सरस मेला 2026: दिल्ली-एनसीआर के बाहर पहला राष्ट्रीय आयोजन
विजयवाड़ा के पुन्नामी घाट पर चल रहा राष्ट्रीय सरस मेला 2026 दिल्ली-एनसीआर के बाहर पहला है, जिसमें 34 राज्यों की 1,500 महिला उद्यमी शामिल हैं।

चर्चा में क्यों
पत्र सूचना कार्यालय ने 21 अक्टूबर 2026 को विजयवाड़ा के पुन्नामी घाट पर चल रहे राष्ट्रीय सरस मेला पर पृष्ठभूमि जारी की। यह दिल्ली-एनसीआर के बाहर आयोजित पहला राष्ट्रीय सरस मेला है और डीएवाई-एनआरएलएम के तहत 13 से 31 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है।
आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित पुन्नामी घाट पर चल रहा राष्ट्रीय सरस मेला 2026, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के बाहर आयोजित होने वाला पहला राष्ट्रीय सरस मेला है। यह आयोजन 13 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ और 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। मेला ग्रामीण विकास मंत्रालय की दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत लगाया गया है, जिसका मकसद गाँव की महिलाओं के सामान को केवल प्रदर्शनी में सजाना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं, खरीदारों और संस्थानों के सामने रखना है।
विजयवाड़ा में कौन बेच रहा है
34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आई लगभग 1,500 महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) उद्यमी और लखपति दीदियाँ 650 से अधिक स्टॉलों पर अपना सामान सजाए बैठी हैं। यहाँ पंजाब की फुलकारी, जम्मू-कश्मीर की पश्मीना, तेलंगाना के इकत और तेलिया वस्त्र तथा मिजोरम की पाउंचेई देखने को मिलती है। इनके साथ मीनाकारी, ढोकरा, पीतल का काम, काष्ठकला और पारंपरिक चित्रकारी भी है। मेले का मुख्य आकर्षण 16 फुट की कलाकृति शक्ति - लखपति दीदी की भावना है। आयोजन को नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) तथा एनआईआरडीपीआर (राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान) का सहयोग मिला है।
1999 से अब तक का सफर
पहला राष्ट्रीय सरस मेला 1999 में दिल्ली में लगा था और उसमें लगभग 65 लाभार्थी शामिल हुए थे। तब से अब तक कुल 117 राष्ट्रीय सरस मेले हो चुके हैं और इनकी वार्षिक बिक्री 200 करोड़ रुपये से ऊपर पहुँच चुकी है। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश साल में कम से कम दो राज्य-स्तरीय सरस मेले लगाता है, जिससे देश भर में हर साल करीब 50 आयोजन होते हैं, और इनके नीचे क्षेत्रीय तथा जिला स्तर के मेले अलग से चलते हैं। राष्ट्रीय आयोजन को राजधानी क्षेत्र से बाहर ले जाना उसी सोच का हिस्सा है, जिसके तहत ब्रिक्स और जी-20 की बैठकें देश के अलग-अलग हिस्सों में कराई गईं।
लखपति दीदी का लक्ष्य
| कौन लखपति दीदी | वह एसएचजी सदस्य, जिसके परिवार की सालाना आय कम से कम 1 लाख रुपये हो और वह आय टिकाऊ हो; आँकलन चार या अधिक कृषि मौसमों अथवा व्यापार चक्रों पर होता है |
| अगस्त 2023 | दो करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया |
| अंतरिम बजट 2024-25 | लक्ष्य बढ़ाकर तीन करोड़ किया गया |
| दिसंबर 2025 | तीन करोड़ का पड़ाव पूरा हुआ |
| फरवरी 2026 | छह करोड़ का नया लक्ष्य घोषित |
पैवेलियन, फूड कोर्ट और डिजिटल पहुँच
मेले का मैदान सामान्य दुकानों की कतार नहीं, बल्कि विषयवार हिस्सों में बँटा है। लखपति दीदी पैवेलियन में वे महिलाएँ बैठी हैं, जो सालाना 10 लाख रुपये से अधिक कमा रही हैं और कुछ तो 1 करोड़ रुपये से भी ऊपर; वे अपने उत्पाद और कारोबार का तरीका दूसरी सदस्यों को समझाती हैं। लर्निंग एंड नॉलेज पैवेलियन में पैकेजिंग, ब्रांडिंग, कारोबारी प्रस्ताव बनाने, ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया से बिक्री पर कार्यशालाएँ होती हैं, जिनमें नाबार्ड, फिक्की, सीआईआई, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अमेज़न और फ्लिपकार्ट हिस्सा लेते हैं। कन्वर्जेंस पैवेलियन में जनजातीय कार्य मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय, ओएनडीसी, सरकारी ई-बाज़ार (जेम) और ट्राइफेड मौजूद हैं, ताकि कर्ज़, गुणवत्ता प्रमाणन और योजनाओं का लाभ वहीं समझाया जा सके। डेमॉन्स्ट्रेशन पैवेलियन में मिट्टी के बर्तन, सुई का काम और शीशे की कढ़ाई सामने बनती दिखती है।
इंडिया फूड कोर्ट में 50 स्टॉल हैं और 28 से अधिक राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की 200 से ज़्यादा ऐसी महिला उद्यमी जुड़ी हैं, जो पहली बार खाद्य सेवा का कारोबार कर रही हैं। यहाँ लिट्टी चोखा, हैदराबादी दम बिरयानी, असम का मशरूम पीठा, मक्के दी रोटी के साथ सरसों का साग, केरल के अट्टापाडी की वन सुंदरी और छत्तीसगढ़ का चौसेला परोसा जाता है। भुगतान मुख्य रूप से यूपीआई से होता है, पर बुज़ुर्ग आगंतुकों के लिए कूपन से नकद भुगतान की सुविधा भी रखी गई है। मेले के बाहर ईसरस मंच और सरस गैलरी इन्हीं उत्पादों को ऑनलाइन बेचते हैं, और 2025 में आया सरस मेला डिजिटल ऐप एसएचजी नामांकन तथा उपस्थिति सँभालता है। यह आयोजन 2 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए सेवा पखवाड़ा के दौरान उठाए गए कदमों में गिना जाता है और वोकल फॉर लोकल तथा आत्मनिर्भर भारत का संदेश देता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| आयोजन | राष्ट्रीय सरस मेला 2026 (दिल्ली-एनसीआर के बाहर पहला) |
|---|---|
| स्थान | पुन्नामी घाट, विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश |
| अवधि | 13 अक्टूबर 2026 से 31 अक्टूबर 2026 |
| किसके तहत | दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) |
| भागीदारी | 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लगभग 1,500 महिला एसएचजी उद्यमी, 650 से अधिक स्टॉल |
| पहला आयोजन | दिल्ली, 1999, लगभग 65 लाभार्थी |
| अब तक | 117 राष्ट्रीय सरस मेले, वार्षिक बिक्री 200 करोड़ रुपये से अधिक |
| लखपति दीदी | एसएचजी सदस्य, जिसके परिवार की सालाना आय कम से कम 1 लाख रुपये |
| लखपति दीदी लक्ष्य | छह करोड़, फरवरी 2026 में घोषित (तीन करोड़ दिसंबर 2025 तक पूरा) |
| मुख्य कलाकृति | 16 फुट की शक्ति - लखपति दीदी की भावना |
| सहयोगी संस्थान | नाबार्ड और एनआईआरडीपीआर |
| ऑनलाइन मंच | ईसरस, सरस गैलरी तथा 2025 में आया सरस मेला डिजिटल ऐप |
परीक्षा की दृष्टि से
पहली बार और आँकड़े याद रखें: दिल्ली-एनसीआर के बाहर पहला राष्ट्रीय सरस मेला, स्थान पुन्नामी घाट विजयवाड़ा, तिथि 13 से 31 अक्टूबर 2026, मिशन डीएवाई-एनआरएलएम, 34 राज्यों की 1,500 उद्यमी, 650 से अधिक स्टॉल, अब तक 117 आयोजन, 1999 में 65 लाभार्थियों से शुरुआत, लखपति दीदी की 1 लाख रुपये वाली परिभाषा और फरवरी 2026 का छह करोड़ का लक्ष्य।
अभ्यास प्रश्न
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के बाहर आयोजित होने वाला पहला राष्ट्रीय सरस मेला किस शहर में लग रहा है?
- A.विशाखापत्तनम
- B.विजयवाड़ा
- C.हैदराबाद
- D.भोपाल
उत्तर देखें
राष्ट्रीय सरस मेला आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित पुन्नामी घाट पर 13 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है और यह दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के बाहर लगने वाला पहला राष्ट्रीय सरस मेला है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सरस मेला निम्नलिखित में से किस मिशन के तहत आयोजित किए जाते हैं?
- A.प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण
- B.दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
- C.महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना
- D.दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना
उत्तर देखें
सरस मेले सरकार इसी मिशन के तहत आयोजित करती है, जो ग्रामीण गरीबी घटाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से मज़बूत करने की प्रमुख योजना है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सरकार ने फरवरी 2026 में लखपति दीदी का बढ़ा हुआ लक्ष्य कितना घोषित किया?
- A.दो करोड़
- B.तीन करोड़
- C.छह करोड़
- D.दस करोड़
उत्तर देखें
डीएवाई-एनआरएलएम के तहत चलने वाली लखपति दीदी पहल चरणों में आगे बढ़ी और फरवरी 2026 में सरकार ने छह करोड़ लखपति दीदी का बढ़ा हुआ लक्ष्य घोषित किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सरस मेला मंच के बारे में नीचे दिए कथनों पर विचार कीजिए और सही विकल्प चुनिए।
- 1. पहला राष्ट्रीय सरस मेला 1999 में दिल्ली में लगभग 65 लाभार्थियों के साथ आयोजित हुआ था।
- 2. अब तक कुल 117 राष्ट्रीय सरस मेले हो चुके हैं और इनकी वार्षिक बिक्री 200 करोड़ रुपये से अधिक रही है।
- A.केवल 1 सही है
- B.केवल 2 सही है
- C.1 और 2 दोनों सही हैं
- D.न 1 न 2 सही है
उत्तर देखें
सरस का सफर 1999 में शुरू हुआ, जब दिल्ली में लगभग 65 लाभार्थियों के साथ पहला राष्ट्रीय सरस मेला लगाया गया, इसलिए पहला कथन सही है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिल्ली-एनसीआर के बाहर पहला राष्ट्रीय सरस मेला कहाँ लग रहा है?
आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित पुन्नामी घाट पर, 13 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक। इसमें 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लगभग 1,500 महिला एसएचजी उद्यमी 650 से अधिक स्टॉलों पर सामान बेच रही हैं।
सरस मेला किस मिशन के तहत आयोजित होते हैं?
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत। यह ग्रामीण गरीबी घटाने और महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की प्रमुख सरकारी योजना है, जो स्वयं सहायता समूहों और उनके संघों के ज़रिये काम करती है।
लखपति दीदी किसे कहा जाता है?
उस एसएचजी सदस्य को, जिसके परिवार की सालाना आय कम से कम 1 लाख रुपये हो और वह आय टिकाऊ हो। आँकलन चार या अधिक कृषि मौसमों अथवा व्यापार चक्रों पर किया जाता है। फरवरी 2026 में लक्ष्य छह करोड़ कर दिया गया।
सरस मेला की शुरुआत कब हुई थी?
1999 में, जब दिल्ली में लगभग 65 लाभार्थियों के साथ पहला राष्ट्रीय सरस मेला लगा। अब तक कुल 117 राष्ट्रीय सरस मेले हो चुके हैं और इनकी वार्षिक बिक्री 200 करोड़ रुपये से अधिक रही है।
स्रोत
- सरस मेला 2026 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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