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GK24
विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

गैलेक्सआई की मल्टी-सेंसर उपग्रह परियोजना की कुल स्वीकृत लागत कितनी है?

  1. A.147.69 करोड़ रुपये
  2. B.247.69 करोड़ रुपये
  3. C.347.69 करोड़ रुपये
  4. D.447.69 करोड़ रुपये

सही उत्तर

B. 247.69 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 247.69 करोड़ रुपये है। यह पूरी परियोजना की स्वीकृत लागत है, जिसका एक हिस्सा प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड से दे रहा है और शेष कंपनी उठाएगी। यह भेद मायने रखता है, क्योंकि ऐसा सार्वजनिक कोष महंगे प्रौद्योगिकी कार्यक्रम का जोखिम बांटने के लिए होता है, उसे पूरा चुकाने के लिए नहीं, और इसी कारण सहायता ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स के रूप में दी जा रही है। विकल्प A, C और D में दशमलव भाग वही रखकर केवल पहला अंक बदला गया है, इसलिए जिस अभ्यर्थी ने आंकड़ा ढीले ढंग से याद किया है, वह इनमें अंतर नहीं कर पाएगा। नोट्स में सहायता और कुल लागत, दोनों को जोड़ी बनाकर लिखें, तो अलग-अलग याद रखने से आसान रहेगा।

पूरा लेख पढ़ें: टीडीबी ने गैलेक्सआई को ऑप्टोएसएआर हेतु 63.84 करोड़ रुपये दिए

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Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने आरडीआई फंड के तहत गैलेक्सआई को कितनी सहायता देने पर सहमति दी है?

  1. A.36.48 करोड़ रुपये
  2. B.63.84 करोड़ रुपये
  3. C.84.63 करोड़ रुपये
  4. D.127.50 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 63.84 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 63.84 करोड़ रुपये है, जो रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड के तहत तय वित्तीय सहायता है और सीधे अनुदान के रूप में नहीं, बल्कि ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स के जरिये दी जाएगी। इसे उसी घोषणा के दूसरे धन-आंकड़े से अलग रखें, यानी परियोजना की स्वीकृत कुल लागत से, जो इससे कहीं बड़ी है; प्रश्न में दोनों को साथ रखकर यही देखा जाता है कि अभ्यर्थी सहायता और कुल लागत में भेद कर पाता है या नहीं। विकल्प A और C में वही अंक उलट-पुलट कर रखे गए हैं, और यह जाल इसीलिए चलता है कि आंकड़े में दशमलव के बाद दो अंक हैं, जो जल्दबाजी में उलट जाते हैं। विकल्प D गोल दिखने वाली राशि है जो घोषणा में कहीं नहीं आती। ऐसे आंकड़े को एक बार पूर्ण संख्या और एक बार दशमलव भाग के रूप में पढ़ लेना सुरक्षित आदत है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

गैलेक्सआई की ऑप्टोएसएआर प्रौद्योगिकी किन दो प्रकार की इमेजिंग को एक साथ लाती है?

  1. A.सिंथेटिक अपर्चर रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इमेजिंग
  2. B.लिडार और थर्मल इन्फ्रारेड इमेजिंग
  3. C.हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग और रडार अल्टीमेट्री
  4. D.उपग्रह नेविगेशन संकेत और सोनार इमेजिंग
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सिंथेटिक अपर्चर रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इमेजिंग

व्याख्या

सही उत्तर सिंथेटिक अपर्चर रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इमेजिंग है, और संकेत प्रौद्योगिकी के नाम में ही छिपा है, क्योंकि ऑप्टो का अर्थ ऑप्टिकल सेंसर और एसएआर का अर्थ रडार है। दोनों को एक मंच पर इसलिए रखा जाता है कि उनकी कमजोरियां एक जैसी नहीं हैं, ऑप्टिकल इमेजिंग बारीक दृश्य विवरण देती है पर बादल और अंधेरा उसे रोक देते हैं, जबकि रडार उजाले की परवाह किए बिना काम करता है और बादलों के आर-पार देख लेता है। दोनों के आंकड़े मिलाने से जमीन की अधिक पूरी और कम टूटी तस्वीर मिलती है, जिससे बड़े भूभाग की निगरानी, लोगों और वाहनों की पहचान तथा लक्ष्य वर्गीकरण हर मौसम में संभव होता है। विकल्प B, C और D में सुदूर संवेदन की असली विधियां हैं, पर यहां बताई जोड़ी कोई नहीं, और विकल्प D में सोनार भी है जो पानी में काम करता है, कक्षा से नहीं।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

आरडीआई सहायता ऑप्टोएसएआर प्रौद्योगिकी को किन तैयारी स्तरों से गुजारने के लिए है?

  1. A.टीआरएल-1 से टीआरएल-4
  2. B.टीआरएल-3 से टीआरएल-6
  3. C.टीआरएल-6 से टीआरएल-9
  4. D.टीआरएल-4 से टीआरएल-7
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. टीआरएल-6 से टीआरएल-9

व्याख्या

सही उत्तर टीआरएल-6 से टीआरएल-9 है। प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर वह पैमाना है जो बताता है कि कोई प्रौद्योगिकी विचार से नियमित उपयोग तक कितनी दूर पहुंची है, और यहां बताया गया चरण आखिरी हिस्से का है, जहां वास्तविक परिस्थितियों के करीब दिखा दी गई प्रणाली को इंजीनियरिंग, परीक्षण और वैलिडेशन से गुजारकर सेवा में खरा उतारना होता है। बोर्ड अपनी भूमिका भी ठीक इसी रूप में बताता है, यानी उन्नत विकास और तैनाती के बीच के अहम चरणों में सहारा देना, जिसका अंतिम उद्देश्य व्यापारिक उपयोग है। विकल्प A और B शुरुआती चरण बताते हैं, जहां काम प्रयोगशाला की खोज के अधिक निकट होता है, और यह मान लेने वाला अभ्यर्थी उनकी ओर खिंचता है कि सार्वजनिक धन सदा शुरुआती शोध को ही मिलता है। विकल्प D पैमाने के शीर्ष तक नहीं जाता, इसलिए तैनाती के घोषित लक्ष्य से मेल नहीं खाता।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड यह सहायता किस वित्तीय माध्यम से दे रहा है?

  1. A.ब्याज रहित सीधा अनुदान
  2. B.सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड
  3. C.वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर
  4. D.व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण सब्सिडी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर

व्याख्या

सही उत्तर वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर है। प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड यूबीफ्लाई टेक्नोलॉजीज को यह सहायता इसी माध्यम से दे रहा है। यह एक प्रकार का ऋण पत्र होता है, जिसे रखने वाले के पास तय अवधि के बाद उसे कंपनी के इक्विटी शेयरों में बदलने का विकल्प होता है। विकल्प क गलत है, क्योंकि विज्ञप्ति में इस राशि को अनुदान नहीं बताया गया और परिवर्तनीय साधन का चुनाव ही इसे सामान्य सब्सिडी से अलग करता है। विकल्प ख गलत है, क्योंकि सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड सरकार पर्यावरण से जुड़े खर्च के लिए बाजार से जुटाती है और उसका इस स्वीकृति से कोई संबंध नहीं है। विकल्प घ भी गलत है, क्योंकि व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण मुख्य रूप से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में दिया जाता है। जिस कोष से यह राशि आई है, वह 1 लाख करोड़ रुपये का है।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

यूबीफ्लाई टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित किया जा रहा ई 200 एक्स किस प्रकार का विमान है?

  1. A.पिस्टन इंजन वाला दो सीट का प्रशिक्षण विमान
  2. B.तीन सीटों वाला कार्बन उत्सर्जन रहित हवाई गतिशीलता विमान
  3. C.बिना पायलट वाला मालवाहक ड्रोन
  4. D.साठ यात्रियों वाला टर्बोप्रॉप यात्री विमान
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. तीन सीटों वाला कार्बन उत्सर्जन रहित हवाई गतिशीलता विमान

व्याख्या

सही उत्तर तीन सीटों वाला कार्बन उत्सर्जन रहित हवाई गतिशीलता विमान है। विज्ञप्ति के अनुसार ई 200 एक्स में एक पायलट और दो यात्री बैठते हैं, इसकी लक्षित उड़ान सीमा 110 किलोमीटर और गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा है तथा इसका लैंडिंग गियर पारंपरिक और ऊर्ध्वाधर दोनों तरह की लैंडिंग के लिए बना है, जिससे यह कम जगह से भी संचालित हो सकता है। विकल्प क गलत है क्योंकि यह विमान बिजली से चलता है, इसमें तीन सीटें हैं और इसे प्रशिक्षण विमान नहीं बताया गया। विकल्प ग इसलिए गलत है कि इसमें पायलट विमान में ही बैठता है, इसलिए यह मानवरहित मंच नहीं है। विकल्प घ हर दृष्टि से गलत है, क्योंकि ई 200 एक्स एक छोटा विद्युत विमान है, कोई यात्री विमान नहीं। इसके स्वदेशी हिस्सों में वर्टिकल रोटर, फॉरवर्ड प्रोपेलर और शीतलन प्रणाली वाले बैटरी पैक शामिल हैं।