भारत में विकसित पहले सुपरकंप्यूटर का नाम क्या था?
- A.परम 8000
- B.आदित्य
- C.अनुपम-अध्याय
- D.सागा-220
सही उत्तर
A. परम 8000
व्याख्या
सही उत्तर A, परम 8000 है। परम 8000 को पुणे स्थित सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग अर्थात सी-डैक ने बनाया था और इसे 1991 में सामने लाया गया, यानी सी-डैक की स्थापना के तीन वर्ष बाद, जो 1988 में हुई थी। इस परियोजना का नेतृत्व सी-डैक के संस्थापक महानिदेशक विजय पी. भटकर ने किया था, और यह काम इसलिए हाथ में लिया गया क्योंकि अमेरिका ने भारत को क्रे सुपरकंप्यूटर देने से मना कर दिया था। परम शब्द संस्कृत में सर्वोच्च का अर्थ देता है और पैरेलल मशीन का संक्षिप्त रूप भी है।
विकल्प B आदित्य भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान की बहुत बाद में लगी उच्च निष्पादन मशीन है, इसलिए यह पहली मशीन नहीं है। विकल्प C अनुपम-अध्याय भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की अनुपम शृंखला का हिस्सा है, जो परमाणु शोध में काम आती है और परम के बाद आई। विकल्प D सागा-220 को इसरो ने 2011 में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में बनाया, अर्थात परम 8000 के बीस वर्ष बाद।
पूरा लेख पढ़ें: भारत के सुपरकंप्यूटर: परम शृंखला, एनएसएम और पीवाईक्यू
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंस्वदेशी रूप से जोड़ा गया पहला सुपरकंप्यूटर परम शिवाय कहाँ स्थापित किया गया था?
- A.आईआईटी बीएचयू
- B.आईआईटी खड़गपुर
- C.आईआईएससी, बेंगलुरु
- D.आईआईएसईआर पुणे
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. आईआईटी बीएचयू
व्याख्या
सही उत्तर A, आईआईटी बीएचयू है। परम शिवाय को 2019 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू), वाराणसी में चालू किया गया था और यह राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के अंतर्गत भारत के भीतर जोड़ा गया पहला सुपरकंप्यूटर था। यह मिशन 2015 में शुरू हुआ और इसका संचालन इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग मिलकर करते हैं, जबकि इसे लागू करने वाली संस्थाएँ सी-डैक पुणे और भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु हैं। मशीन को भारत में जोड़ने का उद्देश्य देश में उच्च निष्पादन कंप्यूटिंग हार्डवेयर का कौशल तैयार करना था।
विकल्प B आईआईटी खड़गपुर को इसी मिशन की बाद की मशीन परम शक्ति मिली थी। विकल्प C आईआईएससी बेंगलुरु मिशन की कार्यान्वयन संस्था है और वहाँ 2022 में परम प्रवेग लगाया गया। विकल्प D आईआईएसईआर पुणे में परम ब्रह्मा स्थापित है। चारों संस्थानों में मिशन की मशीनें हैं, और यही भ्रम प्रश्न में बनाया गया है; पहला केवल आईआईटी (बीएचयू) का परम शिवाय था।
राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के दूसरे चरण के अंतर्गत मार्च 2022 में सी-डैक द्वारा आईआईटी रुड़की में डिजाइन और स्थापित किए गए सुपरकंप्यूटर का नाम क्या है?
- A.परम गंगा
- B.परम भीम
- C.परम युवा
- D.परम यमुना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. परम गंगा
व्याख्या
सही उत्तर A, परम गंगा है। परम गंगा को 2022 में राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के दूसरे चरण के अंतर्गत आईआईटी रुड़की में लगाया गया और इसका डिजाइन तथा स्थापना सी-डैक ने की। मिशन का दूसरा चरण वह अवस्था है जिसमें सर्वर बोर्ड तैयार आयात करने के बजाय भारत में बनने लगे, इसलिए इस चरण की मशीनें आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम मानी जाती हैं। मिशन में नाम रखने की शैली यह है कि मेजबान संस्थान से जुड़ा कोई परिचित भारतीय नाम चुना जाए, और गंगा रुड़की के लिए उपयुक्त है, जो उत्तराखंड में गंगा बेसिन में बसा है।
विकल्प B परम भीम रुड़की की इस मिशन की मशीन नहीं है। विकल्प C परम युवा सी-डैक पुणे की पुरानी पीढ़ी की मशीन है, जहाँ परम युवा दो 2013 में चालू हुआ था, अर्थात मिशन शुरू होने से भी पहले। विकल्प D परम यमुना नदी के नाम पर सुनने में सही लगता है, पर आईआईटी रुड़की में ऐसी कोई मशीन नहीं लगाई गई।
भारत की परम सुपरकंप्यूटर शृंखला का शिल्पी किसे माना जाता है?
- A.राज रेड्डी
- B.विजय पी. भटकर
- C.नरिंदर सिंह कपानी
- D.सैम पित्रोदा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. विजय पी. भटकर
व्याख्या
सही उत्तर B, विजय पी. भटकर है। वे 1988 में पुणे में स्थापित सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग के संस्थापक महानिदेशक थे और उन्होंने उस दल का नेतृत्व किया जिसने 1991 में परम 8000 तैयार किया। चूँकि विदेशी मशीन मना किए जाने के बाद इस परियोजना ने भारत को अपना सुपरकंप्यूटर दिया, इसलिए उन्हें आमतौर पर भारत के सुपरकंप्यूटर कार्यक्रम का शिल्पी या जनक कहा जाता है। बाद में वे स्वदेशी कंप्यूटिंग के राष्ट्रीय प्रयासों और कई शिक्षण संस्थानों से जुड़े रहे।
विकल्प A राज रेड्डी भारतीय मूल के प्रसिद्ध कंप्यूटर वैज्ञानिक और ट्यूरिंग पुरस्कार विजेता हैं, परंतु उनका काम अमेरिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिकी में रहा, परम कार्यक्रम में नहीं। विकल्प C नरिंदर सिंह कपानी भौतिक विज्ञानी थे और उन्हें प्रकाशिक तंतु का जनक कहा जाता है, जो अलग क्षेत्र है। विकल्प D सैम पित्रोदा ने सी-डॉट अर्थात सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स के माध्यम से दूरसंचार क्रांति का नेतृत्व किया, जिसका नाम सी-डैक से मिलता-जुलता होने के कारण भ्रम होता है।
सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
- A.1984
- B.1988
- C.1991
- D.1995
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1988
व्याख्या
सही उत्तर B, 1988 है। सी-डैक की स्थापना 1988 में पुणे में केंद्र सरकार की एक वैज्ञानिक संस्था के रूप में हुई थी, और इसका निश्चित काम था भारतीय सुपरकंप्यूटर का डिजाइन तैयार करना, क्योंकि मौसम पूर्वानुमान के लिए माँगी गई क्रे मशीन देने से अमेरिका ने मना कर दिया था। यह संस्था आज इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन काम करती है और राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन की कार्यान्वयन संस्था भी है।
विकल्प A 1984 राष्ट्रीय कंप्यूटर नीति की शुरुआत और दूरसंचार संस्था सी-डॉट से जुड़ा वर्ष है, इसलिए यह स्वाभाविक जाल है। विकल्प C 1991 वह वर्ष है जब परम 8000 तैयार हुआ, अर्थात संस्था बनने के तीन वर्ष बाद; जो परीक्षार्थी केवल एक तिथि याद रखते हैं वे अक्सर दोनों को मिला देते हैं। विकल्प D 1995 दोनों से बाद का है और इस कहानी में कुछ नहीं दर्शाता। सुरक्षित तरीका यही है कि जोड़ा याद रखें: सी-डैक 1988 और परम 8000 1991।
राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन का संचालन भारत सरकार की किन दो संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है?
- A.शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी
- B.इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
- C.इसरो और परमाणु ऊर्जा विभाग
- D.नीति आयोग और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
व्याख्या
सही उत्तर B, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग है। 2015 में शुरू हुए राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन का संचालन ये दोनों संस्थाएँ मिलकर करती हैं, और जमीनी काम सी-डैक पुणे तथा भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु करते हैं। इसका उद्देश्य शैक्षणिक तथा शोध संस्थानों में सुपरकंप्यूटरों का जाल बनाना है, जिन्हें राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क से जोड़ा जाए और जिनमें हार्डवेयर का भारतीय हिस्सा हर चरण में बढ़ता जाए।
विकल्प A में शिक्षा से जुड़ी संस्थाएँ हैं, जिनके संस्थानों में कई मशीनें लगी तो हैं पर वे मिशन का संचालन नहीं करतीं। विकल्प C में इसरो और परमाणु ऊर्जा विभाग हैं, जो सागा-220 तथा अनुपम शृंखला जैसी अपनी मशीनें चलाते हैं पर मिशन के संचालक नहीं हैं। विकल्प D में नीति आयोग एक नीति संस्था है और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पास प्रत्यूष तथा मिहिर जैसी अलग मौसम मशीनें हैं।