हड़प्पा सभ्यता के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. मृद्भांड, मुहरों, ईंटों और बाटों में दिखने वाली कलाकृतियों में असाधारण एकरूपता है। 2. उत्तर हड़प्पा स्थलों पर भी वही निर्माण तकनीकें बनी रहीं जो परिपक्व हड़प्पा स्थलों पर प्रयोग होती थीं। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, केवल 1। परिपक्व हड़प्पा चरण की कलाकृतियों में अद्भुत एकरूपता दिखती है, पर उत्तर हड़प्पा चरण में यह एकरूपता टूट गई।
पंजाब और सिंध से गुजरात और हरियाणा तक फैले विशाल क्षेत्र में परिपक्व हड़प्पा स्थलों पर 1:2:4 के एक जैसे अनुपात की ईंटें, 16 पर आधारित एक ही मानक के घनाकार बाट, पशु-चित्रों और एक ही लिपि वाली वर्गाकार मुहरें और काले रंग से चित्रित लाल मृद्भांड मिलते हैं। यह किसी केंद्रीय सत्ता द्वारा तय साझा मानकों का संकेत देता है। लगभग 1900 ईसा पूर्व से नगरों का पतन होने लगा। उत्तर हड़प्पा स्थल छोटे हैं, नियोजित सड़कें और बड़ी नालियाँ गायब हो जाती हैं, मानक ईंटें, बाट और मुहरें घटती जाती हैं और उनकी जगह स्थानीय शैली के मृद्भांड आ जाते हैं।
B गलत है क्योंकि उत्तर हड़प्पा स्थलों पर परिपक्व चरण की निर्माण तकनीकें नहीं रहीं, और कथन 1 सही है। C गलत है क्योंकि कथन 2 असत्य है। D गलत है क्योंकि कथन 1 सही है।
Exam tip: परिपक्व हड़प्पा = एक जैसी ईंटें (1:2:4), बाट (आधार 16) और मुहरें; उत्तर हड़प्पा = पतन और स्थानीय विविधता।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंवासुदेव बलवंत फड़के इतिहास में किस लिए जाने जाते हैं?
- A.उन्होंने 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेज़ों के विरुद्ध हिंसक संघर्ष का नेतृत्व किया
- B.वे गांधीवादी संघर्ष के आलोचक थे
- C.उन्होंने 1870 के दशक में अंग्रेज़ों के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व किया
- D.वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उग्र नेता थे
उत्तर देखें
फड़के ने 1879 में ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए महाराष्ट्र में एक सशस्त्र दल खड़ा किया। वासुदेव बलवंत फड़के पुणे में सैन्य वित्त विभाग में लिपिक थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मुगल बादशाहों की धार्मिक नीतियों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.तीर्थयात्रा कर 1563 में और गैर-मुस्लिम प्रजा पर जज़िया कर 1564 में समाप्त कर दिया गया
- B.अकबर ने अपने अधिकारियों को धार्मिक सहिष्णुता की नीति अपनाने के निर्देश दिए
- C.सभी मुगल बादशाहों ने उपासना स्थलों के निर्माण और रखरखाव के लिए अनुदान नहीं दिए
- D.शाहजहाँ और औरंगज़ेब के शासनकाल में युद्ध के दौरान नष्ट हुए अनेक मंदिरों की मरम्मत के लिए अनुदान जारी किए गए
उत्तर देखें
वास्तव में सभी मुगल बादशाहों ने उपासना स्थलों के निर्माण और रखरखाव के लिए अनुदान दिए, इसलिए यह कहना गलत है कि सबने नहीं दिए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आरंभिक राष्ट्रवादियों ने 1892 के परिषद अधिनियम का विरोध क्यों किया?
- A.शाही विधान परिषद के सदस्यों की संख्या बढ़ा दी गई थी
- B.प्रांतीय परिषदों के सदस्यों की संख्या बढ़ा दी गई थी
- C.परिषदों को वार्षिक बजट पर चर्चा करने का अधिकार दिया गया था
- D.इस अधिनियम ने भारतीयों को सार्वजनिक धन पर नियंत्रण नहीं दिया था
उत्तर देखें
परिषदें बजट पर चर्चा कर सकती थीं, पर उस पर मतदान या संशोधन नहीं कर सकती थीं। भारतीय परिषद अधिनियम, 1892 ने शाही और प्रांतीय विधान परिषदों में अतिरिक्त सदस्यों की संख्या बढ़ाई और नगरपालिकाओं, जिला बोर्डों और विश्वविद्यालयों जैसी संस्थाओं की सिफ़ारिश से अप्रत्यक्ष चुनाव की व्यवस्था शुरू की।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सुलह-ए-कुल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. इसका अर्थ 'पूर्ण शांति' है
2. इसमें सभी धर्मों और विचार-संप्रदायों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई थी
3. सुलह-ए-कुल के आदर्श को राज्य की नीतियों के माध्यम से लागू किया गया था
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1 और 2
- B.1, 2 और 3
- C.केवल 3
- D.केवल 2 और 3
उत्तर देखें
सुलह-ए-कुल, अकबर का पूर्ण शांति का आदर्श, हर धर्म को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता था और राज्य की नीतियों से व्यवहार में लाया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रार्थना समाज के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
1. इसका उद्देश्य हिंदू समाज में सुधार करना था
2. यह महाराष्ट्र में आधारित था
3. यह एकेश्वरवाद में विश्वास करता था
4. इसने ब्रह्म समाज को अत्यधिक प्रभावित किया था
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.1, 2 और 3
- D.1 और 4
उत्तर देखें
प्रार्थना समाज महाराष्ट्र की एकेश्वरवादी हिंदू सुधार संस्था थी, पर यह ब्रह्म समाज से प्रभावित थी, उसका उल्टा नहीं। प्रार्थना समाज की स्थापना 1867 में बंबई में आत्माराम पांडुरंग ने की, जब ब्रह्म समाज के केशवचंद्र सेन की यात्रा से वहाँ के सुधारक प्रेरित हुए।
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