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राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन: 40 सुपर कंप्यूटर, 68 पीएफ क्षमता

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत सितंबर 2026 तक देश में 68 पीएफ की संयुक्त क्षमता वाले 40 स्वदेशी सुपर कंप्यूटर तैनात हो चुके थे, पीआईबी ने बताया।

लेखक प्रकाशित · 3 मिनट
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राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन: 40 सुपर कंप्यूटर, 68 पीएफ क्षमता

चर्चा में क्यों

पीआईबी ने 4 अक्टूबर 2026 को देश के सुपरकंप्यूटिंग परितंत्र पर बैकग्राउंडर जारी किया, जिसमें राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन की सितंबर 2026 तक की स्थिति दी गई: 40 सुपर कंप्यूटर, 68 पीएफ क्षमता और 123 पीएफ से अधिक के 50 सिस्टम का लक्ष्य।

पीआईबी ने 4 अक्टूबर 2026 को जारी बैकग्राउंडर में देश के सुपरकंप्यूटिंग परितंत्र की स्थिति बताई। राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (एनएसएम) की शुरुआत अप्रैल 2015 में लगभग 4,500 करोड़ रुपये के परिव्यय से हुई थी। इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) मिलकर संचालित करते हैं।

अब तक की क्षमता

सितंबर 2026 तक देश में 40 सुपर कंप्यूटर चालू थे और उनकी संयुक्त क्षमता 68 पीएफ थी। इनमें 1 पीएफ से तेज 13 हाई-एंड प्रणालियां, 500 टीएफ से 1 पीएफ के बीच की 12 मिड-रेंज प्रणालियां और 500 टीएफ से कम क्षमता की 15 प्रणालियां शामिल हैं। मिशन का लक्ष्य शैक्षणिक तथा अनुसंधान संस्थानों में 123 पीएफ से अधिक की कुल क्षमता वाले 50 सुपर कंप्यूटर स्थापित करना है।

कौन चला रहा है

मिशन को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक), पुणे और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु आगे बढ़ाते हैं। एनएसएम 'बिल्ड दृष्टिकोण' पर चलता है, जिसके तीन समवर्ती चरण हैं: असेंबली, विनिर्माण तथा डिजाइन एवं विनिर्माण समर्थन। सुपर कंप्यूटर की गति एफएलओपीएस में मापी जाती है, जिसमें एक टेराफ्लॉप्स का अर्थ प्रति सेकंड एक ट्रिलियन गणना और एक पेटाफ्लॉप्स का अर्थ प्रति सेकंड एक क्वाड्रिलियन गणना है।

परम 8000 से परम रुद्र तक

स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग में देश का प्रवेश परम 8000 से हुआ, जिसे सी-डैक ने बनाया और 1991 में 1 गीगाफ्लॉप की गति के साथ पेश किया। आगे यह श्रृंखला 54 टेराफ्लॉप्स की परम युवा जैसी प्रणालियों तक पहुंची। अब की प्रमुख श्रृंखला परम रुद्र स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए रुद्र सर्वर पर चलती है, जिनकी तकनीक भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सेवा भागीदारों को दी गई है। सितंबर 2026 तक 6,000 रुद्र सर्वर तैनात थे और 1,500 अन्य बन रहे थे।

स्वदेशी पुर्जे और उपयोग

एनएसएम के तहत एचपीसी सिस्टम सॉफ्टवेयर स्टैक, स्वदेशी कूलिंग तकनीक और नोड-से-नोड हाई-स्पीड इंटरकनेक्ट भी विकसित हुए, जिसका परीक्षण 100 जीबीपीएस और 200 जीबीपीएस पर हुआ। परम शावक भारत में बना सुपरकंप्यूटिंग-इन-द-बॉक्स है, जो इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों के लिए है। मिशन के ढांचे से 400 से अधिक संस्थानों के 16,000 से अधिक शोधकर्ताओं को मदद मिली है, जिनमें 2,900 से अधिक पीएचडी छात्र हैं, और इन प्रणालियों ने 1.5 करोड़ से अधिक कंप्यूट कार्य पूरे करते हुए 1,990 से अधिक शोध प्रकाशनों में योगदान दिया है। राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (एनकेएन) इन सुविधाओं को जोड़ता है। अनुप्रयोगों में महानदी बेसिन के लिए 2 दिन पहले बाढ़ की चेतावनी देने वाली प्रणाली, सिक्किम हिमालय में परखा गया फॉरेस्ट फायर स्प्रेड मॉडल, कोविड-19 के समय इस्तेमाल हुआ जीनोमिक्स एवं दवा खोज मंच तथा सीस्मिक इमेजिंग सुइट शामिल हैं। मिशन संयुक्त राष्ट्र के 11 सतत विकास लक्ष्यों में योगदान देता है।

आगे एस्टिक-2026

बैकग्राउंडर में ईएसटीआईसी-2026 का भी उल्लेख है, जो उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन का दूसरा संस्करण है और 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) इसे 'रचनात्मक दिमाग, विज्ञान को उत्प्रेरित करना और प्रौद्योगिकी को सशक्त बनाना' विषय पर आयोजित करेगी। इसमें 12 विषयगत क्षेत्र शामिल होंगे और यह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का समर्थन करेगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

मिशनराष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (एनएसएम)
शुरुआतअप्रैल 2015, परिव्यय लगभग 4,500 करोड़ रुपये
संचालकविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
कार्यान्वयन एजेंसियांसी-डैक, पुणे और आईआईएससी, बेंगलुरु
स्थिति (सितंबर 2026)40 सुपर कंप्यूटर, संयुक्त क्षमता 68 पीएफ
लक्ष्य50 सुपर कंप्यूटर, कुल क्षमता 123 पीएफ से अधिक
पहला स्वदेशी सिस्टमपरम 8000, 1991 में पेश, गति 1 गीगाफ्लॉप
तैनात रुद्र सर्वर6,000, अन्य 1,500 निर्माणाधीन
लाभान्वित शोधकर्ता16,000 से अधिक, जिनमें 2,900 से अधिक पीएचडी छात्र
आगामी आयोजनईएसटीआईसी-2026, 27 से 29 अक्टूबर 2026, भारत मंडपम, नई दिल्ली

परीक्षा की दृष्टि से

मिशन के मूल तथ्य याद रखें: शुरुआत अप्रैल 2015, परिव्यय लगभग 4,500 करोड़ रुपये, संचालन डीएसटी और एमईआईटीवाई, कार्यान्वयन सी-डैक पुणे तथा आईआईएससी बेंगलुरु। सितंबर 2026 तक 40 सुपर कंप्यूटर और 68 पीएफ क्षमता, लक्ष्य 123 पीएफ से अधिक के 50 सिस्टम। साथ में परम 8000 (1991, 1 गीगाफ्लॉप), परम युवा (54 टेराफ्लॉप्स), परम रुद्र, परम शावक और 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक भारत मंडपम में ईएसटीआईसी-2026 भी पूछे जा सकते हैं।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (एनएसएम) किस वर्ष शुरू किया गया था?

  1. A.2010
  2. B.2015
  3. C.2018
  4. D.2022
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 2015

व्याख्या

सही उत्तर 2015 है। देश की कंप्यूटिंग क्षमता मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने अप्रैल 2015 में राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन शुरू किया और इसके लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये का परिव्यय रखा गया। इस मिशन को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय संयुक्त रूप से संचालित करते हैं, जबकि सी-डैक पुणे और आईआईएससी बेंगलुरु इसे जमीन पर उतारते हैं। विकल्प A यानी 2010 गलत है, क्योंकि उस समय यह मिशन अस्तित्व में ही नहीं था; स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग की शुरुआत 1991 में परम 8000 से हुई थी, लेकिन वह एक मशीन थी, कोई राष्ट्रीय मिशन नहीं। विकल्प C यानी 2018 भी गलत है, क्योंकि तब तक मिशन आत्मनिर्भरता के अपने लक्ष्य पर काम कर रहा था। विकल्प D यानी 2022 इसलिए गलत है कि मिशन के जो आंकड़े सामने आए हैं, जैसे सितंबर 2026 तक 68 पीएफ क्षमता वाले 40 सुपर कंप्यूटर, वे 2015 के बाद के कई वर्षों के काम का नतीजा हैं।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

सितंबर 2026 तक एनएसएम के तहत देश में तैनात सुपर कंप्यूटरों की संयुक्त क्षमता कितनी थी?

  1. A.32 पीएफ
  2. B.45 पीएफ
  3. C.68 पीएफ
  4. D.123 पीएफ
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 68 पीएफ

व्याख्या

सही उत्तर 68 पीएफ है। सितंबर 2026 तक देश में 40 सुपर कंप्यूटर चालू थे, जो सभी भारत में ही बने हैं, और उनकी कुल क्षमता 68 पीएफ थी। इस कुल में 1 पीएफ से तेज 13 हाई-एंड प्रणालियां, 500 टीएफ से 1 पीएफ के बीच की 12 मिड-रेंज प्रणालियां और 500 टीएफ से कम क्षमता की 15 प्रणालियां शामिल हैं। विकल्प A और B दिए गए कुल से कम हैं और मिशन के किसी बताए आंकड़े से मेल नहीं खाते। विकल्प D भ्रम पैदा करने वाला है, क्योंकि 123 पीएफ इस कहानी का असली आंकड़ा है, पर वह भविष्य का है: मिशन शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में कुल 50 सुपर कंप्यूटर स्थापित करने की योजना पर है, जिनकी कुल क्षमता 123 पीएफ से अधिक होगी। इसलिए दोनों जोड़े साथ याद रखें, यानी हासिल 40 सिस्टम और 68 पीएफ, तथा लक्ष्य 50 सिस्टम और 123 पीएफ से अधिक।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन को कार्यान्वित करने वाले दो संस्थान कौन हैं?

  1. A.इसरो, बेंगलुरु और डीआरडीओ, हैदराबाद
  2. B.सी-डैक, पुणे और आईआईएससी, बेंगलुरु
  3. C.आईआईटी बॉम्बे और बार्क, मुंबई
  4. D.सीएसआईआर, नई दिल्ली और एनआईसी, नई दिल्ली
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सी-डैक, पुणे और आईआईएससी, बेंगलुरु

व्याख्या

सही उत्तर सी-डैक, पुणे और आईआईएससी, बेंगलुरु है। सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग, पुणे और भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु ही इस मिशन को आगे बढ़ाते हैं, जबकि इसका संचालन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय करते हैं। सी-डैक ने ही 1991 में परम 8000 बनाया था और रुद्र सर्वर श्रृंखला भी डिजाइन की है, जिन पर परम रुद्र सुपर कंप्यूटर चलते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि अंतरिक्ष या रक्षा अनुसंधान की संस्थाओं को इस मिशन की कार्यान्वयन एजेंसी नहीं बताया गया है। विकल्प C भी गलत है, क्योंकि किसी एक आईआईटी या परमाणु अनुसंधान केंद्र की यह भूमिका नहीं है, भले ही देश भर के शोध संस्थान मिशन की मशीनों का उपयोग करते हैं। विकल्प D में एक सही नाम गलत जगह रखा गया है, क्योंकि वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद ईएसटीआईसी-2026 सम्मेलन कराती है, यह मिशन नहीं चलाती।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

देश का पहला स्वदेशी सुपर कंप्यूटर परम 8000 किस वर्ष पेश किया गया था?

  1. A.1985
  2. B.1991
  3. C.1998
  4. D.2005
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1991

व्याख्या

सही उत्तर 1991 है। परम 8000 को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग ने विकसित किया और 1991 में 1 गीगाफ्लॉप की गति के साथ पेश किया, जिससे स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग में देश का प्रवेश हुआ। इसी ने परम श्रृंखला की नींव रखी, जो आगे 54 टेराफ्लॉप्स की परम युवा जैसी अधिक शक्तिशाली प्रणालियों तक पहुंची और मौसम पूर्वानुमान तथा कम्प्यूटेशनल द्रव गतिशीलता जैसे कामों में मदद करती रही, और बाद में स्वदेशी रुद्र सर्वर पर आधारित परम रुद्र प्रणालियां आईं। विकल्प A यानी 1985 उस समय से पहले का है जब यह मशीन बनी ही नहीं थी। विकल्प C यानी 1998 और विकल्प D यानी 2005 अनावरण के बाद के वर्ष हैं, जब परम श्रृंखला नई और तेज प्रणालियों के जरिये आगे बढ़ चुकी थी। क्रम इस तरह याद रखें: 1990 के दशक की शुरुआत में परम 8000, 2015 से राष्ट्रीय मिशन और सितंबर 2026 तक 68 पीएफ के 40 सुपर कंप्यूटर।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन कब शुरू हुआ और इसे कौन चलाता है?

यह अप्रैल 2015 में लगभग 4,500 करोड़ रुपये के परिव्यय से शुरू हुआ। इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय मिलकर संचालित करते हैं, जबकि सी-डैक पुणे और आईआईएससी बेंगलुरु इसे लागू करते हैं।

एनएसएम के तहत देश में कितने सुपर कंप्यूटर हैं?

सितंबर 2026 तक 68 पीएफ की संयुक्त क्षमता वाले 40 सुपर कंप्यूटर तैनात थे, जिनमें 1 पीएफ से अधिक की 13 प्रणालियां शामिल हैं। मिशन 123 पीएफ से अधिक कुल क्षमता वाले 50 सिस्टम स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है।

देश का पहला स्वदेशी सुपर कंप्यूटर कौन था?

परम 8000, जिसे सी-डैक ने विकसित किया और 1991 में 1 गीगाफ्लॉप की गति के साथ पेश किया। इसी श्रृंखला में आगे 54 टेराफ्लॉप्स की परम युवा और अब स्वदेशी रुद्र सर्वर पर चलने वाले परम रुद्र सुपर कंप्यूटर आए।

ईएसटीआईसी-2026 क्या है?

यह उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन का दूसरा संस्करण है, जो 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में सीएसआईआर की ओर से 'रचनात्मक दिमाग, विज्ञान को उत्प्रेरित करना और प्रौद्योगिकी को सशक्त बनाना' विषय पर होगा और इसमें 12 विषयगत क्षेत्र शामिल होंगे।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 4 अक्टूबर 2026

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