सेंटॉरस X-3 के पास अभिवृद्धि डिस्क की खोज, आरआरआई का अध्ययन
रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने पाया कि चमकीला एक्स-रे पल्सर सेंटॉरस X-3 अभिवृद्धि डिस्क के जरिये पदार्थ खींच रहा है, जो विरल प्रक्रिया है।

चर्चा में क्यों
21 अक्टूबर 2026 को सामने आया कि रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के किंजल रॉय के नेतृत्व वाले दल ने पाया है कि एक्स-रे पल्सर सेंटॉरस X-3 में पदार्थ का संचय अभिवृद्धि डिस्क से हो रहा है, जो उच्च-द्रव्यमान वाली प्रणालियों में विरल है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने पाया है कि सबसे चमकीले एक्स-रे पल्सरों में गिने जाने वाले सेंटॉरस X-3 में पदार्थ का संचय अभिवृद्धि डिस्क के माध्यम से हो रहा है। इस प्रकार की प्रणालियों में ऐसा होना विरल है। यह जानकारी 21 अक्टूबर 2026 को सामने आई और अध्ययन का नेतृत्व संस्थान के अनुसंधानकर्ता किंजल रॉय ने किया।
यह कैसा पिंड है
एक्स-रे द्वितारा पल्सर दो पिंडों की जोड़ी होती है। इसमें एक ओर पल्सर होता है, यानी बहुत प्रबल चुंबकीय क्षेत्र वाला न्यूट्रॉन तारा, और दूसरी ओर सूर्य जैसा साधारण तारा। दोनों गुरुत्वाकर्षण से बंधे रहते हैं। न्यूट्रॉन तारे में लगभग सूर्य जितना पदार्थ किसी बड़े शहर के आकार के गोले में सिमटा होता है। पल्सर का गुरुत्वाकर्षण साथी तारे से पदार्थ खींचता है और गिरते हुए पदार्थ से एक्स-रे विकिरण निकलता है।
प्रणाली के आंकड़े
| पिंड | सेंटॉरस X-3, उच्च-द्रव्यमान वाली एक्स-रे द्वितारा प्रणाली |
| साथी तारा | सूर्य के द्रव्यमान से 10 गुना से अधिक |
| दूरी | लगभग 24,000 प्रकाश-वर्ष |
| इतिहास | शुरुआती एक्स-रे पल्सरों में से एक तथा सेंटॉरस तारामंडल में खोजा गया तीसरा एक्स-रे स्रोत |
संरचना का पता कैसे चला
पल्सर के चुंबकीय ध्रुवों से निकलने वाले विकिरण को प्राथमिक विकिरण कहते हैं। इसका कुछ हिस्सा आसपास की संरचनाओं, जैसे साथी तारे की सतह या उससे निकलने वाली तारकीय पवन, पर पड़ता है और फिर दोबारा उत्सर्जित होता है, जिसे द्वितीयक विकिरण कहा जाता है। ऐसी प्रणालियां इतनी दूर होती हैं कि दूरबीन में बिंदु जैसी दिखती हैं, इसलिए आसपास की बनावट समझने का मुख्य साधन यही द्वितीयक विकिरण है।
संस्थान के दल ने द्वितीयक विकिरण की चार उत्सर्जन रेखाओं का बारीकी से विश्लेषण किया। निष्कर्ष यह निकला कि इन रेखाओं में बदलाव लाने वाली संरचना पल्सर के साथ ही घूम रही होगी। इसी सुराग से किंजल रॉय अभिवृद्धि प्रवाह तक पहुंचे, जो डिस्क से पदार्थ को चुंबकीय ध्रुवों की ओर पहुंचाता है। जब यह प्रवाह उपग्रह और पल्सर के बीच आता है तो सीधा विकिरण घटता है और परावर्तित विकिरण बढ़ जाता है।
खोज का महत्व
ऐसा प्रवाह तभी बन सकता है जब उसे कोई डिस्क पदार्थ दे, इसलिए डिस्क की मौजूदगी सिद्ध होती है। उच्च-द्रव्यमान वाली प्रणालियों में पदार्थ प्राय: साथी तारे की पवन से सीधे पकड़ा जाता है और डिस्क बनने की अपेक्षा नहीं रहती। अब इस प्रणाली के मॉडलों में डिस्क से आने वाले विकिरण को भी जोड़ना होगा, और इससे द्वितारा पल्सरों की समझ भी बेहतर होगी।
महत्वपूर्ण तथ्य
| अध्ययन का विषय | सेंटॉरस X-3, सबसे चमकीले एक्स-रे पल्सरों में से एक |
|---|---|
| संस्थान | रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान |
| नेतृत्व | किंजल रॉय, अनुसंधानकर्ता |
| मुख्य निष्कर्ष | अभिवृद्धि डिस्क के माध्यम से पदार्थ का संचय, जो ऐसी प्रणालियों में विरल है |
| आधार | पल्सर के घूमने के साथ बदलती चार द्वितीयक उत्सर्जन रेखाएं |
| पहचानी गई संरचना | पल्सर के साथ घूमता अभिवृद्धि प्रवाह |
| दूरी | लगभग 24,000 प्रकाश-वर्ष |
| साथी तारा | सूर्य के द्रव्यमान से 10 गुना से अधिक |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: पिंड सेंटॉरस X-3, संस्थान रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान), नेतृत्व किंजल रॉय, खोज अभिवृद्धि डिस्क से पदार्थ का संचय, सुराग चार द्वितीयक उत्सर्जन रेखाएं और अभिवृद्धि प्रवाह, तथा आंकड़े लगभग 24,000 प्रकाश-वर्ष दूरी और सूर्य से 10 गुना अधिक द्रव्यमान वाला साथी तारा।
अभ्यास प्रश्न
किस संस्थान के वैज्ञानिकों ने पाया कि एक्स-रे पल्सर सेंटॉरस X-3 अभिवृद्धि डिस्क के माध्यम से पदार्थ का संचय कर रहा है?
- A.भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान
- B.रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट
- C.भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला
- D.अंतर-विश्वविद्यालय खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी केंद्र
उत्तर देखें
दल ने प्रणाली की चार द्वितीयक उत्सर्जन रेखाओं का विश्लेषण किया और निष्कर्ष निकाला कि इन रेखाओं में बदलाव लाने वाली संरचना पल्सर के साथ घूम रही है, जिससे वे अभिवृद्धि प्रवाह तक और फिर उसे पदार्थ देने वाली डिस्क तक पहुंचे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सेंटॉरस X-3 से जुड़ा यह निष्कर्ष असामान्य क्यों माना जा रहा है?
- A.उच्च-द्रव्यमान वाली प्रणालियों में पदार्थ प्राय: तारकीय पवन से सीधे पकड़ा जाता है, डिस्क नहीं बनती
- B.पल्सर में कोई चुंबकीय क्षेत्र नहीं पाया गया
- C.साथी तारा सूर्य से छोटा पाया गया
- D.यह प्रणाली हमारी आकाशगंगा के बाहर पाई गई
उत्तर देखें
ऐसी जोड़ियों में साथी तारा भारी होता है और उससे तेज पवन निकलती है, जिसे पल्सर सीधे खींच लेता है, इसलिए व्यवस्थित डिस्क बनने की अपेक्षा नहीं की जाती।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सेंटॉरस X-3 में द्वितीयक उत्सर्जन रेखाओं में बदलाव का कारण किस संरचना को बताया गया?
- A.साथी तारे की तारकीय पवन
- B.न्यूट्रॉन तारे की सतह
- C.अभिवृद्धि प्रवाह
- D.द्वितारा प्रणाली के चारों ओर धूल का छल्ला
उत्तर देखें
वैज्ञानिकों ने पाया कि जिम्मेदार संरचना को पल्सर के साथ ही घूमना चाहिए, और यह प्रवाह इसी शर्त पर खरा उतरता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सेंटॉरस X-3 के बारे में वैज्ञानिकों ने क्या पता लगाया?
यह कि वहां पदार्थ का संचय अभिवृद्धि डिस्क के माध्यम से हो रहा है, जबकि उच्च-द्रव्यमान वाली एक्स-रे द्वितारा प्रणालियों में पदार्थ प्राय: साथी तारे की पवन से सीधे पकड़ा जाता है।
यह अध्ययन किस संस्थान ने किया और नेतृत्व किसने किया?
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट ने, और नेतृत्व संस्थान के अनुसंधानकर्ता किंजल रॉय ने किया।
एक्स-रे द्वितारा पल्सर क्या होता है?
यह प्रबल चुंबकीय क्षेत्र वाले न्यूट्रॉन तारे और सूर्य जैसे साधारण तारे की जोड़ी है, जिसमें पल्सर साथी तारे से पदार्थ खींचता है और इस प्रक्रिया में एक्स-रे विकिरण निकलता है।
सेंटॉरस X-3 पृथ्वी से कितनी दूर है?
लगभग 24,000 प्रकाश-वर्ष, और यह सेंटॉरस तारामंडल में खोजा गया तीसरा एक्स-रे स्रोत है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2326032 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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