दूरी-समय ग्राफ का ढाल कौन सी राशि देता है?
- A.चाल
- B.त्वरण
- C.दूरी
- D.संवेग
सही उत्तर
A. चाल
व्याख्या
सही उत्तर A, चाल है। किसी भी ग्राफ का ढाल ऊर्ध्व अक्ष पर हुए परिवर्तन बटा क्षैतिज अक्ष पर हुआ परिवर्तन होता है; यहाँ वह दूरी बटा समय है, जो परिभाषा से चाल है।
विकल्प B, त्वरण वेग-समय ग्राफ का ढाल है, दूरी-समय ग्राफ का नहीं, और परीक्षक जानबूझकर इसी जोड़े में भ्रम पैदा करते हैं। विकल्प C, दूरी सीधे ऊर्ध्व अक्ष से पढ़ी जाती है और वह ढाल है ही नहीं। विकल्प D, संवेग द्रव्यमान के बिना ऐसे ग्राफ से नहीं निकाला जा सकता। दो आकृतियाँ देखते ही पहचान लीजिए: दूरी-समय ग्राफ पर तिरछी सीधी रेखा एकसमान चाल दिखाती है और समय अक्ष के समांतर रेखा विराम, जबकि बढ़ते ढाल वाला वक्र बताता है कि वस्तु की चाल बढ़ रही है। यही कारण है कि ग्राफ वाले प्रश्न में पहले यह देखिए कि ऊर्ध्व अक्ष पर दूरी है या वेग, क्योंकि उसी से ढाल का अर्थ तय होता है।
पूरा लेख पढ़ें: गति, बल और न्यूटन के नियम: सूत्र तथा तथ्य
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंन्यूटन के गति के पहले नियम को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
- A.जड़त्व का नियम
- B.संवेग का नियम
- C.क्रिया और प्रतिक्रिया का नियम
- D.गुरुत्वाकर्षण का नियम
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सही उत्तर: A. जड़त्व का नियम
व्याख्या
सही उत्तर A, जड़त्व का नियम है। पहला नियम कहता है कि कोई वस्तु अपनी विराम या सरल रेखा में एकसमान गति की अवस्था बनाए रखती है जब तक उस पर असंतुलित बाह्य बल न लगे, और यही गुण जड़त्व कहलाता है।
विकल्प B दूसरे नियम की ओर संकेत करता है, जो संवेग परिवर्तन की दर से संबंधित है और जिससे बल बराबर द्रव्यमान गुणा त्वरण निकलता है। विकल्प C तीसरा नियम है, जो कहता है कि क्रिया और प्रतिक्रिया बराबर तथा विपरीत होती हैं और अलग वस्तुओं पर लगती हैं। विकल्प D, गुरुत्वाकर्षण का नियम न्यूटन का ही अलग नियम है, जिसके अनुसार प्रत्येक वस्तु दूसरी को उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती और दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती बल से आकर्षित करती है। पहला नियम बल की परिभाषा भी देता है।
निम्नलिखित में से कौन सी सदिश राशि है?
- A.दूरी
- B.चाल
- C.विस्थापन
- D.समय
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सही उत्तर: C. विस्थापन
व्याख्या
सही उत्तर C, विस्थापन है। यह आरंभ बिंदु से अंतिम बिंदु तक की सबसे कम दूरी है और साथ में उस सीधी रेखा की दिशा भी बताता है, इसलिए इसमें परिमाण तथा दिशा दोनों हैं और यह सदिश राशि है।
विकल्प A, दूरी तय किए गए पथ की कुल लंबाई है और उसमें दिशा नहीं होती, इसलिए वह अदिश है; विकल्प B, चाल दूरी बटा समय है और इसी कारण अदिश है, जबकि वेग, जो विस्थापन बटा समय है, सदिश है। विकल्प D, समय अदिश राशि है। मानक उदाहरण गोलाकार पथ का एक चक्कर पूरा करता धावक है: तय दूरी परिधि के बराबर है पर विस्थापन शून्य, क्योंकि वह वहीं लौट आता है जहाँ से चला था। जोड़े याद रखिए, दूरी और चाल अदिश तथा विस्थापन और वेग सदिश।
बल बराबर द्रव्यमान गुणा त्वरण यह समीकरण गति के किस नियम से निकलता है?
- A.पहला नियम
- B.दूसरा नियम
- C.तीसरा नियम
- D.ऊर्जा संरक्षण का नियम
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सही उत्तर: B. दूसरा नियम
व्याख्या
सही उत्तर B, दूसरा नियम है। यह कहता है कि किसी वस्तु के संवेग के परिवर्तन की दर आरोपित बल के अनुक्रमानुपाती होती है और बल की दिशा में होती है। चूँकि संवेग द्रव्यमान गुणा वेग है, अचर द्रव्यमान वाली वस्तु के लिए उसके परिवर्तन की दर द्रव्यमान गुणा त्वरण हो जाती है, जिससे यह समीकरण मिलता है।
विकल्प A, पहला नियम केवल इतना बताता है कि असंतुलित बल के बिना वस्तु अपनी अवस्था बनाए रखती है, और इस प्रकार बल को परिभाषित करता है, मापता नहीं। विकल्प C, तीसरा नियम क्रिया और प्रतिक्रिया के युग्म से संबंधित है जो दो अलग वस्तुओं पर लगती हैं। विकल्प D विषय की दूसरी शाखा का है। दूसरे नियम से ही न्यूटन मात्रक की परिभाषा भी मिलती है।
गोली चलाने पर बंदूक का पीछे हटना किस राशि के संरक्षण से समझाया जाता है?
- A.ऊर्जा
- B.रैखिक संवेग
- C.द्रव्यमान
- D.विद्युत आवेश
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सही उत्तर: B. रैखिक संवेग
व्याख्या
सही उत्तर B, रैखिक संवेग है। चलाने से पहले बंदूक और गोली दोनों विराम में हैं, इसलिए निकाय का कुल संवेग शून्य है। नली की दिशा में कोई बाह्य बल नहीं लगता, अतः कुल संवेग शून्य ही रहना चाहिए: गोली बड़े अग्र संवेग के साथ निकलती है और बंदूक उतना ही पश्च संवेग लेकर पीछे हटती है, जिसे प्रतिक्षेप कहते हैं। बंदूक गोली से बहुत भारी होती है, इसलिए उसका पश्च वेग कम रहता है।
विकल्प A, ऊर्जा व्यापक अर्थ में संरक्षित तो है पर वह अकेले प्रतिक्षेप की दिशा और मात्रा नहीं बताती। विकल्प C, द्रव्यमान और विकल्प D, आवेश भी संरक्षित राशियाँ हैं पर यहाँ अप्रासंगिक हैं। यही सिद्धांत रॉकेट के प्रणोदन की भी व्याख्या करता है, और वही तीसरा नियम दूसरी ओर से देखा गया रूप है।
संवेग का एसआई मात्रक क्या है?
- A.न्यूटन
- B.जूल
- C.किलोग्राम मीटर प्रति सेकंड
- D.न्यूटन प्रति सेकंड
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सही उत्तर: C. किलोग्राम मीटर प्रति सेकंड
व्याख्या
सही उत्तर C, किलोग्राम मीटर प्रति सेकंड है। संवेग द्रव्यमान और वेग का गुणनफल है, इसलिए उसका मात्रक द्रव्यमान के मात्रक गुणा वेग का मात्रक होता है, अर्थात किलोग्राम गुणा मीटर प्रति सेकंड। यह सदिश राशि है और उसकी दिशा वेग की दिशा होती है।
विकल्प A, न्यूटन बल का मात्रक है, और बल संवेग परिवर्तन की दर है, संवेग नहीं; एक न्यूटन वास्तव में एक किलोग्राम मीटर प्रति सेकंड वर्ग है। विकल्प B, जूल कार्य और ऊर्जा का मात्रक है। विकल्प D, न्यूटन प्रति सेकंड कोई मानक मात्रक नहीं है, यद्यपि न्यूटन सेकंड संवेग का स्वीकार्य वैकल्पिक रूप है, क्योंकि बल गुणा समय संवेग परिवर्तन के बराबर होता है और उसी को आवेग कहते हैं। आवेग और संवेग का यह संबंध भी प्रिय प्रश्न है।