भारत में घुड़सवार युद्ध के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. लोहे की रकाब ने कवचधारी योद्धा के लिए घोड़े पर बिना गिरे मज़बूती से बैठना संभव बनाया। 2. लोहे की रकाब ने भालों को शरीर से कसकर पकड़े हुए घुड़सवार आक्रमण को भी संभव बनाया, बिना इसके कि टक्कर के झटके से सवार गिर जाए। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1, न ही 2
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, 1 और 2 दोनों। लोहे की रकाब ने सवार को मज़बूत आसन दिया और उसी मज़बूत आसन से भाले के साथ धावा संभव हुआ, इसलिए दोनों कथन सही हैं। रकाब काठी से लटका वह छल्ला है जिसमें सवार अपने पैर टिकाता है। इसके बिना भारी कवच पहना योद्धा, खासकर मुड़ते या वार करते समय, आसानी से संतुलन खोकर गिर सकता था। लोहे की रकाब में पैर जमाकर वह स्थिर बैठ सकता था, भारी कवच पहन सकता था और दोनों हाथों से हथियार चला सकता था। इससे वह भाले को शरीर से कसकर दबाए तेज़ी से धावा बोल सकता था, घोड़े के वेग से वार को बल मिलता था और टक्कर के झटके से वह गिरता नहीं था। इतिहासकार लोहे की रकाब और उस पर टिकी भारी घुड़सवार सेना के प्रसार को प्रारंभिक मध्यकाल के युद्धों से जोड़ते हैं, जब कवचधारी घुड़सवार अनेक सेनाओं का मुख्य आधार बन गए। विकल्प A गलत है, क्योंकि कथन 2 भी सही है। विकल्प B गलत है, क्योंकि कथन 1 भी सही है। विकल्प D गलत है, क्योंकि दोनों कथन रकाब के वास्तविक प्रभाव बताते हैं। परीक्षा टिप: लोहे की रकाब यानी कवचधारी घुड़सवार का मज़बूत आसन और भाले के साथ ज़ोरदार धावा।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखें1799 में किंग जॉर्ज को बादशाहनामा किसने भेंट किया?
- A.अबुल फ़ज़ल
- B.अब्दुल हमीद लाहौरी
- C.अवध के नवाब
- D.विलियम जोन्स
उत्तर देखें
1799 में अवध के नवाब ने बादशाहनामा की एक चित्रित पांडुलिपि ब्रिटेन के राजा जॉर्ज तृतीय को भेंट की, जो आज विंडसर कैसल की रॉयल लाइब्रेरी में रखी है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1947 का ट्रूमैन सिद्धांत निम्नलिखित में से किसे प्राप्त करने के लिए घोषित किया गया था?
- A.सोवियत संघ (USSR) को रोकना
- B.अमेरिका में कृषि उत्पादन बढ़ाना
- C.यूरोप को मित्रता का प्रस्ताव देना
- D.संयुक्त राष्ट्र संगठन को सुदृढ़ करना
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ट्रूमैन सिद्धांत ने साम्यवादी दबाव का विरोध करने वाले देशों को अमेरिकी समर्थन का वचन दिया, ताकि सोवियत प्रभाव का फैलाव रोका जा सके।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बीसवीं शताब्दी के आरंभ के भारत के निम्नलिखित महिला संगठनों और उनसे जुड़ी प्रमुख व्यक्तियों पर विचार कीजिए:
1. 1917 का वीमेन्स इंडियन एसोसिएशन : मार्गरेट कज़िन्स
2. 1925 की नेशनल काउंसिल ऑफ वीमेन इन इंडिया : सरला देवी चौधरानी
3. 1910 का भारत स्त्री महामंडल : लेडी मेहरबाई टाटा
ऊपर दिए गए युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
- A.1, 2 और 3
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1 और 2
- D.केवल 1
उत्तर देखें
मार्गरेट कज़िन्स वीमेन्स इंडियन एसोसिएशन की संस्थापकों में थीं, लेकिन युग्म 2 और 3 में जुड़े व्यक्तियों के नाम आपस में बदल दिए गए हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा अभिलेख रेशम बुनकरों की एक श्रेणी (गिल्ड) का इतिहास दर्ज करता है?
- A.हाथीगुम्फा अभिलेख
- B.मंदसौर अभिलेख
- C.कुडुमियामलै अभिलेख
- D.उदयगिरि गुफा अभिलेख
उत्तर देखें
पश्चिमी मध्य प्रदेश के मंदसौर का यह पाँचवीं शताब्दी का संस्कृत अभिलेख बताता है कि रेशम बुनकरों की एक श्रेणी लाट (दक्षिण गुजरात) से दशपुर आकर बसी और उसने सूर्य मंदिर बनवाया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पुनर्जागरणकालीन मानववादी संस्कृति के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
- A.इसने मानव जीवन पर धर्म के नियंत्रण को ढीला किया
- B.यह मानती थी कि मानव स्वभाव बहुआयामी है
- C.यह शिष्टाचार से सरोकार रखती थी
- D.इसने भौतिक संपदा, शक्ति और कीर्ति की आलोचना की
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पुनर्जागरण के मानववादियों ने धन, शक्ति और कीर्ति की निंदा नहीं की, बल्कि इन्हें मनुष्य के योग्य लक्ष्य माना, इसलिए यही कथन सत्य नहीं है।
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