आई-ओईसीएम मान्यता के आवेदन सबसे पहले किस निकाय को भेजे जाते हैं?
- A.राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण
- B.पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- C.यूएनईपी-डब्ल्यूसीएमसी
- D.राज्य जैव विविधता बोर्ड
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण है। केंद्र और राज्य सरकार के विभागों, एजेंसियों, संस्थानों, स्थानीय निकायों तथा जैव विविधता प्रबंधन समितियों के आवेदन प्राधिकरण के पास जाते हैं, जो उनका प्रारंभिक परीक्षण करता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि मंत्रालय प्रक्रिया के अंतिम चरण में आता है और प्राधिकरण के निर्णय के बाद मान्यता प्रदान करता है; वह आवेदन प्राप्त करने वाला निकाय नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि राज्य जैव विविधता बोर्ड या संघ राज्य क्षेत्र जैव विविधता परिषद को आवेदन तभी मिलता है जब प्राधिकरण उसे आगे भेजता है, और उसका काम सूचना की पुष्टि कर अनुशंसा लौटाना है। विकल्प C गलत है, क्योंकि यूएनईपी-डब्ल्यूसीएमसी की भूमिका प्रकाशन चरण में है, जब मान्यता प्राप्त स्थल विश्व संरक्षित क्षेत्र डेटाबेस पर दर्ज किए जाते हैं। प्रक्रिया का क्रम याद रखना चाहिए, क्योंकि प्रश्न अक्सर पूछते हैं कि किस चरण पर कौन निकाय काम करता है।
पूरा लेख पढ़ें: आई-ओईसीएम दिशानिर्देश 2026 सीबीडी कॉप-17 में जारी
अभ्यास प्रश्न
भारत के आई-ओईसीएम अभिनिर्धारण दिशानिर्देश 2026 सीबीडी कॉप-17 के दौरान किस शहर में जारी किए गए?
- A.कैली
- B.येरेवन
- C.बाकू
- D.मॉन्ट्रियल
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जैव विविधता अभिसमय के पक्षकारों का सत्रहवाँ सम्मेलन वहीं हुआ और उसी के सहवर्ती कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 3 नवंबर 2026 को ये दिशानिर्देश जारी किए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आई-ओईसीएम दिशानिर्देशों को लागू करने वाली जीईएफ-8 परियोजना की अवधि कितनी है?
- A.48 महीने
- B.60 महीने
- C.72 महीने
- D.84 महीने
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यह परियोजना 15 मई 2026 से 15 मई 2032 तक चलेगी, यानी ठीक छह वर्ष, और इसे स्थानीय परियोजना मूल्यांकन समिति ने 29 दिसंबर 2025 को मंजूरी दी थी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जीईएफ-8 परियोजना भारत के संरक्षण दायरे में पहले से संरक्षित क्षेत्र के अतिरिक्त कितनी वृद्धि का लक्ष्य रखती है?
- A.27 प्रतिशत के ऊपर 3 प्रतिशत
- B.25 प्रतिशत के ऊपर 5 प्रतिशत
- C.20 प्रतिशत के ऊपर 10 प्रतिशत
- D.23 प्रतिशत के ऊपर 7 प्रतिशत
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परियोजना का लक्ष्य भारत के भूमि एवं समुद्री क्षेत्र का तीन प्रतिशत हिस्सा संरक्षण दायरे में जोड़ना है, जो पहले से संरक्षित सत्ताईस प्रतिशत के अतिरिक्त होगा, और यह ओईसीएम तथा समुदाय एवं निजी संरक्षण क्षेत्रों सहित अन्य पहलों के जरिये हासिल किया जाएगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एनडीसी-टीआईए द्वितीय चरण की पहल को जर्मन सरकार के किस कार्यक्रम से समर्थन मिला है?
- A.हरित जलवायु कोष
- B.अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (आईकेआई)
- C.वैश्विक पर्यावरण सुविधा
- D.स्वच्छ विकास तंत्र
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यही एशिया के लिए क्षेत्रीय पहल एनडीसी-टीआईए द्वितीय को समर्थन देता है, और इसी के तहत नीति आयोग तथा जीआईजेड ने 3 नवंबर 2026 को भारत में सड़क माल ढुलाई का डीकार्बोनाइजेशन तेज करने के लिए कार्यान्वयन समझौता किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एनडीसी-टीआईए द्वितीय चरण के तहत हुए कार्यान्वयन समझौते का केंद्रबिंदु कौन सा क्षेत्र है?
- A.सड़क माल ढुलाई का डीकार्बोनाइजेशन
- B.मेट्रो रेल नेटवर्क का विस्तार
- C.उर्वरक संयंत्रों के लिए हरित हाइड्रोजन
- D.अपतटीय पवन ऊर्जा उत्पादन
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समझौता परियोजना भागीदारों के सहयोग को औपचारिक रूप देता है, जिससे सड़क से माल की आवाजाही में उत्सर्जन घटाने का काम तेज हो, और इसे भारत के उस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है जिसमें परिवहन प्रणाली टिकाऊ, ऊर्जा-सक्षम और कम कार्बन वाली बनेगी।
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