भारत का राष्ट्रीय ध्येय वाक्य सत्यमेव जयते किस ग्रंथ से लिया गया है?
- A.ऋग्वेद
- B.मुंडक उपनिषद
- C.भगवद्गीता
- D.मनुस्मृति
सही उत्तर
B. मुंडक उपनिषद
व्याख्या
सही उत्तर B, मुंडक उपनिषद है। ये शब्द राष्ट्रीय ध्येय वाक्य के रूप में अपनाए गए और भारत के राजचिह्न में सिंह शीर्ष के नीचे देवनागरी में अंकित हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि ऋग्वेद सबसे प्राचीन ग्रंथ होने पर भी इस वाक्य का स्रोत नहीं है; उससे सार्वजनिक जीवन में आया प्रसिद्ध अंश गायत्री मंत्र है। विकल्प C गलत है क्योंकि भगवद्गीता महाभारत का अंश है और उससे कोई राष्ट्रीय प्रतीक नहीं लिया गया। विकल्प D गलत है क्योंकि मनुस्मृति धर्मशास्त्रों में सबसे प्राचीन है और विधि तथा सामाजिक कर्तव्य से संबंधित है। राजचिह्न के तीन तथ्य एक साथ याद रखें: सारनाथ के अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष राजचिह्न बना, उस पर का चक्र राष्ट्रध्वज का चक्र बना, और नीचे का ध्येय वाक्य मुंडक उपनिषद से आया।
पूरा लेख पढ़ें: प्राचीन साहित्य और अभिलेख: ग्रंथ, लेखक और शिलालेख
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंचारों वेदों में से किसे भारतीय संगीत का स्रोत माना जाता है?
- A.ऋग्वेद
- B.सामवेद
- C.यजुर्वेद
- D.अथर्ववेद
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सही उत्तर: B. सामवेद
व्याख्या
सही उत्तर B, सामवेद है। इसका नाम साम अर्थात गान से बना है, और यह उन सूक्तों को, जिनमें से अधिकतर ऋग्वेद से लिए गए हैं, उसी रूप में रखता है जिसमें पुरोहित उन्हें यज्ञ में गाता था, इसलिए भारतीय स्वर पद्धति का आरंभ इसी से माना जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि ऋग्वेद सबसे प्राचीन वेद और 1028 स्तुति सूक्तों का संग्रह है, गानों का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि यजुर्वेद यज्ञ संपन्न कराने के मंत्र और विधि देता है, गद्य तथा पद्य दोनों में, और वह याजक पुरोहित की पुस्तिका है। विकल्प D गलत है क्योंकि अथर्ववेद अभिचार, मंत्र और औषधियों का संग्रह है जो लोक विश्वास तथा प्रारंभिक चिकित्सा को दर्शाता है। सबसे अधिक पूछा जाने वाला युग्म है सामवेद के साथ संगीत और अथर्ववेद के साथ जादू तथा औषधि।
ब्राह्मी लिपि को पढ़कर अशोक के अभिलेखों को सुलभ बनाने का कार्य किसने किया?
- A.अलेक्जेंडर कनिंघम
- B.जेम्स प्रिंसेप
- C.जॉन मार्शल
- D.विलियम जोन्स
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सही उत्तर: B. जेम्स प्रिंसेप
व्याख्या
सही उत्तर B, जेम्स प्रिंसेप है। वे ईस्ट इंडिया कंपनी की टकसाल के अधिकारी और एशियाटिक सोसाइटी के सचिव थे, और 1837 में उन्होंने ब्राह्मी अक्षरों के मान निकाले, जिससे स्वयं को देवानांप्रिय पियदस्सी कहने वाले राजा के अभिलेख पहली बार पढ़े जा सके। विकल्प A गलत है क्योंकि अलेक्जेंडर कनिंघम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रथम महानिदेशक थे और उन्होंने स्थलों का सर्वेक्षण किया, लिपि का पठन नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि जॉन मार्शल बहुत बाद में सर्वेक्षण के प्रमुख रहे और सिंधु सभ्यता की खोज की घोषणा के लिए जाने जाते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि विलियम जोन्स ने 1784 में एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना की और संस्कृत तथा तुलनात्मक भाषा पर कार्य किया, तब ब्राह्मी की समस्या हल नहीं हुई थी। 1837 को प्रिंसेप के नाम से जोड़ लें।
हाथीगुम्फा अभिलेख किस शासक के शासनकाल का विवरण देता है?
- A.कलिंग का खारवेल
- B.रुद्रदामन प्रथम
- C.गौतमीपुत्र सातकर्णि
- D.समुद्रगुप्त
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सही उत्तर: A. कलिंग का खारवेल
व्याख्या
सही उत्तर A, कलिंग का खारवेल है। यह अभिलेख ओडिशा में भुवनेश्वर के निकट उदयगिरि पहाड़ी की एक गुफा में उत्कीर्ण है, प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में है, और महामेघवाहन वंश के इस शासक के अभियानों, सिंचाई कार्यों तथा जैन धर्म के संरक्षण का वर्ष-वार विवरण देता है। विकल्प B गलत है क्योंकि पश्चिमी भारत के शक शासक रुद्रदामन प्रथम का ज्ञान जूनागढ़ शिलालेख से होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि सातवाहन वंश के गौतमीपुत्र सातकर्णि का ज्ञान उसकी माता गौतमी बलश्री की नासिक प्रशस्ति से होता है। विकल्प D गलत है क्योंकि समुद्रगुप्त का ज्ञान हरिषेण रचित प्रयाग या इलाहाबाद स्तंभ प्रशस्ति से होता है। अभिलेख और शासक का यही युग्म इस प्रकार के प्रश्नों का सार है। खारवेल के साथ यह भी याद रखें कि उसने कलिंग में नहर बनवाई, जैन धर्म को संरक्षण दिया और अपने अभिलेख में अपने शासन के वर्षों का क्रमवार विवरण दिया, जो भारतीय अभिलेखों में दुर्लभ है।
इलाहाबाद स्तंभ लेख अर्थात प्रयाग प्रशस्ति की रचना किसने की?
- A.रविकीर्ति
- B.हरिषेण
- C.वत्सभट्टि
- D.बाणभट्ट
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सही उत्तर: B. हरिषेण
व्याख्या
सही उत्तर B, हरिषेण है। वे समुद्रगुप्त के दरबारी कवि थे, और उनकी रची प्रशस्ति संस्कृत में, कुछ गद्य और कुछ पद्य में, उन राजाओं की सूची देती है जिन्हें सम्राट ने उत्तर में उन्मूलित किया, जिन्हें दक्षिण में हराकर पुनः स्थापित किया, और जिन्होंने उसकी अधीनता स्वीकार की, इसी से वह उसके शासन का मुख्य स्रोत है। विकल्प A गलत है क्योंकि रविकीर्ति ने चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय का ऐहोल अभिलेख रचा। विकल्प C गलत है क्योंकि वत्सभट्टि ने कुमारगुप्त के काल में रेशम बुनकरों की श्रेणी से संबंधित मंदसौर अभिलेख रचा। विकल्प D गलत है क्योंकि बाणभट्ट हर्षवर्धन के दरबारी लेखक थे और उन्होंने हर्षचरित तथा कादंबरी लिखीं, जो साहित्यिक कृतियां हैं, अभिलेख नहीं। कवि और आश्रयदाता दोनों दिशाओं में पूछे जाते हैं।
रविकीर्ति द्वारा रचित ऐहोल अभिलेख किस शासक का विवरण है?
- A.हर्षवर्धन
- B.पुलकेशिन द्वितीय
- C.नरसिंहवर्मन प्रथम
- D.दंतिदुर्ग
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सही उत्तर: B. पुलकेशिन द्वितीय
व्याख्या
सही उत्तर B, पुलकेशिन द्वितीय है, जो बादामी के चालुक्यों का सबसे प्रतापी शासक था। ऐहोल का यह अभिलेख, जिसे उसके दरबारी कवि रविकीर्ति ने संस्कृत में रचा, उसकी उपलब्धियों की प्रशंसा करता है और हर्षवर्धन के विरुद्ध उसकी सफलता का उल्लेख करता है, जो इस बात का एकमात्र पक्का प्रमाण है कि कन्नौज के शासक को नर्मदा पर रोका गया। विकल्प A गलत है क्योंकि इस अभिलेख में हर्षवर्धन पराजित पक्ष है, और उसका ज्ञान बाणभट्ट के हर्षचरित तथा ह्वेनसांग के विवरण से होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि नरसिंहवर्मन प्रथम वह पल्लव शासक था जिसने बाद में पुलकेशिन द्वितीय को पराजित कर मारा और वातापिकोंड की उपाधि ली। विकल्प D गलत है क्योंकि दंतिदुर्ग ने आठवीं शताब्दी के मध्य में राष्ट्रकूट सत्ता की स्थापना की, जो इस अभिलेख से बहुत बाद है।