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GK24
बैंकिंग और वित्तमध्यम

बैंकों से जिस एफआई संतृप्ति अभियान में भाग लेने को कहा गया, वह किस अवधि में चलेगा?

  1. A.1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026
  2. B.21 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026
  3. C.21 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027
  4. D.1 नवंबर से 31 दिसंबर 2026

सही उत्तर

B. 21 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026

व्याख्या

सही उत्तर 21 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 है। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव ने बैंकों से इसी अवधि में चलने वाले संतृप्ति अभियान में पूरे उत्साह से भाग लेने और समाज के कमजोर वर्गों की बैंकिंग आवश्यकताओं को पूरा करने पर अधिक जोर देने का आग्रह किया। विकल्प A गलत है क्योंकि अभियान महीने की पहली तारीख से नहीं, बाद में शुरू होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि इसमें अभियान को वित्तीय वर्ष के अंत तक खींच दिया गया है, जो घोषणा में नहीं है। विकल्प D में भी प्रारंभ तिथि अगले महीने कर दी गई है, इसलिए वह गलत है। परीक्षा में ऐसे अभियानों की प्रारंभ और समाप्ति तिथि दोनों पूछी जाती हैं, इसलिए दोनों लिख लें।

पूरा लेख पढ़ें: वित्तीय समावेशन योजनाओं की समीक्षा, एफआई संतृप्ति अभियान तय

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Q1.बैंकिंग और वित्तआसान

सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के साथ वित्तीय समावेशन योजनाओं की प्रगति पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता किसने की?

  1. A.भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर
  2. B.सचिव, वित्तीय सेवा विभाग
  3. C.केंद्रीय वित्त मंत्री
  4. D.भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सचिव, वित्तीय सेवा विभाग

व्याख्या

सही उत्तर सचिव, वित्तीय सेवा विभाग है, अर्थात संजय लोहिया, जिन्होंने नई दिल्ली में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों और प्रमुख निजी बैंकों के कार्यकारी निदेशकों के साथ यह समीक्षा की, जिसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहे। विकल्प A गलत है क्योंकि यह बैठक केंद्रीय बैंक ने नहीं, बल्कि वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने बुलाई थी। विकल्प C गलत है क्योंकि बैठक मंत्री स्तर की नहीं, सचिव स्तर की थी। विकल्प D गलत है क्योंकि बैंकों के प्रमुख इस बैठक में प्रतिभागी थे, अध्यक्ष नहीं। याद रखें कि जन धन, जन सुरक्षा और मुद्रा जैसी योजनाएं इसी विभाग के अधीन आती हैं। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के बैंकों के कार्यकारी निदेशक भी उपस्थित थे, और उनसे इन योजनाओं में अपनी भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया गया।

Q2.बैंकिंग और वित्तमध्यम

पीएमजेजेबीवाई और पीएमएसबीवाई के नए लाभार्थियों का नामांकन किस पोर्टल के माध्यम से किया जाना है?

  1. A.जन धन दर्शक पोर्टल
  2. B.उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल
  3. C.जन सुरक्षा पोर्टल
  4. D.पीएम स्वनिधि पोर्टल
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. जन सुरक्षा पोर्टल

व्याख्या

सही उत्तर जन सुरक्षा पोर्टल है। बैंकों को निर्देश दिया गया कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के सभी नए नामांकन इसी पोर्टल से करें, क्योंकि इसे सभी बैंकों और बीमा कंपनियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे आंकड़ों की गुणवत्ता और रोजमर्रा के कामकाज की सुगमता बढ़ेगी। विकल्प A गलत है क्योंकि वह मंच बैंकिंग सुविधाओं का पता लगाने से जुड़ा है, बीमा नामांकन से नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि उद्यम पंजीकरण का इन दोनों बीमा योजनाओं से कोई संबंध नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की ऋण योजना अलग कार्यक्रम है, भले उसकी समीक्षा भी इसी बैठक में हुई। इसी बैठक में बैंकों को दावे की पात्रता के बारे में जागरूकता बढ़ाने तथा दावों से जुड़ी शिकायतों का निपटारा विशेष सावधानी से करने का निर्देश भी दिया गया।

Q3.बैंकिंग और वित्तमध्यम

अक्टूबर 2026 में सूचीबद्ध नाबकिसान के WASH सामाजिक बॉन्ड की ब्याज दर क्या है?

  1. A.7.10% वार्षिक
  2. B.7.75% वार्षिक
  3. C.8.10% वार्षिक
  4. D.8.60% वार्षिक
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 8.10% वार्षिक

व्याख्या

सही उत्तर 8.10% वार्षिक है। नाबकिसान ने जो बॉन्ड मुंबई के राष्ट्रीय शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध कराया, वह पाँच वर्ष चलता है और परिपक्वता यानी सितंबर 2031 तक अपने धारकों को यही दर देता रहेगा। क्रिसिल और केयर, दोनों रेटिंग एजेंसियों ने इस बॉन्ड को घरेलू स्तर की सर्वोच्च गुणवत्ता का माना और AAA (स्थिर) श्रेणी दी। इसी वजह से इस स्तर की ब्याज दर पर बिक्री के लिए रखी रकम से 1.8 गुना अधिक बोलियाँ आईं और कंपनी ₹180 करोड़ जुटा सकी। विकल्प A और B में दी गई 7.10% तथा 7.75% दरें वास्तविक दर से कम हैं, जबकि विकल्प D की 8.60% दर उससे अधिक है; इनमें से कोई भी दर इस निर्गम में नहीं दी गई। परीक्षा में बॉन्ड से जुड़े प्रश्न आमतौर पर पाँच आंकड़ों में से किसी एक पर होते हैं, इसलिए ब्याज दर के साथ अवधि, परिपक्वता का महीना, अभिदान और जुटाई गई रकम भी साथ ही याद करें।

Q4.बैंकिंग और वित्तआसान

नाबकिसान फाइनेंस लिमिटेड ने भारत के पहले WASH सामाजिक बॉन्ड से कितनी राशि जुटाई?

  1. A.₹90 करोड़
  2. B.₹180 करोड़
  3. C.₹250 करोड़
  4. D.₹360 करोड़
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ₹180 करोड़

व्याख्या

सही उत्तर ₹180 करोड़ है। नाबार्ड की अनुषंगी नाबकिसान फाइनेंस लिमिटेड ने जल, स्वच्छता और साफ-सफाई के काम के लिए समर्पित देश का पहला सामाजिक बॉन्ड बाज़ार में उतारा और निवेशकों ने बिक्री के लिए रखे बॉन्ड से 1.8 गुना अधिक की बोली लगाई। इसी मांग के कारण कंपनी ₹180 करोड़ जुटा सकी, जो गाँवों और उन इलाकों में सुरक्षित पानी, शौचालय तथा साफ-सफाई की सेवाओं पर कर्ज़ के रूप में लगेगी जिन्हें कर्ज़दाता आमतौर पर छोड़ देते हैं। विकल्प A यानी ₹90 करोड़ असली रकम का आधा है और निर्गम से इसका कोई संबंध नहीं है। विकल्प C यानी ₹250 करोड़ तथा विकल्प D यानी ₹360 करोड़ बड़ी गोल संख्याएँ हैं, जो कभी जुटाई ही नहीं गईं; मांग अधिक रहने पर भी निर्गम तय राशि पर ही बंद हुआ। परीक्षा के लिहाज़ से इस रकम को बॉन्ड की बाकी शर्तों के साथ याद रखें — पाँच वर्ष की अवधि, 8.10% वार्षिक ब्याज, सितंबर 2031 में परिपक्वता तथा क्रिसिल और केयर दोनों से AAA (स्थिर) रेटिंग।

Q5.बैंकिंग और वित्तआसान

भारत का पहला WASH सामाजिक बॉन्ड जारी करने वाली नाबकिसान फाइनेंस लिमिटेड किस संस्था की अनुषंगी है?

  1. A.भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक
  2. B.राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
  3. C.राष्ट्रीय आवास बैंक
  4. D.भारतीय निर्यात-आयात बैंक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक

व्याख्या

सही उत्तर राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक यानी नाबार्ड है। नाबकिसान फाइनेंस लिमिटेड नाबार्ड की अनुषंगी कंपनी है, और इस बॉन्ड की सूचीबद्धता को ऐसा कदम बताया गया जो ग्रामीण विकास के लिए नए वित्तीय तरीकों के प्रति नाबार्ड तथा नाबकिसान, दोनों की प्रतिबद्धता को मज़बूत करता है। नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी ने समारोह में कहा कि विकास संस्थाएँ ऐसी परियोजनाओं को इतना कर्ज़-योग्य बना देती हैं कि वाणिज्यिक बैंक और पूंजी बाज़ार भी उनमें हिस्सा लेने लगते हैं। विकल्प A यानी भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए काम करता है, इस कंपनी से उसका कोई नाता नहीं है। विकल्प C यानी राष्ट्रीय आवास बैंक आवास वित्त का पुनर्वित्त करता है और विकल्प D यानी भारतीय निर्यात-आयात बैंक विदेश व्यापार को सहारा देता है; यहाँ इनकी कोई भूमिका नहीं है। मूल संस्था याद रखना ज़रूरी है क्योंकि उसी से समझ आता है कि यह रकम ग्रामीण और वंचित परिवारों पर क्यों केंद्रित है।