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आईआईटीएम पुणे में एपार्क प्रारंभिक कैरियर कार्यशाला आयोजित

आईआईटीएम पुणे ने 11 अक्टूबर 2026 को मेघदूत हॉल में एपार्क प्रारंभिक कैरियर शोधकर्ता कार्यशाला की, जो ईएसटीआईसी की पूर्वपीठिका बनी; करीब 120 प्रतिभागी जुटे।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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आईआईटीएम पुणे में एपार्क प्रारंभिक कैरियर कार्यशाला आयोजित

चर्चा में क्यों

11 अक्टूबर 2026 को भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे ने एपार्क प्रारंभिक कैरियर शोधकर्ता कार्यशाला 'द ईसीआर नेक्सस' आयोजित की, जो उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी) की पूर्वपीठिका बनी।

भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे 11 अक्टूबर 2026 को देश-विदेश के युवा वायुमंडलीय और जलवायु वैज्ञानिकों का केंद्र बना। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन काम करने वाले इस संस्थान ने छात्रों तथा प्रारंभिक कैरियर शोधकर्ताओं के लिए एक दिन की कार्यशाला आयोजित की, जिसका शीर्षक था 'द ईसीआर नेक्सस: कनेक्टिंग वॉइसेस, टूल्स एंड साइंस टू सोसाइटी'। यह आयोजन मेघदूत हॉल में हुआ और इसका एक दूसरा मकसद भी था, क्योंकि यही कार्यक्रम उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी) की पूर्वपीठिका के रूप में रखा गया था।

किसने संबोधित किया

दिन का मुख्य संबोधन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार ने दिया। उन्होंने सम्मेलन का उद्देश्य समझाया और कहा कि देश को अपने दम पर आगे बढ़ना है तो शोध, प्रौद्योगिकी और नीति को साथ-साथ चलना होगा। आईआईटीएम के निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र ए. राव ने स्वागत भाषण दिया। वैज्ञानिक आयोजन समिति की ओर से जर्मनी के यूलिख स्थित एपार्क कार्यालय की निदेशक डॉ. इनेस त्रित्शर, बीजिंग के छिंगहुआ विश्वविद्यालय के डॉ. जोनाथन एस. राइट और जेनेवा में विश्व मौसम विज्ञान संगठन के डब्ल्यूसीआरपी की डॉ. हिंदुमती पलानीस्वामी ने भी संबोधित किया। आईआईटीएम के सीसीसीआर की परियोजना निदेशक डॉ. सुवर्णा फडणवीस ने धन्यवाद ज्ञापन किया, जबकि सत्र संयोजक डॉ. अदिति मोदी ने कार्यशाला की रूपरेखा रखी।

सत्रों में क्या रहा

  • मैरीलैंड विश्वविद्यालय की डॉ. मारिया मोलिना ने पृथ्वी विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग पर मुख्य व्याख्यान दिया।
  • वैज्ञानिक कैरियर की दिशाओं पर पैनल चर्चा हुई, जिसमें एनवीडिया, डब्ल्यूसीआरपी, लॉरेंस लिवरमोर राष्ट्रीय प्रयोगशाला, टोक्यो विश्वविद्यालय और जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ शामिल रहे।
  • डॉ. बिरगिट हैस्लर के संयोजन में अर्थ सिस्टम मॉडल इवैल्युएशन टूल (ईएसएमवैलटूल) पर तकनीकी प्रशिक्षण हुआ।
  • नेचर पोर्टफोलियो और स्प्रिंगर नेचर के प्रतिनिधियों के साथ 'मीट द एडिटर्स' सत्र चला तथा यंग अर्थ सिस्टम साइंटिस्ट्स समुदाय ने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग पर बात रखी।

भागीदारी और सहयोग

कार्यशाला में भारत और विदेश के लगभग 120 प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें नए शोधकर्ताओं के साथ वरिष्ठ वैज्ञानिक, पत्रिकाओं के संपादक और विशेषज्ञ भी थे। चर्चा में शोध अनुदान की घटती उपलब्धता, आंकड़ों तथा कंप्यूटिंग संसाधनों तक असमान पहुंच, गतिशीलता और वैज्ञानिक नेतृत्व तक पहुंचने के रास्ते उठे। कार्यक्रम को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, डब्ल्यूसीआरपी, विश्व मौसम विज्ञान संगठन, एपार्क, जर्मनी के यूलिख शोध केंद्र, आईएएमएएस, आईसीएमए और नासा सहित कई साझेदारों का सहयोग मिला। यह कार्यशाला एपार्क महासभा 2026 से ठीक पहले रखी गई थी।

ईएसटीआईसी क्या है

ईएसटीआईसी को भारत का प्रमुख विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंच बताया गया है, जो मंत्रालयों, नीति-निर्माताओं, शीर्ष वैज्ञानिकों, शिक्षण संस्थानों, उद्योग और डीप-टेक स्टार्टअप को एक मेज पर लाता है। इसके 2026 संस्करण की परिकल्पना 'क्रिएटिव माइंड्स, कैटलाइजिंग साइंस, एम्पावरिंग टेक्नोलॉजीज' है और यह सम्मेलन विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य से जुड़ा है।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजनएपार्क प्रारंभिक कैरियर शोधकर्ता (ईसीआर) कार्यशाला 2026
कार्यशाला शीर्षकद ईसीआर नेक्सस: कनेक्टिंग वॉइसेस, टूल्स एंड साइंस टू सोसाइटी
तिथि और स्थान11 अक्टूबर 2026, मेघदूत हॉल, आईआईटीएम पुणे
आयोजक संस्थानभारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे
मंत्रालयपृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
मुख्य संबोधनडॉ. टी. श्रीनिवास कुमार, सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
आईआईटीएम निदेशकडॉ. सूर्यचंद्र ए. राव
प्रतिभागीदेश-विदेश के लगभग 120 प्रतिभागी
पूर्वपीठिकाउभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी)
ईएसटीआईसी 2026 परिकल्पनाक्रिएटिव माइंड्स, कैटलाइजिंग साइंस, एम्पावरिंग टेक्नोलॉजीज
तकनीकी प्रशिक्षणअर्थ सिस्टम मॉडल इवैल्युएशन टूल (ईएसएमवैलटूल)

परीक्षा की दृष्टि से

आयोजक संस्थान (आईआईटीएम पुणे) और उसका मंत्रालय (पृथ्वी विज्ञान), स्थान (मेघदूत हॉल), कार्यशाला का शीर्षक, तिथि, लगभग 120 प्रतिभागी, मुख्य संबोधन देने वाले सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार, आईआईटीएम निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र ए. राव, ईएसटीआईसी और ईएसएमवैलटूल के पूरे नाम, ईएसटीआईसी 2026 की परिकल्पना तथा विकसित भारत 2047 का लक्ष्य याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

ईएसटीआईसी की पूर्वपीठिका बनी एपार्क प्रारंभिक कैरियर शोधकर्ता कार्यशाला 2026 का आयोजन किस संस्थान ने किया?

  1. A.भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु
  2. B.भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे
  3. C.राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, गोवा
  4. D.राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र, नोएडा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे

व्याख्या

सही उत्तर भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे है। प्रारंभिक कैरियर शोधकर्ताओं के लिए 'द ईसीआर नेक्सस: कनेक्टिंग वॉइसेस, टूल्स एंड साइंस टू सोसाइटी' शीर्षक वाली यह कार्यशाला आईआईटीएम पुणे के मेघदूत हॉल में हुई और यही कार्यक्रम उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन की पूर्वपीठिका भी बना। आईआईटीएम पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का संस्थान है और इसके निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र ए. राव ने स्वागत भाषण दिया। विकल्प A यानी भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु एक अग्रणी शोध संस्थान है, पर इस आयोजन से उसका कोई संबंध नहीं था। विकल्प C यानी राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, गोवा समुद्र विज्ञान पर काम करता है और यहां स्थल नहीं था। विकल्प D यानी नोएडा का राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र पृथ्वी विज्ञान से जुड़ी दूसरी संस्था है, लेकिन उसने यह कार्यशाला नहीं कराई। इसलिए केवल आईआईटीएम पुणे ही सही उत्तर बनता है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

11 अक्टूबर 2026 को हुई ईएसटीआईसी की पूर्वपीठिका में मुख्य संबोधन किसने दिया?

  1. A.डॉ. सूर्यचंद्र ए. राव
  2. B.डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार
  3. C.डॉ. मारिया मोलिना
  4. D.डॉ. सुवर्णा फडणवीस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार

व्याख्या

सही उत्तर डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार हैं, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव हैं। उन्होंने दिन का मुख्य संबोधन दिया, सम्मेलन की परिकल्पना और रणनीतिक उद्देश्य रखे तथा कहा कि भारत के भविष्य के विकास और मजबूत शोध तंत्र के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नीति का मेल जरूरी है। विकल्प A यानी डॉ. सूर्यचंद्र ए. राव आईआईटीएम के निदेशक हैं और उन्होंने स्वागत भाषण दिया, मुख्य संबोधन नहीं। विकल्प C यानी मैरीलैंड विश्वविद्यालय की डॉ. मारिया मोलिना ने पृथ्वी विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग पर मुख्य व्याख्यान दिया, जो अलग सत्र था। विकल्प D यानी डॉ. सुवर्णा फडणवीस आईआईटीएम के सीसीसीआर की परियोजना निदेशक हैं और उन्होंने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस तरह केवल पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव ही इस विवरण पर खरे उतरते हैं।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

ईएसटीआईसी 2026 की परिकल्पना क्या है?

  1. A.क्रिएटिव माइंड्स, कैटलाइजिंग साइंस, एम्पावरिंग टेक्नोलॉजीज
  2. B.साइंस फॉर सोसाइटी, टेक्नोलॉजी फॉर ऑल
  3. C.इनोवेट इन इंडिया, इनोवेट फॉर द वर्ल्ड
  4. D.यंग माइंड्स, ग्रीन टेक्नोलॉजीज, स्ट्रॉन्ग नेशन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. क्रिएटिव माइंड्स, कैटलाइजिंग साइंस, एम्पावरिंग टेक्नोलॉजीज

व्याख्या

सही उत्तर 'क्रिएटिव माइंड्स, कैटलाइजिंग साइंस, एम्पावरिंग टेक्नोलॉजीज' है। यही वाक्य उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन के 2026 संस्करण की घोषित परिकल्पना है। इस सम्मेलन को भारत का प्रमुख विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंच बताया गया है, जो मंत्रालयों, नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ वैज्ञानिकों, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत और डीप-टेक स्टार्टअप को एक साथ लाता है, और यह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ा है। विकल्प B, C और D सुनने में भरोसेमंद नारे लगते हैं, पर इनमें से कोई भी इस सम्मेलन की परिकल्पना नहीं है। परीक्षार्थियों को शब्दावली ठीक से याद रखनी चाहिए, क्योंकि बड़े राष्ट्रीय आयोजनों की थीम या परिकल्पना पर प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं और भ्रमित करने वाले विकल्प दूसरी सरकारी मुहिमों के नारों से गढ़े जाते हैं।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

आईआईटीएम पुणे की एपार्क प्रारंभिक कैरियर शोधकर्ता कार्यशाला 2026 में देश-विदेश के लगभग कितने प्रतिभागी शामिल हुए?

  1. A.लगभग 60
  2. B.लगभग 120
  3. C.लगभग 250
  4. D.लगभग 500
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लगभग 120

व्याख्या

सही उत्तर लगभग 120 है। कार्यशाला में भारत और दूसरे देशों के करीब 120 प्रतिभागी शामिल हुए और इसमें जान-बूझकर नए शोधकर्ताओं के साथ वरिष्ठ वैज्ञानिक, विषय विशेषज्ञ, पत्रिकाओं के संपादक तथा अलग-अलग संस्थानों के पेशेवर जोड़े गए। यही मिश्रण आयोजन का असली मकसद था, क्योंकि सत्र इस तरह बनाए गए थे कि नए शोधकर्ता स्थापित वैज्ञानिकों से सीधे सवाल कर सकें और अपने साथियों से अनुदान, गतिशीलता, आंकड़ों तथा कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच और वैज्ञानिक नेतृत्व के रास्तों पर अनुभव साझा कर सकें। विकल्प A यानी लगभग 60 वास्तविक उपस्थिति से कम है। विकल्प C और D यानी लगभग 250 और लगभग 500 इस एक दिवसीय और एक ही सभागार में हुई केंद्रित कार्यशाला के आकार से बहुत बड़े हैं। इसलिए केवल 120 का आंकड़ा सही बैठता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईएसटीआईसी का पूरा नाम क्या है?

ईएसटीआईसी का पूरा नाम उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन है। इसे भारत का प्रमुख विज्ञान और नवाचार मंच बताया गया है और इसके 2026 संस्करण की परिकल्पना 'क्रिएटिव माइंड्स, कैटलाइजिंग साइंस, एम्पावरिंग टेक्नोलॉजीज' है।

एपार्क प्रारंभिक कैरियर शोधकर्ता कार्यशाला 2026 कहां हुई?

यह कार्यशाला 11 अक्टूबर 2026 को भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे के मेघदूत हॉल में हुई। इसमें देश-विदेश के लगभग 120 प्रतिभागी शामिल हुए और यह एपार्क महासभा 2026 से ठीक पहले रखी गई थी।

ईएसटीआईसी की पूर्वपीठिका में मुख्य संबोधन किसने दिया?

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार ने। उन्होंने सम्मेलन की परिकल्पना और उद्देश्य बताए तथा कहा कि देश के विकास के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नीति का मेल जरूरी है।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 11 अक्टूबर 2026

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