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GK क्विजकला और संस्कृति

कला और संस्कृति मिश्रित क्विज: सेट 4

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

कला और संस्कृति मिश्रित क्विज़ (सेट 4) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 14 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: भारत के शास्त्रीय नृत्य, भारत की भाषाएं और लिपियां, भारत के लोक नृत्य और अन्य। इनमें से 15 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.कला और संस्कृतिमध्यम

कौन सा शास्त्रीय नृत्य रास लीला और पुंग नामक ढोल से जुड़ा हुआ है?

  1. A.सत्रीया
  2. B.मणिपुरी
  3. C.ओडिसी
  4. D.कुचिपुड़ी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मणिपुरी

व्याख्या

सही उत्तर B, मणिपुरी है। इसका केंद्रीय विषय राधा और कृष्ण की रास लीला है, पैर धीरे पड़ते हैं, मुख पर भाव तीव्र नहीं बल्कि शांत रहते हैं, और नर्तकी कड़ा, ढोलनुमा कुमिल घाघरा पहनती है। पुंग को बजाते हुए ही नाचा जाता है, जिसे पुंग चोलम कहते हैं, और इस क्षेत्र की प्राचीन अनुष्ठानिक परंपरा लाई हराओबा है। रवींद्रनाथ टैगोर मणिपुरी गुरुओं को शांतिनिकेतन लाए और इस शैली को देशव्यापी पहचान दिलाई।

विकल्प A, सत्रीया भी वैष्णव विषय लेता है, परंतु वह असम के सत्रों की शैली है और उसमें खोल वाद्य बजता है। विकल्प C, ओडिसी अपने कृष्ण विषय गीत गोविंद से लेता है और उसके साथ मर्दल बजता है। विकल्प D, कुचिपुड़ी भामा कलापम मंचित करता है और उसमें मृदंग प्रयुक्त होता है, पुंग नहीं।

Q2.कला और संस्कृतिपूछा गया: बिहार · BPSC 65th CCE Pre, 2019मध्यम

प्राचीन भारत की निम्नलिखित लिपियों में से कौन-सी दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी?

  1. A.ब्राह्मी
  2. B.शारदा
  3. C.खरोष्ठी
  4. D.नंदिनागरी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. खरोष्ठी

व्याख्या

सही उत्तर है C, खरोष्ठी। खरोष्ठी दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी, ठीक उस अरामाइक लिपि की तरह जिससे यह निकली। यह उत्तर-पश्चिम के गांधार क्षेत्र की लिपि थी, जो आज पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान में है, और लगभग तीसरी सदी ईसा पूर्व से तीसरी सदी ईस्वी तक मुख्य रूप से प्राकृत लिखने में प्रयोग हुई। इसीलिए अशोक के दो बड़े शिलालेख, शाहबाज़गढ़ी और मानसेहरा, खरोष्ठी में हैं, जबकि उनके लगभग सभी दूसरे अभिलेख ब्राह्मी में हैं। यह रेशम मार्ग से मध्य एशिया तक फैली और फिर लुप्त हो गई। विकल्प A गलत है, क्योंकि ब्राह्मी बाएँ से दाएँ लिखी जाती है और देवनागरी समेत ज़्यादातर भारतीय लिपियों की जननी है। विकल्प B गलत है, क्योंकि कश्मीर की पुरानी लिपि शारदा ब्राह्मी से निकली और बाएँ से दाएँ लिखी जाती है। विकल्प D गलत है, क्योंकि संस्कृत पांडुलिपियों में प्रयुक्त नागरी का दक्षिणी रूप नंदिनागरी भी बाएँ से दाएँ चलती है। परीक्षा टिप: खरोष्ठी अपवाद है, दाएँ से बाएँ और उत्तर-पश्चिम में; ब्राह्मी बाएँ से दाएँ और लगभग हर जगह।

Q3.कला और संस्कृतिमध्यम

कुरुबा समुदाय का ओजपूर्ण ढोल नृत्य डोल्लू कुनिता किस राज्य का लोक नृत्य है?

  1. A.तेलंगाना
  2. B.तमिलनाडु
  3. C.कर्नाटक
  4. D.केरल
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. कर्नाटक

व्याख्या

सही उत्तर C, कर्नाटक है। डोल्लू कुनिता में कलाकार गले में डोल्लू नाम का बड़ा ढोल लटकाकर उसे बजाते हुए तेज रचनाओं में घूमते हैं, और यह नृत्य कुरुबा गड़रिया समुदाय का है, जो इसे अपने देवता बीरेश्वर की सेवा में करता है। कुनिता शब्द का अर्थ ही देवता को अर्पित अनुष्ठान नृत्य है, और कर्नाटक में वीरभद्र के उपासकों का वीरगासे तथा लोक नाट्य यक्षगान भी मिलते हैं।

विकल्प A, तेलंगाना में पेरिनी शिवतांडवम, स्त्रियों का बतुकम्मा और बंजारा समुदाय का लंबाड़ी नृत्य होते हैं। विकल्प B, तमिलनाडु में सिर पर सजा घड़ा रखकर किया जाने वाला करगाट्टम, छड़ों वाला कोलाट्टम, कुम्मी और ओयिलाट्टम मिलते हैं। विकल्प D, केरल में अनुष्ठान रूप थेय्यम, पडयनी और मुडियेट्टु तथा ओणम पर स्त्रियों का तिरुवातिराकली होते हैं। चारों दक्षिण भारत के राज्य हैं, इसीलिए इन्हें विकल्पों में साथ रखा जाता है, पर डोल्लू नाम का ढोल और कुरुबा गड़रिया समुदाय मिलकर केवल कर्नाटक की ओर संकेत करते हैं।

Q4.कला और संस्कृतिपूछा गया: CTET · Paper I, 21 Jan 2024, Shift 2आसान

'पोचमपल्ली' अपनी सुंदर डिज़ाइन वाली चटकीले रंगों की साड़ियों और एक खास बुनाई के लिए प्रसिद्ध है, जिसे पोचमपल्ली ही कहा जाता है। यह किसका हिस्सा है?

  1. A.महाराष्ट्र
  2. B.तेलंगाना
  3. C.तमिलनाडु
  4. D.कर्नाटक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. तेलंगाना

व्याख्या

सही उत्तर है B, तेलंगाना। पोचमपल्ली तेलंगाना के यादाद्रि भुवनगिरि ज़िले का बुनकरों का कस्बा है, जो हैदराबाद से ज़्यादा दूर नहीं है। यह इकत साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, जिनमें बुनाई से पहले धागों को बाँधकर रंगा जाता है, ताकि कपड़ा बुनते समय ही डिज़ाइन उभर आए। इससे चटकीले, ज्यामितीय डिज़ाइन बनते हैं जिनके किनारे हल्के धुंधले दिखते हैं। पोचमपल्ली इकत को भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिला है, जो इस क्षेत्र के बुनकरों के लिए इस नाम की रक्षा करता है। इस कस्बे को भूदान पोचमपल्ली भी कहते हैं, क्योंकि विनोबा भावे ने 1951 में यहीं से भूदान आंदोलन शुरू किया था। A गलत है क्योंकि महाराष्ट्र पैठणी साड़ियों के लिए जाना जाता है, पोचमपल्ली के लिए नहीं। C गलत है क्योंकि तमिलनाडु कांजीवरम रेशमी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। D गलत है क्योंकि कर्नाटक मैसूर सिल्क और इलकल साड़ियों के लिए जाना जाता है। परीक्षा टिप: पोचमपल्ली इकत – तेलंगाना; पैठणी – महाराष्ट्र; कांजीवरम – तमिलनाडु; पटोला – गुजरात; चंदेरी – मध्य प्रदेश।

Q5.कला और संस्कृतिआसान

किस वेद को भारतीय शास्त्रीय संगीत का स्रोत माना जाता है?

  1. A.ऋग्वेद
  2. B.यजुर्वेद
  3. C.सामवेद
  4. D.अथर्ववेद
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. सामवेद

व्याख्या

सही उत्तर C, सामवेद है। सामवेद गान का वेद है। उसके अधिकांश मंत्र ऋग्वेद से लिए गए हैं, परन्तु वे पाठ के लिए नहीं बल्कि गाने के लिए संकलित किए गए हैं, और इस गायन को सामगान कहा जाता है। संगीत पर लिखा हर परवर्ती भारतीय ग्रंथ परम्परा को इसी वेद तक ले जाता है, इसीलिए यह जोड़ी बार-बार पूछी जाती है।

विकल्प A, ऋग्वेद, सबसे प्राचीन वेद है और देवताओं की स्तुति के सूक्तों का संग्रह है; वह सामवेद को शब्द देता है, पर स्वयं संगीत का वेद नहीं है। विकल्प B, यजुर्वेद, यज्ञ की विधियों का वेद है और पुरोहित के लिए गद्य मंत्र देता है। विकल्प D, अथर्ववेद, में दैनिक जीवन के अभिचार, औषधि और कुछ दार्शनिक सूक्त संकलित हैं। चारों में केवल सामवेद ही राग-रचना के आधार पर संगठित है, इसलिए वही भारतीय शास्त्रीय संगीत का स्रोत कहलाता है।

Q6.कला और संस्कृतिपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · Prelims GS Paper I, 28 May 2023मध्यम

'आत्मा केवल पशु और वनस्पति जीवन की ही विशेषता नहीं है, बल्कि चट्टानों, बहते जल और ऐसी कई अन्य प्राकृतिक वस्तुओं की भी है जिन्हें अन्य धार्मिक संप्रदाय सजीव नहीं मानते।'

उपर्युक्त कथन प्राचीन भारत के निम्नलिखित में से किस धार्मिक संप्रदाय की एक मूल मान्यता को दर्शाता है?

  1. A.बौद्ध धर्म
  2. B.जैन धर्म
  3. C.शैव धर्म
  4. D.वैष्णव धर्म
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. जैन धर्म

व्याख्या

सही उत्तर है B, जैन धर्म। जैन धर्म मानता है कि आत्मा (जीव) केवल मनुष्यों, पशुओं और पौधों में ही नहीं, बल्कि पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु में भी है। जैन दर्शन जीवों को उनकी इंद्रियों की संख्या से बाँटता है। सबसे निचले वर्ग, एकेंद्रिय जीवों, में पृथ्वीकाय, जलकाय, अग्निकाय, वायुकाय और वनस्पति आते हैं, इसलिए पत्थर और बहते पानी में भी आत्मा है। इसी कारण जैन मुनि अहिंसा का बहुत कड़ाई से पालन करते हैं, रास्ता बुहारते हैं और पानी छानते हैं ताकि कम से कम जीवों को हानि हो। महावीर ने सिखाया कि हर जीव कर्म से बँधा है और सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र, यानी त्रिरत्न, से ही मुक्त होता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि बौद्ध धर्म अनात्म के सिद्धांत से स्थायी आत्मा को ही नहीं मानता। विकल्प C गलत है, क्योंकि शैव धर्म शिव की भक्ति पर केंद्रित है और चट्टानों में आत्मा नहीं मानता। विकल्प D गलत है, क्योंकि वैष्णव धर्म विष्णु और उनके अवतारों की भक्ति पर केंद्रित है। परीक्षा टिप: पत्थर और पानी में आत्मा, सबसे कड़ी अहिंसा यानी जैन; अनात्म यानी बौद्ध।

Q7.कला और संस्कृतिमध्यम

नाट्यशास्त्र के वर्गीकरण में फूँक से बजने वाले वाद्यों को किस नाम से पुकारा जाता है?

  1. A.तत वाद्य
  2. B.सुषिर वाद्य
  3. C.अवनद्ध वाद्य
  4. D.घन वाद्य
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सुषिर वाद्य

व्याख्या

सही उत्तर B, सुषिर वाद्य है। सुषिर का अर्थ है खोखला, और इस वर्ग में वे सभी वाद्य आते हैं जिनमें नली के भीतर की वायु कम्पित होकर ध्वनि उत्पन्न करती है। बाँसुरी, शहनाई, नादस्वरम, पुंगी, अलगोजा और शंख सभी इसी वर्ग के हैं, तथा हारमोनियम भी, जिसकी रीडें धौंकनी की हवा से बजती हैं।

विकल्प A, तत वाद्य, तार वाले वाद्यों का वर्ग है, जैसे सितार, सरोद, सारंगी, वीणा और संतूर। विकल्प C, अवनद्ध वाद्य, में चमड़ा मढ़े वाद्य आते हैं, अर्थात् तबला, पखावज, मृदंगम और चेंडा जैसे ढोल। विकल्प D, घन वाद्य, धातु, मिट्टी या लकड़ी के ठोस वाद्यों का वर्ग है, जो बिना किसी स्वर मिलान के आघात या हिलाने से बजते हैं, जैसे मंजीरा, घटम और जलतरंग। चारों नाम एक ही वर्गीकरण के हैं, इसलिए ये सदा साथ रखे जाते हैं।

Q8.कला और संस्कृतिपूछा गया: RRB NTPC · 28 Dec 2020, Shift 1आसान

पट्टचित्र शैली की चित्रकला निम्नलिखित में से किस राज्य की सबसे प्राचीन और लोकप्रिय कला शैलियों में से एक है?

  1. A.आंध्र प्रदेश
  2. B.राजस्थान
  3. C.ओडिशा
  4. D.बिहार
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. ओडिशा

व्याख्या

सही उत्तर है C, ओडिशा। पट्टचित्र ओडिशा की प्राचीन कपड़े पर बनने वाली चित्रकला है और इसका नाम ही इसका अर्थ बता देता है — पट्ट यानी कपड़ा और चित्र यानी तस्वीर। चित्रकार कहे जाने वाले कलाकार कपड़े पर खड़िया और इमली की लेई चढ़ाते हैं, फिर प्राकृतिक रंगों और बारीक कूँची से देवी-देवताओं तथा कथाओं के दृश्य उकेरते हैं और चारों ओर सजी हुई किनारी बनाते हैं। अधिकांश चित्रों में पुरी के जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा, कृष्ण लीला या महाकाव्यों के प्रसंग दिखाए जाते हैं। पुरी के पास बसा रघुराजपुर गाँव इस कला के लिए प्रसिद्ध है और ओडिशा पट्टचित्र को जीआई टैग भी मिला है। A गलत है क्योंकि आंध्र प्रदेश कलमकारी के लिए जाना जाता है। B गलत है क्योंकि राजस्थान फड़ चित्रकला तथा किशनगढ़, मेवाड़ और बूँदी की लघु चित्र शैलियों के लिए प्रसिद्ध है। D गलत है क्योंकि बिहार की पहचान मधुबनी या मिथिला चित्रकला है। परीक्षा टिप: पट्टचित्र ओडिशा, मधुबनी बिहार, कलमकारी आंध्र प्रदेश और वारली महाराष्ट्र की शैली है।

Q9.कला और संस्कृतिपूछा गया: राजस्थान · 29 Nov 2020मध्यम

किस चित्रशैली में पशु-पक्षियों को महत्वपूर्ण स्थान मिला है?

  1. A.बूंदी शैली
  2. B.नाथद्वारा शैली
  3. C.किशनगढ़ शैली
  4. D.बीकानेर शैली
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बूंदी शैली

व्याख्या

सही उत्तर है A, बूंदी शैली। हाड़ौती क्षेत्र की बूंदी शैली ही अपने चित्रों को पशु-पक्षियों और घने हरे जंगल से भर देती है। इसके चित्रकारों को प्रकृति प्रिय थी: आम और केले के कुंज, कमल से भरे तालाब, बिजली सहित वर्षा के बादल, हाथी, बाघ, गिलहरी, तोते और मोर पृष्ठभूमि में भरे रहते हैं, और उनके सामने गोल चेहरे तथा छोटी नाक वाली मानव आकृतियाँ दिखाई जाती हैं। बूंदी चित्रकला राव सुर्जन सिंह के समय चुनार के कलाकारों की सहायता से आगे बढ़ी, और इसकी शाखा कोटा शैली ने घने जंगल के शिकार दृश्यों को अपनी विशेषता बना लिया। विकल्प B गलत है, क्योंकि नाथद्वारा शैली में श्रीनाथजी के चित्र बनते हैं, अधिकतर कपड़े पर पिछवाई के रूप में। विकल्प C गलत है, क्योंकि किशनगढ़ शैली निहालचंद के बणी-ठणी मुखड़े और राधा-कृष्ण विषयों के लिए जानी जाती है। विकल्प D गलत है, क्योंकि बीकानेर शैली पर मुगल तथा दक्कनी प्रभाव है और उसके चित्रकार अपने नाम लिखते थे। परीक्षा टिप: बूंदी-कोटा का अर्थ प्रकृति और शिकार; किशनगढ़ का अर्थ बणी-ठणी।

Q10.कला और संस्कृतिपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019मध्यम

निम्नलिखित में से किस संगीतज्ञ ने राजा मान सिंह तोमर और गुजरात के बहादुरशाह के राजदरबार में सेवा दी?

  1. A.बैजू बावरा
  2. B.तानसेन
  3. C.लाल कलावंत
  4. D.रंग खाँ कलावंत
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बैजू बावरा

व्याख्या

सही उत्तर है A, बैजू बावरा। बैजू, जिन्हें बैजू नायक भी कहा जाता है, ग्वालियर में राजा मान सिंह तोमर के दरबार के प्रमुख गायक थे और बाद में उन्होंने गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह के दरबार में सेवा दी। राजा मान सिंह तोमर ने 1486 से 1516 तक ग्वालियर पर राज किया और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की सबसे पुरानी जीवित शैली ध्रुपद को सँवारने का श्रेय उन्हें दिया जाता है। बैजू ध्रुपद के उस्ताद थे और किंवदंतियाँ उन्हें तानसेन का प्रतिद्वंद्वी बताती हैं, यही कहानी 1952 की फ़िल्म "बैजू बावरा" में दिखाई गई। ग्वालियर का संगीत से यह नाता आज भी हर साल होने वाले तानसेन समारोह में दिखता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि तानसेन पहले रीवा के राजा रामचंद्र के दरबार में थे और फिर अकबर के नवरत्नों में शामिल हुए। विकल्प C गलत है, क्योंकि लाल कलावंत तानसेन के शिष्य थे, जिन्होंने मुगल दरबार में सेवा दी। विकल्प D गलत है, क्योंकि रंग खाँ कलावंत का नाम मान सिंह तोमर या बहादुरशाह के दरबार से नहीं जुड़ता। परीक्षा टिप: ग्वालियर के मान सिंह तोमर ने ध्रुपद को प्रसिद्ध किया; वहाँ बैजू गाते थे और बाद में तानसेन अकबर के दरबार में चमके।

Q11.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC MTS · 03 May 2023, Shift 1मध्यम

रामप्पा मंदिर किस देवता को समर्पित है?

  1. A.भगवान राम
  2. B.भगवान विष्णु
  3. C.भगवान इंद्र
  4. D.भगवान शिव
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. भगवान शिव

व्याख्या

सही उत्तर है D, भगवान शिव। रामप्पा मंदिर शिव को समर्पित है, जहाँ उन्हें रामलिंगेश्वर के रूप में पूजा जाता है। यह तेलंगाना के मुलुगु ज़िले के पालमपेट में है और तेरहवीं शताब्दी में काकतीय शासक गणपति देव के काल में उनके सेनापति रेचरला रुद्र ने बनवाया था। इसकी एक विशेषता यह है कि मंदिर अपने शिल्पी रामप्पा के नाम से जाना जाता है। यह बलुआ पत्थर के तारे जैसे चबूतरे पर खड़ा है, इसके शिखर में इतनी हल्की और छिद्रयुक्त ईंटें लगी हैं कि कहा जाता है वे पानी पर तैरती हैं, और चमकाए गए काले बेसाल्ट स्तंभ तथा नर्तकियों की मदनिका मूर्तियाँ बारीक़ी से गढ़ी हैं। यूनेस्को ने 2021 में इसे काकतीय रुद्रेश्वर मंदिर के नाम से विश्व विरासत सूची में रखा। विकल्प A गलत है, क्योंकि राम की पूजा भद्राचलम जैसे मंदिरों में होती है, यहाँ नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि इस क्षेत्र के बड़े विष्णु मंदिर तिरुपति और सिंहाचलम हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि भारत में इंद्र को समर्पित मंदिर लगभग नहीं मिलते। परीक्षा टिप: रामप्पा मंदिर के साथ पालमपेट, काकतीय वंश, तैरती ईंटें और 2021 की यूनेस्को सूची जोड़ें।

Q12.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC CGL · 27 Jul 2023, Shift 3मध्यम

पंडित राम नारायण निम्नलिखित में से किस वाद्य यंत्र से जुड़े थे?

  1. A.घटम
  2. B.तबला
  3. C.बांसुरी
  4. D.सारंगी
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. सारंगी

व्याख्या

सही उत्तर है D, सारंगी। पंडित राम नारायण वही संगीतकार थे जिन्होंने हिंदुस्तानी संगीत में सारंगी को संगत के वाद्य से उठाकर एकल मंच का वाद्य बनाया। 1927 में राजस्थान के उदयपुर में जन्मे वे आकाशवाणी में बजाते रहे, वर्षों गायकों के साथ संगत की, और 1950 के दशक के मध्य से भारत तथा विदेशों में एकल प्रस्तुतियाँ देने लगे। उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और 2005 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। सारंगी छोटी गर्दन वाला गज से बजने वाला वाद्य है, जो लकड़ी के एक ही टुकड़े से गढ़ा जाता है; इसमें तीन मुख्य ताँत के तार और करीब पैंतीस सहायक तार होते हैं, और इसका स्वर मानव कंठ के सबसे निकट माना जाता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि मिट्टी के घड़े जैसा घटम कर्नाटक संगीत का ताल वाद्य है, जिसे विक्कू विनायकराम बजाते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि तबला अल्लारखा और जाकिर हुसैन से जुड़ा है। विकल्प C गलत है, क्योंकि बांसुरी पन्नालाल घोष और हरिप्रसाद चौरसिया की पहचान है। परीक्षा टिप: सारंगी — राम नारायण; सरोद — अमजद अली खान; संतूर — शिवकुमार शर्मा।

Q13.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC MTS · 04 Nov, 2024, Shift 3मध्यम

विश्व का दूसरा सबसे बड़ा गुंबद भारत में बना था और आज भी मज़बूती से खड़ा है। यहाँ किस गुंबद की बात हो रही है?

  1. A.ग्लैम्पईको
  2. B.टीला
  3. C.गोल गुंबज
  4. D.कैलिको डोम
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. गोल गुंबज

व्याख्या

सही उत्तर है C, गोल गुंबज। मुहम्मद आदिल शाह के मक़बरे गोल गुंबज का गुंबद बहुत समय से रोम के सेंट पीटर्स बैसिलिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गुंबद कहा जाता है। यह कर्नाटक के विजयपुरा, यानी पुराने बीजापुर में है और दक्कन के आदिल शाही वंश के सातवें शासक के लिए 1656 में पूरा हुआ। गुंबद का व्यास लगभग 44 मीटर है और यह एक-दूसरे को काटने वाली मेहराबों पर टिका है, इसलिए नीचे के कक्ष में कोई स्तंभ नहीं है और वह एक छत के नीचे बने सबसे बड़े कक्षों में गिना जाता है। गुंबद के भीतर घूमने वाली दीर्घा, जिसे व्हिस्परिंग गैलरी कहते हैं, धीमी आवाज़ को भी पूरे घेरे में पहुँचा देती है, और इमारत अपने आकार के साथ उस गूँज के लिए भी प्रसिद्ध है। विकल्प A गलत है, क्योंकि ग्लैम्पईको कोई स्मारक नहीं है। विकल्प B गलत है, क्योंकि टीला नाम का ऐसा कोई गुंबद नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि कैलिको डोम अहमदाबाद की एक आधुनिक संरचना थी, ऐतिहासिक मक़बरा नहीं। परीक्षा टिप: गोल गुंबज के साथ विजयपुरा, आदिल शाही वंश और व्हिस्परिंग गैलरी याद रखें।

Q14.कला और संस्कृतिपूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 2 Feb 2025कठिन

सूची-I व सूची-II को सुमेलित करते हुए राजस्थान की प्रसिद्ध चित्रकला शैलियों एवं उनके चित्रकारों के संबंध में सही विकल्प चुनिये:

सूची-I

A. किशनगढ़

B. बीकानेर

C. मेवाड़

D. मारवाड़

सूची-II

(i) साहिबदीन

(ii) निहालचंद

(iii) अली रज़ा

(iv) शिवदास

  1. A.A-ii, B-iv, C-i, D-iii
  2. B.A-ii, B-iii, C-i, D-iv
  3. C.A-ii, B-iii, C-iv, D-i
  4. D.A-ii, B-i, C-iii, D-iv
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. A-ii, B-iii, C-i, D-iv

व्याख्या

सही उत्तर है B, A-ii, B-iii, C-i, D-iv। निहालचंद 18वीं शताब्दी में राजा सावंत सिंह, यानी कवि नागरीदास, के समय किशनगढ़ के प्रमुख चित्रकार थे; लंबी नाक, धनुषाकार भौंहों और कमल जैसी आँखों वाली उनकी 'बणी-ठणी' को भारत की मोनालिसा कहा जाता है। दिल्ली से आए उस्ताद अली रज़ा ने 17वीं शताब्दी में महाराजा कर्णसिंह के समय बीकानेर में काम किया, इसीलिए बीकानेर शैली में मुगल प्रभाव साफ दिखता है। साहिबदीन महाराणा जगत सिंह प्रथम के समय मेवाड़ के प्रमुख चित्रकार थे; 1628 की उनकी रागमाला और रामायण चित्रों ने उदयपुर शैली को आकार दिया। शिवदास की गिनती मारवाड़ यानी जोधपुर शैली के चित्रकारों में होती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि इसमें शिवदास को बीकानेर और अली रज़ा को मारवाड़ से जोड़ा गया है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इसमें शिवदास को मेवाड़ और साहिबदीन को मारवाड़ से जोड़ा गया है। विकल्प D गलत है, क्योंकि इसमें साहिबदीन को बीकानेर और अली रज़ा को मेवाड़ से जोड़ा गया है। परीक्षा टिप: बणी-ठणी–निहालचंद–किशनगढ़; रागमाला–साहिबदीन–मेवाड़; अली रज़ा–बीकानेर; शिवदास–मारवाड़।

Q15.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC CHSL · 13 Oct 2020, Shift 3मध्यम

कौन सा त्योहार तिब्बती नववर्ष के आरंभ का प्रतीक है?

  1. A.सागा दावा उत्सव
  2. B.ओंगकोर उत्सव
  3. C.लोसर उत्सव
  4. D.शोटोन उत्सव
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. लोसर उत्सव

व्याख्या

सही उत्तर है C, लोसर उत्सव। लोसर तिब्बती नववर्ष का प्रतीक है और लगभग पंद्रह दिनों तक मनाया जाता है, प्रायः फरवरी या मार्च में। यह लद्दाख, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश तथा देश भर के तिब्बती समुदायों में मनाया जाता है। तिब्बती भाषा में 'लो' का अर्थ वर्ष और 'सर' का अर्थ नया है। घरों की सफाई और सजावट होती है, मक्खन के दीप जलाए जाते हैं, मठों में मुखौटा पहनकर छम नृत्य होता है और परिवार गुथुक नामक नूडल सूप खाते हैं, ताकि बीते वर्ष का अशुभ दूर हो जाए। विकल्प A गलत है, क्योंकि सागा दावा बुद्ध के जन्म, ज्ञानप्राप्ति और महापरिनिर्वाण का पर्व है और तिब्बती पंचांग के चौथे महीने में आता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि ओंगकोर फसल कटाई से पहले मनाया जाने वाला त्योहार है। विकल्प D गलत है, क्योंकि ल्हासा का शोटोन दही उत्सव है, जो तिब्बती ओपेरा और विशाल थंका के प्रदर्शन के लिए प्रसिद्ध है। परीक्षा टिप: लोसर - तिब्बती नववर्ष; सागा दावा - बुद्ध का जन्म और ज्ञानप्राप्ति।

Q16.कला और संस्कृतिपूछा गया: RRB NTPC · 13 June 2022, Shift 2आसान

कोणार्क का सूर्य मंदिर लोकप्रिय रूप से __________ के नाम से जाना जाता है।

  1. A.श्वेत पैगोडा
  2. B.ब्लैक पैगोडा
  3. C.स्वर्ण पैगोडा
  4. D.कांस्य पैगोडा
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ब्लैक पैगोडा

व्याख्या

सही उत्तर है B, ब्लैक पैगोडा। यूरोपीय नाविक कोणार्क के सूर्य मंदिर को ब्लैक पैगोडा अर्थात काला पैगोडा कहते थे, क्योंकि इसका गहरे रंग के पत्थर से बना शिखर ओडिशा के समुद्र तट पर दूर से दिखाई देता था और उनके लिए दिशासूचक चिह्न का काम करता था; इसके विपरीत पुरी के सफेद पुते जगन्नाथ मंदिर को वे श्वेत पैगोडा कहते थे। इस मंदिर का निर्माण तेरहवीं शताब्दी में पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने कलिंग शैली में कराया था। पूरा मंदिर सूर्य देव के रथ के आकार में बना है, जिसमें पहियों के बारह जोड़े उकेरे गए हैं और सात घोड़े उसे खींचते दिखाए गए हैं; ये पहिए धूपघड़ी का काम भी करते हैं। यूनेस्को ने 1984 में इसे विश्व धरोहर सूची में रखा। A गलत है क्योंकि श्वेत पैगोडा नाविकों द्वारा पुरी के मंदिर को दिया गया नाम था। C और D गलत हैं क्योंकि कोणार्क के लिए ऐसे कोई नाम प्रचलित नहीं रहे। परीक्षा टिप: कोणार्क = ब्लैक पैगोडा, नरसिंहदेव प्रथम, कलिंग शैली, 1984 से यूनेस्को धरोहर।

Q17.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC CHSL · 02 Aug, 2023, Shift 1मध्यम

निम्नलिखित का मिलान कीजिए। सूची I: a) चंपाकुलम नौका दौड़, b) सोमनाथ मेला, c) सूरजकुंड मेला, d) बेणेश्वर मेला। सूची II: i) गुजरात, ii) हरियाणा, iii) राजस्थान, iv) केरल।

  1. A.a - iv, b - iii, c - i, d - ii
  2. B.a - iii, b - i, c - iv, d - ii
  3. C.a - iv, b - ii, c - i, d - iii
  4. D.a - iv, b - i, c - ii, d - iii
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. a - iv, b - i, c - ii, d - iii

व्याख्या

सही उत्तर है D, a - iv, b - i, c - ii, d - iii। चंपाकुलम मूलम नौका दौड़ केरल के अलप्पुझा में पंपा नदी पर होती है और राज्य की सबसे पुरानी सर्प-नौका दौड़ मानी जाती है। सोमनाथ मेला गुजरात के सोमनाथ मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा पर लगता है, जहां श्रद्धालु बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम के दर्शन करने आते हैं। सूरजकुंड शिल्प मेला हर वर्ष फरवरी में हरियाणा के फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड में लगता है, जिसमें देश-विदेश के शिल्पकार आते हैं और हर बार एक थीम राज्य रखा जाता है। बेणेश्वर मेला राजस्थान के डूंगरपुर में सोम और माही नदियों के संगम पर लगने वाला भीलों का आदिवासी मेला है। विकल्प A गलत है, क्योंकि इसमें सोमनाथ मेला राजस्थान और बेणेश्वर मेला हरियाणा में दिखाया गया है। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें नौका दौड़ राजस्थान में रखी गई है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इसमें सोमनाथ हरियाणा और सूरजकुंड गुजरात हो जाता है। परीक्षा टिप: चंपाकुलम - केरल, सोमनाथ - गुजरात, सूरजकुंड - हरियाणा, बेणेश्वर - राजस्थान।

Q18.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 7 March 2019, Shift 1कठिन

दबू छपाई, जिसमें कपड़े पर महीन आकृतियों में मिट्टी लगाकर उसे रंग में डुबोया जाता है, भारत के किस राज्य में की जाती है?

  1. A.राजस्थान
  2. B.ओडिशा
  3. C.आंध्र प्रदेश
  4. D.असम
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. राजस्थान

व्याख्या

सही उत्तर है A, राजस्थान। दबू राजस्थान की मिट्टी अवरोध वाली हाथ की ठप्पा छपाई है, जो मुख्य रूप से चित्तौड़गढ़ के आकोला तथा जयपुर के पास बगरू और सांगानेर में की जाती है। मिट्टी, गोंद, चूने और गेहूँ के भूसे का लेप लकड़ी के ठप्पों से कपड़े पर लगाया जाता है; ढका हुआ भाग रंग को रोक देता है, जो आमतौर पर नील होता है, और वह हिस्सा हल्का रह जाता है जबकि बाकी कपड़ा रंग पकड़ लेता है। धुलाई के बाद मिट्टी झड़ जाती है और आकृति उभर आती है, और अधिक रंगों के लिए यही प्रक्रिया दोहराई जाती है। राजस्थान बंधेज, बगरू और सांगानेरी छपाई तथा कोटा डोरिया बुनाई के लिए भी जाना जाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि ओडिशा इकत यानी बंधा और पट्टचित्र के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प C गलत है, क्योंकि आंध्र प्रदेश कलमकारी के लिए प्रसिद्ध है, जो बाँस की कलम से बनाई जाती है। विकल्प D गलत है, क्योंकि असम मूगा और एरी रेशम की बुनाई के लिए जाना जाता है। परीक्षा टिप: दबू का अर्थ मिट्टी अवरोध, बंधेज का अर्थ बाँध कर रंगना, कलमकारी का अर्थ कलम का काम।

Q19.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC CHSL · 16 March, 2023, Shift 1आसान

निम्नलिखित में से कौन सा किला हैदराबाद में कुतुब शाही वंश की प्रमुख राजधानी था?

  1. A.चिकतन किला
  2. B.राजगढ़ किला
  3. C.लाल किला
  4. D.गोलकुंडा किला
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. गोलकुंडा किला

व्याख्या

सही उत्तर है D, गोलकुंडा किला। हैदराबाद का गोलकुंडा कुतुब शाही वंश की राजधानी था, जिसने 1518 से गोलकुंडा सल्तनत पर शासन किया, जब कुली कुतुब शाह ने बहमनी राज्य से अलग होकर स्वतंत्र राज्य बनाया। यह किला ग्रेनाइट की पहाड़ी पर बना है और अपनी ध्वनि व्यवस्था के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि फतह दरवाजे पर ताली बजाने की आवाज ऊपर बने मंडप तक सुनाई देती है। यह हीरों के व्यापार का भी केंद्र रहा, जिनमें कोहिनूर भी शामिल था। 1591 में मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने हैदराबाद नगर बसाया और चारमीनार बनवाकर राजधानी वहां ले गए; औरंगजेब ने 1687 में गोलकुंडा जीत लिया। विकल्प A गलत है, क्योंकि चिकतन किला लद्दाख में है। विकल्प B गलत है, क्योंकि महाराष्ट्र का राजगढ़ शिवाजी की आरंभिक राजधानी का किला था। विकल्प C गलत है, क्योंकि लाल किला दिल्ली में शाहजहां ने बनवाया था। परीक्षा टिप: कुतुब शाही - गोलकुंडा और फिर हैदराबाद; चारमीनार 1591 में मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने बनवाया।

Q20.कला और संस्कृतिकठिन

सत्रीया नृत्य का जन्म किस वैष्णव संत द्वारा स्थापित मठों में हुआ था?

  1. A.चैतन्य महाप्रभु
  2. B.श्रीमंत शंकरदेव
  3. C.सिद्धेंद्र योगी
  4. D.वल्लत्तोल नारायण मेनन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. श्रीमंत शंकरदेव

व्याख्या

सही उत्तर B, श्रीमंत शंकरदेव है। पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दी के इस असमिया संत ने सत्र अर्थात वे वैष्णव मठ स्थापित किए जिनसे इस शैली का नाम बना, और नामघर में मंचित होने वाले अंकिया नाट नाटकों की रचना की, जिनके भीतर यह नृत्य विकसित हुआ। उन्हीं मठों में रहने वाले भिक्षुओं ने परंपरा को जीवित रखा, और संगीत नाटक अकादमी ने इसे वर्ष 2000 में शास्त्रीय माना।

विकल्प A, चैतन्य महाप्रभु ने उसी काल में बंगाल और ओडिशा में भक्ति आंदोलन का नेतृत्व किया, परंतु असम के सत्र उनकी स्थापना नहीं हैं। विकल्प C, सिद्धेंद्र योगी आंध्र प्रदेश के थे और उन्होंने कुचिपुड़ी को रूप देकर भामा कलापम रचा। विकल्प D, वल्लत्तोल नारायण मेनन वे मलयालम कवि थे जिन्होंने 1930 में केरल कलामंडलम की स्थापना कर कथकली तथा मोहिनीअट्टम को पुनर्जीवित किया।

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