; बैंक ऐसी अनुमोदित प्रतिभूतियां धारा 24 की सांविधिक चलनिधि आवश्यकता पूरी करने के लिए भी रखते हैं। विकल्प D, रिजर्व बैंक के पास नकद शेष, भी परिसंपत्ति है, चाहे नकद आरक्षित अनुपात के कारण उसे रखना अनिवार्य हो। जो अभ्यर्थी जमाकर्ता की भाषा में सोचते हैं, वे दोनों पक्ष उलट देते हैं; बैलेंस शीट बैंक के दृष्टिकोण से लिखी जाती है।

Q2.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

किसी बैंक का कासा अनुपात उसकी कुल जमा में निम्नलिखित में से किसका हिस्सा बताता है?

  1. A.नकदी और सांविधिक चलनिधि धारिता
  2. B.चालू खाता और बचत खाता जमाएं
  3. C.पूंजी और अधिशेष
  4. D.छोटे ऋणियों को दिए गए ऋण और अग्रिम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. चालू खाता और बचत खाता जमाएं

व्याख्या

सही उत्तर है B, चालू खाता और बचत खाता जमाएं। कासा चालू खाता और बचत खाता का संक्षिप्त रूप है, और कासा अनुपात का अर्थ है चालू तथा बचत जमा के योग में कुल जमा का भाग, प्रतिशत में। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि चालू खाते पर जमाकर्ता को ब्याज नहीं मिलता और बचत खाते पर दर कम रहती है, इसलिए ये बैंक का सबसे सस्ता धन हैं; ऊंचा कासा अनुपात जमा की लागत घटाता है और स्प्रेड बढ़ाता है।

विकल्प A नकद आरक्षित और सांविधिक चलनिधि धारिता की बात करता है, जो परिसंपत्ति पक्ष में आती हैं और नकद आरक्षित अनुपात तथा धारा 24 से नियंत्रित होती हैं, कासा से नहीं। विकल्प C, पूंजी और अधिशेष, स्वामियों का अंश है और पूंजी पर्याप्तता अनुपात में प्रयुक्त होता है। विकल्प D एक काल्पनिक ऋण अनुपात है; जमा में अग्रिमों का हिस्सा ऋण-जमा अनुपात कहलाता है, जो पूरी तरह भिन्न माप है। इस प्रश्न का जाल 'सी' अक्षर को चालू के बजाय ऋण या नकदी पढ़ लेना है।

Q3.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

किसी बैंक की शुद्ध ब्याज आय की गणना कैसे की जाती है?

  1. A.कुल आय में से परिचालन व्यय घटाकर
  2. B.अर्जित ब्याज में से व्यय किया गया ब्याज घटाकर
  3. C.शुद्ध लाभ में से प्रावधान और आकस्मिकताएं घटाकर
  4. D.अर्जित ब्याज में से परिचालन व्यय घटाकर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अर्जित ब्याज में से व्यय किया गया ब्याज घटाकर

व्याख्या

सही उत्तर है B, अर्जित ब्याज में से व्यय किया गया ब्याज घटाकर। शुद्ध ब्याज आय बैंक की मूल कमाई है: अग्रिमों और निवेशों पर वसूला गया ब्याज घटा जमा तथा उधार पर दिया गया ब्याज। जब इसे औसत अर्जक परिसंपत्तियों के अनुपात में व्यक्त किया जाता है तो वही शुद्ध ब्याज मार्जिन बन जाता है, जिसे परीक्षक इसके साथ पूछते हैं।

विकल्प A, कुल आय में से परिचालन व्यय, में दिया गया ब्याज भीतर ही रह जाता है और शुल्क तथा ट्रेजरी आय भी मिल जाती है, इसलिए वह न शुद्ध ब्याज आय है न परिचालन लाभ। विकल्प C लाभ-हानि खाते का क्रम उलट देता है: प्रावधान और आकस्मिकताएं परिचालन लाभ में से घटाकर शुद्ध लाभ निकाला जाता है, अतः शुद्ध लाभ में से प्रावधान घटाना कोई परिभाषित आंकड़ा नहीं है। विकल्प D गलत व्यय घटाता है; वेतन और किराया जैसे परिचालन व्यय लागत-आय अनुपात में आते हैं। ध्यान रखें कि शुद्ध ब्याज आय में दोनों पक्षों का केवल ब्याज गिना जाता है और अन्य आय अलग रखी जाती है।

Q4.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

किसी बैंक का ऋण-जमा अनुपात किसमें किसका भाग देकर निकाला जाता है?

  1. A.कुल जमा में कुल अग्रिमों का भाग
  2. B.कुल अग्रिमों में कुल जमा का भाग
  3. C.कुल अग्रिमों में जोखिम भारित परिसंपत्तियों का भाग
  4. D.शुद्ध लाभ में कुल जमा का भाग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कुल अग्रिमों में कुल जमा का भाग

व्याख्या

सही उत्तर है B, कुल अग्रिमों में कुल जमा का भाग। ऋण-जमा अनुपात, जिसे सीडी अनुपात कहा जाता है और प्रतिशत में दिया जाता है, बताता है कि बैंक ने जमा के प्रत्येक सौ रुपये में से कितना ऋण दिया है। नीचा अनुपात निष्क्रिय धन और खोई ब्याज आय का संकेत है, और सौ प्रतिशत से ऊपर का अनुपात बताता है कि ऋण जमा से अधिक है और यह अंतर उधार से भरा जा रहा है।

विकल्प A सूत्र उलट देता है और जमा-ऋण अनुपात बन जाता है, जो प्रश्न में पूछा गया माप नहीं है; उलटा सूत्र इस अध्याय का सबसे आम भ्रमजाल है। विकल्प C में जोखिम भारित परिसंपत्तियां आ गई हैं, जो पूंजी पर्याप्तता अनुपात का हर हैं और जमा के उपयोग का माप नहीं। विकल्प D, जमा पर शुद्ध लाभ, लाभप्रदता की बात है और परिसंपत्ति पर प्रतिफल के निकट है। यह भी स्मरण रखें कि अग्रणी बैंक योजना के अंतर्गत ग्रामीण और अर्ध-शहरी शाखाओं में कम से कम साठ प्रतिशत ऋण-जमा अनुपात अपेक्षित है।

Q5.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की किस अनुसूची में बैंक की बैलेंस शीट तथा लाभ-हानि खाते के प्रपत्र निर्धारित हैं?

  1. A.पहली अनुसूची
  2. B.दूसरी अनुसूची
  3. C.तीसरी अनुसूची
  4. D.चौथी अनुसूची
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. तीसरी अनुसूची

व्याख्या

सही उत्तर है C, तीसरी अनुसूची। बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 29 के अनुसार प्रत्येक बैंककारी कंपनी को अपने लेखा वर्ष के अंतिम कार्य दिवस की स्थिति में बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाता उसी अधिनियम की तीसरी अनुसूची में दिए प्रपत्रों में तैयार करना होता है। उस अनुसूची का प्रपत्र 'ए' बैलेंस शीट है और प्रपत्र 'बी' लाभ-हानि खाता, इसीलिए देश भर के बैंकों के लेखे एक समान दिखते हैं और उनकी अनुपातों से तुलना हो पाती है।

विकल्प A, पहली अनुसूची, और विकल्प D, चौथी अनुसूची, में ये प्रपत्र नहीं हैं। विकल्प B, दूसरी अनुसूची, जाना-पहचाना जाल है, क्योंकि बैंकिंग से जुड़ी दूसरी अनुसूची भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की है: उसमें सूचीबद्ध बैंक अनुसूचित बैंक कहलाता है। अभ्यर्थी दोनों अधिनियम मिला देते हैं, इसलिए जोड़ी याद रखें: प्रपत्र बैंककारी विनियमन अधिनियम की तीसरी अनुसूची में, अनुसूचित बैंक रिजर्व बैंक अधिनियम की दूसरी अनुसूची में।