दोलन करते लोलक के गोलक पर कार्य करने वाला पृथ्वी का गुरुत्व बल निम्नलिखित में से किसका उदाहरण है?
- A.अनुप्रयुक्त बल
- B.घर्षण बल
- C.प्रत्यानयन बल
- D.आभासी बल
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, प्रत्यानयन बल। दोलन करते लोलक में गोलक के भार का उसके पथ के अनुदिश घटक उसे हमेशा सबसे निचले बिंदु की ओर वापस खींचता है, इसलिए गुरुत्व यहाँ प्रत्यानयन बल के रूप में कार्य करता है। गोलक को एक ओर खींचने पर उसके भार mg के दो घटक होते हैं: डोरी के अनुदिश mg cos θ, जिसे तनाव संतुलित करता है, और चाप के अनुदिश mg sin θ, जो माध्य स्थिति की ओर होता है। यही दूसरा घटक प्रत्यानयन बल है। छोटे दोलनों में यह विस्थापन के लगभग समानुपाती होता है, इसलिए गोलक सरल आवर्त गति करता है, जिसका आवर्तकाल 2π गुणा लंबाई बटा g का वर्गमूल है और गोलक के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता। विकल्प A गलत है, क्योंकि अनुप्रयुक्त बल बाहर से लगाया धक्का या खिंचाव है, जैसे दोलन शुरू करने वाला हाथ। विकल्प B गलत है, क्योंकि घर्षण और वायु प्रतिरोध गति का विरोध करके दोलन को धीरे-धीरे कम करते हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि आभासी बल वह बल नहीं है जो गोलक को वापस लाता है। परीक्षा टिप: लोलक का प्रत्यानयन बल mg sin θ; आवर्तकाल लंबाई और g पर निर्भर, द्रव्यमान पर नहीं।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंविद्युत चुंबकीय तरंगों, ध्वनि तरंगों और जल तरंगों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. इनमें परावर्तन होता है 2. ये ऊर्जा का वहन करती हैं 3. ये दाब डालती हैं 4. ये निर्वात में चल सकती हैं नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.1, 2 और 3
- B.2 और 4
- C.केवल 1 और 3
- D.केवल 1
उत्तर देखें
तीनों प्रकार की तरंगें परावर्तित होती हैं, ऊर्जा ले जाती हैं और दाब डालती हैं, पर केवल विद्युत चुंबकीय तरंगें निर्वात में चल सकती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा ऊर्जा का मात्रक नहीं है?
- A.जूल
- B.वाट-घंटा
- C.न्यूटन-मीटर
- D.kg-मीटर/सेकंड²
उत्तर देखें
किलोग्राम-मीटर प्रति सेकंड² द्रव्यमान और त्वरण का गुणनफल है, यानी बल; यह न्यूटन है, ऊर्जा का मात्रक नहीं। ऊर्जा और कार्य की विमाएँ बल गुणा दूरी की होती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →इस्पात और लोहे को जंग से बचाने के लिए निम्नलिखित में से किस धातु की पतली परत चढ़ाई जाती है?
- A.मैग्नीशियम
- B.ज़िंक (जस्ता)
- C.ऐलुमिनियम
- D.लेड (सीसा)
उत्तर देखें
लोहे या इस्पात पर ज़िंक की पतली परत चढ़ाने को यशदलेपन (गैल्वनीकरण) कहते हैं और जंग से बचाने का यह सबसे आम तरीका है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एक विद्युत परिपथ में 10 Ω प्रतिरोध का एक तार प्रयुक्त है। यदि इस तार को खींचकर इसकी लंबाई मूल लंबाई की दोगुनी कर दी जाए, तो परिपथ में धारा हो जाएगी :
- A.अपने मूल मान की आधी।
- B.अपने मूल मान की दोगुनी।
- C.अपने मूल मान की एक-चौथाई।
- D.अपने मूल मान की चार गुनी।
उत्तर देखें
तार को खींचकर दोगुना लंबा करने से उसका प्रतिरोध चार गुना हो जाता है, इसलिए उसी वोल्टता पर धारा एक-चौथाई रह जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किस वैज्ञानिक ने बताया कि परमाणु में इलेक्ट्रॉन विकिरण ऊर्जा उत्सर्जित किए बिना कुछ निश्चित स्थायी कक्षाओं में परिक्रमा कर सकता है?
- A.अर्नेस्ट रदरफ़ोर्ड
- B.जे. जे. थॉमसन
- C.नील्स बोर
- D.अल्बर्ट आइंस्टीन
उत्तर देखें
1913 के अपने परमाणु मॉडल में बोर ने बताया कि इलेक्ट्रॉन कुछ निश्चित कक्षाओं, जिन्हें स्थायी अवस्थाएँ कहा जाता है, में घूमते हैं और उनमें ऊर्जा विकिरित नहीं करते।
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