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GK क्विजभूगोल

भूगोल क्विज: स्थलरूप, अपक्षय और अपरदन

  • 11 प्रश्न
  • 11 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

भूगोल के अंतर्गत "स्थलरूप, अपक्षय और अपरदन" विषय पर यह क्विज़ 11 बहुविकल्पीय प्रश्न रखता है, जो GK24 के इसी विषय के नोट्स के साथ प्रकाशित सत्यापित प्रश्न हैं, जिनमें 3 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे गए हैं। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और शेष विकल्पों के गलत होने की पूरी व्याख्या दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर याद न करें बल्कि उसके पीछे का तथ्य समझें। नोट्स पढ़ने के तुरंत बाद इसे हल करें, निर्धारित समय का पालन करें, और अंत में व्याख्याएं पढ़कर कमजोर बिंदु चिह्नित करें। परीक्षा से पहले दोहराव के लिए इसे दोबारा दें।

इस क्विज के प्रश्न

11 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भूगोलपूछा गया: SSC CGL · 11 April 2022, Shift 2आसान

निम्नलिखित में से कौन 'उत्खात भूमि' का मुख्य कारण है?

  1. A.अल्प वर्षा
  2. B.मृदा अपरदन
  3. C.अत्यधिक वन आवरण
  4. D.खुले में शौच
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मृदा अपरदन

व्याख्या

सही उत्तर B, मृदा अपरदन है। उत्खात भूमि वह भू भाग है जो गहरी अवनालिकाओं और तीखे कटकों के घने जाल में कट जाता है और इतना विच्छेदित हो जाता है कि खेती असंभव हो जाती है। यह तब बनती है जब बहता जल ऊपरी मृदा को परत प्रवाह के रूप में हटाता है और वह प्रवाह पहले सँकरी सरिताओं में तथा फिर अवनालिकाओं में केंद्रित हो जाता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की चंबल अवनालिकाएँ भारत का पाठ्यपुस्तक उदाहरण हैं। विकल्प A, अल्प वर्षा, गलत है क्योंकि उत्खात भूमि के लिए ढीले पदार्थ पर तीव्र और केंद्रित जल प्रवाह आवश्यक है और वह अत्यंत शुष्क भागों की अपेक्षा भारी मौसमी वर्षा वाले क्षेत्रों में बनती है। विकल्प C, अत्यधिक वन आवरण, सत्य के विपरीत है, क्योंकि जड़ों और पत्तियों का घना आवरण मृदा को बाँधता है और वर्षा बूँदों का वेग तोड़ता है। विकल्प D, खुले में शौच, स्वच्छता की समस्या है और अवनालिका निर्माण में उसकी कोई भूमिका नहीं है। यही प्रश्न कभी अवनालिका शब्द के साथ भी पूछा जाता है और उत्तर वही रहता है।

Q2.भूगोलपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 1st December 2021, Shift 3आसान

निम्नलिखित में से कौन मृदा संरक्षण की विधि नहीं है?

  1. A.अंतरवर्तीय फसल
  2. B.रक्षक मेखला
  3. C.शिला बाँध
  4. D.अतिचारण
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. अतिचारण

व्याख्या

सही उत्तर D, अतिचारण है। अतिचारण घास का सुरक्षात्मक आवरण समाप्त कर देता है, पशुओं के खुर सतह को ढीला कर देते हैं और नंगी मृदा वर्षा तथा पवन के सम्मुख खुल जाती है, अतः यह शुष्क भारत में मृदा अपरदन के प्रमुख कारणों में है, उपाय कदापि नहीं। विकल्प A, अंतरवर्तीय फसल, में दो या अधिक फसलें एकांतर पंक्तियों में उगाई जाती हैं जिससे भूमि कभी नंगी नहीं रहती और गिरती वर्षा का वेग घट जाता है; यह मान्य संरक्षण पद्धति है। विकल्प B, रक्षक मेखला, प्रचलित पवन के आड़े लगाई गई वृक्षों की पंक्तियाँ हैं, जिनका उपयोग राजस्थान तथा तटीय भागों में पवन की गति घटाने और बालू मृदा के अपवाहन को रोकने के लिए होता है। विकल्प C, शिला बाँध, अवनालिका के आड़े बनाया गया पत्थरों का नीचा अवरोध है जिससे जल धीमा होकर गाद गिरा देता है और वाहिका को और गहरा नहीं काटता। ऐसे प्रश्नों में तीन वास्तविक उपाय और एक क्षरण कारण दिया जाता है, अतः प्रश्न में नहीं शब्द अवश्य पढ़ें।

Q3.भूगोलपूछा गया: उत्तर प्रदेश · 11 Feb, 2024कठिन

अपरदन के निम्नलिखित प्रकारों को खेत से होने वाली मृदा हानि के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए: I. अवनालिका अपरदन II. उच्छाल अपरदन III. सरिता अपरदन IV. परत अपरदन। नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए।

  1. A.IV, I, III, II
  2. B.II, IV, III, I
  3. C.III, II, I, IV
  4. D.II, III, IV, I
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. II, IV, III, I

व्याख्या

सही उत्तर B, अर्थात II, IV, III और I है। जल अपरदन चरणों में आगे बढ़ता है और प्रत्येक चरण पर मृदा की हानि बढ़ती जाती है। उच्छाल अपरदन, जो क्रमांक II है, प्रथम और सबसे मंद है: वर्षा की बूँदें नंगी मृदा पर गिरकर अलग अलग कणों को कुछ सेंटीमीटर दूर उछाल देती हैं। परत अपरदन, जो क्रमांक IV है, इसके पश्चात आता है, जब विस्थापित पदार्थ संपूर्ण सतह पर जल की पतली चादर के रूप में बह जाता है। सरिता अपरदन, जो क्रमांक III है, तब आरंभ होता है जब वही प्रवाह कुछ सेंटीमीटर गहरी छोटी वाहिकाओं में एकत्र हो जाता है, जिन्हें हल चलाकर मिटाया जा सकता है। अवनालिका अपरदन, जो क्रमांक I है, अंतिम और सर्वाधिक विनाशकारी चरण है, जिसमें वे वाहिकाएँ गहरी होकर स्थायी खड्ड बन जाती हैं और खेत अनुपयोगी हो जाता है। अतः बढ़ता क्रम उच्छाल, परत, सरिता और अवनालिका है, जो विकल्प B है। विकल्प A तथा C उच्छाल से पहले अवनालिका या सरिता रखते हैं और विकल्प D परत से पहले सरिता रखता है, अतः कोई भी मान्य क्रम से मेल नहीं खाता।

Q4.भूगोलआसान

अपपर्णन, जिसमें ग्रेनाइट गुंबद से चट्टान की वक्र परतें प्याज के छिलके की तरह उतरती हैं, किस प्रक्रिया का उदाहरण है?

  1. A.रासायनिक अपक्षय
  2. B.भौतिक अपक्षय
  3. C.हिमनद अपरदन
  4. D.पवन निक्षेपण
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. भौतिक अपक्षय

व्याख्या

सही उत्तर B, भौतिक अपक्षय है। अपपर्णन चट्टान की बाहरी परत के बार बार गर्म और ठंडा होने तथा ऊपर के पदार्थ के हटने पर दबाव मुक्त होने से होता है; सतह भीतरी भाग की अपेक्षा अधिक फैलती और सिकुड़ती है और वक्र चादरों के रूप में अलग हो जाती है। इसमें चट्टान की रासायनिक संरचना नहीं बदलती और कोई परिवहन नहीं होता, अतः यह अपने स्थान पर होने वाला यांत्रिक अपक्षय है। विकल्प A, रासायनिक अपक्षय, के लिए कार्बोनेटीकरण, जल अपघटन या ऑक्सीकरण जैसी अभिक्रियाएँ आवश्यक हैं जो खनिजों को ही बदल देती हैं, जैसे चूना पत्थर का घोलन। विकल्प C, हिमनद अपरदन, में चलती हिम चट्टान को उखाड़ती और घिसती है तथा सर्क और यू आकार की घाटियाँ बनाती है, प्याज जैसी परतें नहीं। विकल्प D, पवन निक्षेपण, बालुका स्तूप और लोएस बनाता है और निक्षेपण की प्रक्रिया है, जो चट्टान तोड़ने के विपरीत है। इस अध्याय के अधिकांश प्रश्नों का निर्णायक नियम स्मरण रखें: अपक्षय चट्टान को उसी स्थान पर तोड़ता है, अपरदन टुकड़ों को हटाकर ले जाता है।

Q5.भूगोलमध्यम

चूना पत्थर की गुफा के भीतर आश्मलंब, आश्मस्तूप और स्तंभ मुख्यतः किस कारक की क्रिया से बनते हैं?

  1. A.पवन
  2. B.हिमनद
  3. C.भूमिगत जल
  4. D.सागरीय तरंगें
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. भूमिगत जल

व्याख्या

सही उत्तर C, भूमिगत जल है। कार्बन डाइऑक्साइड युक्त वर्षा जल दुर्बल कार्बोनिक अम्ल बन जाता है, चूना पत्थर की संधियों में रिसता है और कार्बोनेटीकरण द्वारा कैल्सियम कार्बोनेट को घोल देता है। कंदरा के भीतर टपकता जल कार्बन डाइऑक्साइड खो देता है और उसी कैल्सियम कार्बोनेट को फिर जमा कर देता है, जिससे छत से नीचे की ओर आश्मलंब, फर्श से ऊपर की ओर आश्मस्तूप और दोनों के मिलने पर स्तंभ बनता है। इन सभी लक्षणों का कुल कार्स्ट स्थलाकृति कहलाता है। विकल्प A, पवन, छत्रक शिला, यारडांग, बालुका स्तूप और लोएस बनाती है, वह भी नंगी सतह वाले शुष्क प्रदेशों में। विकल्प B, हिमनद, सर्क, कंगीय कटक, गिरिशृंग और यू आकार की घाटियाँ काटता है तथा हिमोढ़ और ड्रमलिन जमा करता है। विकल्प D, सागरीय तरंगें, तट पर भृगु, गुफाएँ, मेहराब और स्टैक काटती हैं तथा पुलिन, रोधिका और लैगून बनाती हैं। भारत में आंध्र प्रदेश की बोर्रा गुफाएँ इसका प्रसिद्ध उदाहरण हैं।

Q6.भूगोलआसान

गोखुर झील निम्नलिखित में से किसके द्वारा बनती है?

  1. A.हिमनद द्वारा गर्त खोदना
  2. B.विसर्पी नदी द्वारा लूप का कट जाना
  3. C.मरुस्थल में पवन अपवाहन
  4. D.क्रेटर का ज्वालामुखीय अवतलन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. विसर्पी नदी द्वारा लूप का कट जाना

व्याख्या

सही उत्तर B, विसर्पी नदी द्वारा लूप का कट जाना है। नदी अपने मध्य और निचले भाग में एक ओर से दूसरी ओर झूलती है, प्रत्येक मोड़ के बाहरी किनारे का अपरदन करती है और भीतरी किनारे पर निक्षेपण करती है। लूप की गर्दन क्रमशः सँकरी होती जाती है और कोई बाढ़ उसे सीधे काट देती है; छोड़ा हुआ लूप गाद से बंद होकर अर्धचंद्राकार झील के रूप में बचा रहता है, जिसे गोखुर झील कहते हैं। विकल्प A सर्क अथवा टार्न का वर्णन है, जो ऊँचे पर्वतों के हिमनद गर्त हैं और वृत्ताकार होते हैं, अर्धचंद्राकार नहीं। विकल्प C, पवन अपवाहन, मरुस्थलों में छिछले बेसिन खोदता है जिनमें जल थोड़े समय ही रहता है और वे लूप के आकार के नहीं होते। विकल्प D क्रेटर झील का वर्णन है, जैसे महाराष्ट्र की लोणार झील, जिसका नदी के मोड़ों से कोई संबंध नहीं है। परीक्षक इसके साथ यह तथ्य भी जोड़ते हैं कि गोखुर झीलें गंगा और ब्रह्मपुत्र के बाढ़ के मैदानों में सामान्य हैं।

Q7.भूगोलमध्यम

लोएस, जो पवन द्वारा लाई गई सूक्ष्म गाद का मोटा निक्षेप है, किस देश में सर्वाधिक विकसित है?

  1. A.ब्राज़ील
  2. B.उत्तरी चीन
  3. C.कनाडा
  4. D.ऑस्ट्रेलिया
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. उत्तरी चीन

व्याख्या

सही उत्तर B, उत्तरी चीन है। लोएस पवन का निक्षेपण स्थलरूप है: मरुस्थलीय और हिमनद किनारों से उठाई गई अत्यंत सूक्ष्म गाद दूर तक ले जाई जाती है और पीली, छिद्रयुक्त तथा ढीली परत के रूप में बैठ जाती है। पृथ्वी पर इसकी सबसे मोटी और विस्तृत परतें उत्तरी चीन के लोएस पठार में हैं, जिससे ह्वांग हो को उसका रंग और पीली नदी नाम मिला। विकल्प A, ब्राज़ील, अधिकांशतः आर्द्र उष्ण कटिबंध में है जहाँ रासायनिक अपक्षय और घना वन आवरण ऐसे निक्षेपण को रोकते हैं। विकल्प C, कनाडा, में हिमोढ़, ड्रमलिन और एस्कर जैसे हिमनद निक्षेप हैं और लोएस के केवल छोटे टुकड़े हैं। विकल्प D, ऑस्ट्रेलिया, में बड़े मरुस्थल हैं परंतु उसके पवन निक्षेप लंबे सीफ स्तूपों के रूप में हैं, विशाल लोएस चादरों के रूप में नहीं। एक संबंधित तथ्य स्मरणीय है कि लोएस मृदा स्वभावतः उपजाऊ और स्वतः जल निकासी वाली होती है, इसी कारण चीन की लोएस पट्टी अवनालिका अपरदन के अत्यधिक खतरे के बावजूद घनी खेती का आधार है।

Q8.भूगोलमध्यम

निम्नलिखित में से कौन हिमनद का निक्षेपण स्थलरूप है?

  1. A.सर्क
  2. B.कंगीय कटक
  3. C.हिमोढ़
  4. D.गिरिशृंग
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. हिमोढ़

व्याख्या

सही उत्तर C, हिमोढ़ है। हिमोढ़ असंस्तरित चट्टानी मलबे का वह कटक है जिसे हिमनद ढोकर जमा कर देता है; स्थिति के अनुसार इसे पार्श्विक, मध्यस्थ, तलस्थ और अंतस्थ हिमोढ़ कहा जाता है और अंतस्थ हिमोढ़ हिम के पहुँचने की अंतिम सीमा दर्शाता है। विकल्प A, सर्क, हिमनद घाटी के शीर्ष पर उखाड़न और अपघर्षण से कटा आराम कुर्सी जैसा गर्त है, अतः अपरदनात्मक है। विकल्प B, कंगीय कटक, वह तीखा छुरी जैसा कटक है जो दो सर्कों के पीछे की ओर कटते हुए एक दूसरे के निकट आने पर बचता है, वह भी अपरदनात्मक है। विकल्प D, गिरिशृंग, तब बनता है जब तीन या अधिक सर्क एक ही पर्वत पिंड को काटते हैं और पिरामिड जैसी चोटी बनती है, जिसका श्रेष्ठ उदाहरण मैटरहॉर्न है; वह भी अपरदनात्मक है। हिम के अन्य निक्षेपण रूप ड्रमलिन, एस्कर, केम और हिमजल धौत मैदान हैं। उत्तर देने का सुरक्षित सूत्र यह है कि हिम का अपरदन गर्त बनाता और धार तेज करता है, जबकि हिम का निक्षेपण ढेर लगाता है।

Q9.भूगोलकठिन

कार्स्ट स्थलाकृति का नाम वर्तमान में किस देश के एक पठार से लिया गया है?

  1. A.स्लोवेनिया
  2. B.यूनान
  3. C.स्विट्ज़रलैंड
  4. D.नॉर्वे
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. स्लोवेनिया

व्याख्या

सही उत्तर A, स्लोवेनिया है। यह शब्द दिनारिक प्रदेश के क्रास अथवा कार्स्ट पठार से आया है, जो मुख्यतः वर्तमान स्लोवेनिया में स्थित है और पड़ोसी तटीय पट्टी तक फैला है। वहाँ का चूना पत्थर सिंकहोल, डोलाइन, निगरानी छिद्र, कंदराओं और भूमिगत धाराओं से भरा है, और भूगोलवेत्ताओं ने उस स्थानीय नाम को प्रत्येक ऐसे भूदृश्य के लिए अपना लिया जहाँ घुलनशील चट्टान भूमिगत जल द्वारा तराशी जाती है। भारत में आंध्र प्रदेश की बोर्रा गुफाएँ और मेघालय पठार की गुफाएँ वही लक्षण दिखाती हैं। विकल्प B, यूनान, में चूना पत्थर विस्तृत है परंतु उसने इस स्थलाकृति को नाम नहीं दिया। विकल्प C, स्विट्ज़रलैंड, सर्क और कंगीय कटक जैसे आल्पीय तथा हिमनद शब्दों से जुड़ा है, कार्स्ट से नहीं। विकल्प D, नॉर्वे, अपने पश्चिमी तट के डूबे हिमनद द्रोणियों अर्थात फियोर्ड के लिए स्मरण किया जाता है। परीक्षक इस प्रश्न को प्रक्रिया के रूप में कार्बोनेटीकरण और चट्टान के रूप में चूना पत्थर या डोलोमाइट की जोड़ी के साथ जोड़ना पसंद करते हैं।

Q10.भूगोलमध्यम

फियोर्ड का सर्वोत्तम वर्णन निम्नलिखित में से कौन है?

  1. A.पवन द्वारा काटी गई सँकरी मरुस्थलीय घाटी
  2. B.हिमनद द्रोणी जिसमें बाद में सागर जल भर गया
  3. C.वर्षा जल से भरा ज्वालामुखीय क्रेटर
  4. D.मुलायम चूना पत्थर में बना नदी गार्ज
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. हिमनद द्रोणी जिसमें बाद में सागर जल भर गया

व्याख्या

सही उत्तर B, हिमनद द्रोणी जिसमें बाद में सागर जल भर गया है। तट तक पहुँचने वाला घाटी हिमनद अपने तल को वर्तमान सागर तल से नीचे तक खोद देता है; जब हिम पिघलती है और सागर तल ऊपर उठता है तो जल उस द्रोणी में भर जाता है और अत्यधिक गहराई वाला लंबा, सँकरा तथा तीव्र ढाल वाला प्रवेश बन जाता है। नॉर्वे, चिली, न्यूज़ीलैंड और ग्रीनलैंड में इसके श्रेष्ठ उदाहरण हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि मरुस्थल में पवन छिछले बेसिन खोदती और यारडांग तराशती है और इतनी गहरी डूबी घाटी नहीं काट सकती। विकल्प C क्रेटर अथवा काल्डेरा झील का वर्णन है, जैसे महाराष्ट्र की लोणार झील, जो वृत्ताकार है और सागर से असंबद्ध है। विकल्प D नदी अपरदन से बने गार्ज या कैन्यन का वर्णन है, जिसका अनुप्रस्थ काट हिमनद कार्य के यू आकार के स्थान पर वी आकार का रहता है। परीक्षक इसी अनुप्रस्थ काट पर भरोसा करते हैं: नदी वी काटती है, हिमनद उसे चौड़ा करके यू बनाता है और डूबा हुआ यू फियोर्ड है।

Q11.भूगोलमध्यम

गर्म और आर्द्र उष्ण कटिबंधीय जलवायु में किस प्रकार का अपक्षय प्रमुख होता है?

  1. A.तुषार अपक्षय
  2. B.रासायनिक अपक्षय
  3. C.लवण क्रिस्टलीकरण
  4. D.खंड विघटन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रासायनिक अपक्षय

व्याख्या

सही उत्तर B, रासायनिक अपक्षय है। पर्याप्त वर्षा, ऊँचा तापमान और घनी वनस्पति मिलकर वह जल, ऊष्मा और कार्बनिक अम्ल देते हैं जो घोलन, जल अपघटन, जलयोजन, कार्बोनेटीकरण और ऑक्सीकरण की गति बढ़ा देते हैं, अतः खनिज बहुत गहराई तक वियोजित हो जाते हैं। इसी कारण आर्द्र उष्ण कटिबंध में लोहे और ऐलुमिनियम के ऑक्साइडों की मोटी लाल लैटेराइट पर्त तथा गहरी अवशिष्ट मृदाएँ मिलती हैं। विकल्प A, तुषार अपक्षय, के लिए दरारों में भरे जल का बार बार जमना और पिघलना आवश्यक है, अतः वह ऊँचे पर्वतों और शीत शीतोष्ण प्रदेशों का लक्षण है। विकल्प C, लवण क्रिस्टलीकरण, के लिए लवणीय नमी का वाष्पन आवश्यक है और वह शुष्क तथा तटीय प्रदेशों में विशिष्ट है। विकल्प D, खंड विघटन, अधिक दैनिक तापांतर का यांत्रिक परिणाम है और इसलिए गर्म मरुस्थलों तथा शीत चट्टानी उच्च भूमियों में प्रमुख रहता है। स्मरण रखने योग्य जोड़ी सरल है: गर्म मरुस्थल यांत्रिक अपक्षय, आर्द्र उष्ण कटिबंध रासायनिक अपक्षय और उच्च अक्षांश तथा ऊँचाई तुषार क्रिया।

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