जोधपुर के पोलिटिकल एजेंट मोंक मेसन 1857 के किस युद्ध में मारे गए?
- A.बिथौड़ा का युद्ध
- B.चेलावास का युद्ध
- C.सांगानेर का युद्ध
- D.कोठारिया का युद्ध
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, चेलावास का युद्ध है। आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह ने 18 सितंबर 1857 को चेलावास में अंग्रेज और जोधपुर की मिली-जुली सेना का सामना किया और उसे हराया, तथा इसी लड़ाई में जोधपुर में तैनात पोलिटिकल एजेंट मोंक मेसन मारे गए। युद्धक्षेत्र में एक पोलिटिकल एजेंट की मृत्यु वही तथ्य है जिसे परीक्षक चेलावास से जोड़ते हैं।
विकल्प A गलत है क्योंकि दस दिन पहले 8 सितंबर 1857 को हुआ बिथौड़ा का युद्ध कुशाल सिंह और केवल जोधपुर की राज्य सेना के बीच था, मेसन वहां उपस्थित नहीं थे। विकल्प C गलत है क्योंकि सांगानेर 1858 के तांत्या टोपे अभियान से जुड़ा है, जो एक वर्ष बाद पूर्वी राजस्थान में हुआ। विकल्प D इसी कारण गलत है: कोठारिया भी 1858 में तांत्या टोपे के संघर्ष का स्थान था, कुशाल सिंह का युद्धक्षेत्र नहीं।
पूरा लेख पढ़ें: राजस्थान में 1857 और किसान-जनजातीय आंदोलन
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंराजस्थान में 1857 की क्रांति 28 मई 1857 को किस छावनी से शुरू हुई?
- A.नीमच
- B.नसीराबाद
- C.एरिनपुरा
- D.देवली
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अजमेर जिले की नसीराबाद छावनी में तैनात 15वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री ने 28 मई 1857 को विद्रोह किया, छावनी जला दी और दिल्ली की ओर बढ़ गई, इसलिए पूरे राजपूताना में क्रांति का पहला केंद्र नसीराबाद ही माना जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1857 की क्रांति के समय राजपूताना का एजेंट टू द गवर्नर-जनरल कौन था, जिसका मुख्यालय माउंट आबू में था?
- A.मेजर बर्टन
- B.मोंक मेसन
- C.जॉर्ज सेंट पैट्रिक लॉरेंस
- D.जनरल रॉबर्ट्स
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पूरे राजपूताना की निगरानी एक ही एजेंट टू द गवर्नर-जनरल करता था, और 1857 में यह पद पैट्रिक लॉरेंस के पास था, जो माउंट आबू से कार्य करते थे और पूरा वर्ष रियासती शासकों को अंग्रेजों के पक्ष में बनाए रखने में लगे रहे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →15 अक्टूबर 1857 के विद्रोह में पोलिटिकल एजेंट मेजर बर्टन और उनके दो पुत्र किस स्थान पर मारे गए?
- A.कोटा
- B.टोंक
- C.जयपुर
- D.उदयपुर
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15 अक्टूबर 1857 को जयदयाल और मेहराब खां के नेतृत्व में कोटा की राज्य सेना ने अंग्रेजी रेजीडेंसी पर आक्रमण किया, मेजर बर्टन तथा उनके दो पुत्रों को मार डाला और लगभग पांच महीने शहर पर अधिकार रखा, जब तक मार्च 1858 में जनरल रॉबर्ट्स ने उसे वापस नहीं लिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिजोलिया किसान आंदोलन मेवाड़ के जिस ठिकाने में चला, वह आज राजस्थान के किस जिले में है?
- A.चित्तौड़गढ़
- B.भीलवाड़ा
- C.उदयपुर
- D.अजमेर
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बिजोलिया मेवाड़ का प्रथम श्रेणी का ठिकाना था और उसका गांव आज भीलवाड़ा जिले में पड़ता है। वहां के अधिकतर धाकड़ किसानों का लगभग चौरासी प्रकार की लाग-बाग के विरुद्ध आंदोलन 1897 से 1941 तक चला और इसे भारत का सबसे लंबा चलने वाला किसान आंदोलन माना जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1919 में वर्धा में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना किसने की और 1916 से बिजोलिया आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
- A.माणिक्य लाल वर्मा
- B.विजय सिंह पथिक
- C.सीताराम दास
- D.जयनारायण व्यास
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बुलंदशहर में भूप सिंह के नाम से जन्मे पथिक ने 1916 से बिजोलिया आंदोलन की बागडोर संभाली, उसे प्रेस और संगठन दिया, और रियासतों के किसान आंदोलनों में तालमेल के लिए 1919 में वर्धा में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना की।
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