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GK क्विजकला और संस्कृति

कला और संस्कृति क्विज: भारत के शास्त्रीय नृत्य

  • 12 प्रश्न
  • 12 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

कला और संस्कृति के अंतर्गत "भारत के शास्त्रीय नृत्य" विषय पर यह क्विज़ 12 बहुविकल्पीय प्रश्न रखता है, जो GK24 के इसी विषय के नोट्स के साथ प्रकाशित सत्यापित प्रश्न हैं। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और शेष विकल्पों के गलत होने की पूरी व्याख्या दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर याद न करें बल्कि उसके पीछे का तथ्य समझें। नोट्स पढ़ने के तुरंत बाद इसे हल करें, निर्धारित समय का पालन करें, और अंत में व्याख्याएं पढ़कर कमजोर बिंदु चिह्नित करें। परीक्षा से पहले दोहराव के लिए इसे दोबारा दें।

इस क्विज के प्रश्न

12 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.कला और संस्कृतिआसान

भरतनाट्यम किस भारतीय राज्य की शास्त्रीय नृत्य शैली है?

  1. A.केरल
  2. B.तमिलनाडु
  3. C.कर्नाटक
  4. D.आंध्र प्रदेश
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. तमिलनाडु

व्याख्या

सही उत्तर B, तमिलनाडु है। भरतनाट्यम तमिलनाडु के मंदिरों में विकसित हुआ, जहाँ देवदासियाँ इसे सादिर या दासीअट्टम नाम से करती थीं, और बीसवीं शताब्दी में ई. कृष्ण अय्यर तथा रुक्मिणी देवी अरुंडेल इसे मंच पर ले आए। रुक्मिणी देवी ने 1936 में मद्रास में कलाक्षेत्र की स्थापना की।

विकल्प A, केरल दो अन्य शास्त्रीय शैलियों कथकली और मोहिनीअट्टम का घर है, और यही सबसे आम भ्रम है क्योंकि तीनों दक्षिण भारत की हैं। विकल्प C, कर्नाटक की यक्षगान परंपरा समृद्ध है, परंतु यक्षगान लोक नाट्य है और अकादमी की आठ शास्त्रीय शैलियों की सूची में नहीं है। विकल्प D, आंध्र प्रदेश कुचिपुड़ी का घर है, जो दक्षिण की ही शास्त्रीय शैली है और प्रायः भरतनाट्यम से भ्रमित होती है; दोनों को अलग करने का सरल सूत्र यह है कि कुचिपुड़ी नृत्य नाटिका है जिसमें कलाकार संवाद भी बोलते हैं, जबकि भरतनाट्यम मौन एकल प्रस्तुति है।

Q2.कला और संस्कृतिआसान

केरल की कौन सी शास्त्रीय नृत्य शैली रंगे हुए मुख और विशाल शिरोभूषा वाली नृत्य नाटिका है?

  1. A.मोहिनीअट्टम
  2. B.कथकली
  3. C.कुचिपुड़ी
  4. D.ओडिसी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कथकली

व्याख्या

सही उत्तर B, कथकली है। इस नाम का अर्थ ही कथा-नाट्य है, और यह शैली रामायण तथा महाभारत के प्रसंग मंचित करती है। इसमें पात्र रूपसज्जा से पहचाने जाते हैं, मुख्यतः श्रेष्ठ नायकों के लिए पच्चा, रावण जैसे दंभी प्रतिनायकों के लिए कठी, उग्र पात्रों के लिए ताड़ी, राक्षसियों के लिए करी और कोमल स्त्रियों तथा ऋषियों के लिए मिनुक्कु।

विकल्प A, मोहिनीअट्टम केरल की ही दूसरी शैली है, परंतु भाव में इसके ठीक विपरीत है: सादी सफेद कसावु साड़ी में की जाने वाली एकल, स्त्रैण और लास्य प्रधान प्रस्तुति, जिसमें मुखौटे जैसी रूपसज्जा बिलकुल नहीं होती। विकल्प C, कुचिपुड़ी भी नृत्य नाटिका है, पर वह आंध्र प्रदेश की है और उसमें कलाकार संवाद बोलते हैं। विकल्प D, ओडिसी ओडिशा की शैली है जो चौक और त्रिभंग मुद्राओं पर टिकी है। जोड़ा याद रखिए: केरल कथकली और मोहिनीअट्टम देता है, एक प्रखर और एक शांत।

Q3.कला और संस्कृतिमध्यम

भारतीय शास्त्रीय नृत्य और नाट्य के मूल ग्रंथ नाट्यशास्त्र का रचयिता किसे माना जाता है?

  1. A.नंदिकेश्वर
  2. B.भरत मुनि
  3. C.अभिनवगुप्त
  4. D.जयदेव
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. भरत मुनि

व्याख्या

सही उत्तर B, भरत मुनि है। नाट्यशास्त्र वही संस्कृत ग्रंथ है जो हर शास्त्रीय शैली का व्याकरण तय करता है; यह प्रस्तुति को नृत्त, नृत्य और नाट्य में बाँटता है, चार प्रकार के अभिनय बताता है और रसों का वर्णन करता है। इसे पंचम वेद कहा जाता है, क्योंकि माना जाता है कि इसमें ऋग्वेद से पाठ्य, सामवेद से गान, यजुर्वेद से अभिनय और अथर्ववेद से रस लिया गया है।

विकल्प A, नंदिकेश्वर ने अभिनय दर्पण लिखा, जो बाद का वह ग्रंथ है जिसमें हस्त मुद्राओं की सूची है; इसलिए वह दूसरा ग्रंथ है, पहला नहीं। विकल्प C, अभिनवगुप्त कश्मीर के वे आचार्य थे जिन्होंने नाट्यशास्त्र पर प्रसिद्ध टीका अभिनवभारती लिखी, स्वयं ग्रंथ नहीं। विकल्प D, जयदेव ने गीत गोविंद की रचना की, जो राधा और कृष्ण पर लिखा वह काव्य है जिससे ओडिसी अपने प्रिय विषय लेता है।

Q4.कला और संस्कृतिमध्यम

संगीत नाटक अकादमी ने सत्रीया को किस वर्ष शास्त्रीय नृत्य शैली के रूप में मान्यता दी?

  1. A.1958
  2. B.1980
  3. C.2000
  4. D.2010
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 2000

व्याख्या

सही उत्तर C, 2000 है। असम का सत्रीया अकादमी की सूची में आठवीं और अंतिम शैली के रूप में जुड़ा, और यही तिथि इसके बारे में सबसे अधिक पूछी जाती है। इस शैली की रचना पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दी में वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव ने की और सत्रों अर्थात उन मठों में रहने वाले भिक्षुओं ने इसे अंकिया नाट नाटकों के अंग के रूप में सुरक्षित रखा, जिनसे इसका नाम बना।

विकल्प A, 1958 इसलिए भ्रामक लगता है क्योंकि उन्हीं वर्षों में अकादमी की स्थापना हुई थी और उसके आरंभिक पुरस्कार उसी दशक के हैं। विकल्प B, 1980 और विकल्प D, 2010 केवल गोल तिथियों के रूप में जाल बनाते हैं; इन वर्षों में शास्त्रीय सूची में कुछ नहीं जोड़ा गया। क्रम याद रखिए: सात शैलियाँ पहले मान्यता पा चुकी थीं और सत्रीया 2000 में जुड़कर संख्या आठ कर गया।

Q5.कला और संस्कृतिआसान

तरंगम, जिसमें नर्तक पीतल की थाली के किनारे पर नृत्य करता है, किस शास्त्रीय नृत्य का अंग है?

  1. A.ओडिसी
  2. B.कुचिपुड़ी
  3. C.मणिपुरी
  4. D.कथक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कुचिपुड़ी

व्याख्या

सही उत्तर B, कुचिपुड़ी है। तरंगम में नर्तक पीतल की थाली के उठे हुए किनारे पर संतुलन बनाकर उसे लय में चलाता है और प्रायः सिर पर जल से भरा घड़ा रखता है, जिससे इस आंध्र शैली का वह संतुलन कौशल दिखता है जिसके लिए वह प्रसिद्ध है। कुचिपुड़ी का नाम कृष्णा जिले के गाँव से पड़ा और सिद्धेंद्र योगी ने इसे नृत्य नाटिका का रूप देकर भामा कलापम रचा।

विकल्प A, ओडिसी की पहचान चौक और त्रिभंग मुद्राएँ तथा जयदेव का गीत गोविंद है। विकल्प C, मणिपुरी रास लीला, पुंग ढोल और कुमिल घाघरे से पहचानी जाती है और उसकी गति जानबूझकर कोमल रखी जाती है। विकल्प D, कथक तेज चक्कर और समतल फर्श पर किए जाने वाले जटिल पदसंचालन के लिए जाना जाता है, किसी वस्तु पर संतुलन के लिए नहीं।

Q6.कला और संस्कृतिमध्यम

कौन सा शास्त्रीय नृत्य मंदिर और मुगल दरबार दोनों के संरक्षण में विकसित हुआ और अपने तेज चक्करों के लिए जाना जाता है?

  1. A.कथक
  2. B.ओडिसी
  3. C.सत्रीया
  4. D.भरतनाट्यम
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. कथक

व्याख्या

सही उत्तर A, कथक है। इसका आरंभ कथाकारों से हुआ, जो उत्तर भारत के मंदिरों में महाकाव्य सुनाते थे, और मुगल आश्रय में यह दरबार के भीतर पहुँची, फारसी वेशभूषा अपनाई तथा शुद्ध लय की ओर मुड़ी। इसे सीधे खड़े होकर किया जाता है, जिसमें चक्कर कहलाने वाली तेज घुमावें, तबले की मात्रा पर कसा पदसंचालन और भारी घुंघरू होते हैं; इसके घराने लखनऊ, जयपुर और बनारस हैं।

विकल्प B, ओडिसी ओडिशा का मंदिर नृत्य बना रहा, जिसे महरियों और गोटीपुआ ने आगे बढ़ाया, और उसे इस प्रकार का दरबारी संरक्षण नहीं मिला। विकल्प C, सत्रीया असम के वैष्णव मठों के भीतर विकसित हुआ और उसे जानबूझकर दरबारी जीवन से दूर रखा गया। विकल्प D, भरतनाट्यम तमिलनाडु का मंदिर नृत्य था जिसे देवदासियाँ करती थीं; उसे बाद में तंजावुर के मराठा शासकों का संरक्षण अवश्य मिला, परंतु मुगल छाप केवल कथक पर है।

Q7.कला और संस्कृतिमध्यम

त्रिभंग मुद्रा, जिसमें शरीर तीन स्थानों पर मुड़ता है, किस शास्त्रीय नृत्य की पहचान है?

  1. A.मणिपुरी
  2. B.ओडिसी
  3. C.मोहिनीअट्टम
  4. D.कथकली
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ओडिसी

व्याख्या

सही उत्तर B, ओडिसी है। यह शैली दो मूल मुद्राओं पर टिकी है, वर्गाकार चौक और तीन मोड़ वाली त्रिभंग, जिसमें सिर, धड़ और कटि विपरीत दिशाओं में झुकते हैं और वैसी ही मूर्तिवत रेखा बनती है जैसी ओडिशा के मंदिरों की मूर्तिकला में दिखती है। उदयगिरि गुफाओं की आकृतियों से यही समानता ओडिसी को जीवित शैलियों में सबसे प्राचीन कहने का आधार भी है।

विकल्प A, मणिपुरी शरीर को कोणों में मोड़ने के बजाय कोमल और अविच्छिन्न रखता है, जिसमें पैर धीरे पड़ते हैं और मुख शांत रहता है। विकल्प C, मोहिनीअट्टम लहराती, वर्तुल गति पर आधारित है जिसकी तुलना नारियल के वृक्ष से की जाती है, किसी निश्चित मोड़ पर नहीं। विकल्प D, कथकली में चौड़ी बैठक होती है और भार पैरों के बाहरी किनारों पर रहता है, और उसका भाव रंगे हुए मुख तथा आँखों से व्यक्त होता है, धड़ के मोड़ से नहीं।

Q8.कला और संस्कृतिआसान

भरतनाट्यम की शिक्षा के लिए 1936 में मद्रास में स्थापित कलाक्षेत्र संस्था किसने बनाई थी?

  1. A.रुक्मिणी देवी अरुंडेल
  2. B.टी. बालासरस्वती
  3. C.सोनल मानसिंह
  4. D.सितारा देवी
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. रुक्मिणी देवी अरुंडेल

व्याख्या

सही उत्तर A, रुक्मिणी देवी अरुंडेल है। उन्होंने भरतनाट्यम उस समय सीखा जब यह शैली अपना मंदिर आश्रय खो रही थी, इसे सार्वजनिक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई और 1936 में कलाक्षेत्र की स्थापना की, जहाँ नृत्य के साथ संगीत और शिल्प भी व्यवस्थित रूप से सिखाए जाते हैं। उनका यह कार्य और ई. कृष्ण अय्यर का अभियान भरतनाट्यम के पुनरुद्धार पर पूछे गए किसी भी प्रश्न का मानक उत्तर है।

विकल्प B, टी. बालासरस्वती परंपरागत देवदासी परंपरा की महान नर्तकी और रुक्मिणी देवी की समकालीन थीं, परंतु उन्होंने ऐसी कोई संस्था नहीं बनाई। विकल्प C, सोनल मानसिंह बाद की पीढ़ी की ओडिसी और भरतनाट्यम नर्तकी हैं। विकल्प D, सितारा देवी बनारस परंपरा की कथक नर्तकी थीं और बिलकुल दूसरी शैली से संबंधित हैं। इन नामों को शैली के साथ जोड़कर याद रखिए, क्योंकि प्रश्नपत्र प्रायः कलाकार और नृत्य का मिलान पूछते हैं।

Q9.कला और संस्कृतिकठिन

कथकली में रावण जैसे दंभी प्रतिनायक पात्रों की रूपसज्जा किस प्रकार की होती है?

  1. A.पच्चा
  2. B.कठी
  3. C.मिनुक्कु
  4. D.करी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कठी

व्याख्या

सही उत्तर B, कठी है। इस शब्द का अर्थ छुरी है, और इस रूपसज्जा की पहचान हरे आधार पर बनी ऊपर की ओर मुड़ी छुरी जैसी रेखा है, जो उन पात्रों के लिए होती है जो वीर और शक्तिशाली तो हैं पर अहंकारी हैं; रावण और दुर्योधन इसके मानक उदाहरण हैं। मुख के वर्णन से वेशम पहचानना कथकली पर पूछा जाने वाला प्रिय प्रश्न है।

विकल्प A, पच्चा पूर्णतः श्रेष्ठ नायकों जैसे राम, कृष्ण और अर्जुन का सादा हरा मुख है और यही प्रकार चित्रों में सबसे अधिक दिखता है। विकल्प C, मिनुक्कु का अर्थ है चमकाया हुआ, और यह कोमल स्त्रियों, ऋषियों तथा ब्राह्मणों की हल्की रूपसज्जा है। विकल्प D, करी का अर्थ काला है और यह राक्षसियों तथा वन के पात्रों की रूपसज्जा है। पाँचों को साथ याद कीजिए, क्योंकि प्रश्नपत्र इन्हें मिलान सूची के रूप में देते हैं: पच्चा, कठी, ताड़ी, करी और मिनुक्कु।

Q10.कला और संस्कृतिमध्यम

कौन सा शास्त्रीय नृत्य रास लीला और पुंग नामक ढोल से जुड़ा हुआ है?

  1. A.सत्रीया
  2. B.मणिपुरी
  3. C.ओडिसी
  4. D.कुचिपुड़ी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मणिपुरी

व्याख्या

सही उत्तर B, मणिपुरी है। इसका केंद्रीय विषय राधा और कृष्ण की रास लीला है, पैर धीरे पड़ते हैं, मुख पर भाव तीव्र नहीं बल्कि शांत रहते हैं, और नर्तकी कड़ा, ढोलनुमा कुमिल घाघरा पहनती है। पुंग को बजाते हुए ही नाचा जाता है, जिसे पुंग चोलम कहते हैं, और इस क्षेत्र की प्राचीन अनुष्ठानिक परंपरा लाई हराओबा है। रवींद्रनाथ टैगोर मणिपुरी गुरुओं को शांतिनिकेतन लाए और इस शैली को देशव्यापी पहचान दिलाई।

विकल्प A, सत्रीया भी वैष्णव विषय लेता है, परंतु वह असम के सत्रों की शैली है और उसमें खोल वाद्य बजता है। विकल्प C, ओडिसी अपने कृष्ण विषय गीत गोविंद से लेता है और उसके साथ मर्दल बजता है। विकल्प D, कुचिपुड़ी भामा कलापम मंचित करता है और उसमें मृदंग प्रयुक्त होता है, पुंग नहीं।

Q11.कला और संस्कृतिकठिन

सत्रीया नृत्य का जन्म किस वैष्णव संत द्वारा स्थापित मठों में हुआ था?

  1. A.चैतन्य महाप्रभु
  2. B.श्रीमंत शंकरदेव
  3. C.सिद्धेंद्र योगी
  4. D.वल्लत्तोल नारायण मेनन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. श्रीमंत शंकरदेव

व्याख्या

सही उत्तर B, श्रीमंत शंकरदेव है। पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दी के इस असमिया संत ने सत्र अर्थात वे वैष्णव मठ स्थापित किए जिनसे इस शैली का नाम बना, और नामघर में मंचित होने वाले अंकिया नाट नाटकों की रचना की, जिनके भीतर यह नृत्य विकसित हुआ। उन्हीं मठों में रहने वाले भिक्षुओं ने परंपरा को जीवित रखा, और संगीत नाटक अकादमी ने इसे वर्ष 2000 में शास्त्रीय माना।

विकल्प A, चैतन्य महाप्रभु ने उसी काल में बंगाल और ओडिशा में भक्ति आंदोलन का नेतृत्व किया, परंतु असम के सत्र उनकी स्थापना नहीं हैं। विकल्प C, सिद्धेंद्र योगी आंध्र प्रदेश के थे और उन्होंने कुचिपुड़ी को रूप देकर भामा कलापम रचा। विकल्प D, वल्लत्तोल नारायण मेनन वे मलयालम कवि थे जिन्होंने 1930 में केरल कलामंडलम की स्थापना कर कथकली तथा मोहिनीअट्टम को पुनर्जीवित किया।

Q12.कला और संस्कृतिमध्यम

निम्नलिखित में से कौन सा कथक का घराना नहीं है?

  1. A.लखनऊ
  2. B.जयपुर
  3. C.बनारस
  4. D.ग्वालियर
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. ग्वालियर

व्याख्या

सही उत्तर D, ग्वालियर है। ग्वालियर हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन का सबसे प्राचीन घराना है, कथक का नहीं, और इसे विकल्पों में ठीक इसीलिए रखा जाता है कि जो परीक्षार्थी घराना शब्द तो याद रखता है पर कला का भेद भूल जाता है, वह इसे चुन बैठे। दोनों सूचियाँ अलग-अलग याद रखिए।

विकल्प A, B और C कथक के तीन मान्य घराने हैं। लखनऊ घराना, जो बिंदादीन महाराज और बाद में बिरजू महाराज से जुड़ा है, भाव और लालित्य के लिए जाना जाता है। जयपुर घराना ओजपूर्ण पदसंचालन और जटिल लयकारी के लिए प्रसिद्ध है। बनारस घराना, जिससे सितारा देवी संबंधित थीं, फर्श के अपने विशिष्ट प्रयोग और सहज खड़ी मुद्रा के लिए जाना जाता है। रायगढ़ को कभी-कभी चौथा जोड़ा जाता है, परंतु परीक्षा का मानक उत्तर तीन ही गिनाता है।

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