भारत के योजना आयोग का स्थान नीति आयोग ने किस वर्ष लिया?
- A.2016
- B.2015
- C.2018
- D.2017
सही उत्तर
B. 2015
व्याख्या
सही उत्तर है B, 2015। नीति आयोग, यानी राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान, 1 जनवरी 2015 को मंत्रिमंडल के प्रस्ताव से बनाया गया और उसने 1950 से चल रहे योजना आयोग का स्थान लिया। दोनों में से कोई भी संस्था संविधान या संसद के अधिनियम से नहीं बनी, इसलिए दोनों संविधानेतर और गैर-सांविधिक हैं। इस बदलाव से केंद्रीकृत पंचवर्षीय योजना और राज्यों को योजना निधि बाँटने की पुरानी व्यवस्था समाप्त हो गई; नीति आयोग अब एक विचार मंच के रूप में काम करता है, जो केंद्र और राज्यों को परामर्श देता है, दीर्घकालिक रणनीति बनाता है और स्वास्थ्य, शिक्षा, जल जैसे सूचकांकों पर राज्यों की रैंकिंग करता है। प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं, और शासी परिषद में सभी मुख्यमंत्री तथा उपराज्यपाल शामिल रहते हैं। A गलत है क्योंकि 2016 बदलाव के एक वर्ष बाद का है। C गलत है क्योंकि 2018 तक नई संस्था राज्यों के सूचकांक प्रकाशित करने लगी थी। D गलत है क्योंकि 2017 में केवल बारहवीं पंचवर्षीय योजना समाप्त हुई थी। परीक्षा टिप: योजना आयोग 1950 से 2014 तक, नीति आयोग 1 जनवरी 2015 से।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंमाँग का नियम बताता है कि किनके बीच ऋणात्मक संबंध होता है?
- A.किसी वस्तु की माँग और उसकी पूर्ति
- B.किसी वस्तु की माँग और उसकी कीमत
- C.किसी वस्तु पर कर और उसकी कीमत
- D.किसी वस्तु की पूर्ति और उसकी कीमत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. किसी वस्तु की माँग और उसकी कीमत
व्याख्या
सही उत्तर है B, किसी वस्तु की माँग और उसकी कीमत। माँग का नियम कहता है कि अन्य बातें समान रहने पर किसी वस्तु की कीमत बढ़ने से उसकी माँगी गई मात्रा घट जाती है और कीमत घटने से बढ़ जाती है, अर्थात दोनों विपरीत दिशा में चलते हैं। यही विलोम संबंध माँग वक्र को बाएँ से दाएँ नीचे की ओर ढालू बनाता है। ऐसा इसलिए होता है कि कम कीमत पर क्रेता के पास अधिक वास्तविक क्रय शक्ति बचती है और वस्तु अपने प्रतिस्थापनों की तुलना में सस्ती हो जाती है; 'अन्य बातें समान रहने पर' में आय, रुचि, संबंधित वस्तुओं की कीमतें और क्रेताओं की संख्या आती हैं। गिफिन वस्तुएँ और दिखावे के लिए खरीदी जाने वाली वस्तुएँ इसके प्रमुख अपवाद हैं। A गलत है क्योंकि माँग और पूर्ति को कीमत आपस में मिलाती है, उनमें ऋणात्मक संबंध नहीं होता। C गलत है क्योंकि कर वस्तु की कीमत बढ़ाता है, यह धनात्मक संबंध है। D गलत है क्योंकि पूर्ति और कीमत एक ही दिशा में चलते हैं, और वही पूर्ति का नियम है। परीक्षा टिप: माँग वक्र नीचे की ओर और पूर्ति वक्र ऊपर की ओर ढालू होता है।
भारतीय श्रमिक पश्चिमी देशों के श्रमिकों की तुलना में कम कुशल क्यों हैं?
- A.मजदूरी का निम्न स्तर
- B.श्रमिकों को दी गई पूँजी की घटिया गुणवत्ता
- C.निरक्षरता का उच्च स्तर
- D.मजबूत श्रमिक संघ
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. निरक्षरता का उच्च स्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, निरक्षरता का उच्च स्तर। कौशल की नींव शिक्षा और प्रशिक्षण है, इसलिए जिस श्रमशक्ति का बड़ा हिस्सा निरक्षर या बहुत कम पढ़ा हो, वह तकनीकी प्रशिक्षण को उस तरह ग्रहण नहीं कर पाती जैसे पूर्ण साक्षर श्रमशक्ति करती है। स्वतंत्रता के बाद के दशकों में भारत की साक्षरता दर औद्योगिक पश्चिम से बहुत पीछे रही, और आज भी श्रमशक्ति का बड़ा भाग विद्यालय पूरा किए बिना या कोई व्यावसायिक पाठ्यक्रम किए बिना काम में आ जाता है, इसी कारण प्रति श्रमिक उत्पादन कम रहता है। इसलिए अर्थशास्त्री शिक्षा और प्रशिक्षण को मानव पूँजी में निवेश मानते हैं, और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान तथा स्किल इंडिया मिशन इसी अंतर को भरने के लिए हैं। A गलत है क्योंकि कम मजदूरी कम कौशल का परिणाम है, कारण नहीं। B गलत है क्योंकि घटिया पूँजी प्रति श्रमिक उत्पादन घटाती है, पर श्रमिक को अप्रशिक्षित नहीं बनाती। D गलत है क्योंकि श्रमिक संघों की ताकत सौदेबाजी से जुड़ी है, कौशल से नहीं। परीक्षा टिप: शिक्षा और प्रशिक्षण मानव पूँजी बनाते हैं, और मानव पूँजी ही श्रम उत्पादकता तय करती है।
किसी भी परियोजना के मूल्यांकन से जुड़े सभी वित्तीय निर्णय किस पर आधारित होते हैं?
- A.धन का भावी मूल्य
- B.धन का वर्तमान मूल्य
- C.धन की अवसर लागत
- D.इनमें से कोई नहीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. धन का वर्तमान मूल्य
व्याख्या
सही उत्तर है B, धन का वर्तमान मूल्य। धन का समय मूल्य होता है, इसलिए कई वर्ष बाद मिलने वाला एक रुपया आज हाथ में रखे एक रुपये से कम मूल्य का होता है, और निर्णय लेने से पहले परियोजना के हर नकदी प्रवाह को आज के मूल्य पर लाया जाता है। किसी परियोजना की लागत और आय कई वर्षों में फैली होती है, और इनकी तुलना तभी सही होती है जब सबको एक ही तिथि पर लाया जाए; वह तिथि वर्तमान ही है। इसी कारण मूल्यांकन के मानक उपकरण, शुद्ध वर्तमान मूल्य और आंतरिक प्रतिफल दर, भावी प्रवाहों को एक चुनी हुई दर पर बट्टाकृत करते हैं, और परियोजना तभी स्वीकृत होती है जब बट्टाकृत आय बट्टाकृत व्यय से अधिक हो। A गलत है क्योंकि भावी मूल्य बताता है कि आज का धन आगे कितना बढ़ेगा, जिससे भिन्न अवधि की परियोजनाओं की तुलना नहीं हो पाती। C गलत है क्योंकि अवसर लागत केवल बट्टा दर देती है, वह निर्णय का आधार नहीं है। D गलत है क्योंकि विकल्प B सही है। परीक्षा टिप: बट्टाकरण से वर्तमान मूल्य और चक्रवृद्धि से भावी मूल्य निकलता है।
ट्रांसजेंडर समुदाय तथा भीख माँगने के कार्य में लगे व्यक्तियों के कल्याण के लिए 2022 में शुरू की गई योजना का नाम क्या है?
- A.स्माइल (SMILE)
- B.शाइन (SHINE)
- C.श्री (SHRI)
- D.राइज (RISE)
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. स्माइल (SMILE)
व्याख्या
सही उत्तर है A, स्माइल। स्माइल का पूरा नाम है 'सपोर्ट फॉर मार्जिनलाइज्ड इंडिविजुअल्स फॉर लाइवलीहुड एंड एंटरप्राइज', यह वह केंद्रीय योजना है जिसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों तथा भीख माँगने में लगे लोगों का कल्याण शामिल है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने इसे 2022 में शुरू किया और दोनों वर्गों को एक छत्र योजना के नीचे लाकर प्रत्येक के लिए अलग उप-योजना रखी। इसमें छात्रवृत्ति, कौशल प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए गरिमा गृह नामक आश्रय गृह, तथा भीख माँगते पाए गए लोगों के लिए सर्वेक्षण, पुनर्वास, शिक्षा और आजीविका सहायता दी जाती है; यह काम राज्य सरकारों, शहरी निकायों और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से होता है। B गलत है क्योंकि इस योजना की अधिसूचना शाइन नाम से नहीं हुई। C गलत है क्योंकि इन दो वर्गों के लिए मंत्रालय की श्री नाम की कोई योजना नहीं है। D गलत है क्योंकि राइज भी यह योजना नहीं है; तीनों गलत विकल्प सही विकल्प जैसे दिखने के लिए बनाए गए हैं। परीक्षा टिप: स्माइल - 2022, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, आश्रय गृह का नाम गरिमा गृह।
ग्रामीण क्षेत्रों में वह बेरोज़गारी, जिसमें लोगों को वर्ष के कुछ महीनों में काम नहीं मिलता, ______ कहलाती है।
- A.शिक्षित बेरोज़गारी
- B.अदृश्य बेरोज़गारी
- C.घर्षणात्मक बेरोज़गारी
- D.मौसमी बेरोज़गारी
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. मौसमी बेरोज़गारी
व्याख्या
सही उत्तर है D, मौसमी बेरोज़गारी। मौसमी बेरोज़गारी वह स्थिति है जिसमें लोगों को वर्ष के कुछ ही महीनों में काम मिलता है और बाकी समय वे खाली रहते हैं। भारत के गाँवों में यह आम है, क्योंकि खेती में बुआई, रोपाई और कटाई के समय बहुत हाथ चाहिए, पर बीच के महीनों में बहुत कम; इसलिए मज़दूर या बेकार बैठे रहते हैं या कुछ महीनों के लिए शहर चले जाते हैं। चीनी मिल, ईंट भट्ठे और पर्यटन के काम में भी यही ढर्रा दिखता है। ग्रामीण रोज़गार गारंटी जैसी योजनाएँ, जो ग्रामीण परिवार को सौ दिन के मज़दूरी-काम का वादा करती हैं, मुख्य रूप से इन्हीं सुस्त महीनों के लिए बनाई गई थीं। विकल्प A गलत है, क्योंकि शिक्षित बेरोज़गारी का अर्थ है पढ़े-लिखे युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप काम न मिलना, जो अधिकतर शहरी समस्या है। विकल्प B गलत है, क्योंकि अदृश्य बेरोज़गारी में काम के लिए ज़रूरत से अधिक लोग लगे रहते हैं, जैसे पारिवारिक खेत पर। विकल्प C गलत है, क्योंकि घर्षणात्मक बेरोज़गारी नौकरी बदलने के बीच का थोड़ा समय है। परीक्षा टिप: मौसमी का अर्थ खाली महीने, अदृश्य का अर्थ ज़रूरत से ज़्यादा हाथ।