आइन-ए-अकबरी के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.इसे अबुल फ़ज़ल ने लिखा था।
- B.यह अकबरनामा नामक एक बड़ी कृति का भाग है।
- C.इसमें मुग़ल साम्राज्य को विविध जनसंख्या और मिश्रित संस्कृति वाला बताया गया है।
- D.इसे बाद में शाहजहाँ के आदेश पर सादुल्लाह ख़ान ने संशोधित किया।
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है D, इसे बाद में शाहजहाँ के आदेश पर सादुल्लाह ख़ान ने संशोधित किया। ऐसा कोई संशोधन नहीं हुआ; आइन-ए-अकबरी अकबर के शासनकाल में पूरी हुई अबुल फ़ज़ल की अपनी कृति है।
अकबर के निकट मित्र और प्रमुख दरबारी अबुल फ़ज़ल ने तीन खंडों में अकबरनामा लिखा। पहले दो खंडों में अकबर के पूर्वजों और उसके शासन का इतिहास है, और तीसरा खंड आइन-ए-अकबरी है, जो लगभग 1598 में पूरा हुआ। यह साम्राज्य का प्रशासनिक और सांख्यिकीय विवरण है, जिसमें शाही परिवार, सेना, राजस्व, सूबों तथा लोगों के धर्म, शिल्प और रीति-रिवाजों का वर्णन है। सादुल्लाह ख़ान शाहजहाँ का वज़ीर था, पर उसका इस ग्रंथ के संशोधन से कोई संबंध नहीं था; शाहजहाँ के शासन का इतिहास अब्दुल हमीद लाहौरी ने पादशाहनामा में लिखा।
A, B और C सही कथन हैं। लेखक अबुल फ़ज़ल हैं, आइन अकबरनामा का तीसरा भाग है और इसमें साम्राज्य को अनेक समुदायों वाली साझा, मिश्रित संस्कृति की भूमि के रूप में दिखाया गया है।
Exam tip: अकबरनामा और आइन-ए-अकबरी, अबुल फ़ज़ल; पादशाहनामा, अब्दुल हमीद लाहौरी; हुमायूँनामा, गुलबदन बेगम।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंलॉर्ड वेलेज़ली की सहायक संधि प्रणाली की शर्तों में निम्नलिखित में से कौन-सी शामिल नहीं थी?
- A.अंग्रेज़ अपने सहयोगी की रक्षा करेंगे।
- B.सहयोगी अन्य शासकों से समझौते करने या युद्ध करने के लिए स्वतंत्र था।
- C.सहयोगी के क्षेत्र में एक ब्रिटिश सैन्य टुकड़ी तैनात रहेगी।
- D.सहयोगी को ब्रिटिश सैन्य टुकड़ी के रखरखाव के लिए संसाधन देने होंगे।
उत्तर देखें
लॉर्ड वेलेज़ली (गवर्नर-जनरल 1798–1805) की सहायक संधि में भारतीय शासक यही स्वतंत्रता छोड़ देता था: कंपनी की अनुमति के बिना वह न युद्ध कर सकता था, न संधि कर सकता था, न अन्य यूरोपीयों को नौकरी दे सकता था, और उसे अपने दरबार में एक ब्रिटिश रेज़िडेंट रखना पड़ता था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सहजिया संप्रदाय, जिसकी शुरुआत 10वीं और 11वीं सदी में खोजी जा सकती है, सामान्यतः किससे संबंधित है?
- A.आरंभिक भक्ति परंपराओं से
- B.एक प्रकार के आरंभिक सूफ़ीवाद से
- C.आरंभिक उपनिषदीय दर्शन से
- D.बौद्ध धर्म से
उत्तर देखें
सहजिया संप्रदाय पूर्वी भारत, खासकर बंगाल, में उत्तरकालीन तांत्रिक बौद्ध धर्म से विकसित हुआ और इसे अक्सर सहजयान कहा जाता है, जो वज्रयान की एक शाखा है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर मुगल काल में सैयद बंधुओं के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
- A.उन्होंने जहाँदार शाह को सत्ता में पहुँचाया।
- B.उनके हाथ में प्रशासनिक शक्ति थी।
- C.उन्होंने सहिष्णु धार्मिक नीति अपनाई।
- D.उन्होंने राजा शाहू के साथ समझौता किया।
उत्तर देखें
जहाँदार शाह 1712 में ज़ुल्फ़िकार ख़ाँ की मदद से गद्दी पर बैठा था, जबकि सैयद बंधुओं, अब्दुल्ला ख़ाँ और हुसैन अली ख़ाँ, ने 1713 में उसके भतीजे फ़र्रुख़सियर की मदद कर उसे हराया और मरवा दिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आलवार कौन थे?
- A.वे जो विष्णु की भक्ति में डूबे रहते थे
- B.शिव के भक्त
- C.वे जो ईश्वर के निराकार रूप की उपासना करते थे
- D.शक्ति के भक्त
उत्तर देखें
आलवार बारह तमिल कवि-संत थे, जो लगभग छठी से नौवीं सदी के बीच हुए; 'आलवार' का अर्थ ही है विष्णु की भक्ति में 'डूबे हुए'।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मिहिर भोज की ग्वालियर प्रशस्ति के रचयिता कौन थे?
- A.नागभट
- B.वत्सराज
- C.बालादित्य
- D.कक्कुक
उत्तर देखें
ग्वालियर प्रशस्ति गुर्जर-प्रतिहार राजा मिहिर भोज (भोज प्रथम, लगभग 836–885 ई.) की संस्कृत प्रशंसा है, जिसकी रचना कवि बालादित्य ने की थी।
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