अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का विषय क्या था?
- A.आशा के पंख
- B.संकट से उबरना - भारत के गिद्धों का संरक्षण
- C.सफाईकर्मियों को बचाएं
- D.स्वच्छ भारत के लिए गिद्ध
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 'संकट से उबरना - भारत के गिद्धों का संरक्षण' है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने हरियाणा के पंचकुला में इसी विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया, और विज्ञप्ति अंत में भी इसी वाक्यांश से उस यात्रा को बताती है जो देश ने विज्ञान, नीति, संरक्षण प्रजनन, सुरक्षित भूदृश्यों और सामुदायिक भागीदारी के जरिये तय की है। विकल्प A, C और D गढ़े हुए नारे हैं और विज्ञप्ति में इनमें से कोई नहीं आता। विषय को पूरे आयोजन के ब्योरे के साथ याद रखें, क्योंकि प्रश्न इसी तरह बनते हैं: अवसर है अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026, स्थान है हरियाणा का पंचकुला, मंत्री हैं भूपेंद्र यादव, हरियाणा के मंत्री हैं राव नरबीर सिंह, और साझेदार हैं केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, हरियाणा वन एवं वन्यजीव विभाग, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी तथा पिंजौर का जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र।
पूरा लेख पढ़ें: अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 पंचकुला में मनाया गया
अभ्यास प्रश्न
पिंजौर के जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र ने 2025-26 में कितने गिद्धों को आश्रय दिया?
- A.245
- B.356
- C.412
- D.180
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विज्ञप्ति दर्ज करती है कि पिंजौर के जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र ने 2025-26 में इतने गिद्धों को आश्रय दिया और इसी अवधि में 35 चूजों का सफल प्रजनन कराया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पिंजौर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र किस राज्य में है?
- A.पंजाब
- B.हिमाचल प्रदेश
- C.हरियाणा
- D.उत्तराखंड
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पिंजौर हरियाणा में है, और विज्ञप्ति वहां के केंद्र को हरियाणा वन विभाग तथा बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की साझा पहल बताती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 पर कौन सी कॉफी टेबल बुक जारी की गई?
- A.जटायु की कहानी: भारत के गिद्धों का संरक्षण
- B.सफाईकर्मी की वापसी
- C.भारत का गिद्ध एटलस
- D.आकाश के प्रहरी
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विज्ञप्ति के अनुसार यह कॉफी टेबल बुक पंचकुला के उद्घाटन सत्र में जारी की गई। इसमें देश की गिद्ध संरक्षण कथा दर्ज है, जो घटती आबादी से चलकर पिंजौर केंद्र पर टिके सफल प्रजनन संरक्षण कार्यक्रम तक पहुंचती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2014-15 से एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से कितनी विदेशी मुद्रा बची है?
- A.62,000 करोड़ रुपये से अधिक
- B.1.01 लाख करोड़ रुपये से अधिक
- C.1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक
- D.1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक
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मंत्रालय ने ईएसवाई 2014-15 से कार्यक्रम की चार संचयी उपलब्धियां बताईं - इतनी विदेशी मुद्रा की बचत, लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रतिस्थापन, लगभग 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड में कमी और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का हस्तांतरण।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कर्नाटक में जांचे गए नमूनों में एथेनॉल की औसत मात्रा कितनी दर्ज हुई?
- A.19.30 प्रतिशत
- B.21.50 प्रतिशत
- C.26 प्रतिशत
- D.31 प्रतिशत
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कर्नाटक में अलग-अलग स्थानों और तीनों तेल विपणन कंपनियों से लिए गए सभी 56 नमूने निर्धारित विनिर्देश के अनुरूप पाए गए, जिनमें एथेनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच रही और औसत यही आंकड़ा निकला।
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