कथन I : 1920 में स्थापित अवध किसान सभा किसी भी किसान सभा को अपने साथ जोड़ने में विफल रही। कथन II : अवध किसान सभा ने किसानों से बेदख़ली वाली ज़मीन जोतने से इनकार करने और हरी व बेगार न देने को कहा।
- A.दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है
- B.दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं, परंतु कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है
- C.कथन I सत्य है, परंतु कथन II असत्य है
- D.कथन I असत्य है, परंतु कथन II सत्य है
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है D, कथन I असत्य है, परंतु कथन II सत्य है। अवध किसान सभा की स्थापना अक्टूबर 1920 में प्रतापगढ़ में बाबा रामचंद्र, गौरीशंकर मिश्र, जवाहरलाल नेहरू आदि ने की, ताकि अवध के काश्तकार ऊँचे लगान, अवैध नज़रानों और तालुकदारों की बेदख़ली के विरुद्ध एकजुट हों। यह विफल नहीं हुई, बल्कि एक महीने के भीतर लगभग 330 स्थानीय किसान सभाएँ इससे जुड़ गईं, इसलिए कथन I असत्य है। सभा ने किसानों से बेदख़ली वाली ज़मीन (जिससे किसी काश्तकार को निकाला गया हो) न जोतने, हरी और बेगार (जबरन मज़दूरी) न देने और विवाद पंचायतों से सुलझाने को कहा, इसलिए कथन II सत्य है। विकल्प A गलत है, क्योंकि कथन I असत्य है। विकल्प B भी इसी कारण गलत है। विकल्प C गलत है, क्योंकि यह दोनों कथनों की सत्यता को उलट देता है। परीक्षा टिप: यूपी किसान सभा 1918 (गौरीशंकर मिश्र, इंद्र नारायण द्विवेदी); अवध किसान सभा 1920 (बाबा रामचंद्र, नेहरू)।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन 'अपरिवर्तनवादी' (नो-चेंजर्स) समूह से संबंधित नहीं था?
- A.एम.ए. अंसारी
- B.विट्ठलभाई पटेल
- C.चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
- D.कस्तूरी रंगा आयंगर
उत्तर देखें
1922 में गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन वापस लेने के बाद कांग्रेस अगले कदम पर बँट गई। सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू के नेतृत्व वाले परिवर्तनवादी, जिनमें विट्ठलभाई पटेल भी थे, विधान परिषदों में प्रवेश कर उन्हें भीतर से निष्क्रिय करना चाहते थे; उन्होंने 1923 में स्वराज पार्टी बनाई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दक्षिण भारत के निम्नलिखित राजवंशों में से किसने अपने अभिलेख पहले प्राकृत में और बाद में संस्कृत में जारी किए?
- A.तमिलनाडु के चोल
- B.संगमोत्तर युग के पांड्य
- C.तोंडैमंडलम के पल्लव
- D.कलिंगनगर के गंग
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कांचीपुरम के आसपास के तोंडैमंडलम क्षेत्र पर शासन करने वाले पल्लवों ने अपने सबसे पुराने ताम्रपत्र दान-पत्र, जैसे शिवस्कंदवर्मन के मयिदवोलु और हिरहडगल्ली ताम्रपत्र, प्राकृत में जारी किए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा किसान संघर्ष ब्रिटिश अफ़ीम नीति का परिणाम था?
- A.फुलगुड़ी धावा (1861)
- B.बिरसाइत उलगुलान (1899-1900)
- C.पबना विद्रोह (1873)
- D.मराठा किसान विद्रोह (1875)
उत्तर देखें
फुलगुड़ी धावा 1861 में असम के नगाँव ज़िले के फुलगुड़ी में हुआ किसान विद्रोह था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →'तत्वबोधिनी सभा' की स्थापना किसने की थी?
- A.1839 में देवेंद्रनाथ टैगोर ने
- B.1857 में केशवचंद्र सेन ने
- C.1850 में अक्षय कुमार दत्त ने
- D.1840 में द्वारकानाथ टैगोर ने
उत्तर देखें
देवेंद्रनाथ टैगोर ने 1839 में कलकत्ता में तत्वबोधिनी सभा की स्थापना की, ताकि राजा राममोहन राय के एकेश्वरवादी विचारों और उपनिषदों के अध्ययन का प्रसार हो।
पूरी व्याख्या पढ़ें →महानवमी डिब्बा के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. यह महानवमी उत्सव में बाँटी जाने वाली मिठाइयों के एक विशाल डिब्बे का नाम था। 2. यह एक विशाल चबूतरे का नाम था, जिसका आधार उभरी हुई नक्काशी से ढका था। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
महानवमी डिब्बा विजयनगर की राजधानी हम्पी के राजकीय केंद्र में बना एक विशाल पत्थर का चबूतरा है, जिसका आधार उभरी हुई नक्काशी से ढका है।
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