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GK24
रक्षामध्यम

9 सितंबर 2026 को भारत और श्रीलंका के बीच हुआ समझौता ज्ञापन किस उपकरण के उन्नयन से संबंधित है?

  1. A.डोर्नियर समुद्री गश्ती विमान
  2. B.श्रीलंकाई वायु सेना की एल 70 वायु रक्षा तोपें
  3. C.श्रीलंकाई नौसेना के अपतटीय गश्ती पोत
  4. D.श्रीलंकाई सेना के रडार केंद्र

सही उत्तर

B. श्रीलंकाई वायु सेना की एल 70 वायु रक्षा तोपें

व्याख्या

सही उत्तर श्रीलंकाई वायु सेना की एल 70 वायु रक्षा तोपें हैं। इनमें से छह तोपों का उन्नयन भारत सरकार के अनुदान के अंतर्गत किया जाएगा और ये तोपें पहले भारत ने ही श्रीलंका को दी थीं, इसलिए उन्नयन की जिम्मेदारी भी भारत के पास है। बताया गया उद्देश्य श्रीलंका की महत्वपूर्ण संपत्तियों की वायु रक्षा संरचना को मजबूत करना है। विकल्प A यानी डोर्नियर विमान और विकल्प C यानी अपतटीय गश्ती पोत इसलिए भ्रमित करते हैं क्योंकि भारत ने अतीत में श्रीलंका को समुद्री प्लेटफॉर्म दिए हैं और इस यात्रा में समुद्री सहयोग प्रमुख विषय रहा, पर उस दिन इन पर कोई समझौता नहीं हुआ। विकल्प D में वायु निगरानी का सही विचार तो है, पर सेवा और उपकरण दोनों गलत हैं। यात्रा का दूसरा समझौता ज्ञापन दोनों देशों के राष्ट्रीय कैडेट कोर और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालयों के सहयोग पर था, जिसे परीक्षक अक्सर साथ पूछते हैं।

पूरा लेख पढ़ें: राजनाथ सिंह कोलंबो में, भारत-श्रीलंका ने दो रक्षा समझौते किए

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Q1.रक्षाआसान

9 सितंबर 2026 को कोलंबो यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने श्रीलंका के किस राष्ट्रपति से मुलाकात की?

  1. A.श्री अनुरा कुमारा दिसानायके
  2. B.डॉ. हरिनी अमरसूर्या
  3. C.श्री अरुणा जयसेकरा
  4. D.श्री रानिल विक्रमसिंघे
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. श्री अनुरा कुमारा दिसानायके

व्याख्या

सही उत्तर श्री अनुरा कुमारा दिसानायके हैं, जो श्रीलंका के राष्ट्रपति हैं और जिनसे रक्षा मंत्री ने कोलंबो में मुलाकात की। इसी मुलाकात में राष्ट्रपति ने भरोसा दिलाया कि श्रीलंका की भूमि का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के प्रतिकूल गतिविधियों के लिए कभी नहीं होने दिया जाएगा और उन्होंने सागर बंधु अभियान के तहत मिली राहत के लिए आभार जताया। विकल्प B यानी डॉ. हरिनी अमरसूर्या श्रीलंका की प्रधानमंत्री हैं, जिनसे राजनाथ सिंह ने उसी दिन अलग से भेंट की और उन्हें नारी शक्ति का प्रतीक बताया। यही सबसे बड़ा भ्रम है, क्योंकि दोनों मुलाकातें कुछ ही घंटों के अंतर पर हुईं। विकल्प C यानी श्री अरुणा जयसेकरा रक्षा उप मंत्री हैं, जो रक्षा मंत्रालय में रक्षा मंत्री के संबोधन के समय उपस्थित थे। विकल्प D में श्रीलंका के एक पूर्व नेता का नाम है, जिनका इस विज्ञप्ति में कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए दिसानायके को राष्ट्रपति और अमरसूर्या को प्रधानमंत्री के रूप में जोड़कर याद रखें।

Q2.रक्षाकठिन

श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय में रक्षा मंत्री द्वारा उल्लेखित 'महासागर' दृष्टिकोण का अर्थ क्या है?

  1. A.वैश्विक क्षेत्रों और मार्गों की सुरक्षा के लिए समुद्री गठबंधन
  2. B.सभी क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति
  3. C.साझा विकास और क्षेत्रीय सहायता के लिए समुद्री उन्नयन
  4. D.बंदरगाहों, जहाजरानी और वैश्विक पहुंच मार्गों की उन्नति का मिशन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सभी क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति

व्याख्या

सही उत्तर सभी क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति है। रक्षा मंत्री ने श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय में बोलते हुए यही विस्तार बताया और कहा कि आपसी तथा समग्र शब्द ही इस विचार का मूल हैं, क्योंकि वे तालमेल, सहयोग और मिलकर काम करने के महत्व को उजागर करते हैं। उन्होंने भारत और श्रीलंका की समुद्री साझेदारी को प्रधानमंत्री के इसी दृष्टिकोण से जोड़ा। विकल्प A, C और D बंदरगाह, गठबंधन, जहाजरानी और मार्ग जैसे परिचित समुद्री शब्दों से गढ़े गए हैं और अधूरा याद रखने वाले छात्र को सही लगते हैं। यही इस प्रकार के प्रश्नों का जाल है, क्योंकि संक्षिप्त नामों का अनुमान लगाना आसान होता है पर सटीक विस्तार याद रखना कठिन। इसे शब्द दर शब्द याद करें और उसी भाषण के दूसरे शब्द विश्व मित्र के साथ जोड़ लें, जिससे रक्षा मंत्री ने पड़ोस में भारत की भूमिका बताई।

Q3.रक्षामध्यम

बैठक में बताया गया कि भारत-मोरक्को द्विपक्षीय सहयोग की 70वीं वर्षगांठ किस वर्ष पड़ेगी?

  1. A.2026
  2. B.2027
  3. C.2028
  4. D.2030
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 2027

व्याख्या

सही उत्तर 2027 है। बैठक में दोनों पक्षों ने कहा कि भारत और मोरक्को के द्विपक्षीय सहयोग की सत्तरवीं वर्षगांठ उसी वर्ष आ रही है और इसी पड़ाव से पहले रक्षा संबंधों को व्यापक बनाने पर सहमति बनी। विकल्प A उस वर्ष को बताता है जिसमें बैठक हुई, क्योंकि बैठक 8 सितंबर 2026 को हुई थी; जल्दबाजी में पढ़ने वाला अभ्यर्थी यही चुन सकता है, जबकि बैठक का वर्ष और वर्षगांठ का वर्ष अलग तथ्य हैं। विकल्प C और विकल्प D ऐसे वर्ष हैं जिनका उल्लेख इस बैठक की विज्ञप्ति में है ही नहीं। इस समाचार को दोहराते समय तीन वर्ष अलग-अलग याद रखें: रक्षा समझौता ज्ञापन सितंबर 2025 में, समिति की पहली बैठक 2026 में और सहयोग की सत्तरवीं वर्षगांठ 2027 में।

Q4.रक्षामध्यम

भारत-मोरक्को संयुक्त रक्षा समिति जिस समझौता ज्ञापन से बनी, वह किसकी मोरक्को यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित हुआ था?

  1. A.प्रधानमंत्री
  2. B.रक्षा मंत्री
  3. C.विदेश मंत्री
  4. D.प्रमुख रक्षा अध्यक्ष
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रक्षा मंत्री

व्याख्या

सही उत्तर रक्षा मंत्री है। रक्षा सहयोग का समझौता ज्ञापन सितंबर 2025 में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की मोरक्को यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित हुआ था और संयुक्त रक्षा समिति उसी समझौते से बना संस्थागत तंत्र है। विकल्प A यानी प्रधानमंत्री गलत है, क्योंकि विज्ञप्ति इस समझौते को रक्षा मंत्री की यात्रा से जोड़ती है। विकल्प C यानी विदेश मंत्री भ्रमित करने वाला विकल्प है, क्योंकि बैठक में भारतीय दल में विदेश मंत्रालय के अधिकारी शामिल थे; परंतु बैठक में शामिल होना और मूल समझौते पर हस्ताक्षर करना अलग-अलग बातें हैं। विकल्प D यानी प्रमुख रक्षा अध्यक्ष गलत है, क्योंकि ऐसे समझौते राजनीतिक स्तर पर होते हैं। याद रखने का क्रम सरल है: 2025 की यात्रा से समझौता ज्ञापन और समझौता ज्ञापन से यह समिति बनी।

Q5.रक्षाआसान

भारत-मोरक्को संयुक्त रक्षा समिति की पहली बैठक किस शहर में हुई?

  1. A.रबात
  2. B.कासाब्लांका
  3. C.नई दिल्ली
  4. D.मुंबई
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. नई दिल्ली

व्याख्या

सही उत्तर नई दिल्ली है। भारत और मोरक्को की संयुक्त रक्षा समिति की पहली बैठक 8 सितंबर 2026 को भारत की राजधानी में हुई और मोरक्को का प्रतिनिधिमंडल इसी उद्देश्य से 7 से 10 सितंबर 2026 तक भारत के दौरे पर रहा। विकल्प A यानी रबात मोरक्को की राजधानी है, इसलिए यह सबसे आकर्षक गलत विकल्प है, परंतु इस बैठक की मेजबानी भारत ने की थी, मोरक्को ने नहीं। विकल्प B यानी कासाब्लांका मोरक्को का प्रसिद्ध व्यावसायिक शहर है और इस बैठक से इसका कोई संबंध नहीं है। विकल्प D यानी मुंबई इसलिए गलत है कि प्रतिनिधिमंडल का पूरा कार्यक्रम राष्ट्रीय समर स्मारक, डीपीएसयू भवन और आर्मी हॉस्पिटल तक सीमित था, जो सभी राजधानी में हैं। यह भी याद रखें कि समिति स्वयं सितंबर 2025 में मोरक्को में हुए समझौता ज्ञापन से बनी थी।