बिहार के किसानों को संगठित करने वाले स्वामी सहजानंद सरस्वती किस संगठन के पहले अध्यक्ष थे?
- A.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
- B.अखिल भारतीय किसान सभा
- C.कांग्रेस समाजवादी दल
- D.बिहार विद्यापीठ
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, अखिल भारतीय किसान सभा है। सहजानंद सरस्वती ने 1929 से बिहार प्रांतीय किसान सभा के माध्यम से किसान आंदोलन खड़ा किया और 1936 में बनी अखिल भारतीय किसान सभा के पहले अध्यक्ष बने, जिसके महासचिव एन. जी. रंगा थे। उनका जोत जोतने वाले को का नारा उस काल के कृषि कार्यक्रम को दिशा देने वाला था।
विकल्प A गलत है क्योंकि 1885 में कांग्रेस के पहले अध्यक्ष डब्ल्यू. सी. बनर्जी थे। विकल्प C गलत है क्योंकि 1934 में पटना में बने कांग्रेस समाजवादी दल के अध्यक्ष आचार्य नरेंद्र देव और महासचिव जयप्रकाश नारायण थे। विकल्प D गलत है क्योंकि बिहार विद्यापीठ 1921 की शिक्षा संस्था थी, जो राजेंद्र प्रसाद से जुड़ी थी, सहजानंद से नहीं। सहजानंद के साथ 1929 की बिहार प्रांतीय किसान सभा और 1936 की अखिल भारतीय किसान सभा, ये दो तिथियाँ साथ याद रखें।
पूरा लेख पढ़ें: चंपारण सत्याग्रह और बिहार का स्वतंत्रता संग्राम
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंचंपारण सत्याग्रह भारत के निम्नलिखित में से किस राज्य में हुआ था?
- A.ओडिशा
- B.गुजरात
- C.बिहार
- D.पश्चिम बंगाल
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चंपारण उत्तर बिहार का जिला है, जिसका मुख्यालय मोतीहारी है, और 1917 का सत्याग्रह वहीं निलहे बागान मालिकों की तीनकठिया व्यवस्था के विरुद्ध हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →महात्मा गांधी को चंपारण आने के लिए किसने प्रेरित किया?
- A.राजेंद्र प्रसाद
- B.राजकुमार शुक्ल
- C.ब्रजकिशोर प्रसाद
- D.मजहरुल हक
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शुक्ल चंपारण के किसान थे, जिन्होंने 1916 के कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में गांधी जी से भेंट की और स्थान-स्थान पर उनके पीछे जाकर आग्रह करते रहे, जब तक गांधी जी जिले में आने को तैयार नहीं हो गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चंपारण की तीनकठिया व्यवस्था में किसान को नील उगाना पड़ता था
- A.अपनी भूमि के प्रत्येक बीस कट्ठा में से तीन कट्ठा पर
- B.प्रत्येक बीस बीघा में से तीन बीघा पर
- C.अपनी कुल जोत के एक तिहाई पर
- D.प्रत्येक जोत के तीन एकड़ पर
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तीनकठिया शब्द इस बाध्यता से बना है कि भूमि के प्रत्येक बीस कट्ठा में से तीन कट्ठा पर नील बोना पड़ता था, और स्थानीय माप में बीस कट्ठा से एक बीघा बनता था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चंपारण के बागान मालिक नील की खेती से मुक्ति देने के बदले जो बढ़ा हुआ लगान लेते थे, उसे क्या कहा जाता था?
- A.तावान
- B.शरहबेशी
- C.अबवाब
- D.बेगार
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जब कृत्रिम रंग ने प्राकृतिक नील का बाजार नष्ट कर दिया, तब बागान मालिकों ने काश्तकारों को नील उगाने की बाध्यता से मुक्त किया पर उनका लगान स्थायी रूप से बढ़ा दिया; इस वृद्धि को शरहबेशी कहा गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तीनकठिया व्यवस्था समाप्त करने वाला चंपारण कृषि अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ?
- A.1916
- B.1917
- C.1918
- D.1920
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सरकार ने 1917 में चंपारण कृषि जाँच समिति नियुक्त की, जिसके एक सदस्य गांधी जी थे, और उसकी रिपोर्ट के आधार पर 1918 में चंपारण कृषि अधिनियम पारित हुआ।
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