हरितगृह प्रभाव के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.यह काँच के ऐसे कक्ष के भीतर हो सकता है जिसमें न कोई विकिरण भीतर आ सके और न ही वापस बाहर जा सके
- B.यह काँच के ऐसे कक्ष के भीतर हो सकता है जिसमें लंबी तरंगदैर्ध्य वाला अवरक्त विकिरण भीतर आ सके और छोटी तरंगदैर्ध्य वाला अवरक्त विकिरण वापस बाहर न जा सके
- C.यह काँच के ऐसे कक्ष के भीतर हो सकता है जिसमें छोटी तरंगदैर्ध्य वाला अवरक्त विकिरण भीतर आ सके और लंबी तरंगदैर्ध्य वाला अवरक्त विकिरण वापस बाहर न जा सके
- D.यह काँच के ऐसे कक्ष के भीतर हो सकता है जिसमें सभी अवरक्त विकिरण भीतर आ सकें या वापस बाहर जा सकें
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C: कक्ष छोटी तरंगदैर्ध्य वाले विकिरण को भीतर आने देता है, पर लंबी तरंगदैर्ध्य वाले अवरक्त विकिरण को बाहर नहीं जाने देता, इसलिए ऊष्मा भीतर फँस जाती है।
ग्लासहाउस तक पहुँचने वाला सूर्य-प्रकाश अधिकतर दृश्य प्रकाश और छोटी तरंगदैर्ध्य वाला अवरक्त होता है, जिसे काँच आसानी से पार होने देता है। भीतर के पौधे और मिट्टी इसे सोखकर गर्म होते हैं और यह ऊर्जा लंबी तरंगदैर्ध्य वाले अवरक्त के रूप में फिर छोड़ते हैं, क्योंकि ठंडी वस्तुएँ लंबी तरंगें उत्सर्जित करती हैं। काँच इन लंबी तरंगों को काफ़ी हद तक रोक लेता है, इसलिए तापमान बढ़ता है। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड यही काम करती हैं और पृथ्वी को लगभग 33 °C अधिक गर्म रखती हैं।
A गलत है: कोई विकिरण भीतर ही न आए तो फँसाने को ऊर्जा ही नहीं होगी।
B गलत है: इसमें तरंगदैर्ध्य उलट दी गई हैं।
D गलत है: सारा अवरक्त बाहर निकल जाए तो कुछ नहीं फँसेगा।
परीक्षा टिप: छोटी तरंगें भीतर, लंबी तरंगें बाहर नहीं; काँच और ग्रीनहाउस गैसें बाहर जाते लंबी तरंग वाले अवरक्त को रोकती हैं।