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GK क्विजभारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज: सेट 14

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज़ (सेट 14) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 18 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: सिंधु घाटी सभ्यता, विश्व इतिहास: क्रांतियां और विश्व युद्ध, वैदिक काल और अन्य। इनमें से 18 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 20 Oct 2020, Shift 1मध्यम

सिंधु घाटी सभ्यता का निम्नलिखित में से कौन सा स्थल सिंधु नदी के किनारे नहीं है?

  1. A.चन्हूदड़ो
  2. B.मोहनजोदड़ो
  3. C.रोपड़
  4. D.कोट दीजी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रोपड़

व्याख्या

सही उत्तर है C, रोपड़। रोपड़, जो अब पंजाब का रूपनगर है, सतलुज नदी के किनारे बसा है, सिंधु के नहीं। इसकी खुदाई 1953 में वाई.डी. शर्मा ने की थी और स्वतंत्र भारत में खोदा गया यह पहला हड़प्पाई स्थल था। यहाँ मनुष्य के साथ कुत्ते को दफनाने का साक्ष्य मिला, जो इसकी सबसे चर्चित खोज है। बाकी तीनों स्थल आज के पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सिंधु नदी के किनारे हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि चन्हूदड़ो सिंधु के किनारे है और मनके तथा शंख के कारखानों के लिए जाना जाता है; यही अकेला हड़प्पाई नगर है जिसमें दुर्ग नहीं मिला। विकल्प B गलत है, क्योंकि मोहनजोदड़ो, जहाँ विशाल स्नानागार और विशाल अन्नागार मिले, सिंधु के दाहिने किनारे पर है। विकल्प D गलत है, क्योंकि कोट दीजी सिंधु के बाएँ किनारे पर मोहनजोदड़ो के सामने है और इसी के नाम पर पूर्व-हड़प्पा संस्कृति का नाम पड़ा। परीक्षा टिप: स्थल और नदी साथ याद रखें - रोपड़ सतलुज, कालीबंगा घग्गर, लोथल भोगावा, हड़प्पा रावी।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: RRB ग्रुप D · 20 Sept 2018, Shift 3आसान

बोस्टन टी पार्टी की घटना किस वर्ष हुई थी?

  1. A.1773
  2. B.1776
  3. C.1775
  4. D.1774
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 1773

व्याख्या

सही उत्तर है A, 1773। बोस्टन टी पार्टी की घटना 16 दिसंबर 1773 को हुई, जब अमेरिकी उपनिवेशवासियों ने बोस्टन बंदरगाह में ब्रिटिश चाय के संदूक फेंक दिए थे। यह विरोध 1773 के चाय अधिनियम के खिलाफ था, जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी को उपनिवेशों में सामान्य शुल्क चुकाए बिना चाय बेचने की छूट दी और स्थानीय व्यापारियों का धंधा चौपट कर दिया। सन्स ऑफ लिबर्टी के सदस्य, जिनमें कुछ मोहॉक आदिवासियों के वेश में थे, ग्रिफिन्स व्हार्फ पर खड़े तीन जहाजों पर चढ़े और चाय के 342 संदूक पानी में डाल दिए। ब्रिटेन ने जवाब में असहनीय कानून लगाए, और उनसे उपजे गुस्से ने 1774 की पहली महाद्वीपीय कांग्रेस तथा 1775 से अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम की राह बनाई। B गलत है क्योंकि 1776 में 4 जुलाई को स्वतंत्रता की घोषणा स्वीकार की गई थी। C गलत है क्योंकि 1775 में लेक्सिंगटन और कॉनकॉर्ड से लड़ाई शुरू हुई। D गलत है क्योंकि 1774 असहनीय कानूनों और पहली महाद्वीपीय कांग्रेस का वर्ष है। परीक्षा टिप: बोस्टन टी पार्टी 1773, युद्ध की शुरुआत 1775, स्वतंत्रता की घोषणा 1776।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 25-Oct-2017, Shift 3आसान

कौन सा वेद सबसे प्राचीन वैदिक कालीन संस्कृति की जानकारी देता है?

  1. A.ऋग्वेद
  2. B.यजुर्वेद
  3. C.अथर्ववेद
  4. D.सामवेद
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ऋग्वेद

व्याख्या

सही उत्तर है A, ऋग्वेद। ऋग्वेद चारों वेदों में सबसे प्राचीन है, इसलिए वही आरंभिक वैदिक संस्कृति का चित्र देता है। इसमें 1,028 सूक्त हैं, जो दस मंडलों में बँटे हैं और उत्तर-पश्चिम के सप्त सिंधु प्रदेश में रचे गए। दूसरे से सातवें मंडल सबसे पुराने हैं, पहला और दसवाँ बाद में जोड़े गए। दसवें मंडल में पुरुष सूक्त है, जिसमें चार वर्णों का पहला उल्लेख मिलता है। गायत्री मंत्र भी ऋग्वेद से ही है। इसमें दिखने वाला समाज पशुपालक और कबीलाई है, जहाँ गाय धन है और इंद्र, अग्नि तथा वरुण प्रमुख देवता हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि यजुर्वेद यज्ञ की विधियाँ और मंत्र बताता है और उत्तर वैदिक काल का है। विकल्प C गलत है, क्योंकि अथर्ववेद चारों में अंतिम है और जादू-टोना, मंत्र तथा औषधि की बात करता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि सामवेद ऋग्वेद के मंत्रों को गायन में ढालता है और भारतीय शास्त्रीय संगीत का मूल है। परीक्षा टिप: क्रम याद रखें ऋग्, साम, यजुर्, अथर्व।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC Pre GS, 17 Dec 2023आसान

किस अधिवेशन में कांग्रेस नरम एवं गरम दल में विभाजित हो गई थी?

  1. A.बम्बई
  2. B.सूरत
  3. C.कलकत्ता
  4. D.नागपुर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सूरत

व्याख्या

सही उत्तर है B, सूरत। दिसंबर 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस नरम दल और गरम दल में बँट गई थी। अध्यक्ष कौन बने और 1905 के बंगाल विभाजन के बाद शुरू हुए स्वदेशी व बहिष्कार आंदोलन को कितना आगे ले जाया जाए, इन दो बातों पर दोनों गुटों में टकराव था। नरम दल के नेता फिरोजशाह मेहता और गोपाल कृष्ण गोखले रासबिहारी घोष को अध्यक्ष बनाना चाहते थे, जबकि गरम दल के बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिनचंद्र पाल 1906 के कड़े प्रस्तावों को बनाए रखना चाहते थे। अधिवेशन हंगामे में टूट गया और गरम दल 1916 के लखनऊ अधिवेशन में ही वापस लौटा। विकल्प A गलत है, क्योंकि बम्बई में 1885 में पहला अधिवेशन हुआ था, विभाजन नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में 1906 के कलकत्ता अधिवेशन ने विभाजन टाला और पहली बार स्वराज का लक्ष्य अपनाया। विकल्प D गलत है, क्योंकि 1920 के नागपुर अधिवेशन ने असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम को मंज़ूरी दी थी। परीक्षा टिप: सूरत 1907 में फूट, लखनऊ 1916 में मेल, दोनों के केंद्र में तिलक।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 26 Oct 2020, Shift 1मध्यम

उस पवित्र नगर का नाम बताइए जिसे प्रथम और चतुर्थ जैन तीर्थंकरों का जन्मस्थान माना जाता है।

  1. A.गया
  2. B.वाराणसी
  3. C.अयोध्या
  4. D.द्वारका
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. अयोध्या

व्याख्या

सही उत्तर है C, अयोध्या। जैन परंपरा में पहले तीर्थंकर ऋषभनाथ और चौथे तीर्थंकर अभिनंदननाथ का जन्म आज के उत्तर प्रदेश की अयोध्या में माना जाता है। वस्तुतः चौबीस तीर्थंकरों में से पाँच का जन्म यहीं बताया जाता है, इसीलिए जैन अयोध्या को अपने सबसे प्राचीन तीर्थों में गिनते हैं। ऋषभनाथ को आदिनाथ भी कहते हैं, उनका प्रतीक बैल है और उनका उल्लेख ऋग्वेद तथा भागवत पुराण में भी मिलता है। अंतिम दो तीर्थंकर पार्श्वनाथ और महावीर ऐतिहासिक रूप से सबसे प्रमाणित माने जाते हैं; महावीर का जन्म बिहार में वैशाली के पास कुंडग्राम में हुआ था। विकल्प A गलत है, क्योंकि गया बुद्ध के ज्ञानप्राप्ति स्थल बोधगया से जुड़ा है। विकल्प B गलत है, क्योंकि वाराणसी तेईसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ और सातवें तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ का जन्मस्थान है। विकल्प D गलत है, क्योंकि द्वारका कृष्ण तथा बाईसवें तीर्थंकर नेमिनाथ से जुड़ी है। परीक्षा टिप: अयोध्या - ऋषभनाथ; वाराणसी - पार्श्वनाथ; कुंडग्राम - महावीर।

Q6.भारतीय इतिहासपूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPSSSC PET, 28 Oct 2023, Shift 1आसान

1913 में हिंदुस्तान ग़दर पार्टी का मुख्यालय ________ में स्थित था।

  1. A.दिल्ली
  2. B.लाहौर
  3. C.कलकत्ता
  4. D.सैन फ्रांसिस्को
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. सैन फ्रांसिस्को

व्याख्या

सही उत्तर है D, सैन फ्रांसिस्को। ग़दर पार्टी 1913 में अमेरिका और कनाडा के प्रशांत तट पर बसे भारतीय प्रवासियों ने बनाई थी, जिनमें अधिकतर पंजाबी सिख किसान और मज़दूर थे। सोहन सिंह भकना इसके अध्यक्ष थे और लाला हरदयाल इसके प्रमुख विचारक। इसका कार्यालय ‘युगांतर आश्रम’ सैन फ्रांसिस्को में था, जहाँ से 1 नवंबर 1913 से उर्दू और पंजाबी में साप्ताहिक अख़बार ‘ग़दर’ निकलता था, जो अंग्रेज़ी राज के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह का आह्वान करता था। पहला विश्वयुद्ध शुरू होने पर हज़ारों सदस्य भारत लौटे, पर फरवरी 1915 की योजना की ख़बर लीक हो गई और अनेक क्रांतिकारियों पर लाहौर षड्यंत्र केस चले। विकल्प A गलत है, क्योंकि दिल्ली 1911 में ब्रिटिश भारत की राजधानी बनी, पर पार्टी का केंद्र कभी नहीं रही। विकल्प B गलत है, क्योंकि लाहौर ग़दर क्रांतिकारियों के मुक़दमों से जुड़ा है, मुख्यालय से नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि कलकत्ता अनुशीलन समिति और युगांतर जैसे बंगाली संगठनों का केंद्र था। परीक्षा टिप: ग़दर पार्टी, 1913, युगांतर आश्रम, सैन फ्रांसिस्को; अध्यक्ष सोहन सिंह भकना।

Q7.भारतीय इतिहासआसान

छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों की सूची निम्नलिखित में से किस ग्रंथ में मिलती है?

  1. A.अर्थशास्त्र
  2. B.अंगुत्तर निकाय
  3. C.महाभाष्य
  4. D.अष्टाध्यायी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अंगुत्तर निकाय

व्याख्या

सही उत्तर B, अंगुत्तर निकाय है। यह बौद्ध त्रिपिटक के सुत्त पिटक का ग्रंथ है और इसमें बुद्ध के समय के सोलह बड़े राज्यों के नाम मिलते हैं, पूर्व में मगध और कोसल से लेकर उत्तर-पश्चिम में गांधार और कंबोज तक। यही वह सूची है जो सभी मानक पाठ्यपुस्तकों में दी जाती है, जबकि जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में कुछ नाम बदले हुए मिलते हैं।

विकल्प A, अर्थशास्त्र, कौटिल्य का राजनीति ग्रंथ है, जो शासन की पद्धति बताता है पर सोलह महाजनपदों की सूची नहीं देता। विकल्प C, महाभाष्य, पतंजलि की संस्कृत व्याकरण पर टीका है और लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व का स्रोत है, जो शुंग काल के लिए उपयोगी है। विकल्प D, अष्टाध्यायी, पाणिनि का व्याकरण ग्रंथ है और स्थान नामों का स्रोत है, सूची का नहीं। दोहराते समय सोलह की संख्या को अंगुत्तर निकाय से जोड़कर याद रखें।

Q8.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC Pre GS, 12 Jan 2020आसान

ब्रिटिश भारत में साम्प्रदायिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था निम्नलिखित में से किस अधिनियम द्वारा की गई थी?

  1. A.भारतीय कौंसिल अधिनियम, 1892
  2. B.मिंटो-मार्ले सुधार, 1909
  3. C.मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार, 1919
  4. D.भारत सरकार अधिनियम, 1935
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मिंटो-मार्ले सुधार, 1909

व्याख्या

सही उत्तर है B, मिंटो-मार्ले सुधार, 1909। 1909 के भारतीय परिषद अधिनियम, यानी मार्ले-मिंटो सुधार, ने पहली बार मुसलमानों को पृथक निर्वाचन दिया, जिसमें मुस्लिम सदस्यों को केवल मुस्लिम मतदाता ही चुन सकते थे। इससे पहले 1906 में आगा ख़ाँ के नेतृत्व में शिमला प्रतिनिधिमंडल ने लॉर्ड मिंटो से अलग प्रतिनिधित्व की माँग की थी और उसी वर्ष मुस्लिम लीग बनी थी। इसी कारण लॉर्ड मिंटो को ‘सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक’ कहा जाता है। इस अधिनियम ने विधान परिषदों का आकार भी बढ़ाया और सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा वायसराय की कार्यकारी परिषद में पहुँचने वाले पहले भारतीय बने। विकल्प A गलत है, क्योंकि 1892 के अधिनियम ने केवल अप्रत्यक्ष चुनाव और बजट पर चर्चा का अधिकार दिया। विकल्प C गलत है, क्योंकि 1919 के अधिनियम ने सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व को सिखों, भारतीय ईसाइयों, आंग्ल-भारतीयों और यूरोपीयों तक बढ़ाया, उसकी शुरुआत नहीं की। विकल्प D गलत है, क्योंकि 1935 के अधिनियम ने इसे दलित वर्गों, महिलाओं और श्रमिकों तक और फैलाया। परीक्षा टिप: पृथक निर्वाचन 1909 में मिंटो से शुरू हुआ, 1919 और 1935 में इसका विस्तार हुआ।

Q9.भारतीय इतिहासआसान

सेल्यूकस निकेटर ने चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में अपना राजदूत किसे भेजा था?

  1. A.डाइमेकस
  2. B.मेगस्थनीज
  3. C.डायोनिसियस
  4. D.टॉलेमी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मेगस्थनीज

व्याख्या

सही उत्तर B, मेगस्थनीज है। लगभग 305 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य और सेल्यूकस निकेटर के बीच हुई संधि के बाद सेल्यूकस ने मेगस्थनीज को पाटलिपुत्र में अपना राजदूत बनाकर भेजा। मेगस्थनीज ने भारत का विवरण इंडिका नाम से लिखा, जो मूल रूप में नष्ट हो गया और केवल एरियन, स्ट्रैबो तथा डायोडोरस जैसे बाद के यूनानी लेखकों के उद्धरणों में बचा है। इसमें पाटलिपुत्र की लकड़ी की प्राचीर, नगर का प्रबंध करने वाली समितियों और समाज के सात वर्गों का वर्णन मिलता है।

विकल्प A डाइमेकस भी राजदूत था, किंतु उसे एंटिओकस प्रथम ने चंद्रगुप्त के पुत्र बिंदुसार के दरबार में भेजा था, और यही इस प्रश्न का सबसे बड़ा भ्रम है। विकल्प C डायोनिसियस को मिस्र के टॉलेमी द्वितीय ने भेजा था और वह बाद के शासनकाल से जुड़ा है। विकल्प D टॉलेमी स्वयं राजदूत नहीं, बल्कि राजदूत भेजने वाला शासक था।

Q10.भारतीय इतिहासपूछा गया: बिहार · BPSC 68th CCE Pre, 12 Feb 2023आसान

1947 में भारत और पाकिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा तय करने के लिए बनाए गए दोनों सीमा आयोगों की अध्यक्षता निम्नलिखित में से किसने की थी?

  1. A.सिरिल रैडक्लिफ
  2. B.ए. पी. मून
  3. C.ए. वी. एलेक्ज़ेंडर
  4. D.उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सिरिल रैडक्लिफ

व्याख्या

सही उत्तर है A, सिरिल रैडक्लिफ। ब्रिटिश वकील सर सिरिल रैडक्लिफ 1947 में पंजाब और बंगाल, दोनों सीमा आयोगों के अध्यक्ष थे। हर आयोग में चार न्यायाधीश थे, दो कांग्रेस के और दो मुस्लिम लीग के नामित, और जब वे सहमत नहीं हुए तो अंतिम फैसला रैडक्लिफ पर आ गया। वे पहले कभी भारत नहीं आए थे और उन्हें यह काम लगभग पाँच सप्ताह में पूरा करना था। उनका फैसला आज़ादी के दो दिन बाद, 17 अगस्त 1947 को सार्वजनिक हुआ, और उनकी खींची रेखा आज भी पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी सीमा पर रैडक्लिफ रेखा कहलाती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि मून पंजाब में तैनात एक ब्रिटिश अधिकारी थे, जिन्होंने बाद में विभाजन पर लिखा; वे आयोगों के अध्यक्ष नहीं थे। विकल्प C गलत है, क्योंकि ए. वी. एलेक्ज़ेंडर 1946 में कैबिनेट मिशन के सदस्य के रूप में भारत आए थे। विकल्प D गलत है, क्योंकि दोनों आयोगों के अध्यक्ष एक ही व्यक्ति, रैडक्लिफ थे। परीक्षा टिप: कैबिनेट मिशन 1946 में पेथिक-लॉरेंस, क्रिप्स और एलेक्ज़ेंडर; 1947 की सीमा रैडक्लिफ की।

Q11.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 09 Feb 2023, Shift 4मध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सा नगर कुषाण साम्राज्य के समय उनकी दूसरी राजधानी के रूप में उभरा?

  1. A.कन्नौज
  2. B.मथुरा
  3. C.पुरुषपुर
  4. D.पाटलिपुत्र
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मथुरा

व्याख्या

सही उत्तर है B, मथुरा। यमुना तट पर बसा मथुरा कुषाणों की दूसरी राजधानी बना, जबकि उनकी मुख्य राजधानी पुरुषपुर यानी आज का पेशावर थी। सबसे प्रसिद्ध कुषाण शासक कनिष्क के समय, जिसका राज्यारोहण सामान्यतः 78 ईस्वी माना जाता है, साम्राज्य मध्य एशिया से गंगा घाटी तक फैला और मथुरा उसकी पूर्वी सत्ता का केंद्र रहा। यहीं लाल बलुआ पत्थर में मथुरा मूर्तिकला शैली विकसित हुई, जिसने उत्तर-पश्चिम की गांधार शैली के साथ बुद्ध की सबसे प्रारंभिक मूर्तियाँ बनाईं। कनिष्क की एक प्रसिद्ध सिर रहित प्रतिमा मथुरा से मिली है। कुषाणों ने सुंदर स्वर्ण सिक्के भी चलाए और कनिष्क ने कश्मीर में चौथी बौद्ध संगीति बुलाई। विकल्प A गलत है, क्योंकि कन्नौज सातवीं शताब्दी में हर्षवर्धन की राजधानी थी। विकल्प C गलत है, क्योंकि पुरुषपुर यानी पेशावर पहली और प्रमुख राजधानी थी, दूसरी नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि पाटलिपुत्र मौर्यों और बाद में गुप्तों की राजधानी थी। परीक्षा टिप: कुषाणों की पहली राजधानी पुरुषपुर और दूसरी मथुरा, तथा कनिष्क ने 78 ईस्वी में शक संवत आरंभ किया।

Q12.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · NDA (II) 2024, 1 Sep 2024आसान

तक्षशिला प्राचीन भारत के निम्नलिखित में से किस महाजनपद की राजधानी थी?

  1. A.कुरु
  2. B.काशी
  3. C.गांधार
  4. D.अवंति
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. गांधार

व्याख्या

सही उत्तर है C, गांधार। बौद्ध ग्रंथों में छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपद गिनाए गए हैं, और उत्तर-पश्चिम में पेशावर व रावलपिंडी क्षेत्र वाले गांधार की राजधानी तक्षशिला थी, जो आज पाकिस्तान में इस्लामाबाद के पास है। तक्षशिला उत्तरापथ व्यापार मार्ग पर थी और विद्या का प्रसिद्ध केंद्र बनी, जिसे परंपरा पाणिनि, चाणक्य और वैद्य जीवक से जोड़ती है। इसके खंडहर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। बाद में कुषाणों के समय गांधार कला शैली के लिए भी यह क्षेत्र प्रसिद्ध हुआ। A, कुरु, की राजधानी दिल्ली के पास इंद्रप्रस्थ थी और हस्तिनापुर दूसरा केंद्र था। B, काशी, की राजधानी वाराणसी थी। D, अवंति, मालवा में था, जिसकी राजधानी उज्जैन और दक्षिण में महिष्मती थी। परीक्षा टिप: जोड़ों में याद रखें: गांधार-तक्षशिला, अवंति-उज्जैन, कोसल-श्रावस्ती, वत्स-कौशांबी, और मगध-राजगीर, बाद में पाटलिपुत्र।

Q13.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 09 March, 2023, Shift 1मध्यम

रजिया को दिल्ली सल्तनत की गद्दी से किस वर्ष हटाया गया था?

  1. A.1244
  2. B.1240
  3. C.1238
  4. D.1236
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1240

व्याख्या

सही उत्तर है B, 1240। रजिया सुल्तान को 1240 में दिल्ली की गद्दी से हटाया गया और उसी वर्ष उनकी हत्या कर दी गई। वे इल्तुतमिश की पुत्री थीं, जिन्होंने अपने पुत्रों के स्थान पर उन्हें उत्तराधिकारी बनाया था, और उन्होंने 1236 से 1240 तक शासन किया। दिल्ली सल्तनत की गद्दी पर बैठने वाली वे एकमात्र महिला थीं। उन्होंने पर्दा त्याग दिया, पुरुषों के वस्त्रों में दरबार किया और स्वयं युद्ध में गईं; उन्होंने अबीसीनियाई अमीर जमालुद्दीन याकूत को ऊंचा पद दिया, जो तुर्की सरदारों के दल चालीसा को स्वीकार नहीं हुआ। भटिंडा के सूबेदार अल्तूनिया ने विद्रोह किया; रजिया ने उससे विवाह कर लिया, किंतु दोनों उनके भाई बहराम शाह के समर्थकों से पराजित होकर कैथल के पास मारे गए। विकल्प A गलत है, क्योंकि 1244 अलाउद्दीन मसूद शाह के शासनकाल में आता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि 1238 उनके शासन के बीच का वर्ष है। विकल्प D गलत है, क्योंकि 1236 में वे गद्दी पर बैठी थीं। परीक्षा टिप: रजिया का शासन 1236-1240; पतन का कारण तुर्की सरदारों का दल चालीसा।

Q14.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 20 April 2022, Shift 2आसान

निम्नलिखित में से कौन प्राचीन भारत में चिकित्सा के विषय में योगदान देने वाला था?

  1. A.भास
  2. B.चरक
  3. C.पाणिनि
  4. D.हर्ष
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. चरक

व्याख्या

सही उत्तर है B, चरक। चरक प्राचीन भारत के वे चिकित्सक हैं जिनके नाम से चरक संहिता जुड़ी है, जो चिकित्सा का महान ग्रंथ है; परंपरा उन्हें कुषाण शासक कनिष्क का राजवैद्य मानती है। चरक संहिता पुराने अग्निवेश तंत्र का संशोधित रूप है और इसमें रोग निदान, आहार, स्वच्छता, औषधियों तथा वैद्य के आचार-नियमों की चर्चा है। सुश्रुत की शल्य चिकित्सा संबंधी संहिता के साथ मिलकर यह आयुर्वेद का आधार बनती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि भास संस्कृत नाटककार थे, जिन्हें स्वप्नवासवदत्ता जैसे नाटकों के लिए याद किया जाता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि पाणिनि वे व्याकरणाचार्य थे जिन्होंने संस्कृत व्याकरण का मानक ग्रंथ अष्टाध्यायी रचा। विकल्प D गलत है, क्योंकि हर्ष सातवीं सदी के कन्नौज के शासक और स्वयं नाटककार थे, जिन्होंने रत्नावली, प्रियदर्शिका और नागानंद लिखे, चिकित्सा पर कुछ नहीं। परीक्षा टिप: जोड़ियाँ याद रखें — चिकित्सा में चरक, शल्य में सुश्रुत, व्याकरण में पाणिनि और गणित-खगोल में आर्यभट।

Q15.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 13 Oct 2020, Shift 3आसान

मुगल दरबार के इतिहास ग्रंथ किस भाषा में लिखे गए थे?

  1. A.संस्कृत
  2. B.हिंदी
  3. C.उर्दू
  4. D.फारसी
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. फारसी

व्याख्या

सही उत्तर है D, फारसी। फारसी मुगल दरबार और उसके अभिलेखों की भाषा थी, और अकबर ने 1582 में इसे प्रशासन की राजभाषा बनाया। इसलिए सम्राटों के लिए लिखे गए इतिहास ग्रंथ फारसी में ही हैं - अबुल फज़ल का अकबरनामा, जिसका तीसरा भाग आईन-ए-अकबरी है, गुलबदन बेगम का हुमायूँनामा, जहाँगीर का अपना तुज़ुक-ए-जहाँगीरी और शाहजहाँ के लिए अब्दुल हमीद लाहौरी का पादशाहनामा। बाबर ने अपने संस्मरण तुज़ुक-ए-बाबरी चग़ताई तुर्की में लिखे थे, जिनका अकबर ने फारसी में बाबरनामा नाम से अनुवाद कराया। फारसी ने दिल्ली की स्थानीय बोली से भी बहुत कुछ लिया और इसी मेल से आगे चलकर उर्दू भाषा बनी। विकल्प A गलत है, क्योंकि अकबर के मकतबखाना में संस्कृत ग्रंथों का फारसी में अनुवाद होता था, उल्टा नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि हिंदी कविता और क्षेत्रों में चलती थी, दरबारी अभिलेखों में नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि उर्दू बाद में बनी और कभी मुगल कार्यालयी भाषा नहीं रही। परीक्षा टिप: अकबरनामा, पादशाहनामा और आईन-ए-अकबरी फारसी में; बाबरनामा मूलतः तुर्की में।

Q16.भारतीय इतिहासपूछा गया: RRB ग्रुप D · 3 Oct 2018, Shift 2मध्यम

चंद्रगुप्त द्वितीय ने गुप्त राज्य का विस्तार गुजरात तक _______ ई. में किया।

  1. A.390
  2. B.309
  3. C.903
  4. D.930
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 390

व्याख्या

सही उत्तर है A, 390। चंद्रगुप्त द्वितीय ने लगभग 390 ई. में पश्चिमी क्षत्रपों, यानी मालवा, गुजरात और काठियावाड़ के शक शासकों, को हराकर गुप्त राज्य का विस्तार गुजरात तक किया। इस विजय से गुप्तों को पश्चिमी तट के बंदरगाह और पश्चिम एशिया तथा रोम के साथ समुद्री व्यापार मिल गया, और उन्हें विक्रमादित्य की उपाधि मिली; उनके चाँदी के सिक्कों पर शकारि यानी शकों का नाश करने वाला भी अंकित है। चंद्रगुप्त द्वितीय का शासन लगभग 380 से 415 ई. तक रहा, उज्जैन उनका दूसरा सत्ता केंद्र बना, और उनके ही काल में चीनी यात्री फाह्यान भारत आया। B गलत है क्योंकि 309 ई. तो वंश के आरंभ से भी पहले पड़ता है, क्योंकि चंद्रगुप्त प्रथम लगभग 319 ई. में गद्दी पर बैठे। C गलत है क्योंकि 903 ई. गुप्त साम्राज्य के अंत के कई शताब्दी बाद का समय है। D गलत है क्योंकि 930 ई. राजपूत काल का है, किसी गुप्त शासक का नहीं। परीक्षा टिप: चंद्रगुप्त द्वितीय - विक्रमादित्य और शकारि, उज्जैन, फाह्यान की यात्रा, शक विजय लगभग 390 ई.।

Q17.भारतीय इतिहासपूछा गया: CTET · CTET Nov 2012 Paper - 2 Social Studies (आसान

किसी सूफी संत के मकबरे को क्या कहा जाता है?

  1. A.ईदगाह
  2. B.खानकाह
  3. C.इबादतगाह
  4. D.दरगाह
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. दरगाह

व्याख्या

सही उत्तर है D, दरगाह। दरगाह किसी सूफी संत का मकबरा है, जो उनकी कब्र पर बनाया जाता है और जहाँ हर धर्म के लोग धागे बाँधने, फूल चढ़ाने और मन्नत माँगने आते हैं। संत की मृत्यु की वर्षगाँठ पर होने वाले आयोजन को 'उर्स' कहते हैं, जिसमें दरगाह पर कव्वाली गाई जाती है। अजमेर में ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती और दिल्ली में निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाहें भारत में सबसे प्रसिद्ध हैं, और अकबर के समय से मुग़ल बादशाह अजमेर की यात्रा पैदल तीर्थयात्री के रूप में करते थे। A गलत है क्योंकि ईदगाह शहर के बाहर बनी वह खुली चारदीवारी वाली जगह है जहाँ समुदाय ईद की नमाज़ के लिए जुटता है। B गलत है क्योंकि खानकाह वह निवास था जिसमें जीवित सूफी संत अपने शिष्यों के साथ रहते, उन्हें शिक्षा देते और यात्रियों को भोजन कराते थे। C गलत है क्योंकि इबादतगाह का अर्थ सामान्य रूप से उपासना-स्थल है। परीक्षा टिप: खानकाह – संत का निवास, दरगाह – संत का मकबरा, उर्स – वहाँ का वार्षिक आयोजन।

Q18.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 21 March, 2023, Shift 2मध्यम

______ के पिट्स इंडिया एक्ट ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के वाणिज्यिक और राजनीतिक कार्यों के बीच भेद किया।

  1. A.1818
  2. B.1792
  3. C.1784
  4. D.1802
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1784

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1784। पिट्स इंडिया एक्ट ब्रिटिश संसद ने 1784 में पारित किया, जिसका नाम प्रधानमंत्री विलियम पिट (छोटे) के नाम पर पड़ा, और इसने ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक कार्यों को उसके राजनीतिक कार्यों से अलग कर दिया। व्यापार निदेशक मंडल के पास रहा, जबकि भारत के असैनिक, सैनिक और राजस्व मामलों की जिम्मेदारी छह सदस्यों वाले नियंत्रण बोर्ड को दी गई, जो ब्रिटिश सरकार के प्रति उत्तरदायी था। यहीं से कंपनी और ब्रिटिश ताज की द्वैध शासन व्यवस्था शुरू हुई, जो 1858 के भारत शासन अधिनियम तक चली, और पहली बार 'भारत में ब्रिटिश अधिकार क्षेत्र' शब्द का प्रयोग हुआ। इस अधिनियम ने 1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट की कमियों को दूर किया, जिसने वॉरेन हेस्टिंग्स को बंगाल का गवर्नर-जनरल बनाया था। विकल्प A गलत है, क्योंकि 1818 में तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध समाप्त हुआ। विकल्प B गलत है, क्योंकि 1792 में ऐसा कोई अधिनियम नहीं आया। विकल्प D गलत है, क्योंकि 1802 बसीन की संधि का वर्ष है। परीक्षा टिप: रेग्युलेटिंग एक्ट 1773, फिर पिट्स इंडिया एक्ट 1784 - नियंत्रण बोर्ड और द्वैध शासन।

Q19.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 02 Jul, 2024, Shift 4कठिन

बिजोलिया शिलालेख में निम्नलिखित में से किस वंश की वंशावली मिली है?

  1. A.चाहमान
  2. B.चंदेल
  3. C.परमार
  4. D.गहड़वाल
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. चाहमान

व्याख्या

सही उत्तर है A, चाहमान। बिजोलिया शिलालेख राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया में है और 1170 ईस्वी का माना जाता है, यानी सोमेश्वर के शासनकाल का। इसमें शाकंभरी के चौहानों यानी चाहमान वंश की वंशावली दी गई है। संस्कृत में लिखा यह लेख जैन व्यापारी लोलाक ने पार्श्वनाथ मंदिर के पास उत्कीर्ण कराया था और इसमें सामंतराज से लेकर पृथ्वीराज चौहान के पिता सोमेश्वर तक के शासकों के नाम हैं। इतिहासकार इसे इसलिए महत्वपूर्ण मानते हैं कि इसमें चाहमानों को वत्स गोत्र का ब्राह्मण कहा गया है और अजमेर के लिए अजयमेरु जैसे पुराने स्थान-नाम मिलते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि खजुराहो बनवाने वाले बुंदेलखंड के चंदेलों की जानकारी खजुराहो तथा मऊ अभिलेखों से मिलती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि मालवा के परमारों का वर्णन उदयपुर प्रशस्ति में है। विकल्प D गलत है, क्योंकि कन्नौज के गहड़वालों की जानकारी चंद्रावती आदि ताम्रपत्रों से मिलती है। परीक्षा टिप: बिजोलिया - चाहमान; खजुराहो - चंदेल; उदयपुर प्रशस्ति - परमार।

Q20.भारतीय इतिहासपूछा गया: CTET · 21st Dec 2021आसान

पद, वेतन और सैनिक ज़िम्मेदारियाँ तय करने के लिए मुग़लों द्वारा प्रयुक्त श्रेणी-व्यवस्था किस नाम से जानी जाती थी?

  1. A.मनसबदारी व्यवस्था
  2. B.इक्तादारी व्यवस्था
  3. C.ज़ब्त व्यवस्था
  4. D.जागीरदारी व्यवस्था
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मनसबदारी व्यवस्था

व्याख्या

सही उत्तर है A, मनसबदारी व्यवस्था। 'मनसब' का अर्थ पद या श्रेणी है, और अकबर ने इसके द्वारा साम्राज्य के प्रत्येक अधिकारी को एक श्रेणीबद्ध सीढ़ी पर रखा। मनसबदार के पद में दो संख्याएँ होती थीं: 'ज़ात', जो उसका व्यक्तिगत स्थान और वेतन तय करती थी, और 'सवार', जो यह तय करती थी कि उसे सेवा के लिए कितने घुड़सवार तैयार रखने हैं। अधिकांश मनसबदारों को नकद वेतन नहीं, बल्कि सौंपी गई भूमि के राजस्व से भुगतान मिलता था, और उनका स्थानांतरण होता रहता था जिससे कोई परिवार किसी क्षेत्र में जड़ें न जमा सके। B गलत है क्योंकि 'इक्ता' दिल्ली सल्तनत की राजस्व-व्यवस्था थी, जिसे मुक्ती रखते थे, और वह अधिकारियों की इस प्रकार श्रेणी नहीं बनाती थी। C गलत है क्योंकि ज़ब्त या टोडरमल के समय बनी दहसाला व्यवस्था नपी हुई भूमि और औसत उपज से लगान आँकने की पद्धति थी, अमीरों की श्रेणी तय करने की नहीं। D गलत है क्योंकि जागीर केवल वह भूमि थी जिसके राजस्व से मनसबदार का वेतन चुकता था। परीक्षा टिप: मनसब = ज़ात + सवार; ज़ब्त या दहसाला = लगान निर्धारण।

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