ग्रिड स्तरीय ऊर्जा भंडारण के लिए मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण योजना में कुल कितनी वित्तीय सहायता दी जाएगी?
- A.9,500 करोड़ रुपये
- B.12,500 करोड़ रुपये
- C.14,500 करोड़ रुपये
- D.18,500 करोड़ रुपये
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 14,500 करोड़ रुपये है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रिड स्तरीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण योजना को इसी राशि के साथ वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए मंजूरी दी है। यह राशि अकेले परियोजनाएं नहीं बनाएगी, क्योंकि इनमें कुल निवेश 97,600 करोड़ रुपये अनुमानित है और सरकारी सहायता केवल उस अंतर को भरती है जिससे परियोजनाएं कर्ज के लायक बनें। विकल्प A, B और D मंजूर राशि नहीं हैं। अभ्यर्थी इस आंकड़े को उस क्षमता के साथ जोड़कर याद रखें जो इससे बनेगी, यानी कुल 92 गीगावाट घंटा, और उसके बंटवारे को भी, जिसमें 60 गीगावाट घंटा पंप भंडारण, 30 गीगावाट घंटा बैटरी भंडारण और 2 गीगावाट घंटा वैकल्पिक प्रौद्योगिकियों से आएगा। योजना विद्युत मंत्रालय की है और आवंटन प्रतिस्पर्धी बोली से होगा।
पूरा लेख पढ़ें: 92 गीगावाट घंटा भंडारण को 14,500 करोड़ की मंजूरी
अभ्यास प्रश्न
योजना से बनने वाली 92 गीगावाट घंटा क्षमता में पंप भंडारण जल परियोजनाओं का हिस्सा कितना है?
- A.2 गीगावाट घंटा
- B.30 गीगावाट घंटा
- C.45 गीगावाट घंटा
- D.60 गीगावाट घंटा
उत्तर देखें
योजना में 60 गीगावाट घंटा पंप भंडारण जल परियोजनाओं से, 30 गीगावाट घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली से और 2 गीगावाट घंटा वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों से जोड़ने का प्रस्ताव है, जिनका योग कुल 92 गीगावाट घंटा बनता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →योजना के तहत बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए न्यूनतम घरेलू सामग्री की शर्त कितनी रखी गई है?
- A.20 प्रतिशत
- B.30 प्रतिशत
- C.40 प्रतिशत
- D.50 प्रतिशत
उत्तर देखें
योजना से सहायता मांगने वाली बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को न्यूनतम 40 प्रतिशत घरेलू सामग्री की शर्त पूरी करनी होगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एनडीसी-टीआईए द्वितीय चरण की पहल को जर्मन सरकार के किस कार्यक्रम से समर्थन मिला है?
- A.हरित जलवायु कोष
- B.अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (आईकेआई)
- C.वैश्विक पर्यावरण सुविधा
- D.स्वच्छ विकास तंत्र
उत्तर देखें
यही एशिया के लिए क्षेत्रीय पहल एनडीसी-टीआईए द्वितीय को समर्थन देता है, और इसी के तहत नीति आयोग तथा जीआईजेड ने 3 नवंबर 2026 को भारत में सड़क माल ढुलाई का डीकार्बोनाइजेशन तेज करने के लिए कार्यान्वयन समझौता किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एनडीसी-टीआईए द्वितीय चरण के तहत हुए कार्यान्वयन समझौते का केंद्रबिंदु कौन सा क्षेत्र है?
- A.सड़क माल ढुलाई का डीकार्बोनाइजेशन
- B.मेट्रो रेल नेटवर्क का विस्तार
- C.उर्वरक संयंत्रों के लिए हरित हाइड्रोजन
- D.अपतटीय पवन ऊर्जा उत्पादन
उत्तर देखें
समझौता परियोजना भागीदारों के सहयोग को औपचारिक रूप देता है, जिससे सड़क से माल की आवाजाही में उत्सर्जन घटाने का काम तेज हो, और इसे भारत के उस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है जिसमें परिवहन प्रणाली टिकाऊ, ऊर्जा-सक्षम और कम कार्बन वाली बनेगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नीति आयोग ने एनडीसी-टीआईए द्वितीय चरण के तहत कार्यान्वयन समझौता किस संगठन के साथ किया?
- A.जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी
- B.ड्यूश गेसेलशाफ्ट फूर इंटरनेशनेल जुसामेनरबीट (जीआईजेड) जीएमबीएच
- C.संयुक्त राज्य अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी
- D.फ्रांसीसी विकास एजेंसी
उत्तर देखें
यह समझौता 3 नवंबर 2026 को एशिया के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान-परिवहन पहल के द्वितीय चरण के अंतर्गत हुआ, जिसका उद्देश्य भारत में सड़क माल ढुलाई के डीकार्बोनाइजेशन में तेजी लाना है, और यह पहल जर्मन सरकार की अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल से समर्थित है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →