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GK24
भारतीय इतिहासआसानपूछा गया: CDS · CDS-I 2023, GK

'भक्ति' के विभिन्न रूपों को दर्शाने वाला निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

  1. A.सगुण : गुणों वाले ईश्वर में विश्वास
  2. B.निर्गुण : बिना गुणों वाले ईश्वर में विश्वास
  3. C.आलवार : शक्ति की भक्ति में विश्वास करते थे
  4. D.नयनार : शिव की भक्ति में विश्वास करते थे

सही उत्तर

C. आलवार : शक्ति की भक्ति में विश्वास करते थे

व्याख्या

सही उत्तर है C, आलवार : शक्ति की भक्ति में विश्वास करते थे। आलवार विष्णु के भक्त थे, देवी शक्ति के नहीं, इसलिए यह युग्म गलत है।

भक्ति आंदोलन छठी से नौवीं शताब्दी के बीच तमिलनाडु में संत-कवियों के दो समूहों से शुरू हुआ। बारह आलवारों ने विष्णु की स्तुति में गीत गाए, जिनका संग्रह नालायिर दिव्य प्रबंधम है; आंडाल इनमें एकमात्र महिला थीं। तिरसठ नयनार शिव के भक्त थे और उनके भजन तेवारम में संकलित हैं; अप्पर, संबंदर और सुंदरर इनमें प्रसिद्ध हैं। आगे चलकर भक्ति सगुण धारा (तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई) और निर्गुण धारा (कबीर, गुरु नानक) में बँट गई।

A सही है, सगुण भक्ति में राम या कृष्ण जैसे रूप और गुणों वाले ईश्वर की उपासना होती है। B सही है, निर्गुण भक्ति निराकार ईश्वर की उपासना है। D सही है, नयनार शैव संत थे।

परीक्षा टिप: आलवार = विष्णु (12 संत), नयनार = शिव (63 संत); सगुण साकार, निर्गुण निराकार।

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Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · NDA-I 2019, GATमध्यम

कथन I: अंग्रेज़ों ने भारत पर भारतीय सिविल सेवा के नेतृत्व वाली एक आधुनिक नौकरशाही के माध्यम से शासन किया, जिसके सदस्यों की भर्ती खुली प्रतियोगिता पर आधारित योग्यता से होती थी कथन II: भारतीय सिविल सेवा भारतीयों की पूरे मन से भागीदारी पर आधारित थी

  1. A.दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है
  2. B.दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं, परंतु कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है
  3. C.कथन I सत्य है, परंतु कथन II असत्य है
  4. D.कथन I असत्य है, परंतु कथन II सत्य है
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सही उत्तर: C. कथन I सत्य है, परंतु कथन II असत्य है

भारतीय सिविल सेवा एक आधुनिक, योग्यता-आधारित नौकरशाही थी, जिसमें 1853 से खुली प्रतियोगी परीक्षाओं से भर्ती होती थी, पर व्यवहार में भारतीय दशकों तक इससे बाहर रखे गए।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · NDA-II 2023, GATकठिन

सोलहवीं शताब्दी के ग्रंथ चंडीमंगल की रचना किसने की थी?

  1. A.हेम सरस्वती
  2. B.माधव कंदली
  3. C.तुकाराम
  4. D.मुकुंदराम चक्रवर्ती
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सही उत्तर: D. मुकुंदराम चक्रवर्ती

'कविकंकण' उपाधि से सम्मानित बांग्ला कवि मुकुंदराम चक्रवर्ती ने सोलहवीं शताब्दी में चंडीमंगल की रचना की। मंगलकाव्य किसी देवता की स्तुति में लिखी गई लंबी बांग्ला कथा-कविताएँ हैं, और चंडीमंगल देवी चंडी का गुणगान करता है।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · NDA-II 2024, GATमध्यम

महात्मा गांधी के दांडी मार्च से प्रेरित होकर तमिलनाडु में सी. राजगोपालाचारी ने नमक यात्रा कहाँ से कहाँ तक निकाली?

  1. A.तिरुनेलवेली से नागरकोइल
  2. B.कांचीपुरम से महाबलीपुरम
  3. C.त्रिचिनापल्ली से तंजौर तट पर वेदारण्यम
  4. D.चेन्नई से वेल्लोर
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सही उत्तर: C. त्रिचिनापल्ली से तंजौर तट पर वेदारण्यम

अप्रैल 1930 में सी. राजगोपालाचारी स्वयंसेवकों के एक दल को तिरुचिरापल्ली, जिसे तब त्रिचिनापल्ली कहा जाता था, से तंजौर तट पर वेदारण्यम ले गए, जहाँ उन्होंने नमक कानून तोड़ा।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2018, GS Paper Iमध्यम

निम्नलिखित में से किस विदेशी यात्री ने भारत के हीरों और हीरे की खानों के बारे में विस्तार से चर्चा की है?

  1. A.फ्रांस्वा बर्नियर
  2. B.जीन-बैप्टिस्ट टैवर्नियर
  3. C.जीन डी थेवेनो
  4. D.अब्बे बार्थेलेमी कैरे
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सही उत्तर: B. जीन-बैप्टिस्ट टैवर्नियर

वे फ्रांसीसी रत्न व्यापारी थे और उनके यात्रा वृत्तांत में भारत के हीरों और खानों का विस्तृत वर्णन है। टैवर्नियर ने लगभग 1630 से 1668 के बीच पूर्व की छह यात्राएँ कीं और शाहजहाँ व औरंगज़ेब के शासनकाल में कई बार भारत आए।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2016, GS Paper Iकठिन

भारत के इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए : (शब्द : विवरण) 1. एरिपत्ति : वह भूमि, जिसका राजस्व गाँव के तालाब के रखरखाव के लिए अलग रखा जाता था 2. तनियूर : किसी एक ब्राह्मण या ब्राह्मणों के समूह को दान किए गए गाँव 3. घटिका : सामान्यतः मंदिरों से जुड़े विद्यालय उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?

  1. A.1 और 2
  2. B.केवल 3
  3. C.2 और 3
  4. D.1 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 1 और 3

एरिपत्ति और घटिका का विवरण सही है, पर तनियूर ब्राह्मणों को दान किए गए गाँव नहीं थे। ये शब्द आरंभिक मध्यकालीन दक्षिण भारत, विशेषकर पल्लव और चोल काल के अभिलेखों में मिलते हैं।