FAO पारंपरिक कृषि प्रणालियों को 'विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण कृषि विरासत प्रणाली (GIAHS)' का दर्जा देता है। इस पहल का समग्र लक्ष्य क्या है? 1. चिह्नित GIAHS के स्थानीय समुदायों को आधुनिक प्रौद्योगिकी, आधुनिक कृषि विधियों का प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता देना, ताकि उनकी कृषि उत्पादकता बहुत बढ़ सके 2. पर्यावरण-अनुकूल पारंपरिक कृषि पद्धतियों और उनसे जुड़े भू-दृश्यों, कृषि जैव-विविधता तथा स्थानीय समुदायों की ज्ञान प्रणालियों की पहचान और सुरक्षा करना 3. ऐसे चिह्नित GIAHS की सभी प्रकार की कृषि उपज को भौगोलिक संकेतक (GI) का दर्जा देना नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.केवल 1 और 3
- B.केवल 2
- C.केवल 2 और 3
- D.1, 2 और 3
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, केवल 2। GIAHS का उद्देश्य पारंपरिक कृषि प्रणालियों को उनके भू-दृश्य, कृषि जैव-विविधता और स्थानीय ज्ञान सहित पहचानना और सुरक्षित रखना है।
खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने GIAHS कार्यक्रम 2002 में जोहान्सबर्ग के सतत विकास विश्व शिखर सम्मेलन में शुरू किया। यह उन जीवित कृषि प्रणालियों को मान्यता देता है जिन्होंने सदियों से भू-दृश्य गढ़े हैं और फसलों व पशुओं की विविधता बचाई है, जैसे फ़िलीपींस के इफ़ुगाओ के धान सीढ़ीदार खेत। भारत में ऐसी तीन प्रणालियाँ हैं: ओडिशा की कोरापुट पारंपरिक खेती, केरल के कुट्टनाड की समुद्र तल से नीचे की खेती और कश्मीर के पंपोर की केसर विरासत।
A गलत है, क्योंकि लक्ष्य परंपरा को आधुनिक तकनीक से बदलना नहीं है (कथन 1), और GIAHS भौगोलिक संकेतक नहीं देता (कथन 3)।
C गलत है, क्योंकि GI का दर्जा राष्ट्रीय कानून से मिलता है, भारत में GI अधिनियम 1999 से, FAO से नहीं।
D गलत है, क्योंकि इसमें दोनों गलत कथन शामिल हैं।
परीक्षा टिप: भारत में GIAHS (FAO, 2002) = कोरापुट, कुट्टनाड, पंपोर केसर।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. भारत में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन 0.5 t CO2/प्रति व्यक्ति से कम है।
II. ईंधन दहन से CO2 उत्सर्जन के मामले में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है।
III. भारत में बिजली और ऊष्मा उत्पादक CO2 उत्सर्जन के सबसे बड़े स्रोत हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल I और III
- B.केवल II
- C.केवल II और III
- D.I, II और III
उत्तर देखें
ईंधन दहन से CO2 उत्सर्जन में भारत एशिया-प्रशांत में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है और बिजली व ऊष्मा उत्पादन इसका सबसे बड़ा स्रोत है, पर इसका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन 0.5 टन से काफ़ी अधिक है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →'घरेलू अंश आवश्यकता' (डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट) शब्द कभी-कभी समाचारों में किसके संदर्भ में दिखाई देता है?
- A.हमारे देश में सौर ऊर्जा उत्पादन का विकास
- B.हमारे देश में विदेशी टी.वी. चैनलों को लाइसेंस देना
- C.हमारे खाद्य उत्पादों का अन्य देशों को निर्यात
- D.विदेशी शैक्षणिक संस्थानों को हमारे देश में अपने परिसर स्थापित करने की अनुमति
उत्तर देखें
घरेलू अंश आवश्यकता (DCR) वह नियम है जिसके अनुसार कुछ सौर परियोजनाओं में भारत में बने सौर सेल और मॉड्यूल ही लगाने होते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किसके संदर्भ में कुछ वैज्ञानिक पक्षाभ मेघ विरलन (सिरस क्लाउड थिनिंग) तकनीक और समतापमंडल में सल्फेट वायुविलय के अंतःक्षेपण के उपयोग का सुझाव देते हैं?
- A.कुछ क्षेत्रों में कृत्रिम वर्षा कराना
- B.उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की बारंबारता और तीव्रता घटाना
- C.पृथ्वी पर सौर पवनों के प्रतिकूल प्रभाव घटाना
- D.भूमंडलीय तापन घटाना
उत्तर देखें
दोनों उपाय भू-अभियांत्रिकी (जियोइंजीनियरिंग) के प्रस्ताव हैं, जिनका उद्देश्य पृथ्वी में आने या उससे जाने वाली ऊष्मा बदलकर ग्रह को ठंडा करना है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किनकी प्रजातियाँ अन्य जीवों के साथ सहजीवी संबंध स्थापित कर सकती हैं?
1. नाइडेरियन
2. कवक
3. प्रोटोज़ोआ
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
नाइडेरियन, कवक और प्रोटोज़ोआ, तीनों में ऐसी प्रजातियाँ हैं जो अन्य जीवों के साथ घनिष्ठ, परस्पर लाभकारी साझेदारी में रहती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पीकॉक टारेंटुला (गूटी टारेंटुला) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. यह एक सर्वाहारी क्रस्टेशियन है।
II. भारत में इसका प्राकृतिक आवास केवल कुछ वन क्षेत्रों तक सीमित है।
III. अपने प्राकृतिक आवास में यह एक वृक्षवासी प्रजाति है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल I
- B.I और II
- C.केवल II
- D.II और III
उत्तर देखें
गूटी टारेंटुला पेड़ों पर रहने वाली मकड़ी है जो भारत के कुछ ही वन क्षेत्रों में मिलती है; यह क्रस्टेशियन नहीं है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →