आईएनएस तरकश सद्भावना बंदरगाह यात्रा पर केन्या के मोम्बासा पहुंचा
भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का स्टील्थ युद्धपोत आईएनएस तरकश 29 सितंबर 2026 को तैनाती के दौरान सद्भावना बंदरगाह यात्रा पर केन्या के मोम्बासा पहुंचा।

चर्चा में क्यों
भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का स्टील्थ युद्धपोत आईएनएस तरकश 29 सितंबर 2026 को केन्या के मोम्बासा पहुंचा, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री साझेदारी को दर्शाती सद्भावना बंदरगाह यात्रा है।
भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का स्टील्थ युद्धपोत आईएनएस तरकश केन्या के बंदरगाह मोम्बासा पहुंच गया है। पोत 29 सितंबर 2026 को अपनी चल रही तैनाती के सिलसिले में वहां पहुंचा और इस यात्रा को सद्भावना बंदरगाह यात्रा बताया गया है।
मोम्बासा में दोनों नौसेनाएं
इस ठहराव के दौरान भारतीय नौसेना और केन्या नौसेना के नाविक तथा अधिकारी पेशेवर और सामाजिक, दोनों तरह के कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। इनमें दोनों पक्षों के बीच बातचीत, एक-दूसरे के तरीकों से सीखना और सांस्कृतिक आदान-प्रदान शामिल है। ऐसी मुलाकातों का उद्देश्य यही होता है कि हर नौसेना दूसरी की कार्यशैली समझे और दोनों बलों की साथ मिलकर काम करने की क्षमता बढ़े।
नौसैनिक अड्डे से बाहर
- समुदाय से जुड़ाव के कार्यक्रम हो रहे हैं, जो नौसैनिकों को केवल पेशेवर दायरे से बाहर लाते हैं
- खेल मुकाबले और समाज सेवा के काम दोनों पोतों के चालक दल को अनौपचारिक रूप से जोड़ते हैं
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान का उद्देश्य दोनों देशों के नाविकों के बीच समझ गहरी करना है
हिंद महासागर पार भारत और केन्या
भारत और केन्या दोनों समुद्री देश हैं और हिंद महासागर के आर-पार उनके जुड़ाव का लंबा इतिहास है। दोनों देश इतिहास, संस्कृति और अपने लोगों के रिश्तों से बंधे हैं। दोनों समुद्री सहयोग बढ़ाने तथा अपनी नौसेनाओं के बीच भरोसा, समझ और साथ काम करने की क्षमता मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
महासागर की भूमिका
यह यात्रा महासागर की भावना के अनुरूप है, जिसका पूरा नाम म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजंस है। यह हिंद महासागर क्षेत्र के मित्र देशों के साथ समुद्री साझेदारी के लिए भारत की घोषित प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
महत्व क्यों
इस तरह की बंदरगाह यात्राएं नौसैनिक कूटनीति का साधन हैं। विदेशी बंदरगाह में प्रवेश करता युद्धपोत अपने देश का झंडा साथ ले जाता है, मेजबान नौसेना के साथ काम करने की जान-पहचान बनाता है और वे व्यवस्थाएं खुली रखता है, जो समुद्र में दो देशों के पोतों को साथ काम करने पर काम आती हैं। भारत और केन्या के रिश्ते के लिए मोम्बासा की यह यात्रा पहले से टिकाऊ समुद्री साझेदारी को और पक्का करने वाली मानी जा रही है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पोत | आईएनएस तरकश, भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का स्टील्थ युद्धपोत |
|---|---|
| बंदरगाह | मोम्बासा |
| देश | केन्या |
| पहुंचने की तिथि | 29 सितंबर 2026 |
| यात्रा का स्वरूप | तैनाती के दौरान सद्भावना बंदरगाह यात्रा |
| साझेदार नौसेना | केन्या नौसेना |
| पहल | महासागर - म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजंस |
| क्षेत्र | हिंद महासागर क्षेत्र |
परीक्षा की दृष्टि से
पोत (आईएनएस तरकश) और उसका प्रकार (अग्रिम पंक्ति का स्टील्थ युद्धपोत), बंदरगाह (मोम्बासा) और देश (केन्या), पहुंचने की तिथि (29 सितंबर 2026), यात्रा का स्वरूप (सद्भावना बंदरगाह यात्रा) तथा महासागर का पूरा नाम, म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजंस, याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
केन्या में सद्भावना बंदरगाह यात्रा करने वाला आईएनएस तरकश किस प्रकार का युद्धपोत है?
- A.विमानवाहक पोत
- B.अग्रिम पंक्ति का स्टील्थ युद्धपोत
- C.पारंपरिक पनडुब्बी
- D.सर्वेक्षण पोत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अग्रिम पंक्ति का स्टील्थ युद्धपोत
व्याख्या
सही उत्तर अग्रिम पंक्ति का स्टील्थ युद्धपोत है। केन्या के बंदरगाह की यात्रा की घोषणा में पोत का यही परिचय दिया गया है और इस श्रेणी का युद्धपोत बहुउद्देशीय होता है, जिसे कम रडार संकेत के साथ बनाया जाता है, ताकि समुद्र में उसे पकड़ना कठिन हो। विकल्प A गलत है, क्योंकि विमानवाहक पोत कहीं बड़ा मुख्य पोत होता है, जिसका काम अपने डेक से लड़ाकू विमान उड़ाना है और इस यात्रा में कोई विमानवाहक शामिल नहीं था। विकल्प C गलत है, क्योंकि पनडुब्बी पानी के नीचे चलने वाला मंच है, जबकि यहां जिस पोत की बात है वह सतही लड़ाकू पोत है, जो औपचारिक बंदरगाह यात्रा पर समारोह और सामुदायिक कार्यक्रमों में भाग ले रहा है। विकल्प D गलत है, क्योंकि सर्वेक्षण पोत समुद्र का नक्शा बनाने वाला विशेष पोत होता है, अग्रिम पंक्ति की लड़ाकू इकाई नहीं। इसलिए केवल विकल्प B परिचय से मेल खाता है।
मोम्बासा की बंदरगाह यात्रा जिस पहल की भावना के अनुरूप बताई गई, उसका पूरा नाम क्या है?
- A.मैरीटाइम हार्बर सेफ्टी एंड ग्रोथ एग्रीमेंट फॉर रीजंस
- B.म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजंस
- C.मैरीटाइम अलायंस फॉर शेयर्ड ओशंस एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजंस
- D.मिशन फॉर एडवांस्ड हार्बर सर्विसेज एंड ग्रोथ ऑफ रीजंस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजंस
व्याख्या
सही उत्तर म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजंस है। केन्या के बंदरगाह पर भारतीय युद्धपोत की यात्रा को इसी ढांचे की भावना में रखा गया है, जो हिंद महासागर क्षेत्र के मित्र देशों के साथ सुरक्षा और विकास, दोनों पर काम करने के भारत के नजरिये को व्यक्त करता है। विकल्प A, C और D गढ़े गए विस्तार हैं। इन्हें ऐसे शब्दों से बनाया गया है, जो समुद्री संदर्भ में विश्वसनीय लगते हैं, जैसे हार्बर, सेफ्टी, अलायंस और ओशंस, और जिस अभ्यर्थी को केवल यह याद है कि नाम समुद्र से जुड़ा लगता है, वह इनमें फंस सकता है। परीक्षाओं में ठीक इसी तरह के संक्षिप्त नाम पूछे जाते हैं, इसलिए सुरक्षित तरीका यह है कि पूरा नाम शब्द-दर-शब्द याद किया जाए, म्यूचुअल, होलिस्टिक, एडवांसमेंट, सिक्योरिटी, ग्रोथ, अक्रॉस रीजंस। केवल विकल्प B में ये सभी हिस्से सही क्रम में आते हैं।
आईएनएस तरकश 29 सितंबर 2026 को किस बंदरगाह पहुंचा?
- A.दार-एस-सलाम
- B.जिबूती
- C.मोम्बासा
- D.पोर्ट विक्टोरिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. मोम्बासा
व्याख्या
सही उत्तर मोम्बासा है, केन्या का वह बंदरगाह जहां अग्रिम पंक्ति का स्टील्थ युद्धपोत अपनी तैनाती के दौरान सद्भावना यात्रा के लिए रुका। विकल्प A गलत है, क्योंकि दार-एस-सलाम तंजानिया का प्रमुख बंदरगाह है, जो पूर्वी अफ्रीका के उसी तट पर पड़ोसी देश में है और इसी कारण यह विश्वसनीय भ्रमकारी विकल्प बनता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि जिबूती कहीं अधिक उत्तर में लाल सागर के प्रवेश के पास है और इस यात्रा में उसका नाम नहीं आया। विकल्प D गलत है, क्योंकि पोर्ट विक्टोरिया सेशेल्स का बंदरगाह है, जो पश्चिमी हिंद महासागर का द्वीपीय देश है। ये चारों बंदरगाह ऐसे हैं, जहां भारतीय युद्धपोत इस क्षेत्र की तैनातियों में जाते रहते हैं, इसलिए याद रखने लायक बात यही है कि इस विशेष पोत का जोड़ केन्या के मोम्बासा से है, साथ में पहुंचने की तिथि और वहां जिस नौसेना से जुड़ाव हुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मोम्बासा में सद्भावना बंदरगाह यात्रा किस भारतीय नौसैनिक पोत ने की?
आईएनएस तरकश, जो अग्रिम पंक्ति का स्टील्थ युद्धपोत है। वह हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी तैनाती के दौरान 29 सितंबर 2026 को केन्या के मोम्बासा पहुंचा।
महासागर का पूरा नाम क्या है?
म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजंस। मोम्बासा की यह बंदरगाह यात्रा इसी पहल की भावना के अनुरूप बताई गई है।
ऐसी बंदरगाह यात्रा में कौन से कार्यक्रम होते हैं?
दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर और सामाजिक कार्यक्रम, आपसी सीख तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान, साथ ही समुदाय से जुड़ाव, खेल और समाज सेवा के कार्यक्रम।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2317650 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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