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GK24
विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्लेटफॉर्म संपत्तियों की रेटिंग से जुड़े किस वर्ष के विनियमों को लागू करता है?

  1. A.2018
  2. B.2020
  3. C.2022
  4. D.2024

सही उत्तर

D. 2024

व्याख्या

सही उत्तर 2024 है। यह मंच संपत्तियों की डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग से जुड़े 2024 के विनियमों में तय ढांचे को जमीन पर उतारता है। इन विनियमों में बाद में 13 मई 2026 को अधिसूचित संशोधन हुआ और जो प्रक्रिया आज चल रही है, वह 9 जून 2026 को जारी रेटिंग मैनुअल 2026 में लिखी गई है। इस तरह इस खबर में तीन तारीखें एक साथ चलती हैं, मूल विनियम, संशोधन और मैनुअल। बाकी तीनों विकल्प ऐसे वर्ष हैं, जिनमें नियामक ने ऐसा कोई रेटिंग ढांचा अधिसूचित नहीं किया, इसलिए वे गलत हैं। जल्दबाजी में अक्सर मूल विनियम का वर्ष और संशोधन का वर्ष आपस में मिला दिया जाता है, इसलिए याद रखें कि मूल नियम पहले आए और संशोधन तथा मैनुअल दोनों बाद के वर्ष के हैं।

पूरा लेख पढ़ें: ट्राई ने डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत की

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Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग (डीसीआर) प्लेटफॉर्म किस संस्था ने शुरू किया?

  1. A.दूरसंचार विभाग
  2. B.भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण
  3. C.भारत संचार निगम लिमिटेड
  4. D.इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण

व्याख्या

सही उत्तर भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण है। डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्लेटफॉर्म इसी दूरसंचार नियामक ने शुरू किया, जो संचार मंत्रालय के अधीन काम करता है, और इसकी घोषणा 25 सितंबर 2026 को हुई। संपत्तियों की रेटिंग के नियम इसी नियामक ने बनाए, रेटिंग करने वाली एजेंसियों का पंजीकरण भी यही करता है और रेटिंग भी यही प्रकाशित करता है, इसलिए यह मंच किसी और के पास नहीं हो सकता। दूरसंचार विभाग मंत्रालय की कार्यकारी शाखा है, जो लाइसेंस और स्पेक्ट्रम से जुड़ा काम देखता है और उसने यह मंच शुरू नहीं किया। भारत संचार निगम लिमिटेड एक सरकारी सेवा प्रदाता है, जिसकी इसमें कोई नियामक भूमिका नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का विषय बिल्कुल अलग है। परीक्षा में इस मंच को नियामक, चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी और संचार मंत्रालय के साथ जोड़कर याद रखें।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग ढांचे में निम्नलिखित में से किसका आकलन नहीं किया जाता?

  1. A.संपत्ति में फाइबर की तैयारी
  2. B.मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता
  3. C.कालीन क्षेत्र और पार्किंग की संख्या
  4. D.भवन का वाई-फाई ढांचा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. कालीन क्षेत्र और पार्किंग की संख्या

व्याख्या

सही उत्तर कालीन क्षेत्र और पार्किंग की संख्या है। यह रेटिंग इस बात की है कि कोई इमारत संचार के लिहाज से कितनी तैयार है, इसलिए इसमें फाइबर की तैयारी, भवन के भीतर मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता, इमारत में लगे कनेक्टिविटी समाधान और वाई-फाई ढांचे को देखा जाता है तथा हर श्रेणी की संपत्ति के लिए अलग मानक तय हैं। कालीन क्षेत्र और पार्किंग संपत्ति के विवरण से जुड़ी बातें हैं, इनका कनेक्टिविटी आकलन से कोई लेना-देना नहीं। विकल्प ए, बी और डी में दी गई तीनों बातें ढांचे का हिस्सा हैं, इसलिए वे इस प्रश्न का उत्तर नहीं हो सकतीं, क्योंकि प्रश्न यह पूछता है कि किसे शामिल नहीं किया गया। इस कवायद का मकसद कनेक्टिविटी को ऐसी खूबी बनाना है, जिसे ग्राहक देख और परख सके।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

अध्ययन के अनुसार ब्लैक होल का जेट आकाशगंगा के चारों ओर की गैस को कैसे प्रभावित करता है?

  1. A.वह सभी दिशाओं में गैस को ठंडा करता है, जिससे तारे तेजी से बनते हैं
  2. B.वह केवल अपनी दिशा की गैस को ऊर्जावान करता है और तारों का बनना दबा देता है
  3. C.वह पूरा गैस आवरण कुछ वर्षों में ब्लैक होल के भीतर खींच लेता है
  4. D.आकाशगंगा के केंद्रीय हिस्से से बाहर उसका कोई असर नहीं होता
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. वह केवल अपनी दिशा की गैस को ऊर्जावान करता है और तारों का बनना दबा देता है

व्याख्या

सही उत्तर है कि वह केवल अपनी दिशा की गैस को ऊर्जावान करता है और तारों का बनना दबा देता है। जब टीम ने आकाशगंगाओं के चारों ओर सभी दिशाओं के मापों का औसत निकाला, तो कोई संकेत नहीं मिला, लेकिन जेट की दिशा में जांच करने पर मजबूत संकेत मिला, जिससे साफ हुआ कि जेट केवल अपने रास्ते की गैस को रोशन करता है। संकेत वहां सबसे तेज था, जहां जेट तारकीय डिस्क के किनारे पर बाहरी गैस से पहली बार टकराता है और फिर आवरण की बाहरी सीमा पर, जहां धीमा पड़ चुका जेट दोबारा टकराता है और दोनों जगह ऊर्जा जमा होती है। तारे बनने के लिए गैस का ठंडा होना जरूरी है, इसलिए यह गर्मी आकाशगंगा को शांत बना देती है और विकल्प ए निष्कर्ष के ठीक उलट है। इसी कारण विकल्प सी और डी भी गलत हैं।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर यह अध्ययन किस भारतीय संस्थान ने किया?

  1. A.भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान
  2. B.रमन अनुसंधान संस्थान
  3. C.भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला
  4. D.टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रमन अनुसंधान संस्थान

व्याख्या

सही उत्तर रमन अनुसंधान संस्थान है, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है और जिसके वैज्ञानिकों ने अमेरिका की एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के साथियों के साथ मिलकर यह काम किया। द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में छपे इस शोधपत्र की प्रमुख लेखिका नम्रता रॉय हैं, जो इसी संस्थान के खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी प्रभाग में सहायक प्रोफेसर हैं, और निष्कर्ष पर टिप्पणी करने वाली सह-लेखिका संचयीता बोर्थाकुर अमेरिकी विश्वविद्यालय से हैं। बाकी तीनों विकल्प खगोल विज्ञान और भौतिकी के जाने-माने भारतीय संस्थान हैं, इसीलिए वे भ्रम पैदा करते हैं, पर इस विशेष अध्ययन का श्रेय उनमें से किसी को नहीं है। करेंट अफेयर्स में किसी खोज को संस्थान, प्रमुख शोधकर्ता और पत्रिका, तीनों के साथ जोड़कर याद रखना चाहिए।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

अध्ययन में उल्लिखित सर्कमगैलेक्टिक मीडियम (सीजीएम) का सबसे सही वर्णन क्या है?

  1. A.आकाशगंगा का घना केंद्र, जहां तारे ठसाठस भरे होते हैं
  2. B.आकाशगंगा की डिस्क से आगे फैला गैस का धुंधला आवरण
  3. C.धूल का वह छल्ला, जो आकाशगंगा की सर्पिल भुजाएं बनाता है
  4. D.ब्लैक होल के घटना क्षितिज के भीतर का क्षेत्र
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. आकाशगंगा की डिस्क से आगे फैला गैस का धुंधला आवरण

व्याख्या

सही उत्तर है आकाशगंगा की डिस्क से आगे फैला गैस का धुंधला आवरण। अध्ययन के अनुसार सीजीएम गैस का वह विरल भंडार है, जो तारों की डिस्क के किनारे से आगे शुरू होता है और आकाशगंगा के आकार से दस से बीस गुना दूर तक फैलता है, और यही भंडार आगे चलकर तारों के बनने का ईंधन देता है। विकल्प ए में आकाशगंगा के भीड़भाड़ वाले केंद्र की बात है, जो बिल्कुल अलग चीज है। विकल्प सी में सर्पिल भुजाओं की धूल है, जो दिखाई देने वाली डिस्क के भीतर होती है, बाहर नहीं। विकल्प डी में ब्लैक होल के घटना क्षितिज के भीतर का क्षेत्र है, जहां से कुछ भी बाहर नहीं आ सकता और जिसका इस बाहरी गैस से कोई संबंध नहीं। पूरे अध्ययन की बात ही यह है कि केंद्र के ब्लैक होल से निकला जेट इसी आवरण तक पहुंचता है।