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कुफरी जामुनिया: आईसीएआर-सीपीआरआई का बैंगनी आलू

आईसीएआर-सीपीआरआई की बायोफोर्टिफाइड किस्म कुफरी जामुनिया 2024 में जारी हुई; इसके गूदे में 42.75 मिलीग्राम विटामिन सी है, सामान्य आलू में 23.15 मिलीग्राम।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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कुफरी जामुनिया: आईसीएआर-सीपीआरआई का बैंगनी आलू

चर्चा में क्यों

पीआईबी ने 18 अक्टूबर 2026 को जारी बैकग्राउंडर में कुफरी जामुनिया का विवरण दिया, जो आईसीएआर-सीपीआरआई की 2024 में जारी बायोफोर्टिफाइड बैंगनी आलू किस्म है और विटामिन सी, एंथोसायनिन, कैरोटीनॉयड, जिंक तथा आयरन की अधिक मात्रा के कारण छिपी भूख से लड़ने में उपयोगी मानी जा रही है।

भारत की आलू की टोकरी में एक बैंगनी नाम जुड़ा है। आईसीएआर-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान की किस्म कुफरी जामुनिया 2024 में जारी हुई और पोषण के लिहाज से यह संस्थान की रंगीन किस्मों में सबसे आगे है। पत्र सूचना कार्यालय ने 18 अक्टूबर 2026 को जारी बैकग्राउंडर में इसकी खूबियां और खेती के क्षेत्र गिनाए।

रंगीन आलू की जरूरत क्यों

निशाने पर छिपी भूख है, यानी ऐसी थाली जो पेट भर देती है पर विटामिन और खनिज अधूरे छोड़ देती है। इसका एक उत्तर बायोफोर्टिफिकेशन है, जिसमें पोषक तत्व प्रसंस्करण के समय नहीं जोड़े जाते, बल्कि पादप प्रजनन के रास्ते फसल के भीतर ही बढ़ाए जाते हैं। इससे पोषण कंद के साथ-साथ चलता है और बीज किसान तक पहुंचने के बाद यह रास्ता सस्ता पड़ता है। एंथोसायनिन तथा कैरोटीनॉयड जैसे प्राकृतिक पिगमेंट कंदों को लाल, बैंगनी और नीला रंग देते हैं और वही पिगमेंट एंटीऑक्सीडेंट का काम भी करते हैं।

संस्थान की तीन रंगीन किस्में

कुफरी नीलकंठ संस्थान की पहली बैंगनी छिलके वाली विशेष किस्म थी, जो 2018 में आई और पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार तथा छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए अनुशंसित है। कुफरी माणिक 2021 में जारी हुई, जिसके गहरे लाल गोल कंदों का गूदा पीला होता है और उसमें एंथोसायनिन, जिंक तथा आयरन अधिक रहते हैं। कुफरी जामुनिया इन दोनों से एस्कॉर्बिक एसिड, एंथोसायनिन और कैरोटीनॉयड में आगे निकल जाती है।

कंद कैसा, उपज कितनी

यह मध्यम अवधि में पकने वाली किस्म है; पौधे मध्यम ऊंचाई के और कैनोपी अर्ध-सघन रहती है। हर पौधा 10-12 मध्यम से बड़े कंद देता है, जो आयताकार, उथली आंखों वाले, बाहर गहरे बैंगनी, भीतर बैंगनी और भुरभुरे होते हैं। अनुशंसित पद्धति अपनाने पर उपज 32-35 टन प्रति हेक्टेयर रहती है, जबकि 90 दिन की अवधि के स्टेशन परीक्षणों में लगभग 49 टन प्रति हेक्टेयर तक दर्ज हुई। परीक्षणों में कुल उत्पादन का करीब 90% हिस्सा बिकने लायक निकला। 6-8 सप्ताह की सुप्तावस्था के कारण कंद जल्दी अंकुरित नहीं होते और भंडारण में सड़न तथा वजन की हानि कम रहती है।

पोषण की तुलना

पोषक तत्व (प्रति 100 ग्राम)कुफरी जामुनियासामान्य आलू
विटामिन सी42.75 मिलीग्राम23.15 मिलीग्राम
जिंक2.28 मिलीग्राम0.28 मिलीग्राम
आयरन3.22 मिलीग्राम0.57 मिलीग्राम

रसोई और खेत में

गूदे में 42.05 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम तथा छिलके में 80.66 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम एंथोसायनिन, लगभग 161 माइक्रोग्राम प्रति 100 ग्राम कैरोटीनॉयड, करीब 22.77 पीपीएम जिंक और 32.23 पीपीएम आयरन इस किस्म की पहचान हैं। कई स्थानों पर हुए परीक्षणों में प्रदर्शन स्थिर रहने के बाद इसे उत्तर भारतीय मैदानी क्षेत्रों के लिए अनुशंसित किया गया। रसोई में सब्जी, पराठा, पूरी, रायता, दलिया, हलवा, उपमा, डोसा तथा इडली बैटर से लेकर बेकरी उत्पादों, सूप और कुकीज के आटे तक इसका उपयोग हो सकता है, और कंदों से एंथोसायनिन युक्त सूजी तथा आटा भी बनाया जा सकता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

किस्मकुफरी जामुनिया, बायोफोर्टिफाइड बैंगनी गूदे वाला आलू
विकसित कियाआईसीएआर-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई)
जारी वर्ष2024
विटामिन सीगूदे में 42.75 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम, सामान्य आलू में 23.15 मिलीग्राम
एंथोसायनिनगूदे में 42.05 और छिलके में 80.66 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम
जिंक और आयरनगूदे में 22.77 पीपीएम जिंक तथा 32.23 पीपीएम आयरन
उपज32-35 टन प्रति हेक्टेयर; 90 दिन के परीक्षणों में लगभग 49 टन
सुप्तावस्था6-8 सप्ताह, इसलिए कंद जल्दी अंकुरित नहीं होते
अनुशंसित क्षेत्रउत्तर भारतीय मैदानी क्षेत्र
पिछली रंगीन किस्मेंकुफरी नीलकंठ (2018) और कुफरी माणिक (2021)

परीक्षा की दृष्टि से

किस्म का नाम, संस्थान और वर्ष साथ याद रखें: कुफरी जामुनिया, आईसीएआर-सीपीआरआई, 2024। इसके साथ कुफरी नीलकंठ (2018) और कुफरी माणिक (2021), विटामिन सी का आंकड़ा 42.75 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम बनाम सामान्य आलू का 23.15 मिलीग्राम, उपज 32-35 टन प्रति हेक्टेयर, तथा बायोफोर्टिफिकेशन और फूड फोर्टिफिकेशन का अंतर भी रटें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

बायोफोर्टिफाइड बैंगनी गूदे वाली आलू किस्म कुफरी जामुनिया किस वर्ष आधिकारिक रूप से जारी की गई थी?

  1. A.2018
  2. B.2021
  3. C.2024
  4. D.2026
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2024

आईसीएआर-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने बैंगनी गूदे वाली बायोफोर्टिफाइड किस्म कुफरी जामुनिया इसी वर्ष जारी की थी और इसमें संस्थान की दोनों पुरानी रंगीन किस्मों से अधिक एस्कॉर्बिक एसिड, एंथोसायनिन तथा कैरोटीनॉयड पाया जाता है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

कुफरी जामुनिया के गूदे में प्रति 100 ग्राम कितना विटामिन सी पाया जाता है?

  1. A.23.15 मिलीग्राम
  2. B.32.23 मिलीग्राम
  3. C.42.75 मिलीग्राम
  4. D.80.66 मिलीग्राम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 42.75 मिलीग्राम

कुफरी जामुनिया के गूदे में प्रति 100 ग्राम इतना ही विटामिन सी, यानी एस्कॉर्बिक एसिड, मिलता है, जो पारंपरिक पीले छिलके वाले आलू की मात्रा से लगभग दोगुना है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

अनुशंसित कृषि पद्धतियों के तहत कुफरी जामुनिया की उपज कितनी बताई गई है?

  1. A.12-15 टन प्रति हेक्टेयर
  2. B.22-25 टन प्रति हेक्टेयर
  3. C.32-35 टन प्रति हेक्टेयर
  4. D.52-55 टन प्रति हेक्टेयर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 32-35 टन प्रति हेक्टेयर

अनुशंसित कृषि पद्धतियां अपनाने पर यह किस्म इतनी उपज देती है और परीक्षणों में कुल उत्पादन का करीब 90% हिस्सा विपणन योग्य निकला।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुफरी जामुनिया क्या है?

यह गहरे बैंगनी छिलके और बैंगनी गूदे वाली बायोफोर्टिफाइड आलू किस्म है, जिसे आईसीएआर-सीपीआरआई ने विकसित किया और 2024 में जारी किया। इसमें कुफरी माणिक तथा कुफरी नीलकंठ से अधिक एस्कॉर्बिक एसिड, एंथोसायनिन और कैरोटीनॉयड के साथ बढ़ा हुआ जिंक तथा आयरन मिलता है।

बायोफोर्टिफिकेशन और फूड फोर्टिफिकेशन में अंतर क्या है?

बायोफोर्टिफिकेशन में पादप प्रजनन से फसल की पोषक सामग्री बढ़ाई जाती है, इसलिए पोषण कंद या दाने के भीतर ही रहता है। फूड फोर्टिफिकेशन में पोषक तत्व प्रसंस्करण के दौरान जोड़े जाते हैं, इसलिए पहला तरीका अधिक टिकाऊ और किफायती माना जाता है।

इस किस्म की उपज कितनी है?

अनुशंसित कृषि पद्धतियों के तहत यह 32-35 टन प्रति हेक्टेयर उपज देती है और 90 दिन की अवधि के स्टेशन परीक्षणों में लगभग 49 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज हुई। परीक्षणों में कुल उत्पादन का करीब 90% हिस्सा विपणन योग्य निकला।

संस्थान की अन्य रंगीन आलू किस्में कौन सी हैं?

कुफरी नीलकंठ, जो 2018 में जारी हुई, संस्थान की पहली बैंगनी छिलके वाली विशेष किस्म थी और पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा बिहार जैसे राज्यों के लिए उपयुक्त है। कुफरी माणिक 2021 में आई, जिसके कंद गहरे लाल और गूदा पीला होता है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLNABARD