भारत में कीटनाशकों के आयात, निर्माण, विक्रय और उपयोग का नियमन कौन-सा अधिनियम करता है?
- A.पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
- B.कीटनाशी अधिनियम, 1968
- C.उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985
- D.बीज अधिनियम, 1966
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, कीटनाशी अधिनियम, 1968। यह अधिनियम कीटनाशी नियम, 1971 के साथ मिलकर बिक्री से पहले प्रत्येक कीटनाशक के पंजीकरण, निर्माताओं और विक्रेताओं के अनुज्ञापन, लेबल तथा पैकिंग की शर्तों और कीटनाशी निरीक्षकों एवं विश्लेषकों की नियुक्ति की व्यवस्था करता है। केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड सरकार को सलाह देता है और पंजीकरण समिति पंजीकरण प्रदान करती है। विकल्प A, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, भोपाल गैस त्रासदी के बाद बना छत्र कानून है; यह केंद्र सरकार को पर्यावरण मानकों पर व्यापक शक्ति देता है पर कीटनाशक अनुज्ञापन का कानून नहीं है। विकल्प C, उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985, आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत जारी है और उर्वरकों पर लागू होता है, कीटनाशकों पर नहीं। विकल्प D, बीज अधिनियम, 1966, बीज के प्रमाणन और गुणवत्ता से जुड़ा है। खाद्य पदार्थों में कीटनाशक अवशेष की सीमा खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत तय होती है, 1968 के अधिनियम के अंतर्गत नहीं।
पूरा लेख पढ़ें: जैविक खेती और कीटनाशक: विधियां, कानून और प्रभाव
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंजैविक खेती में
- A.उपज बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है।
- B.उपज बढ़ाने के लिए आनुवंशिक रूपांतरण किया जाता है
- C.प्राकृतिक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है
- D.भारत में केवल कपास के उत्पादन की अनुमति है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, प्राकृतिक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है। जैविक खेती की पहचान इसी बात से होती है कि वह किन आदानों को अस्वीकार करती है। कारखाने में बने उर्वरकों के स्थान पर इसमें गोबर की खाद, कम्पोस्ट, केंचुआ खाद, हरी खाद तथा राइजोबियम और एजोटोबैक्टर जैसे जैव उर्वरक काम आते हैं। संश्लेषित कीटनाशियों के स्थान पर नीम अर्क और बैसिलस थुरिंजिएंसिस जैसे जैव कीटनाशी तथा पीड़क के प्राकृतिक शत्रु अपनाए जाते हैं। विकल्प A परिभाषा के ठीक उलट है, क्योंकि रासायनिक उर्वरक का प्रयोग खेत को जैविक प्रमाणन से बाहर कर देता है। विकल्प B गलत है क्योंकि राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम के मानक आनुवंशिक रूप से रूपांतरित बीज और रोपण सामग्री को स्पष्ट रूप से वर्जित करते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि भारत में जैविक खेती अनाज, दलहन, तिलहन, मसाले, चाय और फलों में होती है और कोई नियम इसे कपास तक सीमित नहीं करता।
कौन-सा जैव उर्वरक दलहनी पौधों की जड़ ग्रंथिकाओं में वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है?
- A.एजोटोबैक्टर
- B.राइजोबियम
- C.एजोस्पिरिलम
- D.ट्राइकोडर्मा
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व्याख्या
सही उत्तर है B, राइजोबियम। राइजोबियम एक सहजीवी जीवाणु है जो दलहन, मूंगफली, सोयाबीन आदि फलीदार पौधों की जड़ों में प्रवेश करके जड़ ग्रंथिकाओं नामक गांठों के भीतर बढ़ता है। ग्रंथिका के अंदर नाइट्रोजिनेज एंजाइम वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अमोनिया में बदल देता है, जिसे पौधा काम में लेता है, और बदले में पौधा जीवाणु को शर्करा देता है। इसी कारण फसल चक्र में अनाज के बाद दलहन रखी जाती है। विकल्प A, एजोटोबैक्टर, नाइट्रोजन स्थिर तो करता है पर मिट्टी में स्वतंत्र रहता है और गेहूं, मक्का, कपास तथा सब्जियों के लिए संस्तुत है, ग्रंथिकाओं में नहीं रहता। विकल्प C, एजोस्पिरिलम, सहयोगी स्थिरीकारक है जो गन्ना, ज्वार और बाजरा की जड़ों के पास रहता है, ग्रंथिका नहीं बनाता। विकल्प D, ट्राइकोडर्मा, एक कवक है जिसका प्रयोग जड़ गलन और उगरा जैसे मृदाजनित रोगों के विरुद्ध जैव कवकनाशी के रूप में होता है; यह नाइट्रोजन स्थिरीकरण नहीं करता।
आहार श्रृंखला के प्रत्येक अगले स्तर पर वसा में घुलनशील कीटनाशक की सांद्रता बढ़ने की घटना क्या कहलाती है?
- A.सुपोषण
- B.जैव उपचारण
- C.जैव आवर्धन
- D.जैव प्रबलीकरण
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व्याख्या
सही उत्तर है C, जैव आवर्धन। डीडीटी जैसा कीटनाशक वसा में घुलता है, अपघटित नहीं होता और शरीर से बाहर नहीं निकलता, इसलिए किसी परभक्षी के शरीर में उसकी मात्रा उसके सभी शिकारों की मात्राओं का जोड़ बन जाती है। इस प्रकार सांद्रता जल से प्लवक, छोटी मछली, बड़ी मछली और मछली खाने वाले पक्षियों तक चरणबद्ध रूप से बढ़ती जाती है और पक्षियों में जल की तुलना में हजारों गुना तक पहुंच सकती है। विकल्प A, सुपोषण, जल निकाय में नाइट्रेट और फॉस्फेट की अधिकता है जिससे शैवाल प्रस्फुटन और ऑक्सीजन की कमी होती है; यह पोषक तत्वों की समस्या है, आहार श्रृंखला की नहीं। विकल्प B, जैव उपचारण, प्रदूषित मिट्टी या जल की सफाई के लिए सूक्ष्मजीवों या पौधों के उपयोग की लाभकारी प्रक्रिया है। विकल्प D, जैव प्रबलीकरण, फसलों को लोहा, जिंक या विटामिन ए से समृद्ध करने का प्रजनन कार्य है, जैसे भारत में जारी लौह समृद्ध बाजरा किस्में।
भारत का कौन-सा राज्य पहला पूर्ण जैविक राज्य घोषित किया गया?
- A.केरल
- B.उत्तराखंड
- C.सिक्किम
- D.हिमाचल प्रदेश
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, सिक्किम। सिक्किम ने 2003 से रासायनिक उर्वरकों को चरणबद्ध रूप से हटाना शुरू किया, अपने संपूर्ण कृषि क्षेत्र को प्रमाणित जैविक पद्धति में बदला और पूर्ण जैविक राज्य घोषित हुआ। इस कार्य के लिए उसे 2018 में खाद्य एवं कृषि संगठन का फ्यूचर पॉलिसी गोल्ड अवॉर्ड मिला और वह इस प्रकार सम्मानित होने वाला विश्व का पहला राज्य बना। विकल्प A, केरल, की जैविक नीति सशक्त है और इस अध्याय में वह कासरगोड की एंडोसल्फान त्रासदी के लिए याद किया जाता है, पर उसने अपनी पूरी कृषि भूमि नहीं बदली। विकल्प B, उत्तराखंड, में प्रमाणित जैविक क्षेत्र बड़ा है और जैविक उत्पाद परिषद भी है, फिर भी यह बाद में और आंशिक रूप से हुआ। विकल्प D, हिमाचल प्रदेश, राज्य योजना के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देता है और जैविक बनने का लक्ष्य घोषित कर चुका है, जो उपलब्धि के समान नहीं है। परीक्षाएं सिक्किम को 2016 और गोल्ड अवॉर्ड के साथ जोड़कर पूछती हैं।
डीडीटी कीटनाशकों के किस रासायनिक वर्ग से संबंधित है?
- A.ऑर्गेनोफॉस्फेट
- B.कार्बामेट
- C.पायरेथ्रॉइड
- D.ऑर्गेनोक्लोरीन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है D, ऑर्गेनोक्लोरीन। डाइक्लोरो डाइफिनाइल ट्राइक्लोरोएथेन क्लोरीनयुक्त हाइड्रोकार्बन ढांचे पर बना है, जिससे वह वसा में घुलनशील, रासायनिक रूप से स्थायी और मिट्टी तथा जल में अत्यंत धीमी गति से अपघटित होने वाला बनता है। इन्हीं गुणों ने उसे मलेरिया नियंत्रण का सस्ता छिड़काव बनाया और इन्हीं गुणों ने उसे पहला ऐसा कीटनाशक बनाया जिसका जैव आवर्धन सिद्ध हुआ; इसीलिए वह स्थायी कार्बनिक प्रदूषकों की स्टॉकहोम अभिसमय सूची में है। बीएचसी, एल्ड्रिन और एंडोसल्फान इसी वर्ग के साथी हैं। विकल्प A, ऑर्गेनोफॉस्फेट, में मैलाथियान और पैराथियान आते हैं, जो कुछ दिनों में अपघटित हो जाते हैं पर एसिटिलकोलीनएस्टरेज को तीव्रता से रोकते हैं। विकल्प B, कार्बामेट, में कार्बारिल और कार्बोफ्यूरान हैं, जो उसी एंजाइम पर प्रतिवर्ती रूप से असर करते हैं। विकल्प C, पायरेथ्रॉइड, में साइपरमेथ्रिन और परमेथ्रिन हैं, जो गुलदाउदी से मिलने वाले पायरेथ्रिन के प्रयोगशाला रूप हैं और डीडीटी से बहुत कम स्थायी हैं।