असम के वैष्णव संत शंकरदेव के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. उनकी शिक्षाएं प्रायः भागवती धर्म के नाम से जानी जाती हैं। 2. उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान के प्रसार के लिए सत्र या मठों तथा नामघर या प्रार्थना-गृहों की स्थापना को प्रोत्साहित किया। 3. उनकी प्रमुख रचनाओं में कीर्तन-घोषा शामिल है। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.1, 2 और 3
- D.केवल 3
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, 1, 2 और 3। शंकरदेव के बारे में तीनों कथन सही हैं। शंकरदेव पंद्रहवीं शताब्दी के अंत और सोलहवीं शताब्दी के आरंभ में असम के प्रमुख वैष्णव संत थे। उनकी शिक्षाएं भागवती धर्म कहलाती हैं, क्योंकि वे भगवद्गीता और भागवत पुराण पर आधारित थीं; उन्होंने विष्णु, विशेषकर कृष्ण रूप के प्रति पूर्ण भक्ति और नाम-कीर्तन पर बल दिया। इस भक्ति के प्रसार के लिए उन्होंने सत्रों, यानी शिक्षा देने वाले मठों, और नामघरों, यानी गांव के प्रार्थना-गृहों, की स्थापना को बढ़ावा दिया; दोनों आज भी असमिया जीवन का हिस्सा हैं और माजुली द्वीप के सत्र सबसे प्रसिद्ध हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में कीर्तन-घोषा है, और उन्होंने अंकीया नाट तथा सत्रीया नृत्य परंपरा भी शुरू की। विकल्प A गलत है, क्योंकि इसमें कथन 3 छूट गया है। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें कथन 1 छूट गया है। विकल्प D गलत है, क्योंकि कथन 1 और 2 भी सही हैं। परीक्षा टिप: असम के शंकरदेव: भागवती धर्म, सत्र और नामघर, कीर्तन-घोषा।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा परिवर्तन भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 द्वारा नहीं लाया गया था?
- A.भारत शासन अधिनियम, 1935 को अंतरिम संविधान के रूप में संशोधित किया गया।
- B.भारत एक पराधीन देश (डिपेंडेंसी) नहीं रहा।
- C.नया संविधान बनने तक ताज (क्राउन) सत्ता का स्रोत बना रहा।
- D.गवर्नर-जनरल भारतीय डोमिनियन का संवैधानिक प्रमुख था।
उत्तर देखें
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ने ताज को सत्ता का स्रोत बनाए नहीं रखा; इसने 15 अगस्त 1947 से भारत पर ब्रिटिश सत्ता समाप्त कर दी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए :
1. गजपति - उड़ीसा के एक शक्तिशाली राजवंश का नाम
2. अश्वपति - दक्कन के सुल्तान
3. नरपति - विजयनगर के राय
ऊपर दिए गए युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1, 2 और 3
- D.इनमें से कोई नहीं
उत्तर देखें
ये तीनों उपाधियां पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दी के भारत में प्रचलित थीं और तीनों युग्म सही सुमेलित हैं। गजपति का अर्थ है 'हाथियों का स्वामी'; यह उड़ीसा के एक शक्तिशाली शासक वंश की उपाधि थी, जो पूर्वी गंगों के बाद सत्ता में आया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1857 के विद्रोह के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.यह राजाओं, नवाबों और तालुकदारों द्वारा सावधानी से संगठित और नियोजित विद्रोह था
- B.इसके भड़कने और फैलने में अफ़वाहों और भविष्यवाणियों की कोई भूमिका नहीं थी
- C.1857 में विद्रोहियों की घोषणाओं में बार-बार जाति और धर्म का भेद किए बिना जनता के सभी वर्गों से अपील की गई
- D.अंग्रेज़ विद्रोहियों को जल्दी और आसानी से नियंत्रित करने में सफल रहे
उत्तर देखें
विद्रोही चाहते थे कि हिंदू और मुसलमान मिलकर अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध खड़े हों। बहादुर शाह ज़फ़र के नाम से जारी घोषणाओं में सबको लड़ाई में शामिल होने को कहा गया और उस मुगल अतीत को याद किया गया जब विभिन्न समुदाय साथ रहते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्राचीन भारत आए किस चीनी यात्री ने 'रिकॉर्ड्स ऑफ़ द ट्रैवल्स टू मिडिल इंडिया' नामक डायरी लिखी?
- A.वांग शुआनत्से
- B.ह्वेनसांग
- C.इत्सिंग
- D.ली यिबियाओ
उत्तर देखें
सातवीं सदी में कई बार भारत आए तांग राजदूत वांग शुआनत्से ने 'मध्य भारत की यात्राओं का वृत्तांत' नामक विवरण लिखा, जिसके केवल कुछ अंश बचे हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पूर्वी भारत के निम्नलिखित ज़िलों में से किसने 1947 में पाकिस्तान में शामिल होने या न होने का निर्णय करने के लिए जनमत संग्रह कराया था?
- A.सिलहट
- B.गोलपाड़ा
- C.कछार
- D.जलपाईगुड़ी
उत्तर देखें
उस समय असम का मुस्लिम-बहुल ज़िला सिलहट जुलाई 1947 में जनमत संग्रह में गया, और वहाँ के लोगों ने पूर्वी बंगाल में शामिल होने के पक्ष में मत दिया, जो पाकिस्तान का भाग बना।
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